: *नोनी कैसे शक्तिशाली कैंसर रोधक है..??*
कैंसर एक सेलुलर खराबी है।
कैंसर से पीड़ित होने पर, मानव शरीर सामान्य सेलुलर नियंत्रण खो देता है, जिसके परिणामस्वरूप घातक कोशिका की अनियमित वृद्धि होती है।
इन कैंसर कोशिकाओं में भेदभाव की कमी होती है और वे स्थानीय ऊतकों को बुलाते हैं, कहीं और यात्रा करते हैं, और मेटास्टेसाइज करते हैं।
रोग स्वयं एक कोशिका से शुरू होता है जो उत्परिवर्तित या परिवर्तित होता है।
असामान्य कोशिका मानव शरीर की रक्षा प्रणाली के प्रयासों के बावजूद कोशिका की प्रजनन प्रक्रिया के माध्यम से उस उत्परिवर्तन को बनाए रखती है, जो असामान्य कोशिकाओं को खत्म करने की कोशिश करती है।
ये उत्परिवर्तित कोशिकाएं (असामान्य डीएनए के परिणामस्वरूप) तब शरीर के माध्यम से यात्रा करती हैं, शरीर के एक या अधिक अंगों में निवास स्थापित करती हैं।
अब एक सौ से अधिक प्रकार के कैंसर हैं जो मानव शरीर के भीतर मौजूद हो सकते हैं।
चूंकि कैंसर कई प्रकार के होते हैं, प्रत्येक का अपना असामान्य डीएनए और अलग अलग लक्षण और लक्षण होते हैं, इसलिए इस संक्षिप्त समीक्षा में उन सभी को कवर करना असंभव है।
सबसे आम लक्षण जो हम देखते हैं वह था ऊर्जा की हानि। कई अलग अलग प्रकार के कैंसर में त्वचा की मलिनकिरण, और गैर-उपचार घावों, त्वचा के नीचे पता लगाने योग्य गांठ, ऊंचा तापमान और वजन घटाने जैसी असामान्यताएं, जो अक्सर कई अन्य लक्षणों और लक्षणों से जुड़ी होती हैं।
अधिकांश प्रकार के कैंसर सूक्ष्म रूप से शुरू होते हैं और केवल नियमित चिकित्सा जांच और विशिष्ट परीक्षण होने पर ही इसका ठीक से निदान किया जा सकता है। जितनी जल्दी एक कैंसर का पता लगाया जाता है और उसका इलाज किया जाता है, उतना ही बेहतर परिणाम होता है।
कैंसर पर नोनी का प्रभाव सबसे अधिक संभावना इस तथ्य से संबंधित है कि नोनी और कैंसर दोनों सेलुलर स्तर पर काम करते हैं।
यह आगे माना जाता है कि नोनी सेलुलर संरचना को बढ़ाता है जबकि कैंसर निश्चित रूप से इसे नष्ट कर देता है।
नोनी के प्रमुख घटकों में से एक, प्रोक्सेरोनिन, गॉल्गी तंत्र और रेटिकुलोएन्डोथेलियम द्वारा शरीर के भीतर "बीमार" कोशिकाओं को भेजा जाता है।
ये रुग्ण कोशिकाएँ प्रोजीरोनाइन (Proxeronine) और एक एंजाइम प्रोजीरोनायिनेस (Proxeroninease) को आकर्षित करती हैं। ज़ेरोनिन, कोशिकाओं में एक सेलुलर शक्ति बढ़ाने वाला पदार्थ बनाता है।
मोरिंडा सिट्रिफोलिया की कैंसर से लड़ने की क्षमताओं को मान्य करने के लिए प्रयोगशालाओं में कई अन्य अध्ययन किए गए हैं।
ऐसे ही एक अध्ययन में, चार जापानी वैज्ञानिकों ने मोरिंडा सिट्रिफ़ोलिया में पाए जाने वाले डैमनाकैंथल नामक पदार्थ के साथ आरएएस कोशिकाओं (कोशिकाएं जो कई घातक वृद्धि के अग्रदूत हैं) को इंजेक्ट किया।
उन्होंने देखा कि इंजेक्शन ने आरएएस कोशिकाओं को पुनरुत्पादन से काफी हद तक रोक दिया।
प्रोजीरोनाइन और डैमनाकैंथाल, मोरिंडा सिट्रिफ़ोलिया के भीतर ऐसे पदार्थ हैं जिन्हें कैंसर रोधी एजेंट माना जाता है।
