तुर्की के भुकंप में सीमेंट कंक्रीट के अत्याधुनिक, मजबूत व भूकंप रोधी भवनों में दफन बीस हजार से अधिक लोगों को विनम्र श्रद्धांजलि🙏
मैं जब भी अपने जान पहचान वाले और दोस्तों को बताता था कि सीमेंट कंक्रीट के मकान भूकंप रोधी नहीं होते बल्कि मिट्टी के मकान ही भूकंप रोधी होते हैं तो वह मुझ पर हँसते थे।
एक दिन दोपहर को मेरे किसी मित्र का फोन आया व बोला कि पंडत जी राम राम। मैनें तुरंत जवाब दिया कि रै जाट को पंडित कैसे बोल रहा है तू
वह बोला कि नहीं तुम तो सच में पंडित हो, आज मैं मान गया। तुम जो उस दिन कह रहे थे कि मिट्टी के मकान ही भूकंप रोधी होते हैं, वह मैनें आज प्रत्यक्ष देख लिया।...
अभी मैं काठमांडू में हूँ तथा अभी बहुत जोर का भूकंप आया है। मेरी आँखों के सामने सीमेंट के मकान भरभरा कर गिर रहे हैं। यहाँ अभी तक कुछ मिट्टी के मकान भी सामने हैं, उनका कुछ भी नहीं बिगड़ा।
दोस्तो, मिट्टी में लचीलापन होता है जबकि कंक्रीट में लचीलापन नहीं होता। वह लचीलापन भूकंप में शॉकर का काम करता है। पर जब एक झूठ बार बार बोला जाये तो हम उसे सच मान लेते हैं।
बहुत से लोग मिट्टी के भवनों की उम्र व बहुमंजिला बनने आदि के बारे में भी सवाल पूछते हैं तो प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती।
संलग्न चित्र में यमन देश के शिबम शहर के बहुमंजिला मिट्टी के भवन हैं जो कि सोहलवीं सदी में बनाये गये थे तथा आज भी अनेक बार भूकंप आने के बाद सीना ताने खड़े हैं तथा तुर्की के शहर सीमेंट के मजबूत मकान जो धरती पर पड़े हैं!
और हाँ, मिट्टी से बढ़ियाँ गौक्रीट है, गौक्रीट के तो कहने ही क्या, यह तो अल्टीमेट भवन निर्माण सामग्री है, भूकंप रोधी के साथ साथ ना पानी में गले ना आग में जले, टॉप का सौदा है।
नोट:- ग्लोबल वार्मिंग के प्रमुख कारणों में एक सीमेंट कंक्रीट भी है।
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