*नोनी एक चमत्कारिक फल हैं, जो बड़े से बड़े रोग के लिए रामबाण औषिधि हैं।*
ये शरीर के सम्पूर्ण रोग प्रतिरोधक सिस्टम को आश्चर्यजनक रूप से बूस्ट कर देता हैं। ये आम लोगों के लिए जितना गुमनाम है, सेहत के लिए उतना ही फायदेमंद।
नोनी के रूप में वैज्ञानिक इसको एक ऐसी संजीवनी मानते है, जो मधुमेह, अस्थमा, गठिया, कैंसर, दिल, शीघ्रपतन, नपुंसकता के मरीजों सहित कई बीमारियों के इलाज में रामबाण साबित हो रही है। यहाँ तक के एड्स के रोगियों के लिए भी ये बहुत फायदेमंद हैं।
अगर आप बहुत जल्दी बीमार पड़ जाते हैं या आपको बहुत जल्दी ही रोग घेर लेते हैं, तो ये आपके लिए रामबाण हैं। अगर आपके जीवन में उमंग उत्साह खत्म हो कर आपका जीवन बिलकुल निढाल हो गया हैं तो आप इसको एक बार ज़रूर अपनाये।
इसे वैज्ञानिक भाषा में मोरिन्डा सिट्रीफोलिया के नाम से जाना जाता है।
यह औषधि की क्षमता को बेहतर बनाता है। इसे अन्य औषधियों के साथ भी लिया जा सकता है।
इस फल को कई नामों से जाना जाता है, जैसे- हॉग एपल, चीज फल, लेड, दर्द निवारक वृक्ष (हिंदी में आच, आक, आल, तमिल में वेन नूना, मलायालम में कट्टपिटलवम, तेलगु में मद्दी, मोलुगु मुलुगु)|
यह एक उष्णकटिबंधीय फल है जो मुख्यतः दक्षिणी प्रशांत क्षेत्र में पाया जाता है| यह लगभग आलू के आकार का सफेद, पीले अथवा हरे रंग का होता है| तहीती लोग नोनी के स्वास्थ्यवर्धक गुणों के कारण इसको सैकड़ों वर्षो से प्रयोग कर रहे हैं|
नोनी फल में अनानास फल की तुलना में 40 गुना ज्यादा एंजाइम पाया जाता है|
नोनी में जेरोनाइन होता है, जेरोनाइन सूक्ष्म जंतुओं, पौधों, जानवरों और इंसानों की सभी कोशिकाओं में पाया जाता है|
शरीर की सभी कोशिकायें सही कार्य करे उसके लिये जेरोनाइन की प्रयाप्त मात्रा शरीर में बहुत जरूरी होता है, जेरोनाइन हमारे शरीर में प्रोटीनों को उनके अलग-अलग कार्यों करने को करने में समर्थ बनाता है|
जेरोनाइन, मानवीय कोशिकाओं की भित्तियों के छिद्रों के आकार को बढ़ाता है ताकि बढ़ते अवशोषण के लिए पौष्टिक तत्व आसानी से कोशिकाओं में प्रवेश कर सकें, जेरोनाइन की कमी से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है|
नोनी में व्यापक उपचारात्मक प्रभाव नोट किये गए है जिसमे एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल, एंटी-फंगल, एंटी-ट्यूमर, एंटी-इनफ्लेमेटरी और इम्यून को बढ़ाने वाले प्रभाव शामिल है| यह पोटेशियम का एक समर्थ सोत्र है और इम्यून सिस्टम, संचार प्रणाली, पाचन तंत्र, मेटाबोलिक सिस्टम, टिशूस और कोशिकाओं, त्वचा और बालों को सहायता करता है| यह पूरे परिवार के लिए सुरछित है और जवान एवं बुजुर्गों, दोनों के लिए ही लाभदायक है| ये एंटी एजिंग हैं, जो आपको जवान बनाने में मदद करता हैं।
नोनी के फायदे-
• यह जोड़ों के दर्द, अकड़न, जोड़ों की गतिहीनता की समस्याओ आदि में सहायता करता है|
• सांस की बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों को इसके सेवन से अत्यधिक लाभ मिलता है|
• मुहांसों, एक्जीमा, सोरियासिस के मामले में सहायता करता है|
• ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में सहायता करता है,और मधुमेह में यह कारगार है|
• उच्च रक्तचाप और माइग्रेन से पीड़ित व्यक्तियों के लिए लाभदायक है|
• गंजेपन और बालों से सम्बंधित समस्याओं की देखभाल करता है|
• कब्ज, बदहजमी, दस्त आदि से पीड़ित व्यक्तियों को नोनी के सेवन से रोगों की मुक्ति मिलती है|
• इम्यून सिस्टम प्रणाली को मजबूत बनाता है क्योंकि इसमे कई आवश्यक विटामिन और मिनरल होते है|
नोनी निम्नलिखित अवस्थाओ में उपयोगी हो सकता है-
• गठिया (जोड़ों की जकड़न, अकड़न एवं जोड़ों के स्वास्थ्य में)
• दमा (सांस संबंथी समस्याओं में)
• त्वचा संबंधी समस्याओं (खाज, मुंहासे, सोरियासिस एवं रोसासिया में)
• कैंसर में (इम्यून सिस्टम)
• पाचन (कब्ज, परजीवियों एवं दस्त)
• दर्द (अनियमित माहवारी)
• इम्पोटेंसी इम्यून सिस्टम की विफलता (एड्स एवं वाइरस)
• मधुमेह, उच्च रक्तचाप,सरदर्द (माइग्रेन) में
• संक्रमण एवं वाइरस (इम्यून सिस्टम)
मात्रा- सुबह शाम खाली पेट 1-1 या 2-2
विशेष परिस्थितियों में मात्रा बदल जाती है।
मोटापे में नोनी –
एक बड़ी विदेशी कंपनी है जो नोनी के जूस को 2000₹ में 1 महीने में 7 किलो वजन कम करने की Gurantee के साथ दे रही है, क्यूंकि इसमें मिलाया जाने वाला गरसिनिया कम्बोजिया (Garcinia Cambogia) तत्व मोटापे को खत्म करने में बहुत सहायक है.
