Thursday, 26 March 2026

खाड़ी युद्ध और अमेरिका क्या सचमुच विश्व युद्ध होगा -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

 खाड़ी युद्ध और अमेरिका क्या सचमुच विश्व युद्ध होगा -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 

लगातार 28 दिन से ईरान पर अमेरिका और इजरायल का भीषण आक्रमण और ईरान के द्वारा भयानक प्रत्यक्रमण जारी है इस भीषण महायुद्ध ने सारी दुनिया को अब बहुत गहराई से प्रभावित करना प्रारंभ कर दिया है तेल के इस खेल में तेल गैस पेट्रोलियम का अभाव लगातार पूरी दुनिया में बढ़ रहा है विशेष कर खाड़ी देशों पर निर्भर भारत चीन जापान और एशिया के सभी देशों में डीजल पेट्रोल गैस और इससे संबंधित वस्तुओं की कीमत बढ़ने से हर जगह महंगाई बढ़ती चली जा रही है मोदी जी और पुतिन ने तो इसे कोरोना काल की कोविद जैसी स्थिति करार दिया है तो क्या सचमुच कोई विश्व युद्ध परमाणु नाभिकीय जैव रासायनिक युद्ध होने वाला है और क्या भारत सहित दुनिया को सचमुच बहुत गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है इसका निष्पक्ष तथ्य परक विवेचन आवश्यक है।


ईरान जिसका प्राचीन नाम भारत फारस है और अंग्रेजी में से परसिया कहते हैं वह तीन और से जमीन से और एक तरफ समुद्र से घिरा है जिसको ईरान की खाड़ी ‌ ‌या फारस की खाड़ी कहते हैं ‌ यह दुनिया का सबसे प्राचीन स्थल और पुरानी सभ्यता में सा रहा है और भारत पर सबसे अधिक आक्रमण इसी देश ने किए हैं उसी के दिखाएं रास्ते पर बाद में सिकंदर तुर्क मुसलमान अंग्रेज लोग भारत को जीतते चले आए हैं।

दूसरी तब दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश संयुक्त राज्य अमेरिका है जो संसार का चौथा सबसे बड़ा देश है उसका साथ संसार का सबसे विकसित शक्तिशाली साहसी और देशभक्त ‌ देश इजराइल दे रहा है जो 58 मुस्लिम देशों से गिरा हुआ है और जिसकी कहानियां सारे विश्व के लिए उदाहरण बन गई है । इजरायल की जनसंख्या लगभग एक करोड़ ईरान की जनसंख्या लगभग 10 करोड़ और संयुक्त राज्य अमेरिका की जनसंख्या लगभग 35 करोड़ है ‌ अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी सैनिक शक्ति है इजराइल चौथी और ईरान ‌ दसवीं बड़ी सैन्य शक्ति है इजरायल की सेवा में लगभग 2 लाख जबकि ईरान की सेवा में छह लाख और संयुक्त राज्य अमेरिका की सेवा में 12 से 15 लाख सैनिक है ‌ अमेरिका जल थल नभ तीनों में सर्वश्रेष्ठ है जबकि जमीन के युद्ध और ‌ लड़ाकू विमान के युद्ध में और गुप्तचर तंत्र में इजराइल का कोई जोड़ नहीं है जबकि प्रक्षेपास्त्र और द्रोण युद्ध में ईरान इस समय दुनिया में सबसे आगे हैं 

संयुक्त राज्य अमेरिका और इसराइल दोनों परमाणु शक्ति हैं जबकि ईरान अभी इसके नजदीक पहुंचने वाला है कई बार इसके परमाणु बम कार्यक्रम को इजरायल द्वारा नष्ट कर दिया गया भारत की सहायता से इसराइल पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम भी नष्ट करना चाहता था ‌ लेकिन भारतीय सरकार डर के कारण पीछे हट गई ईराने कैसी जगह पर स्थित है जहां अमेरिका को छोड़कर वह संपूर्ण दुनिया को परमाणु और प्रक्षेपास्त्र तथा ड्रोन तकनीक से ब्लैकमेल कर सकता है और पूरे संसार के लिए खतरे की घंटी है दुनिया का 90% आतंकवाद और आतंकवादी ईरान से ही पलीत और पोषित है जिसमें हूती हिजबुल्ला जैसे संगठन सम्मिलित हैं ‌ इस बात पर विशेष ध्यान देना है कि दुनिया में सबसे अधिक आतंकवाद भारत झेल रहा है।