इसके अलावा, शोध से पता चला है कि नोनी शरीर के अन्य कैंसर से लड़ने वाले तत्वों जैसे नाइट्रिक ऑक्साइड, इंटरल्यूकिन्स, इंटरफेरॉन, ट्यूमर नेक्रोसिस फैक्टर, लिपोपॉलीसेकेराइड और प्राकृतिक हत्यारे कोशिकाओं के उत्पादन को प्रोत्साहित करने में मदद करता है।
कुछ लोगों का मानना है कि मोरिंडा सिट्रिफोलिया कैंसर के शुरूआती चरण के दौरान एक निवारक और सुरक्षात्मक कार्रवाई कर सकता है, जो कि कैंसर के गठन का पहला चरण है। रॉकफोर्ड में यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोइस कॉलेज ऑफ मेडिसिन में मियां-यिंग वांग, एमडी द्वारा किए गए एक अध्ययन से पता चला कि जिन चूहों को एक सप्ताह के लिए 10% नोनी का घोल दिया गया था और फिर डीएमबीए, एक ज्ञात कैंसर पैदा करने वाले एजेंट के साथ इंजेक्शन लगाया गया था, उनमें महत्वपूर्ण रूप से कमी थी। डीएमबीए इंजेक्शन वाले चूहों की तुलना में कम डीएनए एडक्ट मार्कर (असामान्य डीएनए के लिए एक परीक्षण) केवल पानी खिलाया जाता है।
डीएनए एडक्ट मार्करों की संख्या जितनी कम होगी, कैंसर से लड़ने के लिए उतनी ही अधिक सुरक्षा होगी।
नोनी दिये गए चूहों में नोनी के बिना पानी से भरे चूहों की तुलना में फेफड़ों में 50% कम डीएनए मार्कर थे, दिल में 60% कम मार्कर, यकृत में 70% कम और गुर्दे में 90% कम थे। इसलिए नोनी ने कैंसर से सबसे ज्यादा सुरक्षा किडनी (90 फीसदी) और सबसे कम सुरक्षा फेफड़ों (50 फीसदी) को दी।
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*पार्किंसन बीमारी को हल्के में न लें..!*
हाथ-पैर कंपकंपाते हैं?
तो आपको पार्किंसन रोग हो गया है।
पार्किंसन रोग में शरीर में कंपन होता है, हाथ-पैर कंपकंपाने लगते हैं।
पूरे विश्व में पार्किंसन रोगियों की संख्या 60 लाख से ज़्यादा है, अकेले अमेरिका में इस रोग से प्रभावित लोग लगभग दस लाख है। आमतौर पर यह बीमारी 50 वर्ष की उम्र के बाद होती है।
वृद्धावस्था में भी हाथ-पैर हिलने लगते हैं, लेकिन यह पता कर पाना कि यह पार्किंसन है या उम्र का असर, सामान्य व्यक्ति के लिए मुश्किल है।
पार्किंसन यदि है तो शरीर की सक्रियता कम हो जाती हैं, मस्तिष्क ठीक ढंग से काम नहीं करता है।
यह बीमारी होती इसीलिए है कि मस्तिष्क में बहुत गहरे केंद्रीय भाग में स्थित सेल्स डैमेज हो जाते हैं।
दिमाग़ के ख़ास हिस्से बैसल गैंग्लिया (Basal ganglia disease) में स्ट्रायटोनायग्रल नामक सेल्स होते हैं।
सब्सटेंशिया निग्रा (Substantia nigra) की न्यूरान कोशिकाओं की क्षति होने से उनकी संख्या कम होने लगती है।
आकार छोटा हो जाता है।
स्ट्राएटम तथा सब्सटेंशिया निग्रा नामक हिस्सों में स्थित इन न्यूरान कोशिकाओं द्वारा रिसने वाले रासायनिक पदार्थों (न्यूरोट्रांसमिटर) का आपसी संतुलन बिगड़ जाता है।
इस वजह से शरीर का भी संतुलन बिगड़ जाता है।
कुछ शोधों के आधार पर कहा जा सकता है कि यह बीमारी वंशानुगत भी हो सकती है।
इस रोग को ख़त्म करने वाली दवाइयां अभी उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन नेचुरोपैथी से इसकी रोकथाम संभव है।
