[4/10, 7:22 AM] Dileep Singh Rajput Jounpur: [4/8, 22:14] Dr. Dileep Singh
: महा अष्टमी और महानवमी पूजा-पाठ और पारण 9 दिन की नवरात्रि में महा अष्टमी को बहुत विशिष्ट दिन माना जाता है बहुत से लोग अज्ञान के कारण रात में 12:00 बजते ही व्रत का पारण कर देते हैं जो गलत है व्रत का पारण सूर्योदय के बाद ही करना चाहिए
इस वर्ष बसंत एक नवरात्रि विक्रम संवत 2019 में चैत्र शुक्ल पक्ष आठवीं तिथि को तदनुसार 9 अप्रैल को जबकि महानवमी 10 अप्रैल को मनाई जाएगी चाहे महा अष्टमी का व्रत हो या महानवमी का बिना हवन के और कन्याओं के भोजन अथवा दान के नवरात्रि अधूरा ही माना जाता है
इस वर्ष पूरे 9 दिन का बसंती नवरात्रि हैं अष्टमी के दिन देवी महागौरी का पूजन करते हैं जो भगवती पार्वती का एक रूप है और कल्पना से परे गौर वर्ण और सुंदर हैं जबकि 9 दिन सिद्धिदात्री देवी का पूजन किया जाता है दोनों ही दिन कन्याओं का पूजन अवश्य करना चाहिए अगर नौकर ने ना मिले तो एक ही कन्या से संकल्प करके मां का ध्यान करते हुए उसे भोजन और दान देना चाहिए ध्यान रहे बच्चियां 2 वर्ष से 11 वर्ष के बीच की हो
इस वर्ष जबकि महा अष्टमी 9 अप्रैल शनिवार के दिन पड़ रही हैं महा अष्टमी को दुर्गा महाअष्टमी भी कहते हैं इस महा अष्टमी का प्रारंभ दो 8 अप्रैल को रात 11:58 से शुरू हो जाएगा और यह शुभ मुहूर्त 12:48 तक रहेगा इस शुभ मुहूर्त में कन्या पूजन किया जा सकता है जबकि नवमी की तिथि 10 अप्रैल की रात्रि 1:23 से शुरू होगी और 11 अप्रैल सुबह 3:15 पर समाप्त होगी
परम पवित्र महा नवमी के दिन रवि पुष्य योग रवि योग सर्वार्थ सिद्धि का योग पूरे दिन रहेगा अतः कन्या पूजन सुबह भी कर सकते हैं
विधि विधान महा अष्टमी व्रत का पूजन और पारण वैसे 10 अप्रैल को सूर्य उदय होने के बाद स्नान ध्यान करके कर सकते हैं लेकिन शुभ मुहूर्त शास्त्रों के अनुसार 11:58 से दोपहर 12:48 तक है
जबकि महानवमी की तिथि 10 अप्रैल को रात में 1:30 से शुरू होगी और यह 11 अप्रैल को 3:15 तक रहेगी सूर्योदय के बाद चाहे व्रत हैं या नहीं है उठकर स्नान करें पूजा करें पूजा के लिए साफ कपड़े पहने नया होना आवश्यक नहीं है और शुभ मुहूर्त में ही पूजा करने का हर संभव प्रयास करें अगर संभव हो तो संधिकाल में 108 दीपक जलाकर पूजा करें और हवन करें संभव है तो दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और तब हवन करें और कन्याओं को भोजन करा कर इसका समापन कर दें महा अष्टमी के दिन तुलसी के पौधे के पास 9 दीपक जलाकर उसकी परिक्रमा करने से घर में सुख शांति समृद्धि आती है और विवाह की मनोकामना पूरी होती है
*कन्या पूजन कैसे किया जाता है जिन कन्याओं को भोजन कराना हो उन्हें 1 दिन पहले सादर निमंत्रण है जब कन्या घर में प्रवेश करें तो फूलों की वर्षा से अथवा सच्चे हार्दिक प्रेम से उनका स्वागत करें और नव दुर्गा के प्रत्येक नाम का जयकारा लगाएं अर्थात शैलपुत्री ब्रह्मचारिणी चंद्रघंटा कूष्मांडा स्कंदमाता कात्यायनी कालरात्रि महागौरी और सिद्धिदात्री देवी का जयकारा लगाएं साफ सुथरी जगह प्रेम से बैठा कर उनके पैरों को पानी में अथवा दूध मिले पानी में डालकर हाथ से धोएं और साफ कपड़े से पोछें उनके माथे पर अक्षत फूल या कुमकुम लगाएं और देवी रूपी कन्याओं भगवती मां का ध्यान करके प्रेम से भोजन कराएं फिर अपने सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा और उपहार दें और उनके पैर छूकर आशीर्वाद ले किसी कारण से अगर नौ कन्या ना हो सके तो एक ही कन्या को संकल्प कर के नौ रूपों में आप भोजन उपहार दक्षिणा देकर अपने व्रत को सफल करें*
कन्या पूजन का संबंध माता वैष्णो देवी से जुड़ा हुआ है माता वैष्णो देवी के आशीर्वाद से ही संतान श्रीधर पंडित के घर कन्या का जन्म हुआ था
Dr. Dileep Singh: *इस प्रकार अब कोई संदेह नहीं रह गया कि 9 को महा अष्टमी का पूजन होगा और 10 तारीख को अर्थात 10 अप्रैल को इसका पारण होगा जबकि महानवमी 10 अप्रैल को मनाई जाएगी अर्थात पूजा पाठ हवन होगा और इसका पारण अगले दिन 11 अप्रैल को दशमी लगने के पूर्व होगा होगा क्योंकि इस वर्ष दसवीं की तिथि 11 अप्रैल 3:16 से शुरू हो रही है इसलिए सूर्योदय के बाद स्नान ध्यान करके 3:16 बजे के बाद दशमी का पारन कर लेना चाहिए डॉ दिलीप कुमार सिंह ज्योतिष शिरोमणि*
Jounpur: *राम के जनम भयो बहे पुरवैया*
*हर्षित अयोध्या नगरी हर्षित*
*कौशल्या मैया शीतल मंद सुगंध पवन बहै*
*कण कण परम प्रसन्न कहे ता ता थैया*
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