दुनिया में उसी का इतिहास है जो शक्तिशाली रहा है खूंखार रहा है जिसे दुनिया की सभ्यताओं को नष्ट किया है चाहे वह सिकंदर रहे हो चंगेज खान गजनी गोरी हिटलर नेपोलियन स्टालिन मुसोलिनी औरंगजेब अकबर या खलीफा सबने शक्तिशाली होकर दुनिया को नष्ट और बर्बाद किया और दुनिया पर राज किया आज यही काम अमेरिका ढाई सौ वर्ष से कर रहा है और दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति बना हुआ है। यही काम करके चीन और रूस भी आगे बढ़ना चाहते हैं यही काम कभी इराक ने किया था जिसे नष्ट कर दिया गया 

ईरान और अमेरिका तथा इजराइल में 28 दिनों के युद्ध में दोनों पक्षों की भीषण हानि हुई है और इजरायल ने अप्रत्याशित रूप से मिसाइल और द्रोण का प्रयोग करके अमेरिका और इसराइल को गहरा झटका दिया है लेकिन तुलनात्मक रूप से ईरान का काफी भाग खंडहर हो चुका है और वहां के समाचार पूरी तरह बाहर नहीं आ रहे हैं अमेरिका और इजरायल ने उसके लगभग सभी उच्च स्तर के अधिकारी और प्रशासक तथा सेनानायके को मार गिराया है इसलिए एक प्रकार से ईरान अंतिम लड़ाई लड़ रहा है जो दीपक के लौ की तरह अंतिम चरण में है ‌ या तो ईरान समर्पण कर देगा या फिर ईरान का नेतृत्व अमेरिका के किसी पिट्ठू के हाथ में चला जाएगा यह निश्चित है।

इस भीषण युद्ध के विश्व युद्ध में बदलने की कितनी संभावना है हमने दो महीने पहले भी ज्योतिष और पंचांग का आकलन करके कहा था कि यह युद्ध भीषण तो होगा लेकिन इसके विश्व युद्ध में बदलने की बहुत अधिक आशा नहीं है परमाणु जैव नाभिकीय अस्त्र-शस्त्र प्रयोग की भी आशा कम ही है लेकिन इसकी संभावना बनी हुई है। ऐसा माना जाता है कि लाख दावे के बाद भी ईरान का अधिकतर ड्रोन और मिसाइल खत्म हो चुका है और उसकी सैन्य शक्ति हवाई सेवा और जल सेवा बहुत कमजोर हो चुकी हैं ऐसे में वह निर्णायक हमले को कितने दिन झेल सकेगा यह देखा जाना ‌ बहुत ही रोमांचक होगा 

ऐसा प्रतीत नहीं होता और ना ऐसा कोई कारण है जिससे सीधे-सीधे ईरान के पक्ष में कोई देश खड़ा दिखे चीन और रूस सीधे-सीधे कभी भी ईरान का साथ नहीं देंगे भले ही अंदर-अंदर वे अपने अस्त्र-शास्त्र बेचकर स्वयं को मजबूत बना रहे हैं 58 मुस्लिम देशों में भी ऐसा कोई नहीं दिख रहा जो ईरान का साथ देगा चोरी छुपे आर्थिक मदद दे सकते हैं सबसे खूंखार और धर्मांध देश तुर्की और पाकिस्तान हैं लेकिन यह भी सीधे-सीधे ईरान का साथ नहीं देंगे क्योंकि यदि ईरान इस युद्ध को जीत जाता है जो संभव है तो ईरान उनके लिए भी कॉल बन जाएगा ‌ क्योंकि ईरान का इतिहास बहुत ही गंदा रहा है और दूसरे ईरान पूरे दुनिया को शिया मुस्लिम धरती में बदलने का सपना देख रहा है जो सुनी लोगों को कदापि बर्दाश्त नहीं हो सकता है ‌ बची खुची आशा ईरान ने दो दर्जन देशों पर आक्रमण करके समाप्त कर दी है‌।

