Thursday, 11 August 2022

भाई के माथे पर तिलक करने से मिलते हैं ये 12 चमत्कारी लाभ, जानिए क्या है इनका अर्थ*/रक्षा बंधन या रक्षा सूत्र:*

*💥भाई के माथे पर तिलक करने से मिलते हैं ये 12 चमत्कारी लाभ, जानिए क्या है इनका अर्थ*


*रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाई को मस्तक पर तिलक करती हैं। ज्योतिष के अनुसार तिलक करना बहुत शुभ माना जाता है।*

Raksha Bandhan 2022: रक्षाबंधन के त्योहार पर बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उनकी सलामती की कामना करती हैं। वहीं भाई भी अपनी बहनों को रक्षा का वचन देते हैं। रक्षाबंधन का पर्व हर साल श्रावणी पूर्णिमा पर बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। ज्योतिष के मुताबिक रक्षाबंधन के दिन भाई को राखी बांधने से पहले उसकी पूजा की जाती है। साथ ही तिलक लगाया जाता है। साथ ही कोई अन्य शुभ मौका आने पर हमारे यहां माथे पर तिलक लगाने की परंपरा बरसों से चली आ रही है। बचपन से ही राखी बांधने से पहले हम भाई को तिलक लगाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये तिलक लगाने के पीछे आखिर क्या राज है। आज हम आपको तिलक लगाने के 12 चमत्कारी लाभ बताने जा रहे हैं।

आमतौर पर चंदन, कुमकुम, मिट्टी, हल्दी, भस्म आदि का तिलक किया जाता है। लेकिन जो लोग तिलक लगा हुआ दिखाना नहीं चाहते हैं वे जल से माथे पर तिलक करके भी इसका फायदा पा सकते हैं।

माथे पर तिलक लगाने से व्यक्तित्व प्रभावशाली हो जाता है। साथ ही इसका मनोवैज्ञानिक असर भी होता है। इससे व्यक्ति के आत्मविश्वास और आत्मबल में वृद्धि होती है।
माना जाता है कि माथे पर रोज तिलक लगाने से मस्तिष्क में शांति बनी रहती है। व्यक्ति सुकून का अनुभव करता है। साथ ही इससे कई मानसिक बीमारियां भी ठीक हो सकती हैं।
माथे पर तिलक लगाने से सेराटोनिन और एंडोर्फिन का स्राव सही तरीके से होता है। साथ ही इससे सिर दर्द की समस्या और उदासी दूर करने में भी मदद मिलती है।
हल्दी युक्त तिलक लगाने से त्वचा शुद्ध होती है। हल्दी में एंटी बैक्टीरियल तत्व होते हैं जो रोगों से मुक्ति दिलाने में सहायक होते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार चंदन का तिलक लगाने से मनुष्य के सभी पापों का नाश होता है। साथ ही कई तरह के संकट से भी बच जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार तिलक लगाने से ग्रहों की शांति होती है।
चंदन का तिलक लगाने वाले का घर धन-धान्य से भरा रहता है। साथ ही सौभाग्य में भी वृद्धि होती है।
शास्त्रों में श्वेत चंदन, कुमकुम, भस्म, लाल चंदन आदि का तिलक लगाना शुभ माना गया है। वहीं रक्षाबंधन के दिन कुमकुम से तिलक किया जाता है। कुमकुम के तिलक के साथ चावल का भी प्रयोग किया जाता है।
तिलक विजय, पराक्रम, सम्मान, श्रेष्ठता और वर्चस्व का प्रतीक माना जाता है। तिलक मस्तक के बीच में लगाया जाता है। यह स्थान छठी इंद्री का होता है।
इसका वैज्ञानिक कारण माना जाता है कि अगर शुभ भाव से मस्तक के स्थान पर दबाव बनाया जाए तो स्मरण शक्ति, निर्णय लेने की शक्ति, बौद्धिकता, साहस और बल में वृद्धि होती है।
माथे पर दोनों भौहों के बीच में जहां तिलक किया जाता है वह अग्नि चक्र कहलाता है। यहीं से पूरे शरीर का शक्ति संचार होता है। साथ ही व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है।
इसका प्रतीकात्मक अर्थ यह माना जाता है कि बहन की समाज में रक्षा के लिए इन सभी गुणों की जरूरत होती है। अतः बहन के ही शुभ हाथों से यह कार्य संपन्न होना चाहिए। राखी के दिन भाई को कुमकुम से बहन के हाथों से तिलक का रिवाज है।


*रक्षा बंधन या रक्षा सूत्र:* 


भाई और बहन आपस में स्नेह की डोर से जुड़े रहें इस हेतु हमारे पूर्वजों ने इस त्योंहार को जन्म दिया। 


इसके सामाजिक निर्वहन को लेकर बहुत सारी कहानियाँ भी गढ़ी गयीं । जाने कब ये परम्परा में शामिल हो गया और आज उत्तर भारत में ये चहुँ और मनाया जाता है। 


मैं इन त्योंहारों के मूल उद्देश्य तक जाना चाहता हूँ। ताकि इनसे सामंजस्य बना सकूँ। फिर जितना ग़हरा उतरता हूँ उतना इनसे प्रेम करने लगता हूँ। जब देखता हूँ सामाजिक व्यवहार में समरसता और स्नेह बनाए रखने के लिए पूर्वजों ने कितना बारीकी से सोचा और त्योंहार बनाये। 


हृदय भाव विभोर हो जाता है। कुछ जटिलताएँ जीवन में जुड़ी हैं जिससे त्योंहार वैसे नहीं मना पाते जैसे मनाने चाहिये, फिर भी मन सरस तो हो ही जाता है। 


रक्षा सूत्र कहिये या रक्षा बंधन। भाई बहन कुछ छण फिर से अपना बचपन जी लेते हैं। 


प्रेम बनाए रहिये। रिश्ते निभाये रहिये। जीवन सरस बहुत है यूँ ही सजाए रहिये।


*रक्षा बंधन के शुभ दिवस पर आप सभी को हृदय से शुभकामनाएँ।* 

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प्रस्तुति संपादक के राजपूत

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