Friday, 13 March 2026

महाशक्ति ‌‌ एवं नारी शक्ति का महापर्व नवरात्रि -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि नवरात्रि का महापर्व और देवी के नौ रूप

महाशक्ति ‌‌ एवं नारी शक्ति का महापर्व नवरात्रि -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 

नवरात्रि का महापर्व और देवी के नौ रूप 

नवरात्रि का महापर्व शक्ति का महापर्व कहा जाता है क्योंकि इन नौ दिनों में मां शक्ति के नौ रूपों की पूजा की जाती है आदि महाशक्ति स्वयं भगवती पार्वती हैं और उनके नौ रूप शैलपुत्री ब्रह्मचारिणी चंद्रघंटा कुष्मांडा स्कंदमाता कात्यायनी कालरात्रि महागौरी और सिद्धिदात्री हैं जिनकी इस नवरात्रि में पूजा अर्चना विधि विधान से की जाती है ध्यान देने योग्य बात यह है कि वर्ष में 9 दिन की नवरात्रि दो बार पड़ती है एक बसंत ऋतु में दूसरी शरद ऋतु में जिसे क्रमशः बासंतिक और शारदीय नवरात्रि कहते हैं बासंतिक नवरात्रि नए भारतीय वर्ष के प्रथम दिन से चैत्र माह के उजले पक्ष के प्रथम दिन से प्रारंभ होता है जबकि शारदीय नवरात्रि क्वार माह के शुक्ल पक्ष से प्रारंभ हो 9 दिन तक चलता है

*कब से कब तक है चैत्र माह का नवरात्रि महापर्व* 

इस वर्ष बासंतिक नवरात्रि चैत्र माह के प्रथम दिन उजाला पक्ष से ‌ 19 मार्च शुरू हो रहा है यह  27  मार्च तक चलेगा और यह सर्वार्थ सिद्धि ‌ नल दंड गजकेसरी अनफा मालवीय पंच  मालव्य महापुरुष पाराशरी वोशी और धन योग अमृत योग जैसे सुंदर योग में शुरू हो रहा है जिसके कारण यह अत्यंत ही महत्वपूर्ण और कल्याणकारी हो गया है सनातन धर्म के अन्य महापर्व की तरह शक्ति का यह महापर्व भी अन्याय पर न्याय की असत्य पर सत्य की और अज्ञान पर ज्ञान की विजय है साथ ही साथ नारी शक्ति को कम आंकने वाले लोगों के लिए यह एक उदाहरण है कि जब कभी नारी अपने सृजनात्मक  या विध्वंसक शक्ति में प्रकट होती है तो उसकी शक्ति के आगे कोई भी नहीं ठहर सकता चाहे वह कितना ही बलशाली हिंसक और राक्षसी पुरुष क्यों न हो

*भगवान श्री राम और शक्ति* 

शक्ति का यह महापर्व नए भारतीय वर्ष के प्रथम दिन से प्रारंभ होता है और श्री रामनवमी के दिन समाप्त हो जाता हैं यह ध्यान देने वाली बात है कि दोनों रामनवमी में भगवान श्री राम अभिन्न रूप से जुड़े हुए हैं बसंत में पढ़ने वाली नवरात्रि उनके जन्म से तो शरद ऋतु में पड़ने वाली नवरात्रि उनके विजय पर्व के साथ अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है और सारा जगत जानता है कि भगवती दुर्गा जी की पूजा करके और भगवान शिव का आशीर्वाद लेकर ही भगवान श्री राम ने तीनों लोकों के विजेता दुर्दांत रावण का वध किया था