नोनी 150 से अधिक आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर एक शक्तिशाली एंटी-ऑक्सिडेंट और कोशिका रक्षक आहार है|
(चूँकि हमारे शरीर का आधार कोशिका होता है और यह कोशिकीय स्तर पर कार्य करता है| अत: नोनी हमें हर प्रकार की बीमारियों से बचाने व स्वस्थ रखने में सक्षम है, बिमारी व्यक्ति की बिमारी दूर करता हैं तो ये स्वस्थ मानव को 100 साल की उम्र तक स्वस्थ रख सकता हैं।
हमारा बनाया हुआ अद्भुत नोनी गज़ब के फार्मूलेशन से बनाया हुआ है जिसके 10ml में आपको मिलेगा...
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*टॉन्सिल (टॉन्सिलाइटिस) - Tonsillitis-*
*टॉन्सिल्स क्या होते हैं?*
टॉन्सिल्स गले के पीछे स्थित नरम ऊतकों का जोड़ा होता है।
टॉन्सिल्स लसीका प्रणाली (Lymphatic System) का हिस्सा होते हैं, जो संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं। संक्रमण से प्रतिक्रिया के आधार पर इनके आकार और सूजन में भिन्नता होती है। हालांकि, टॉन्सिल्स को हटाने से संक्रमण के प्रति संवेदनशीलता में वृद्धि नहीं देखी गयी है।
टॉन्सिल्स अपने यौवनारंभ (Puberty) के निकट आकर सबसे बड़े आकार तक पहुँच जाते हैं और इसके बाद धीरे-धीरे उनका क्षय होने लगता है।
हालांकि, अगर गले की चौड़ाई से टॉन्सिल्स आकार की तुलना की जाये, तो यह माप छोटे बच्चों में सबसे बड़ा होता है।
आमतौर पर प्रत्येक टॉन्सिल 2.5 सेंटीमीटर लंबा, 2.0 सेमी चौड़ा और 1.2 सेमी मोटा होता है।
*टॉन्सिलाइटिस क्या है?*
टॉन्सिल्स एक रक्षा तंत्र के रूप में कार्य करते हैं।
वे संक्रमण से आपके शरीर की रक्षा करने में मदद करते हैं।
जब टॉन्सिल्स संक्रमित हो जाते हैं, तो इस स्थिति को 'टॉन्सिलाइटिस' कहा जाता है।
टॉन्सिलाइटिस किसी भी उम्र में हो सकता है और बचपन में होने वाला एक सामान्य संक्रमण है।
पूर्व स्कूली आयु से लेकर मध्य किशोरावस्था के बच्चों में अक्सर टॉन्सिल्स का निदान किया जाता है।
टॉन्सिलाइटिस के लक्षणों में गले में खराश, टॉन्सिल्स में सूजन और बुखार शामिल हैं।
यह स्थिति संक्रामक होती है और विभिन्न वायरस और जीवाणुओं (bacteria) के कारण हो सकती है।
उदाहरण के तौर पर, स्ट्रेप्टोकोकल बैक्टीरिया, जो कि स्ट्रेप थ्रोट (Strep Throat; एक जीवाणु संक्रमण जिसके कारण गले में सूजन और दर्द होता है) का कारण बनता है।
स्ट्रेप थ्रोट के कारण होने वाले टॉन्सिलाइटिस का यदि उपचार न करवाया जाये तो गंभीर जटिलतायें पैदा हो सकती हैं।
टॉन्सिलाइटिस का निदान आसानी से किया जाता है। इसके लक्षण आमतौर पर 7 से 10 दिनों के अंदर ख़त्म हो जाते हैं। टॉन्सिलाइटिस के मामूली केस में जरूरी उपचार की आवश्यकता नहीं है, खासकर जब ये वायरस, जैसे कि ज़ुकाम के कारण हुआ हो। टॉन्सिलाइटिस के अधिक गंभीर मामलों के उपचार में एंटीबायोटिक दवा या टॉन्सिलेक्टोमी (Tonsillectomy; टॉन्सिल्स को निकालने के लिए की जाने वाली सर्जरी) शामिल हो सकते हैं।
भारत में टॉन्सिलाइटिस
अस्पताल आधारित अध्ययन में पाया गया कि भारत में क्रोनिक टॉन्सिलाइटिस रोगियों की सबसे सामान्य आयु 11-20 वर्ष है (56% मामले)।
इसके अलावा, पुरुषों का अनुपात अधिक था-
पुरुषों के लिए 62% और महिलाओं के लिए 38%। टॉन्सिलेक्टोमी के बाद होने वाली सबसे सामान्य जटिलताओं में हेमाटोमा (Hematoma; रक्त वाहिका के बाहर खून का असामान्य रूप से जमा होना) और बुखार थे।
*टॉन्सिल (टॉन्सिलाइटिस) के प्रकार-*
*(1). एक्यूट टॉन्सिलाइटिस (Acute tonsillitis) –*
एक जीवाणु या वायरस टॉन्सिल्स को संक्रमित करता है, जिसके कारण गले में सूजन और खराश होती है। टॉन्सिल एक ग्रे या सफेद रंग की कोटिंग विकसित कर सकता है।
*(2). क्रोनिक टॉन्सिलाइटिस (Chronic tonsillitis) –*
टॉन्सिल्स में बार-बार होने वाले संक्रमण, कभी-कभी एक्यूट टॉन्सिलाइटिस के बार-बार होने के परिणामस्वरूप क्रोनिक टॉन्सिलाइटिस होता है।
*(3). पेरिटॉन्सिलर फोड़ा (Peritonsillar Abscess) –*
संक्रमण से टॉन्सिल के पास मवाद इकट्ठा हो जाता है, जो इसे विपरीत दिशा की ओर धकेलता है। पेरिटॉन्सिलर फोड़ों को तत्काल सुखा देना चाहिए।