*➡ पार्किंसन रोग के लक्षण :*
पार्किंसन रोग में पूरा शरीर ख़ासतौर से हाथ पैर तेज़ी से कंपकंपाने लगते हैं।
कभी कंपन ख़त्म हो जाता है, लेकिन जब भी रोगी व्यक्ति कुछ लिखने या कोई काम करने बैठेगा तो पुन: हाथ कांपने लगते हैं।
भोजन करने में भी दिक्कत होती है।
कभी-कभी रोगी के जबड़े, जीभ व आंखे भी कंपकंपाने लगती हैं।
इसमें शारीरिक संतुलन बिगड़ जाता है।
चलने फिरने में दिक्कत होने लगती है।
रोगी सीधा नहीं खड़ा हो पाता।
कप या गिलास हाथ में पकड़ नहीं पाता।
ठीक से बोल नहीं पाता।
हकलाने लगता है।
चेहरा भाव शून्य हो जाता है।
बैठे हैं तो उठने में दिक्कत होती है।
चलने में बाँहों की गतिशीलता नहीं दिखती, वे स्थिर बनी रहती हैं। जब यह रोग बढ़ता है तो नींद नहीं आती है, वज़न गिरने लगता है, सांस लेने में तकलीफ़, कब्ज़, रुक-रुक कर पेशाब होना, चक्कर आना, आंखों के आगे अंधेरा छा जाना व सहवास में कमी जैसी कई समस्याएं घेर लेती हैं।
साथ ही मांसपेशियों में तनाव व कड़ापन, हाथ-पैरों में जकड़न होने लगती है, ऐसी अवस्था में किसी योग्य चिकित्सा से परामर्श लेना ज़रूरी होता है।
*➡ पार्किंसन रोग के कारण :*
अधिक सोचने, नकारात्मक सोच व मानसिक तनाव इसका प्रमुख कारण है।
दिमाग़ में चोट, नींद की दवाइयों, नशीली दवाइयों व तनाव कम करने वाली दवाइयों का ज़्यादा प्रयोग, विटामिन-ई की कमी, ज़्यादा धूम्रपान, तंबाकू, शराब व फ़ास्ट फ़ूड का सेवन करने से भी पार्किंसन हो सकता है। प्रदूषण भी इसका एक कारण है।
मस्तिष्क तक जाने वाली रक्त वाहिनी नलियों का अवरुद्ध होना व मैंगनीज़ की विषाक्तता भी इसका एक कारण है।
*➡ पार्किंसन रोग के घरेलू उपचार :*
– 4-5 दिन नियमित पानी में नींबू का रस मिलाकर पियें। नारियल का पानी भी इसमें बहुत लाभकारी है।
– नियमित दस दिन तक बिना पका हुआ भोजन करें और फलों तथा सब्ज़ियों का जूस पियें तो कुछ ही दिन में यह बीमारी दूर भाग जाती है।
– पार्किंसन रोग में सोयाबीन को दूध में मिलाकर पिया जा सकता है। तिल के साथ दूध व बकरी के दूध के सेवन से इस रोग में काफ़ी आराम मिलता है।
– हरी पत्तेदार सब्ज़ियों का सलाद खाएं।
– विटामिन ई वाले खाद्य पदार्थों से ज़्यादा सेवन करें।
~ सबसे उत्तम और असरदार फ्लैक्ससीड का उपयोग है।
– प्रतिदिन कुछ हल्के व्यायाम ज़रूर करें।
– विचारों को सकारात्मक रखें और ख़ुश रहें।
– धूप का सेवन करें ताकि विटामिन डी मिल सके।
*➡ परहेज़ :*
पार्किंसन के रोगी को कॉफ़ी, चाय, नशीली चीज़ें, नमक, चीनी, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों से परहेज़ करना चाहिए। हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार कॉफ़ी पीने वालों में इस बीमारी के होने की आशंका 14% कम हो जाती है।
*पार्किन्सन का उपचार अभी तक एलोपैथी में शत प्रतिशत नहीं है लेकिन ये रोग है खतरनाक।*
इस रोग का निवारण प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति से सम्भव है।
कभी भी सम्पर्क कर सकते हैं...