नवरात्रि के महापर्व में छिपे हुए वैज्ञानिक और अन्य तथ्य

[3/26, 9:31 PM] Dr  Dileep Kumar singh: चैत्र महीने में पड़ने वाला नवरात्रि इतना महत्वपूर्ण है की देवी दुर्गा माता स्वयं धरती पर 9 दिनों तक आकर अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं और उन्हें सुरक्षा चक्र प्रदान करती है सबसे बड़ा धार्मिक आध्यात्मिक दार्शनिक महत्व इसके वैज्ञानिक पक्ष में छिपा हुआ है चैत्र माह के नौ दिनों तक लोग सात्विक आहार विहार करके तेल मसाले अन्न से दूर रहते हैं तो उनका सारा शरीर पूरी तरह इस प्रकार तरो ताजा होता है जैसे कोई मशीन लगातार चलते-चलते उसकी संपूर्ण मरम्मत करके उसे नया बना दिया जाए ऋतु परिवर्तन गर्मी और जाड़े के संधि काल में पड़ने वाली यह नवरात्रि 9 दिनों तक उचित आहार बिहार पूजा पाठ यज्ञ हवन अनुष्ठान करने से दैहिक दैविक भौतिक तीनों रूपों में चमत्कारिक परिणाम देती है इसमें कोई भी संदेह नहीं है धर्म से जोड़कर जिस प्रकार का संतुलन भोजन और प्रकृति तथा पर्यावरण से हमारे ब्रह्म ऋषि और विद्वानों ने किया वह बड़े से बड़े वैज्ञानिक नियम से भी बड़ा है जहां वैज्ञानिक उन्नति के कारण आज सभी रोगों को जन्म देने वाले फास्ट फूड जंक फूड नकली घी तेल मसाले और कोल्ड ड्रिंक के कारण रोग बीमारियां असाध्य हो गई हैं वही हमारे विज्ञान के रहस्य को समेटे महापर्व मंगल पर्व विवाह समारोह सही ढंग से करने पर पूरे शरीर को रोग मुक्त करके उसे नई ऊर्जा और इस स्फूर्ति से भर देते हैं

कलश (घट) स्थापना और उसकासमय 

धर्म अनुष्ठान पूजा पाठ और कलश स्थापना करने वालों के लिए विशेष रूप से जानना चाहिए कि कलश स्थापना और पूजा पाठ के मुहूर्त के लिए इस बार 19 मार्च को लंबा समय मिल रहा है जो 6:52 से सुबह 7:53 तक रहेगा और अगर अभिजीत मुहूर्त में करना चाहते हैं तो यह 12:05 से 12:53 तक रहेगा ।नवरात्रि का आरंभ नए वर्ष की तरह 19 मार्च को सुबह 6:52 पर हो रहा है । और 27 मार्च को पहला दिन देवी शैल पुत्री का रहेगा इसी तरह से नौ देवियों का 9 दिन पूजा पाठ व्रत अनुष्ठान चलेगा और साथ को नवरात्रि और श्री रामनवमी का समापन हो जाएगा ।

चैत्र नवरात्रि की कथाएं 

चैत्र मास के नवरात्रि मनाने के धार्मिक वैज्ञानिक दार्शनिक आध्यात्मिक कारण के साथ-साथ दो मुख्य कथाएं हैं पहली कथा परम शक्तिशाली सभी देवी देवताओं के लिए अजेय महिषासुर नामक राक्षस को मारने के लिए सभी देवी देवताओं का तेज एक साथ एकत्र हुआ और उनके सभी अस्त्र-शस्त्र एक करके देवी दुर्गा ने 9 दिनों तक घनघोर युद्ध करके महिषासुर राक्षस का वध कर दिया ।दूसरी कथा भगवान श्री राम ने रावण के वध के लिए शक्ति की उपासना किया था और देवी दुर्गा से विजय का वर प्राप्त किया था इसके उपलक्ष्य में भी यह शक्ति का महापर्व मनाया जाता है। इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने संपूर्ण सृष्टि और अनंत ब्रह्मांड का निर्माण किया था।

घट (कलश) स्थापना के नियम 

 कलश या घट स्थापना के लिए बालू बिछाकर उसके ऊपर घट अर्थात कलश रखते हैं उसमें पानी भरकर गंगाजल मिलाकर एक सिक्का चांदी या सफेद रंग का डाल देते हैं फिर कलश के मुंह पर आम के पत्ते के ऊपर नारियल रखा जाता है और कलश को रक्षा से या चुनरी से बांध देते हैं और इसे पूजा स्थान पर देवी दुर्गा के पास रखा जाता है ‌ और ‌ घड़े पर स्वास्तिक का चिह्न भी बनाया जाता हैऔर लोग अपनी शक्ति और सामर्थ्य के अनुसार पूजा पाठ करते हैं कुछ लोग पहले और आठवें दिन तो कुछ लोग पूरे 9 दिन सात्विक रहकर बिना अन्न ग्रहण किये अपने व्रत को पूरा करते हैं ।ध्यान रखने वाली बात यह है कि शुद्ध और सात्विक मन से किया गया एक दिन का पूजा पाठ भी 9 दिन के उपवास से अधिक होता है और उसी का फल प्राप्त होता है। और 9 दिन व्रत रखकर भी जो बुरे कर्म और पापों में लिप्त रहता है उसे फल तो मिलता नहीं ऊपर से उसको दंड भी भोगना पड़ता है प्रत्येक दिन पूजा पाठ के बाद हर देवी का अलग-अलग भोग होता है।