दूरी इस तरफ अमेरिका है और आश्चर्यजनक रूप से इस बार यूरोप के देश और नाटो संगठन और अमेरिका का मित्र देश प्रत्यक्ष रूप में अमेरिका और इजरायल के साथ इस युद्ध में सम्मिलित नहीं हुआ है बल्कि फ्रांस और इंग्लैंड ने तो खुले रूप में इसे अस्वीकार कर दिया है जिससे ट्रंप बहुत क्रोधित हो चुके हैं यह यूरोप और नाटो के लिए खतरे की घंटी है क्योंकि यूक्रेन को जीत लेने के बाद रूस महाशक्ति बनने के लिए सीधे-सीधे यूरोप की तरफ बढ़ेगा तब यह देश बिल्कुल विवश हो जाएंगे इसलिए आज नहीं तो कल नाटो यूरोप के देश और अमेरिका के मित्र देश अमेरिका के साथ खड़े होंगे लेकिन लगता है कि इसकी नौबत ही नहीं आएगी। 


सबसे बड़ा खतरनाक काम ईरान ने हॉरमुज जलडमरूमध्य को बंद करके उठाया है जो पूरे विश्व के लिए खतरे की घंटी है और ऐसा करना ईरान के लिए अंतरराष्ट्रीय शर्तों का खुले आम उल्लंघन है ऐसा करके वह अपना अधिकार संयुक्त राष्ट्र संघ और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के लिए खो चुका है‌ इससे धीरे-धीरे विश्व के देश और विश्व जनमत ईरान के विरुद्ध होता जा रहा है और ऐसी स्थिति में अमेरिका का साथ देने के लिए देश बाध्य होंगे। दुनिया का 20% खनिज तेल यहां से होकर जाता है यदि स्थिति ऐसी रही तो गैस और तेल आयात करने वाले देश वैकल्पिक ऊर्जा की खोज करेंगे और अन्य देशों पर निर्भर होंगे जैसे कि भारत ने किया है तब फिर यह खनिज तेल अरब देशों के लिए वरदान की जगह अभिशाप हो जाएगा 

अमेरिका और इजरायल ने यह कदम बहुत सोच समझ कर उठाया है और जहां ईरान में 3000 से अधिक सैनिक और लोग मारे गए हैं वहीं अमेरिका और इजराइल में कुल मिलाकर 50 लोग भी नहीं मारे गए हैं यह सीधे-सीधे एक दर्पण है जिसको देखकर ईरान और उसके पक्ष में बोलने वाले लोगों को सावधान होना चाहिए वैसे भी ईरान में हताहतों की संख्या बहुत अधिक है‌ और इसराइल इस स्थिति में है कि जब भी चाहेगा वह ईरान के किसी भी नेता को मार गिराएगा यदि इसराइल और अमेरिका ने ऐसा नहीं किया तो मध्य पूर्व में उनका नियंत्रण समाप्त हो जाएगा और अमेरिका का स्थान ईरान ले लेगा और चीन तथा रूस उसके साथ होंगे और शक्ति संतुलन बिगड़ जाएगा। ऐसा होना इजरायल के संपूर्ण अस्तित्व के लिए खतरे की घंटी होगा इजरायल भारत नहीं है कि शत्रु को आगे बढ़ते हुए अपना विनाश देखता रहेगा। 

इजराइल 1948 में स्थापित हुआ और तब से वह लगातार अपना विस्तार करता चला जा रहा है आज वह अपने क्षेत्रफल का 5 से 10 गुना विस्तार कर चुका है और आने वाले भविष्य में वह लेबनान और आसपास के देशों को जीतकर एक बेहतर इसराइल बनाने की योजना पर जुटा हुआ है अभी तक उसने लेबनान का 15% भूभाग अपने अधिकार में कर लिया है यदि इसराइल ऐसा नहीं करेगा तो ईरान या फिर अन्य कोई अरब का देश उसका अस्तित्व समाप्त कर देगा इजराइल का बड़ा होना आवश्यक भी है क्योंकि यदि कोई मुस्लिम देश परमाणु बम बना लेता है तो छोटे से इसराइल में भीषण नुकसान करना उसके लिए आसान हो जाएगा 

