Monday, 13 February 2023

आप को सदैव प्रभु का अंश समझते हुए आनंदित रहकर जीवन जीने का अभ्यास करना चाहिए। अपनी मानते ही वस्तु अशुद्ध हो जाती है एवं भगवान की मानते ही वह शुद्ध और भगवत्स्वरूप हो जाती है। इसी तरह अपने आपको भी भगवान से दूर और पृथक मानते ही आप अशुद्ध हो जाते हो।

राधे - राधे - आज का भगवद चिन्तन 
           09 - 02 - 2023 
            *" ईश्वर अंश जीव "* 

      ☯️      अपने आप को सदैव प्रभु का अंश समझते हुए आनंदित रहकर जीवन जीने का अभ्यास करना चाहिए। अपनी मानते ही वस्तु अशुद्ध हो जाती है एवं भगवान की मानते ही वह शुद्ध और भगवत्स्वरूप हो जाती है। इसी तरह अपने आपको भी भगवान से दूर और पृथक मानते ही आप अशुद्ध हो जाते हो। 

     ☯️       प्रत्येक पल भगवान का स्मरण करो और उन्हें अपना मानो। इससे उनके प्रति आसक्ति प्रगट हो जाएगी एवं भगवद् चरणों में प्रीति प्रकट हो जाएगी। भगवान का हृदय से आश्रय करते ही भगवदीय गुण स्वतः प्रगट होने लगते हैं।

     ☯️        छोटा बालक माँ -माँ करता है। उसका लक्ष्य, ध्यान, विश्वास माँ शब्द पर नहीं होता अपितु माँ के सम्बन्ध पर होता है। ताकत माँ शब्द में नहीं है, माँ के सम्बन्ध में है। इसी तरह ताकत भगवान के सम्बन्ध में है। हर परिस्थिति में भगवद् चरणों में आश्रय जीव को निर्भयता प्रदान कर देता है।

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