*(4). एक्यूट मोनो न्यूक्लिओसिस (Acute Mono Nucleosis) –*
यह आमतौर पर एप्सटीन बरर वायरस (Epstein Barr Virus) की वजह से होता है। 'मोनो' के कारण टॉन्सिल्स में गंभीर सूजन, बुखार, गले में खराश, लाल चकत्ते और थकान हो सकती है।
*(5). स्ट्रेप थ्रोट (Strep throat) –*
स्ट्रेप्टोकोकस (Streptpcpccus) नामक एक जीवाणु (बैक्टीरिया) टॉन्सिल और गले को संक्रमित करता है। गले की खराश के साथ अक्सर बुखार और गर्दन मेँ दर्द भी होता है।
*(6). टॉन्सिलोइथ्स या टॉन्सिल स्टोन्स (Tonsilloliths or Tonsil Stones) –*
टॉन्सिल स्टोन्स या टॉन्सिलोइथ्स तब बनते हैं, जब यह फंसा हुआ अपशिष्ट सख्त हो जाता है।
*टॉन्सिल (टॉन्सिलाइटिस) के लक्षण -*
टॉन्सिलाइटिस सबसे ज्यादा पूर्व स्कूली आयु (Preschool Ages) वाले तथा मध्य किशोरावस्था के बच्चों को प्रभावित करता है।
*टॉन्सिलाइटिस के साधारण संकेतों और लक्षणों में शामिल हैं –*
लाल और सूजे हुए टॉन्सिल्स
टॉन्सिल पर सफेद या पीले रंग का आवरण या धब्बे
गले में खराश
निगलने में परेशानी या दर्द
बुखार
गर्दन में उपस्थित मुलायम ग्रंथियों (लिम्फ नोड्स) का बढ़ना
खरखरी, धीमी या भारी आवाज़
सांसों की बदबू
पेट में दर्द (खासकर छोटे बच्चों में)
गर्दन में अकड़न
सिरदर्द
बहुत छोटे बच्चों में जो अपनी बातों को कह पाने में असमर्थ होते हैं, उनमें टॉन्सिलाइटिस के ये लक्षण शामिल हो सकते हैं –
● निगलने में मुश्किल या दर्द होने की वजह से लार टपकाना
● खाने के लिए मना करना
● असामान्य रूप से चिड़चिड़ा होना
*डॉक्टर को कब दिखाएं –*
यदि आपके बच्चे में ऐसे लक्षण हैं, जो टॉन्सिलाइटिस का संकेत कर सकते हैं तो इसका सटीक निदान प्राप्त करना महत्वपूर्ण है।
*अपने डॉक्टर से बात करें अगर आपका बच्चा ये अनुभव कर रहा है –*
गले में खराश जो 24 से 48 घंटों के दौरान नहीं जाती है
निगलने में दर्द या परेशानी
अत्यधिक कमजोरी, थकान या चिड़चिड़ापन
यदि आपके बच्चे में इनमें से कोई लक्षण है तो तुरंत ध्यान दें:-
● सांस लेने मे तकलीफ
● निगलने में बहुत ज़्यादा तकलीफ होना
● लार टपकाना
*टॉन्सिल (टॉन्सिलाइटिस) के कारण -*
क्योंकि बाहरी रोगो के आक्रमण से शरीर की रक्षा करने में टॉन्सिल्स सबसे पहले कार्य करते हैं, इसलिए वे संक्रमण के प्रति अतिसंवेदनशील होते हैं।
टॉन्सिलाइटिस आमतौर पर वायरस के कारण होता है, लेकिन कभी-कभी बैक्टीरिया के कारण भी हो सकता है।
अगर यह समूह ए स्ट्रेप्टोकोकस से संबंधित एक बैक्टीरिया के कारण होता है, तो इस स्थिति को स्ट्रेप थ्रोट (Strep Throat) के नाम से जाना जाता है।
टॉन्सिलाइटिस चाहे वायरल हो या बैक्टीरियल, यह संक्रामक होता है और एक व्यक्ति से दूसरे तक फैल सकता है।
हालांकि, अगर टॉन्सिलाइटिस एक गौण बीमारी (Secondary Illness) के कारण होता है, जैसे साइनसाइटिस (Sinusitis) या परागज ज्वर (Hay Fever), तो इसके संक्रामक होने की संभावना नहीं होती है।
*वायरल कारण...*
टॉन्सिलाइटिस सबसे अधिक वायरल संक्रमण के कारण होता है।
*टॉन्सिल्स को संक्रमित करने वाले सबसे आम प्रकार के वायरस हैं –*
एडीनोवायरस (Adenovirus), जो साधारण सर्दी और गले की खराश के साथ जुड़ा हुआ है।
राइनोवायरस (Rhinovirus), जो आम सर्दी का सबसे सामान्य कारण है।
इन्फ्लुएंजा, जिसे अक्सर 'फ्लू' कहा जाता है।
रेस्पिरेटरी सिंकश्यल वायरस (Respiratory Syncytial Virus), जो अक्सर एक्यूट श्वसन पथ के संक्रमण का कारण बनता है।
कोरोनावायरस (Coronavirus) के दो उपप्रकार हैं, जो मनुष्यों को संक्रमित करते हैं। इनमें से एक एस.ए.आर.एस. (SARS) का कारण बनता है।
सामान्य रूप से कम देखा जाने वाला वायरस टॉन्सिलाइटिस का कारण हो सकता है –
एप्सटीन बर्र वायरस (Epstein Barr Virus)
हर्पीस सिंप्लेक्स वायरस (Herpes Simplex Virus)
साइटोमेगालोवायरस (Cytomegalovirus)
बैक्टीरियल कारण
टॉन्सिल को संक्रमित करने वाले बैक्टीरिया का सबसे सामान्य प्रकार स्ट्रेप्टोकोकस पाइजेंस (Streptococcus Pyogenes) है। लेकिन कभी-कभी यह अन्य प्रजातियों के कारण हो सकता है, जिनमें शामिल हैं...
