इन दो पाप की सजा मनुष्य को यमराज नहीं स्वयं भोलेनाथ और नारायण देते हैं।
एक समय कि बात एक बार नारद जी पृथ्वी पर घुमते-फिरते देखा कि एक मनुष्य बहुत ही तड़प रहा है, अपने प्राण की भीख माँग रहा है फिर भी उनको मौत नहीं आ रही है। नारद जी को बहुत दुख हुआ कि भगवन किसी को इतनी कठोर सजा क्यो देते हैं। और नारद जी कैलाश धाम गये जहाँ भोलेनाथ और माता पार्वती बैठे थे। नारद जी ने भोलेनाथ और माता को प्रणाम किया तो माता बोलीं कहो नारद कैसे आना हुआ, तो नारद जी बोले माता हम पृथ्वी लोक में भ्रमण कर रहे थे तो देखा एक आदमी प्राण त्यागने के लिए भीख माँग रहा है फिर भी उसे मौत नहीं आ रही है, ऐसा क्यों? तो माता बोलीं ये तो स्वामी ही बतायेंगे। तब नारद जी ने भोलेनाथ से पुछा तो भोलेनाथ बोले नारद सुनो जो लोग चाहे वो नारी हो या पुरुष जो भी गर्भवती महिला को अपशब्द कहता है और किसी भोले मनुष्य को जिसे कुछ नहीं आता है उसे कुछ कहता है, तो सुनो नारद हम और नारायण उसे उसी जन्म में उसके उस कर्म की सजा यमराज नहीं हम और नारायण देते हैं। गर्भवती महिला को अपशब्द कहना यानी साक्षात महादेवी दुर्गा को अपशब्द कहना। इसलिए कभी कोई गर्भवती महिला को किसी प्रकार का अपशब्द नहीं कहना चाहिए ना ही किसी भोले मनुष्य को अपशब्द कहना चाहिए और नारद जो मनुष्य किसी भक्त को जो हमारे शिवालय मे जल चढा कर आ रहा हो उसे भी अगर कोई अपशब्द कहता है तो अपशब्द कहने वाले व्यक्ति की जिन्दगी नरक हो जाती हैं। किसी शिव भक्त या नारायण के भक्त का जो अपमान करता है उसे धन तो मिलता है लेकिन उसे कभी चैन शांति नहीं मिलती है और अंत समय बहुत ही बुरी गति से मरता है। इसलिए जानबूझकर किसी के साथ गलत नहीं करना चाहिए। अनजाने में किये हुए पाप को माफ किया जा सकता है लेकिन जानबूझकर किये हुए पाप का फल तो भोगना ही पड़ता है चाहे वो लाखो व्रत नियम उपाय कर ले पर कर्म का फल तो भोगना ही पड़ता है। इसलिए हमेशा अच्छे कर्म करना चाहिए। इतना सुनकर नारद जी को समझ में आ गया कि भगवान किसी को सजा नहीं देते बल्कि उसे उसके कर्म सजा देते है और नारद जी नारायण नारायण करते करते चले गये।
No comments:
Post a Comment