: *ये नई तकनीक बतायेगी,*
*10 साल बाद आपको हो सकती है कौन सी दिल की बीमारी.?*
*●खास बातें●*
(1). खून के जरिए 10 साल बाद होने वाली दिल की बीमारी का पूर्वानुमान आसान।
(2). बी.एम.आई., धूम्रपान की आदतों, ब्लड प्रेशर के आधार पर होगी गणना।
(3). हार्ट अटैक के कारणों का पता लगाना भी होगा आसान।
वैज्ञानिकों ने एक ऐसा नया तरीका इजाद किया है जिससे किसी के खून के जरिए उस व्यक्ति को 10 साल बाद होने वाली दिल की बीमारी का पूर्वानुमान किया जा सकता है।
यह ऐसा तरीका है जो इस बीमारी का पूर्वानुमान जताने वाले पारम्परिक तरीकों से कहीं अधिक सटीक है।
*कराने होंगे ये 2 जांच...*
जब कोई अपने डॉक्टर के पास जाता है तब वह दिल की बीमारी के खतरे को जानने के लिए कॉलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के लिए अपने खून की जांच करा सकता है।
बी.एम.आई., ब्लड प्रेशर के आधार पर पूर्वानुमान संभव
नॉरवेगियन यूनीवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (एन.यू.एस.टी.) के अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक,
बॉडी मास इंडेक्स (बी.एम.आई.), धूम्रपान की आदतों और ब्लड प्रेशर के बारे में अतिरिक्त जानकारी के साथ इसका इस्तेमाल अगले 10 साल में दिल की बीमारी से जुड़े पूर्वानुमान को जानने के लिए किया जा सकता है।
अनुसंधानकर्ताओं ने बताया कि आज कई ऐसे पूर्वानुमान गणक मौजूद हैं जो इसके खतरों के बारे में बता सकते हैं।
हालांकि, खतरा पूर्वानुमान गणकों का इस्तेमाल प्रतिदिन के स्वास्थ्य देखभाल में अस्वीकार किया गया है क्योंकि वर्तमान में मौजूद गणक केवल घटना के मामूली अनुपात को ही बता सकते हैं।
शोधकर्ता ने बताया, ‘‘हमारा अध्ययन यह दिखाता है कि पांच अलग अलग सूक्ष्म आरएनए (राइबोन्यूक्लिक एसिड) के संयोजन को मापने और इस जानकारी को दिल की बीमारी से जुड़े पारम्परिक खतरों में जोड़ने से हम उन बातों का भी पता लगा सकते हैं जिससे हार्ट अटैक के बारे में पहले से सटीक पूर्वानुमान की पहचान की जा सकती है।’’
*यह अनुसंधान ‘मॉलीक्यूलर एंड सेलुलर कार्डियोलॉजी’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ था।*
*अत्यधिक प्रचारित हेयर ऑयल से सावधान रहें...*
भारतीय बाजार में बालों के तेल में पाए जाने वाले सामान्य रसायन हैं - खनिज तेल (जिसे कैंसर का कारण माना जाता है)
डीईए (डायथेनॉलमाइन), एमईए (मोमोएथेनॉलमाइन) और टीईए (ट्राइथेनॉलमाइन) (जो हार्मोनल संतुलन को बाधित करते हैं)
Parabens - Methylparabne, propyl paraben आदि (जो न केवल उम्र बढ़ने में तेजी लाते हैं बल्कि स्तन कैंसर से भी जुड़े होते हैं)
*परफ्यूम/इत्र/सुगंध-*
एक अत्यधिक उपयोग किया जाने वाला शब्द जिसका अर्थ है "अनगिनत रसायनों का एक कॉम्बो जो आपको सामग्री की सूची में उल्लेख नहीं मिलेगा" से अधिक कुछ नहीं है।
आप कितने भी आलसी हों, एक बात पक्की है- आप (+ आपके बाल) बेहतर हैं! :)
कच्चे प्राकृतिक अवयवों का उपयोग करके अपने हाथों से घर पर कुछ बनाया > सौंदर्य पैकेजिंग में बाजार क्या प्रदान करता है।!
