Monday, 11 April 2022

तंत्र मंत्र ज्योतिष और भारत की गूढ़ विद्याऐं तथा आधुनिक विज्ञान का सच भाग 1*

*तंत्र मंत्र ज्योतिष और भारत की गूढ़ विद्याऐं तथा आधुनिक विज्ञान का सच भाग 1*

*दिव्य भारत देश के देवतुल्य सनातन धर्म के वासियों हमारा भारत देश भारत का ज्ञान विज्ञान ज्योतिष कला कौशल कर्मकांड तंत्र मंत्र यंत्र टोना टोटका जादू इंद्रजाल सब कुछ परम सत्य है और इससे सत्य केवल ईश्वर है दुनिया का कोई भी विज्ञान या टेक्नोलॉजी इस की बराबरी नहीं कर सकता जो टोना टोटका ₹100 खर्च करके नजर लगने से लेकर भूत प्रेत बेताल उतारकर असंभव काम संभव कर देता है वही काम विज्ञान-टेक्नॉलॉजी और करोड़ों रुपया देख कर भी खर्च नहीं कर सकते*

*लेकिन इसके महान गुणों से डरकर विधर्मी लोगों और विज्ञान तथा चिकित्सा के द्वारा धन लूटने वाले लोगों ने हमारे पैसों के लोभी कुछ तथाकथित अपने ही लोगों को सुरासुंदरी पैसों आदि से खरीद कर इसमें काफी अंधविश्वास और गलत चीजें भरकर इसे अपमानित और कलंकित किया और हमें लगा कि यह सब झूठ है और पश्चिमी ज्ञान विज्ञान ही सही है लेकिन कोरोना महामारी के आते ही देसी जड़ी बूटियों और आयुर्वेद का डंका बजा और सब की असलियत उजागर हो गई सारे प्रयास करने के बाद भी यूरोप अमेरिका और आधुनिक पश्चिमी विश्व विनाश के कगार पर हैं*

*इसलिए आप लोगों को ज्योतिष ज्योतिर्विज्ञान ग्रह नक्षत्र जड़ी बूटियों टोना टोटका जादू टोना वास्तु शिल्प रत्न इत्यादि के बारे में कोई भी जानकारी चाहिए तो निसंकोच होकर फोन करें हम उसका पूर्व वैज्ञानिक और बिल्कुल सही उत्तर देने का प्रयास 46 वर्षों से कर रहे हैं आगे भी करते रहेंगे*


*एक छोटा सा प्रमाण और बहुत बड़ा सच आप लोगों के सामने रख रहे हैं कि हमारे मनीषियों ब्रह्म ऋषियों और बड़े-बड़े साधु संत ऋषि-मुनियों ने ऐसी खोज किया जिस पर विज्ञान तो क्या इस पर भी नतमस्तक हो गया क्योंकि वह माला जपने वाले साधु संत नहीं थे बल्कि परम वैज्ञानिक थे ब्रह्म ऋषि विश्वामित्र और ब्रह्म ऋषि अगस्त्य ने तो मंत्रों के द्वारा परमाणु बम हाइड्रोजन बम न्यूट्रॉन बम जैव रासायनिक हथियार और पृथ्वी ही नहीं सौरमंडल तक को नष्ट करने वाले महाशक्तिशाली दिव्यास्त्र की खोज किया था* 


*भगवान श्री राम के द्वारा संधान किए गए महा भयानक हाइड्रोजन रूपी अग्नियास्त्र अर्थात अग्निबाण ने समुद्र में हाहाकार मचा दिया था और परशुराम के ऊपर छोड़े गए बाढ़ ने सौरमंडल में खलबली मचा दिया था महाभारत में दुनिया के सभी प्रकार के ज्ञात जैव रासायनिक परमाणु हाइड्रोजन और न्यूट्रॉन बमों का प्रयोग हुआ था जिसमें सबसे भयानक नारायणास्त्र का प्रयोग अश्वत्थामा ने किया था जिसकी काट केवल श्री कृष्ण भगवान के पास थी* 

*यहां तक कि रावण के पास सुषेण की तरह ऐसे ऐसे महान वैद्य और आयुर्वेदाचार्य थे जो हलाहल विश्व में बुझी हुई पर्ची की चोट को भी संजीवनी बूटी से ठीक कर देते थे यह सब राजी नहीं है बल्कि परम सत्य है और आज भी आप संजीवनी बूटी को लगा दीजिए एक बार लग जाने पर वह साल भर सूखे में पड़ी रहने के बाद भी पानी पार्टी है तो फिर से हरी भरी हो जाती है यही हाल गिलोय का है एक बार उसकी जड़ जम जाए तो फिर उस का नष्ट होना बड़ा कठिन होता है बरगद और पीपल के वृक्ष को आपने देखा होगा इस तरह संग पेड़-पौधों जड़ी बूटियों की खोज हमारे महान वैज्ञानिक ऋषि-मुनियों ने किया था और वह क्लोरोफिल अर्थात हरित लवक शरीर में ही भोजन बनाने के लिए ऊर्जा का विकास कर लेते थे इस जानकारी का उद्देश्य केवल और केवल उस सत्य की पहचान और खोज है जिस पर सारा ज्ञान विज्ञान काम कर रहा है* 


*महाभारत के काल में गांधारी के निर्जीव मास के लोड़े को 100  घड़ों  में रखकर परखनली शिशु के द्वारा बच्चों के विकास का पहला प्रामाणिक उदाहरण मिलता है भगवान गणेश के कटे सिर को अल्पकाल में ही हाथी के सिर द्वारा प्रत्यारोपित कर अंग प्रत्यारोपण का चमत्कारिक इतिहास मिलता है आज तक संपूर्ण विज्ञान और मेडिकल साइंस किसी का गला काट कर उसे जिंदा नहीं कर पाया है* 


*महा सती अनुसुइया द्वारा ब्रह्मा विष्णु और शिव को छोटा बच्चा बनाया जाना आप सब लोग जानते हैं जो परम सत्य है और गप्प नहीं है*

*इसी क्रम में मैं बताना चाहूंगा कि रत्न और अंगूठी का क्या महत्व है हमारे पूरे सौरमंडल को ऊष्मा ऊर्जा और अगली भगवान सूर्य से ही मिलती है शरीर और राशि विशेष के अनुसार रत्न सोना चांदी और तांबे में पहना जाता है और यह तीनों तत्व विद्युत के सबसे बड़े सुचालक हैं लेकिन रत्न एक ट्रांसफार्मर और स्टेबलाइजर का काम करते हैं जो खतरनाक अनावश्यक ऊर्जा को रोककर ऋण आत्मक ऊर्जा को बाहर कर धनात्मक ऊर्जा को सूर्य राशियों से सोचते रहते हैं* 


*अपवाद स्वरूप स्थितियों में ट्रीधातु और अष्टधातु की अंगूठी पहनी जाती है और जब लौह तत्व की अर्थात शनि का प्रकोप होता है तब लोहे की अंगूठी नाव की कील अथवा लोहे की नाल जो घोड़ा पहनता है उसे धारण किया जाता है जिसमें दीर्घकाल तक पानी में डूबे रहने से और सड़क पर चलते रहने से रगड़ से चमत्कारिक गुण पैदा हो जाते हैं चुंबक की तरह बाकी ज्योतिष विज्ञान और वास्तविकता पर हम लगातार आपको नई-नई प्रामाणिक विश्वस्तरीय वैज्ञानिक जानकारियां देते रहेंगे डॉ दिलीप कुमार सिंह ज्योतिष शिरोमणि मौसम विज्ञानी एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर मोबाइल नंबर 94 1562 3583*

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