स्टेफिलोकोकस ऑरियस (Staphylococcus Aureus)
माइकोप्लाज्मा निमोनिया (Mycoplasma Pneumonia)
क्लैमाइडिया निमोनि (Chlamydia Pneumoni)
बोर्डेटेला पर्टुसिस (Bordetella Pertussis)
फ्यूजोबैक्टीरियम एसपी (Fusobacterium sp)
नेइसेरिया गोनोरहोई (Neisseria Gonorrhoeae)
*टॉन्सिल (टॉन्सिलाइटिस) से बचाव और रोकथाम...*
वायरल और बैक्टीरियल टॉन्सिलाइटिस को फैलाने वाले रोगाणु (Germs) संक्रामक होते हैं, इसलिए सबसे अच्छी रोकथाम स्वच्छता रखना है।
*अपने बच्चे को निम्न बातें बताएं...*
अपने हाथों को अच्छी तरह और अक्सर धो लें, खासकर शौचालय का उपयोग करने और खाने से पहले।
भोजन, पानी के गिलास, पानी की बोतलें या बर्तन साझा (share) करने से बचें।
टॉन्सिलाइटिस (tonsillitis) की पहचान होने के बाद उसके टूथब्रश को बदल दें।
अपने बच्चे से दूसरे लोगों में बैक्टीरिया या वायरल संक्रमण के प्रसार को रोकने में उनकी मदद इस प्रकार करें...
जब बच्चा बीमार हो तो उसे घर पर रखें।
अपने चिकित्सक से पूछें कि आप अपने बच्चे को वापस स्कूल कब भेज सकते हैं।
अपने बच्चे को खाँसते या छींकते समय मुँह को रुमाल से ढकना सिखाएं।
बच्चे को छींकने या खाँसने के बाद हाथों को धोना सिखाएं।
*टॉन्सिल (टॉन्सिलाइटिस) का परीक्षण और निदान..*
आपके बच्चे का डॉक्टर एक शारीरिक परीक्षण से शुरुआत करेगा, जिसमें शामिल होगा...
एक रोशनी वाले उपकरण से आपके बच्चे के गले का परीक्षण करना, साथ ही उसके कान और नाक की जाँच करना जो संक्रमण के लिए उपयुक्त स्थान हो सकते हैं।
लाल चकत्तों वाला बुखार जिसे 'स्कार्लेटिना' के रूप में जाना जाता है और स्ट्रेप थ्रोट के कुछ मामलों के साथ जुड़ा हुआ है, की जाँच करना।
सूजन ग्रंथियों (लिम्फ नोड्स) की जाँच के लिए बच्चे की गर्दन को धीरे धीरे छूकर महसूस करना।
स्टेथोस्कोप के द्वारा उसकी श्वास को सुनना।
प्लीहा (Spleen) के बढ़ते आकार की जाँच करना (मोनोन्यूक्लिओसिस के बारे में जानने के लिए, जो टॉन्सिल्स में जलन उत्पन्न करता है)।
*थ्रोट स्वेब*
इस सरल परीक्षण के दौरान डॉक्टर स्राव का एक नमूना लेने के लिए आपके बच्चे के गले के पिछले हिस्से को रुई के साफ़ फाहे से पोंछता है।
इस नमूने में स्ट्रेप्टोकोकल बैक्टीरिया है या नहीं, इसकी जाँच क्लिनिक में या लैब में की जाएगी।
कई क्लीनिकों में उनकी अपनी लैब होती है, जिसमें कुछ ही मिनटों में जाँच का परिणाम पता किया जा सकता है।
हालाँकि, एक और अधिक विश्वसनीय परिणाम के लिए परीक्षण आमतौर पर एक अन्य लैब में भेजा जाता है, जो 24 से 48 घंटे के भीतर टेस्ट की रिपोर्ट दे सकती है।
यदि क्लीनिक में किये गए इन परीक्षणों का परिणाम सकारात्मक आता है, तो आपके बच्चे को निश्चित रूप से एक जीवाणु (Bacterial) संक्रमण है।
यदि परीक्षण नकारात्मक होता है, तो आपके बच्चे में वायरल संक्रमण की संभावना है। हालाँकि, संक्रमण के कारण को निर्धारित करने के लिए आपका डॉक्टर क्लिनिक से बाहर दूसरी लैब में भेजे गए परीक्षणों के परिणाम का इंतजार करेगा।
*कम्पलीट ब्लड सेल काउंट (सी.बी.सी.)*
डॉक्टर आपके बच्चे के रक्त का छोटा सा नमूना लेकर सी.बी.सी. (CBC) का निर्देश दे सकता है।
अक्सर क्लिनिक में किये जाने वाले इस टेस्ट के द्वारा विभिन्न प्रकार की रक्त कोशिकाओं की गणना की जाती है।
रक्त कोशिकाओं की अधिक, सामान्य या सामान्य से कम संख्या इस बात की ओर संकेत करती है कि संक्रमण होने का कारण बैक्टीरियल है या वायरल।
स्ट्रेप थ्रोट का निदान करने के लिए अक्सर सी.बी.सी. की आवश्यकता नहीं होती है।
हालाँकि, यदि स्ट्रेप थ्रोट लैब टेस्ट नकारात्मक है, तो टॉन्सिलाइटिस के कारण को निर्धारित करने के लिए सी.बी.सी. टेस्ट करवाया जा सकता है।
*टॉन्सिल (टॉन्सिलाइटिस) का उपचार-*
*कौन से विशेषज्ञ डॉक्टर टॉन्सिलाइटिस का इलाज करते हैं?*
एक प्राथमिक देखभाल प्रदाता (पी.सी.पी.; Primary Care Provider - PCP) जैसे कि एक परिवार का डॉक्टर, एक इंटर्निस्ट या बाल रोग विशेषज्ञ, साधारण टॉन्सिलाइटिस और एडेनोइड (Adenoid) संक्रमण का निदान और उपचार कर सकते हैं।
अगर आपकी टॉन्सिलाइटिस बहुत गंभीर है तो आप किसी आपातकालीन विभाग में जाते हैं। आपको एक आपातकालीन चिकित्सा विशेषज्ञ द्वारा देखा जाएगा। यदि संक्रमण गंभीर, पुराना या आवर्तक (Recurrent) है, तो आपको आगे के उपचार या टॉन्सिल्स और एडेनोइड को निकलवाने के लिए ओटोलरींगोलॉजिस्ट (Otolaryngologist) जिसे कान नाक गले (ई.एन.टी.) का विशेषज्ञ भी कहा जाता है, के पास भेजा जा सकता है।
*घर पर देखभाल*