यदि आप अभी भी सोचते हैं, DIY काम नहीं करते हैं, तो मेरे बालों पर एक नज़र डालें। 5+ साल हो गए हैं जब मैंने "यू आर वर्थ इट" या "अपने बालो को कही जग जग जियो" के नाम पर बाजारों में फेंके गए कचरे को छोड़ दिया।
झाड़ी के बारे में बात किए बिना, यदि आप सोच रहे हैं कि मुलायम रेशमी और स्वस्थ बाल कैसे प्राप्त करें, तो एंटी-डैंड्रफ सीरम प्रश्न का उत्तर हो सकता है।!
तो सावधान रहिये..
: *प्रसव नारी का आभूषण*
*लेकिन सुंदर रहना भी उतना ही जरूरी और ये भी ध्यान रखें कि कहीं आपकी कमर कमरा न बन जाये.!*
*प्रसव के बाद के व्यायाम संबंधी दिशा-निर्देश*
प्रसव के बाद के व्यायाम प्रसव पूर्व व्यायाम जितना ही महत्वपूर्ण है।
●इसकी अवधि लंबी नहीं होनी चाहिए, लेकिन यह दिन में दो अथवा तीन बार किया जाना चाहिए।
●क्रियाओं के प्रत्येक सेट को प्रत्येक सत्र में दस बार दोहराएं।
●अपने सांस को सहज रखें, अपनी क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे काम करें।
●फिजियोथेरेपिस्ट आपकी शारीरिक स्थिति के अनुसार व्यायाम में बदलाव कर सकता है।
*●टिप्पणी:●*
●इसमें प्रसव के बाद के व्यायाम के बारे में केवल एक संक्षिप्त परिचय दिया गया है।
●आपको फिजियोथेरपी डिपार्टमेंट द्वारा आयोजित की जाने वाली प्रसव के बाद के व्यायाम कक्षाओं में शामिल होने की सलाह दी जाती है।
*प्रसव के बाद के व्यायाम का उद्देश्य*
●पेशाब के असंयम की रोकथाम के लिए पेडू की सतह (पेल्विक फ्लोर) की मांसपेशियों को मज़बूत करना।
●पीठ के निचले हिस्से में दर्द होने से रोकना।
●शरीर के आकार को तेज़ी से पहली वाली अवस्था में लाना।
*रक्त के संचार को उत्प्रेरित करना और भूख बढ़ाना*
●उत्साह और आत्म-विश्वास को बनाए रखना, जिससे कि आपको अच्छा महसूस हो।
*मुझे प्रसव के पश्चात् प्रसव के बाद के व्यायाम कब शुरू करना चाहिए?*
●सामान्य प्रसव के दो दिन बाद, आप बिस्तर से उठ सकती हैं और आसपास चल-फिर सकती हैं तथा प्रसव के बाद के व्यायाम कर सकती हैं।
● यदि आपका प्रसव सीजेरियन सेक्शन द्वारा हुआ है, तो आपको फिजियोथेरपिस्ट अथवा डॉक्टर की सलाह के बिना चलना-फिरना नहीं चाहिए अथवा प्रसव के बाद के व्यायाम नहीं करना चाहिए।
*प्रसव के बाद के व्यायाम के प्रकार*
*पेल्विक फ्लोर व्यायाम*
●अपनी पीठ के बल लेट जाएं।
●अपने घुटनों को मोड़ें
●अपने घुटनों को लगभग 1 फिट की दूरी पर रखते हुए अपने पैरों को एक साथ रखें।