खेल और युद्ध तथा रणनीति कितना ही बाहर बैठकर बनाया जाए लेकिन इसके प्रारंभ होने के बाद स्थितियां पूरी तरह से बदल जाती हैं इसराइल और अमेरिका ने 15 दिन में ईरान का खत्म करके समर्पण करने की योजना बनाई थी जो सफल नहीं हुई इसका कारण केवल ईरान की मिसाइल और ड्रोन टेक्नोलॉजी और पहाड़ों के नीचे भूमिगत सुरंगों में रखे गए उसके हथियार थे अमेरिका और इजरायल ने यदि शक्तिशाली जमीनी अभियान अर्थात ग्राउंड ऑपरेशन शुरू किया होता तो अब तक ईरान घुटने टेक चुका होता और एक समय के बाद इन देशों को विवश होकर ग्राउंड ऑपरेशन करना होगा तब ईरान अपने आप ढह जाएगा इस ग्राउंड ऑपरेशन में बहुत भयानक और भीषण खतरे होंगे लेकिन बिना ऐसा किया अमेरिका और इसराइल निर्णायक विजय प्राप्त नहीं करेंगे।

ईरान और इजरायल ने अपने क्रॉस एजेंट से धोखा खाया ज्यादातर मुस्लिम देशों ने अमेरिका की भर्ती दिखाते हुए भी चोरी छिपे ईरान की मदद की और ईरान के सैन्य ठिकानों और उनकी सेवा की ठीक-ठाक स्थिति गुप्त रूप से ईरान तक पहुंचाई जिससे 15 देश में ईरान ने अमेरिका के सैनिकों और अमेरिकी सैनिकों को भयंकर नुकसान पहुंचा अमेरिका और इसराइल इस स्थिति के लिए तैयार नहीं थे इसलिए उनका भीषण नुकसान भी हुआ इसके अलावा अरब देशों ने अप्रत्याशित रूप से इस सैनिक कार्यवाही में अमेरिका से अलग रहकर ईरान का काम आसान कर दिया यह अमेरिका भूल गया कि एक मुस्लिम कभी भी दूसरे मुस्लिम के विरुद्ध और गैर मुसलमान का साथ नहीं देगा अब यह भूल अमेरिका और इसराइल सुधार रहे हैं 

युद्ध के इस चरण में अमेरिका और इजरायल ने अपनी गलतियों को सुधारते हुए ईरान की द्रोण और मिसाइल टेक्नोलॉजी को डिकोड कर लिया है और अपने लोहे की दीवार अर्थात आयरन डोम को सुधार कर उसे शक्तिशाली बनाया है और भविष्य में उसे क्या करना है इसका भी खड़ा अर्थात रोड मैप तैयार कर लिया है ऐसा प्रतीत होता है कि अप्रैल के प्रथम सप्ताह या 15 अप्रैल के आसपास तक यह लड़ाई अत्यंत भयंकर होकर ईरान की हार के साथ समाप्त हो जाएगी। 