टॉन्सिलाइटिस चाहे वायरल या फिर बैक्टीरियल संक्रमण के कारण हुआ हो, घर पर की जाने वाली घरेलू देखभाल आपके बच्चे के लिए अधिक सुविधाजनक हो सकती है और उसकी स्थिति में बेहतर सुधार हो सकता है।
यदि वायरस द्वारा टॉन्सिलाइटिस के होने की अधिक आशंका है, तो ये घरेलू देखभाल के तरीके ही एकमात्र इलाज हैं।
आपके डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाओं का सुझाव नहीं देंगे, क्योंकि इनका वायरस से हुए संक्रमण पर कोई असर नहीं होता है।
आपका बच्चा 7 से 10 दिनों के भीतर बेहतर महसूस कर सकता है।
*स्वास्थ्य के बेहतर होने के समय के दौरान उपयोग की जाने वाली घरेलू देखभाल के तरीकों में निम्नलिखित शामिल हैं –*
अपने बच्चे को पर्याप्त आराम और पूरी नींद लेने के लिए प्रोत्साहित करें।
पर्याप्त तरल पदार्थ दें।
बच्चे के गले को नम रखने और निर्जलीकरण को रोकने के लिए उसे भरपूर पानी पिलाएं।
आरामदायक खाद्य पदार्थ और पेय दें।
*गर्म तरल पदार्थ –*
शोरबा, कैफीन मुक्त चाय या शहद मिला हुआ गर्म पानी और कुल्फी जैसे ठंडे पदार्थ गले की सूजन को कम कर सकते हैं।
गरारे करने के लिए नमक का पानी तैयार करें।
यदि आपका बच्चा गरारे कर सकता है, तो 1 चम्मच (5 मिलीलीटर) नमक, 8 औंस (237 मिलीलीटर) गुनगुने पानी में मिलाएं। इस पानी से गरारे करने से आपके बच्चे के गले की सूजन में आराम मिलेगा।
अपने बच्चे को पानी से गरारे करने और फिर उसे थूकने के लिए कहें।
हवा को नम करें। वायु को नम रखने वाले उपकरण (कूल एयर ह्यूमिडफाअर) का प्रयोग शुष्क हवा को खत्म करने के लिए करें, जिससे गले में अधिक परेशानी हो सकती है, या एक भाप से भरे हुए बाथरूम में अपने बच्चे के साथ कुछ समय बिताएं।
बच्चे को लोज़ेंगेस (Lozenges) खाने के लिए दें।
4 साल से अधिक उम्र के बच्चे गले की खराश को दूर करने के लिए लोज़ेंजेस चूस सकते हैं।
परेशानी पैदा करने वाले तत्वों से बचें।
अपने घर को सिगरेट के धुएं से मुक्त रखें और सफाई उत्पादों को दूर रखें, क्योंकि इनसे गले में जलन हो सकती है।
दर्द और बुखार का इलाज करें।
गले के दर्द को कम करने और बुखार को नियंत्रित करने के लिए आइबुप्रोफेन (एडविल, चिल्ड्रन मोट्रिन, अन्य) या एसिटामिनोफेन (टाइलेनॉल, अन्य) का उपयोग करने के बारे में अपने चिकित्सक से बात करें।
दर्दरहित कम बुखार के इलाज की आवश्यकता नहीं होती है।
कुछ रोगों को छोड़कर, बच्चों और किशोरों को एस्पिरिन दवा नहीं लेनी चाहिए।
जब सर्दी या फ्लू जैसी बीमारियों के लक्षणों का उपचार करने के लिए एस्पिरिन का उपयोग किया जाता है, तो वो इसे रीय सिंड्रोम (Reye's Syndrome) से जोड़ देती है।
यह एक दुर्लभ लेकिन संभावित रूप से हमारे जीवन के लिए गंभीर स्थिति है।
*दवा - एंटीबायोटिक्स...*
यदि टॉन्सिलाइटिस एक बैक्टीरियल संक्रमण के कारण होता है, तो आपका डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाओं के कोर्स का परामर्श देगा।
समूह ए स्ट्रेप्टोकोकस (Group A Streptococcus) की वजह से होने वाले टॉन्सिलाइटिस के लिए पेनिसिलिन को 10 दिनों के लिए मौखिक रूप से लेना सबसे आम एंटीबायोटिक उपचार होता है। यदि आपके बच्चे को पेनिसिलिन से एलर्जी है, तो आपका डॉक्टर वैकल्पिक एंटीबायोटिक का सुझाव देगा।
आपके बच्चे को एंटीबायोटिक दवाओं का पूरा कोर्स लेना चाहिए, भले ही लक्षण पूरी तरह से दूर हो जाएं।
निर्देश के अनुसार सभी दवाओं को लेने में असफल होने से संक्रमण गंभीर रूप से शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकता है। एंटीबायोटिक दवाओं का कोर्स पूरा न करने के कारण, विशेष रूप से आपके बच्चे को वातज्वर (रूमेटिक फीवर) और गुर्दों में गंभीर रूप से सूजन और जलन का खतरा बढ़ सकता है।
अपने डॉक्टर या फार्मासिस्ट से बात करें कि यदि आप अपने बच्चे को खुराक देना भूल जाएं तो क्या करें।
*सर्जरी*
टॉन्सिल्स को निकलने के लिए सर्जरी (टॉन्सिलेक्टोमी- Tonsillectomy) का प्रयोग बार-बार होने वाले टॉन्सिलाइटिस (Frequently Recurring Tonsillitis), क्रोनिक टॉन्सिलाइटिस या बैक्टीरियल टॉन्सिलाइटिस का इलाज करने के लिए किया जा सकता है, जो एंटीबायोटिक उपचार से भी ठीक नहीं होते।
बार-बार होने वाले टॉन्सिलाइटिस (Frequent Tonsillitis) को सामान्यतः परिभाषित किया जाता है...
एक वर्ष में सात से अधिक प्रकरण (एपिसोड)
पिछले दो वर्षों में प्रत्येक वर्ष में चार या पाँच से अधिक एपिसोड होते हैं।
पिछले तीन वर्षों में प्रत्येक वर्ष में तीन से अधिक एपिसोड होते हैं।
अगर टॉन्सिलाइटिस के बढ़ते खतरों को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है तो उसके परिणामस्वरूप टॉन्सिलेक्टोमी भी की जा सकती है, जैसे...