●जैसे आप पेशाब अथवा मल को रोकने का प्रयास करते हैं, उसी प्रकार योनि, मूत्रमार्ग और गुदा की मांसपेशियों को कसें।
●आप इस व्यायाम को बैठकर अथवा खड़े-खड़े भी कर सकते हैं।
: *प्रसव नारी का आभूषण*
*लेकिन सुंदर रहना भी उतना ही जरूरी और ये भी ध्यान रखें कि कहीं आपकी कमर कमरा न बन जाये.!*
*प्रसव के बाद के व्यायाम संबंधी दिशा-निर्देश*
प्रसव के बाद के व्यायाम प्रसव पूर्व व्यायाम जितना ही महत्वपूर्ण है।
●इसकी अवधि लंबी नहीं होनी चाहिए, लेकिन यह दिन में दो अथवा तीन बार किया जाना चाहिए।
●क्रियाओं के प्रत्येक सेट को प्रत्येक सत्र में दस बार दोहराएं।
●अपने सांस को सहज रखें, अपनी क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे काम करें।
●फिजियोथेरेपिस्ट आपकी शारीरिक स्थिति के अनुसार व्यायाम में बदलाव कर सकता है।
*●टिप्पणी:●*
●इसमें प्रसव के बाद के व्यायाम के बारे में केवल एक संक्षिप्त परिचय दिया गया है।
●आपको फिजियोथेरपी डिपार्टमेंट द्वारा आयोजित की जाने वाली प्रसव के बाद के व्यायाम कक्षाओं में शामिल होने की सलाह दी जाती है।
*प्रसव के बाद के व्यायाम का उद्देश्य*
●पेशाब के असंयम की रोकथाम के लिए पेडू की सतह (पेल्विक फ्लोर) की मांसपेशियों को मज़बूत करना।
●पीठ के निचले हिस्से में दर्द होने से रोकना।
●शरीर के आकार को तेज़ी से पहली वाली अवस्था में लाना।
*रक्त के संचार को उत्प्रेरित करना और भूख बढ़ाना*
●उत्साह और आत्म-विश्वास को बनाए रखना, जिससे कि आपको अच्छा महसूस हो।
*मुझे प्रसव के पश्चात् प्रसव के बाद के व्यायाम कब शुरू करना चाहिए?*
●सामान्य प्रसव के दो दिन बाद, आप बिस्तर से उठ सकती हैं और आसपास चल-फिर सकती हैं तथा प्रसव के बाद के व्यायाम कर सकती हैं।
● यदि आपका प्रसव सीजेरियन सेक्शन द्वारा हुआ है, तो आपको फिजियोथेरपिस्ट अथवा डॉक्टर की सलाह के बिना चलना-फिरना नहीं चाहिए अथवा प्रसव के बाद के व्यायाम नहीं करना चाहिए।
*प्रसव के बाद के व्यायाम के प्रकार*
*पेल्विक फ्लोर व्यायाम*
●अपनी पीठ के बल लेट जाएं।
●अपने घुटनों को मोड़ें
●अपने घुटनों को लगभग 1 फिट की दूरी पर रखते हुए अपने पैरों को एक साथ रखें।
●जैसे आप पेशाब अथवा मल को रोकने का प्रयास करते हैं, उसी प्रकार योनि, मूत्रमार्ग और गुदा की मांसपेशियों को कसें।
●आप इस व्यायाम को बैठकर अथवा खड़े-खड़े भी कर सकते हैं।
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