इस बार नौ दिनों का होगा चैत्र का नवरात्रि

इस वर्ष 8 दिन का चैत्र माह का नवरात्रि है और विशेष बातें है कि देवी दुर्गा जी का आगमन डोली (पालकी) पर हो रहा है और प्रस्थान भी हाथी पर हो रहा है जो सनातन धर्म के लिए और भारत देश के लिए बहुत अच्छा है यह स्थिरता शुभ शांति और मांगलिक कार्यों का भी प्रदर्शन है ।इसके साथ ही इस वर्ष नवरात्रि व्रत का पारण भी 27 मार्च 2026को शुक्रवार  के दिन किया जाएगा तिथि के क्षय के कारण इस वर्ष 9 दिन का नवरात्रि मनाया जाएगा विधि विधान और सच्चे मन से 9 दिन माता रानी की पूजा पाठ करने पर व्यक्ति को आत्म साक्षात्कार हो जाता है और कितनों को देवी मां का साक्षात दर्शन भी प्राप्त होता है। पालकी पर आने के कारण पहले चरण बहुत ही हलचल उथल-पुथल और विषम परिस्थिति वाला होगा जबकि हाथी पर जाने के कारण अंतिम चरण बहुत ही अच्छा और भारत के लिए सुख समृद्धि वाला होगा।

‌‌ नवरात्रि के ज्योतिष संबंधित योग 

इस वर्ष बसंत की नवरात्रि में शुक्र उच्च स्थान पर बैठा है जिससे महिलाओं का उत्थान होगा और सद्बुद्धि आएगी बुद्ध ‌ वर्गोत्तम है‌ शनि की महादशा में यह वर्ष प्रारंभ हो रहा है मंगल उच्च भाव में है कालसर्प दोष नए वर्ष में अनुपस्थित है जबकि मंगल के साथ में वर्ष शुरू हो रहा है बृहस्पति राजा है इस प्रकार रौद्र नमक वर्ष अर्थात संवत्सर के कारण साल भर रौद्र रस की प्रधानता रहेगी युद्ध और शीत युद्ध आतंकवाद कई छोटी बड़ी लड़ाई बेहद तेज महंगाई और अपराध के बीच भी भारत प्रगति करेगा और हर क्षेत्र में उपलब्धियां प्राप्त करेगा केंद्र में सत्ता परिवर्तन का योग बनेगा जो एक वर्ष में फली भूत हो जाएगा‌ इस वर्ष नया वर्ष प्रारंभ होने में कई राजयोग हैं जिसमें नल दंड गजकेसरी अनफा मालव्य पंच महापुरुष पाराशरी बोसी और धन राज योग प्रमुख हैं 


पूजा पाठ का विधान 

सामान्य लोगों और गृहस्थ लोगों के लिए जिसमें 99 परीक्षित लोग आते हैं शुद्ध मन से नित्य कर्म करके स्नान ध्यान करते हुए साफ सुथरे कपड़े पहनकर पूजा करना चाहिए देवी पार्वती का ध्यान करते हुए नौ देवियों का अर्थात शैलपुत्री ब्रह्मचारिणी चंद्रघंटा ‌ कुष्मांडा स्कंदमाता ‌ कात्यायनी कालरात्रि महागौरी और सिद्धिदात्री देवी का ध्यान करना चाहिए साफ सुथरी जगह पर लकड़ी का या कोई आसान बेचकर उसे पर लाल कपड़ा रखकर ‌‌ कोई भी देवी का मंत्र पढ़ना चाहिए सबसे पहले संकल्प लेना चाहिए जिसमें हाथ में अक्षत अर्थात बिना टूटा हुआ चावल और जल लेकर अपना नाम पिता का नाम गोत्र दिनांक सहित देवी जी की पूजा करनी चाहिए और आसन पाद्य ‌ अर्थात पैर धोने के लिए जल  अर्घ्य ‌ अर्थात हाथ से जल का दिया जाना आचमन अर्थात मंत्र पढ़कर जल को मुंह से लगाना स्नान अर्थात मूर्ति को गंगाजल मील जल से स्नान करना वस्त्र देवी जी की प्रतिमा या छायाचित्र को अंतर्गत आता है इसके बाद गढ़ में दीप धूप पुष्प और चंदन को जलाना और अर्पण करना होता है फिर नैवेद्य अर्थात भोजन अर्थात प्रसाद को तांबूल के साथ अर्पित करके दक्षिण देकर आरती करते हुए प्रदक्षिणा करना चाहिए

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