*बाधक निंद्रा अश्वसन (Obstructive Sleep Apnea)*
सांस लेने में कठिनाई
निगलने में कठिनाई, विशेष रूप से मांस और अन्य सख्त खाद्य पदार्थ
एक फोड़ा, जो एंटीबायोटिक उपचार के बाद भी ठीक नहीं होता है।
टॉन्सिलेक्टोमी आमतौर पर एक आउट पेशेंट प्रक्रिया के रूप में किया जाता है, जब तक कि आपका बच्चा जटिल चिकित्सा परिस्थिति के लिए बहुत छोटा हो या अगर सर्जरी के दौरान जटिलताएं उत्पन्न होती हैं। इसका अर्थ है कि आपका बच्चा सर्जरी के दिन घर जाने में सक्षम होना चाहिए। बच्चे को स्वस्थ होने में आमतौर पर 7 से 14 दिन लगते हैं।
*सर्जरी के बाद-*
टॉन्सिलेक्टोमी एक आउट पेशेंट प्रक्रिया (Outpatient Procedure) है, जिसे सामान्य एनेस्थीसिया (Anesthesia) के तहत किया जाता है और यह आमतौर पर 30 मिनट से 45 मिनट तक चलती है। इस प्रक्रिया का इस्तेमाल आमतौर पर बच्चों में किया जाता है।
ज्यादातर बच्चे सर्जरी के चार घंटे बाद घर भेज दिए जाते हैं और उन्हें स्वस्थ होने के लिए एक सप्ताह से लेकर 10 दिनों की आवश्यकता होती है।
सर्जरी के बाद लगभग सभी बच्चों के गले में हल्के से लेकर गंभीर दर्द होगा।
कुछ बच्चे कान, जबड़े और गर्दन में दर्द महसूस करेंगे।
आपके बच्चे के चिकित्सक दर्द को कम करने के लिए दवा का सुझाव देंगे।
हालत में सुधार आने की अवधि के दौरान, आपके बच्चे के लिए पर्याप्त आराम करना बहुत महत्वपूर्ण है। आपके बच्चे को अधिक मात्रा में तरल पदार्थ दें। हालाँकि, सर्जरी के पहले 24 घंटों में बच्चे को दूध से बने उत्पाद देने से बचना चाहिए।
यद्यपि गले का दर्द आपके बच्चे को खाने के लिए अनिच्छुक बना सकता है। जितनी जल्दी आपके बच्चे खाते हैं, उतनी ही जल्दी वे ठीक भी हो जायेंगे।
सर्जरी के कई दिनों बाद, आपके बच्चे को हलके बुखार और नाक या लार से रक्त की कुछ बूंदें निकलने का अनुभव हो सकता है।
अगर बुखार 102 डिग्री फ़ारेनहाइट से अधिक है या आप उसके शरीर में खून की कमी देखते हैं, तो तुरंत अपने बच्चे के डॉक्टर को फोन करें। तत्काल चिकित्सा जाँच की आवश्यकता हो सकती है।
*टॉन्सिल (टॉन्सिलाइटिस) के जोखिम और जटिलताएं -*
*टांसिलाइटिस के जोखिम कारक -*
टॉन्सिलाइटिस के लिए जोखिम पैदा करने वाले कारणों में शामिल हैं –
*(1). युवावस्था (Young Age)–* टॉन्सिलाइटिस सबसे अधिक बच्चों में होता है, लेकिन शायद ही कभी 2 साल से कम उम्र के बच्चों में देखा गया हो।
बैक्टीरिया की वजह से फैलने वाला टॉन्सिलाइटिस 5 से 15 साल की उम्र में सबसे आम है, जबकि वायरल टॉन्सिलाइटिस छोटे बच्चों में अधिक सामान्य है।
*(2). रोगाणुओं (Germs) के अधिक संपर्क में आना-*
स्कूली आयु वाले बच्चे अपने साथियों के निकट रहते हैं और अक्सर वायरस या बैक्टीरिया की चपेट में आ जाते हैं, जो टॉन्सिलाइटिस का कारण बन सकते हैं।
*उच्च रक्तचाप (हाई बीपी) का घरेलू उपचार...*
उच्च रक्तचाप का एक प्रमुख कारण होता है रक्त का गाढा होना है जिससे रक्त गाढा होने से उसका प्रवाह धीमा हो जाता है और इस कारण से धमनियों और शिराओं में दवाब बढ जाता है।
लहसुन (Garlic) ब्लड प्रेशर ठीक करने में बहुत मददगार घरेलू उपाय है यह रक्त का थक्का नहीं जमने देती है इसलिए लहसुन का जादा सेवन भी सहायक होता है.!
1- पांच प्रकार के 8 तुलसी के पत्ते (Basil leaves) तथा दो नीम की पत्तियों को पीसकर 20 ग्राम पानी में घोलकर खाली पेट सुबह पिएं आपको 15 दिन में लाभ नजर आने लगेगा।
हाई ब्लडप्रेशर के मरीजों के लिए पपीता भी बहुत लाभ करता है इसे प्रतिदिन खाली पेट चबा चबाकर खाएं।
तरबूज के बीज की गिरी तथा खसखस अलग-अलग पीसकर बराबर मात्रा में मिलाकर रख लें और एक चम्मच मात्रा में प्रतिदिन खाली पेट पानी के साथ लें।
जब ब्लड प्रेशर जादा बढा हुआ हो तो आधा गिलास मामूली गर्म पानी में काली मिर्च (Black pepper) पाउडर एक चम्मच घोलकर 2-2 घंटे के फ़ासले से पीते रहें ये ब्लड प्रेशर सही करने का बढिया उपचार है।
हाई ब्लड प्रेशर को जल्दी कंट्रोल करने के लिये आधा गिलास पानी में आधा नींबू निचोड़कर 2-2 घंटे के अंतर से पीते रहें।
सुबह शाम रोजाना नंगे पैर हरी घास पर दस पंद्रह मिनट चलें इस प्रकार प्रतिदिन चलने से भी ब्लड प्रेशर नार्मल हो जाता है।
साधारण रूप से तीन ग्राम मेथी दाना का पावडर सुबह शाम पानी के साथ लें। इसे पंद्रह दिनों तक लेने से लाभ होता है।
एक बडा चम्मच आंवले का रस और इतना ही शहद मिलाकर सुबह शाम लेने से हाई ब्लड प्रेशर में लाभ होता है।
किसी भी प्रकार की परेशानी के लिए निःशुल्क सेवा के सम्पर्क करें और स्वस्थ रहें।
*वामपंथियों की परेशानी...*
*खरबों रुपये के साम्राज्य पर इतनी आसानी से वैद्य धनवंतरी काबिज हो जाएंगे तो नेता, डॉक्टरों औऱ दस नम्बरीयों की दुकान का क्या होगा..?*
आगे आगे खेल देखिए, बाबा रामदेव की ऐसी तैसी कर देंगे ये फार्मा लॉबी क्योंकि यहां विरोध रामदेव का नही सीधे आयुर्वेद का है।
क्योंकि अगर फिर से हिंदुस्तान को चरकसंहिता की आदत लग गई तो सर्दी बुखार में क्रोसिन की जगह गिलोय का काढ़ा पीने लगेंगे, चोट मोच में बैंडेज, इंजेक्शन की जगह हल्दी प्याज बंधने लगेंगे।
डायबिटीज में महीने के 10 हजार की दवाई खाने वाले मेथी हरसिंगार पत्ते, जौ का आटा खाना शुरू कर देंगे, पूरा दिन टीवी पर 5000 बार मेडिकल प्रोडक्ट्स का प्रचार करने वाली कम्पनी ऐसा होने देगी क्या...??