आने वाले समय में रौद्र नामक संवत्सर और मंगल के मंत्री और बृहस्पति के राजा होने का प्रभाव भारत सहित पूरे विश्व की राजनीति पर पड़ेगा और रूस चीन अमेरिका आपसी मिली मर और नूरा कुश्ती के तहत कनाडा ग्रीनलैंड ऑस्ट्रेलिया और अरब देशों में अपना आधिपत्य जमा सकते हैं ‌ सबसे कठिन और जटिल स्थिति भारत की है जहां अप्रैल से बहुत ही भयानक स्थितियां आर्थिक मंदी और भीषण महंगाई उत्पन्न होगी कोरोना कल के कोविद जैसी तो नहीं लेकिन उससे मिलती-जुलती स्थिति भारत सहित दुनिया के कई देशों में उत्पन्न हो सकती है भारत को अत्यधिक सावधान रहना पड़ेगा अन्यथा यह युद्ध समाप्त होने के बाद उसके ऊपर चीन पाकिस्तान का गहरा दबाव पड़ सकता है और अमेरिका पूरी तरह भारत के विरुद्ध हो चुका है
[3/27, 11:00 AM] Dileep Singh Rajput Jounpur: इस युद्ध में एक और अप्रत्याशित स्थिति उत्पन्न हुई जिसके लिए और अमेरिका और इसराइल तैयार नहीं थे अमेरिका का यह मानना था कि वह भारत की तरह अपने एजेंट भेज कर वहां पर विद्रोह करके तहत पलट कर देगा लेकिन ऐसा नहीं हो पाया ‌ ईरान में भीषण आंतरिक नरसंहार के द्वारा इस विद्रोह को कुचल दिया गया इसके अलावा ईरान को थोड़ा हल्के में लेना भी इसराइल और अमेरिका को भारी पड़ा इस युद्ध का वास्तविक असर युद्ध समाप्त होने के बाद पड़ेगा अमेरिका और इजरायल की अर्थव्यवस्था में तीन प्रतिशत की गिरावट आई है जबकि ईरान में यह बहुत भयानक है वहां का कोई भी समाचार बाहर निकाल कर नहीं आ पा रहा है ‌ होती और हिजबुल्ला जैसे परोक्षसी संगठनों ने ईरान का काम आसान किया हुआ है क्योंकि इसराइल पूरी शक्ति से ईरान से नहीं लड़ पा रहा है उधर चीन और रूस भी अपना अपना हित साधने में जुटे हुए हैं इस युद्ध में भारत को कोई भी पूछ नहीं रहा है 

एक बड़ी आश्चर्यजनक स्थिति और है कि प्रक्षेपास्त्र मिसाइल के सबसे बड़े भंडार करने वाले किम उन जंग का शांत बैठा रहना उनके ईरान की तरफ सम्मिलित होने पर युद्ध की दशा और दिशा बदल जाती लेकिन उनका मौन रहना भी इस युद्ध को गहराई से प्रभावित कर रहा है इसके अतिरिक्त अमेरिका में कुछ राजनेताओं और बड़े अधिकारियों का त्यागपत्र भी अमेरिका के लिए चिंता का कारण बना है‌ धीरे-धीरे ईरान विकट परिस्थितियों में फंस रहा है और अप्रैल के 10 दिन इस युद्ध के निर्णायक सिद्ध होंगे ‌ इसी समय यह युद्ध बहुत ही भयानक हो जाएगा और ईरान को ग्राउंड ऑपरेशन में भीषण हर मिलेगी और खड़ग द्वीपों पर अमेरिका के अधिकार के साथ ही इसराइल के परास्त होने और हमेशा के लिए हार्मुज ‌ जल डमरू मध्य से उसका नियंत्रण समाप्त होने की पूरी पूरी संभावना दिख रही है‌ इसके बाद वह भी इराक पाकिस्तान और लीबिया की तरह एक साधारण देश बनकर रह जाएगा इन सभी घटनाओं से भारत को देश में छिपे हुए देशद्रोही गद्दारों से सावधान रहने की आवश्यकता है‌ इस युद्ध ने यह भी सिद्ध कर दिया है कि किसी अनुशासित और देशभक्त देश को जीतकर बर्बाद करना इतना आसान नहीं होता है जितना सोचा जाता है‌ और यह भी दिखाया है कि रूस चीन अमेरिका और यूरोप के देश अपने को जितना शक्तिशाली दिखाते हैं उसका वह टुकड़े के बराबर नहीं है। यह बात फिर से बता देना चाहता हूं कि दुनिया ठीक हो वैसे ही चल रही है जैसे कि अमेरिका चला रहा है जब उसके पास हथियारों का कचरा और पुराने हथियार हो जाते हैं तब वह उन सभी कूड़ा कचरा हथियारों को लड़ाई में झोंक कर अपने को पूरा कचरा मुक्त कर लेता है और अपनी शक्ति में वृद्धि करता रहता है।

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