देश की 60% कमाई सिर्फ मेडिकल पर लुटा दी जाती है।
2 रुपये की टेबलेट 200 में बेच कर कमाने वाली कंपनियां सड़क पर कटोरा लेकर बैठ जायेंगी।
*बस इसी एक डर की वजह से अब इस आयुर्वेदिक फार्मूले की बदनामी की जाएगी।*
*सरकारी तंत्र का इस्तेमाल किया जाएगा, मीडिया को खरीदा जाएगा, नेता, संतरी, मंतरी सब की बोली लगेगी।*
*और हमे क्या करना है, हमे पता है....*
*गर्म पानी के फायदे*
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1⃣ अगर आप स्किन प्रॉब्लम्स से परेशान हैं या ग्लोइंग स्किन के लिए तरह-तरह के कॉस्मेटिक्स यूज करके थक चूके हैं तो रोजाना एक गिलास गर्म पानी पीना शुरू कर दें। आपकी स्किन प्रॉब्लम फ्री हो जाएगी व ग्लो करने लगेगी।
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2⃣ लड़कियों को पीरियड्स के दौरान अगर पेट दर्द हो तो ऐसे में एक गिलास गुनगुना पानी पीने से राहत मिलती है। दरअसल इस दौरान होने वाले पैन में मसल्स में जो खिंचाव होता है उसे गर्म पानी रिलैक्स कर देता है।
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3⃣ गर्म पानी पीने से शरीर के विषैले तत्व बाहर हो जाते हैं। सुबह खाली पेट व रात्रि को खाने के बाद पानी पीने से पाचन संबंधी दिक्कते खत्म हो जाती है व कब्ज और गैस जैसी समस्याएं परेशान नहीं करती हैं।
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4⃣ भूख बढ़ाने में भी एक गिलास गर्म पानी बहुत उपयोगी है। एक गिलास गर्म पानी में एक नींबू का रस और काली मिर्च व नमक डालकर पीएं। इससे पेट का भारीपन कुछ ही समय में दूर हो जाएगा।
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5⃣ खाली पेट गर्म पानी पीने से मूत्र से संबंधित रोग दूर हो जाते हैं। दिल की जलन कम हो जाती है। वात से उत्पन्न रोगों में गर्म पानी अमृत समान फायदेमंद हैं।
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6⃣ गर्म पानी के नियमित सेवन से ब्लड सर्कुलेशन भी तेज होता है। दरअसल गर्म पानी पीने से शरीर का तापमान बढ़ता है। पसीने के माध्यम से शरीर की सारे जहरीले तत्व बाहर हो जाते हैं।
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7⃣ बुखार में प्यास लगने पर मरीज को ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए। गर्म पानी ही पीना चाहिए बुखार में गर्म पानी अधिक लाभदायक होता है।
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8⃣ यदि शरीर के किसी हिस्से में गैस के कारण दर्द हो रहा हो तो एक गिलास गर्म पानी पीने से गैस बाहर हो जाती है।
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9⃣ अधिकांश पेट की बीमारियां दूषित जल से होती हैं यदि पानी को गर्म कर फिर ठंडा कर पीया जाए तो जो पेट की कई अधिकांश बीमारियां पनपने ही नहीं पाएंगी।
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🔟 गर्म पानी पीना बहुत उपयोगी रहता है इससे शक्ति का संचार होता है। इससे कफ और सर्दी संबंधी रोग बहुत जल्दी दूर हो जाते हैं।
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11 दमा, हिचकी, खराश आदि रोगों में और तले भुने पदार्थों के सेवन के बाद गर्म पानी पीना बहुत लाभदायक होता है।
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12 सुबह खाली पेट एक गिलास गर्म पानी में एक नींबू मिलाकर पीने से शरीर को विटामिन सी मिलता है। गर्म पानी व नींबू का कॉम्बिनेशन शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करता है।साथ ही पी.एच. का स्तर भी सही बना रहता है।
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13 रोजाना एक गिलास गर्म पानी सिर के सेल्स के लिए एक गजब के टॉनिक का काम करता है। सिर के स्केल्प को हाइड्रेट करता है जिससे स्केल्प ड्राय होने की प्रॉब्लम खत्म हो जाती है।
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14 वजन घटाने में भी गर्म पानी बहुत मददगार होता है। खाने के एक घंटे बाद गर्म पानी पीने से मेटॉबालिम्म बढ़ता है। यदि गर्म पानी में थोड़ा नींबू व कुछ बूंदे शहद की मिला ली जाएं तो इससे बॉडी स्लिम हो जाती है।
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15 हमेशा जवान दिखते रहने की चाहत रखने वाले लोगों के लिए गर्म पानी एक बेहतरीन औषधि का काम करता है।
: *रसोई का धीमा जहर*
*रिफाइंड तेल का नंगा सच*
भारत में रसोई का बहुत महत्त्व है क्योंकि रसोई एक वो प्रयोगशाला है जो भारत के लोगों को स्वस्थ रहने में मदद करता है।
पिछले 20-30 वर्षों में हमने इतना विकास कर लिया कि तरह तरह के रोग घर में पहुँच गये। आज से 20-30 साल पहले कैंसर, शुगर (diabetes), हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियाँ सुनने को भी नहीं मिलती थी।
परंतु आज के आधुनिक दौर में ये बीमारियाँ घर-घर में पहुँच रही है।
ये कैसा विकास है, जहाँ हम सभी गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं, फिर भी सचेत नहीं हुए हैं और न ही कोशिश कर रहे हैं।
इस आर्टिकल में आज आपके सामने रसोई में प्रयोग होने वाले एक धीमे जहर, जिसे रिफाइंड कहते हैं, के बारे में अवगत करायेंगे ताकि आप स्वयं को एवं अपने परिवार को गंभीर बीमारियों से बचा सकें, आगे आपकी मर्जी।
हजारों वर्षों के आयुर्वेद के अनुसार तेल अधिक गाढ़ा और दूध पतला होना चाहिए परंतु आज हम इसके विपरीत गाढ़ा दूध और पतला तेल प्रयोग करते हैं जिसके विपरीत परिणाम आप सबके सामने है।
आधुनिक विज्ञान, पैसे कमाने की ललक और सरकारों ने हमें तेल के नाम पर जहर खाने के लिए विवश कर दिया है।
आज रिफाइंड तेल बनाने के नाम पर हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक महत्वपूर्ण घटक (गंध, चिपचिपापन) निकाल लिए जाते हैं।
तेल की मूल गंध जो प्रोटीन होती है और चिपचिपापन जिसके कारण उसे तेल कहते है और इनके निकालने के बाद वह तेल ही नहीं रहता है बल्कि तेल जैसा पदार्थ रह जाता है।
रिफाइंड बनाने कि प्रक्रिया मे उसमे कई खतरनाक रसायन / जहर भी मिलाये जाते हैं।
इसके साथ ही कानून की मदद से इसमे पाम आयल मिलाकर बाजार में बेचा जा रहा है।
जबसे हम रिफाइड खाने लगे हैं तब से रक्त चाप (B.P.), कैंसर, हृदयघात जैसी बीमारियों मे गुणात्मक बढ़ोतरी हुई है।
*ये भी जानिये...*
*रिफाइंड तेल कैसे बनता है.?*
पहले तेल में गैसोलीन नामक केरोसिन फेमिली का केमिकल मिलाकर उसे पतला किया जाता है।
फिर उसमे हेक्सेन केमिकल मिलाकर खूब हिलाया जाता है।
इसके कारण तेल में महत्वपूर्ण एसेंशियल फैटी एसिड (Essential Fatty Acid) और विटामिन-E तथा मिनरल्स आदि निकाल लिए जाते हैं। जबकि हमारा शरीर इन सबको बना ही नहीं पाता, और इसी कारण वो सब तेल से ही हमें मिलते हैं।
फिर एक और तमाशा कि इस तेल को 300° फारेनहाइट पर उबाला जाता है ताकि गैसोलीन और हेक्सेन की दुर्गन्ध को दूर किया जा सके।
तेल का मटमैला रंग निकालकर उसे ट्रांसपेरेंट बनाने के लिए ब्लीचिंग किया जाता है।
जिसके कारण वीटा केरोटीन और क्लोरोफिल खत्म हो जाता है।
यह तत्व हमारे शरीर में कोलेस्ट्रॉल घटाने का काम करता है।
इसके बाद डिगमिंग पद्धति (Degumming process) द्वारा तेल को पतला करने की प्रक्रिया में तेल का महत्वपूर्ण घटक फोस्फालिपिएल (Phosphalipiel) तथा लेसिथिन (Lecithene) निकल जाता है, तेल पतला हो जाता है।
फिर से उसकी दुर्गन्ध निकालने के लिए उसे 464°फारेनहाइट पर गर्म किया जाता है और सबसे अन्त में इस घटिया और तत्वहीन तेल को लम्बे समय तक टिकाये रखने के लिए उसमें प्रिजर्वेटिव (Preservative) के रूप में सिंथेटिक एन्टी ऑक्सीडेंट (Synthetic Anti-Oxidants) डाले जाते हैं।
अब आप ही सोचिए कि आप तेल खा रहे हैं या जहर।
*शुद्ध सरसों के तेल का महत्व:-*
भारतीय रसोई तेल के बिना अधूरा है। उच्चताप एवं लंबे समय तक रखने के लिए सरसों, मूँगफली एवं नारियल का तेल तेल भारतीय वातावरण में सर्वोत्तम हैं। सरसों, मूँगफली, तिल आदि के तेलों में MUFA (Monounsaturated Fatty Acids) की मात्रा अधिक होती है जिससे ये तेल हानिकारक LDL (Low-Density Lipoprotein) को कम करते हैं और लाभदायक HDL (High-Density Lipoprotein) का स्तर बनाये रखते हैं। जिससे हृदयघात की संभावना नगण्य हो जाती है।
शुद्ध सरसों तेल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है।
पाचन तंत्र को मजबूत करता है।
त्वचा संबंधी विकारों को दूर करता है।
सर्दी, जुकाम आदि एलर्जी में रामबाण है।
मालिश के लिए सर्वोत्तम एवं बालों के लिए गुणकारी है।
शुद्ध भारतीय परंपरागत तेल वात से होने वाली 80 प्रकार के बीमारियों को ठीक करता है।
इसीलिए हम तो यही कहेंगे कि अपने खाने में शुद्ध सरसों, अलसी, तिल के तेल, राइसब्रान आयल का प्रयोग करें तथा रिफाइंड जैसे जहर से अपने परिवार को बचाएं।
इस संदेश को ज्यादा से ज्यादा अपने और अपनों को भेजने की कोशिश करें जिससे उनको अच्छा बीमारी मुक्त स्वास्थ्य लाभ मिल सके।
आगे आपकी मर्जी क्योंकि आपने वही करना है जहां आपकी ईगो सन्तुष्ट होती होगी।
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