*Arogya*🍃
*माइग्रेन की समस्या में बादाम के सेवन से फायदा*
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माइग्रेन या आधा सिरदर्द आजकल की अव्यवस्थित जिंदगी की देन है। जिसमें हम अपने खानपान पर नियमित ध्यान नहीं दे पाते हैं। सबसे बड़ा कारण है भागदौड़ की जिंदगी। जो तनाव से तो भरपूर है पर उससे मुक्त होने के लिए हम कोई उपाय नहीं करते। बस यही सारी वजहें धीरे-धीरे माइग्रेन के रुप में बदलने लगती हैं। जैसे ही आप सामान्य स्थिति से एकदम तनाव भरे माहौल में पहुंचते हैं तो सबसे पहले आपका सिर दर्द बढ़ता है।माइग्रेनको आम बोलचाल की भाषा में अधकपारी भी कहते हैं।
*कारण और लक्षण*
यह रोग व्यक्ति को दूसरे रोगों के फलस्वरूप हो जाता है जैसे- नजला, जुकाम, शरीर के अन्य अंग रोग ग्रस्त होना, पुरानी कब्ज इत्यादि| इसके आलावा स्त्रियों में यह रोग मासिकधर्ममें गड़बड़ी के कारण हो सकता है| इसके अलावा आंखों में दृष्टिदोष की वजह से भी आधे सिर में दर्द हो सकता है। माइग्रेन मूल रूप से तो न्यूरोलॉजिकल समस्या है। इसमें रह-रह कर सिर में एक तरफ बहुत ही चुभन भरा दर्द होता है। ये कुछ घंटों से लेकर तीन दिन तक बना रहता है। इसमें सिरदर्द के साथ-साथ गैस्टिक,जी मिचलाने, उल्टी जैसी समस्याएं भी हो सकतीहैं।। पर्याप्त नींद न लेना, भूखे पेट रहना और पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना जैसे कुछ छोटे-छोटे कारणों से भी माइग्रेन की शिकायत हो सकती है। एलर्जी के कारण भी माइग्रेन हो सकता है और अलग-अलग लोगों में एलर्जी के अलग-अलग कारण हो सकते हैं। कुछ लोगों के लिए खाने-पीने की चीजें भी एलर्जी का कारण बन जाती हैं।
*माइग्रेन मे लाभदायक है बादाम*
माइग्रेन के रोगियों के लिए बादाम बहुत फायदेमंद होती है। रोजाना 10-12 नग बादाम का सेवन लाभकारी माना जाता है। बादाम दिमाग से संबंधित रोगों को जड़ से खत्म करता है।
बादाम प्रोटीन, मैग्निशियम, पोटैशियम, जिंक, आयरन और फाइबर का भी अच्छा सोर्स है। मैग्नीशियम प्रभावी ढंग से विभिन्न माइग्रेन सक्रियताओं का मुकाबला कर सकता है क्योंकि यह रक्त शर्करा और रक्तचाप के स्तर को नियंत्रित करता है। अपने आहार में 500 मिलीग्राम मैग्नीशियम की खुराक माइग्रेन के दौरों का प्रभावी ढंग से इलाज करने में मदद कर सकती है।
20 ग्राम कच्चे बादाम में हाई क्वालिटी वाला प्रोटीन होता है, जोकि आवश्यक अमीनो एसिड्स में से तीसरा जरूरी एमीनो एसिड है। बादाम तेल से सिर की
मालिश करने पर भी आराम मिलता है। जिन लोगो को बादाम खाने का समय ना हो वो रात को सोते समय अपने दोनों नाको में 5-5 बूंदे बादाम रोगन की डाल कर सोये। इस से आपको कुछ दिनों में ही इस भयानक बीमारी से आराम मिलेगा।
*वे लोग जिनके ब्लड मे पित्त अधिक हो उन्हें बादाम नहीं खाना चाहिए।*
माइग्रेन की अचूक दवा है योग और ध्यान। अगर योग नहीं कर सकते हैं तो व्यायाम करें। इससेआपका तनाव कम होगा। और तनाव कम होने से आपका डिप्रेशन दूर होगा।
मुनक्का यानी बड़ी दाख
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मुनक्का यानी बड़ी दाख (द्राक्ष) को आयुर्वेद में एक औषधि माना गया है। आयुर्वेद में मुनक्का को गले संबंधी रोगों की सर्वश्रेष्ठ औषधि माना गया है।
जिन व्यक्तियों के गले में निरंतर खराश रहती है या नजला एलर्जी के कारण गले में तकलीफ बनी रहती है, उन्हें सुबह-शाम दोनों वक्त चार-पांच मुनक्का बीजों को खूब चबाकर खा ला लें, लेकिन ऊपर से पानी ना पिएं। दस दिनों तक निरंतर ऐसा करें।
जो बच्चे रात्रि में बिस्तर गीला करते हों, उन्हें दो मुनक्का बीज निकालकर रात को एक सप्ताह तक खिलाएं।
Munakka for cough cold in hindi
सात मुनक्का रात्रि में सोने से पूर्व बीज निकालकर दूध में उबालकर लें। एक खुराक से ही राहत मिलेगी। यदि सर्दी-जुकाम पुराना हो गया हो तो सप्ताह भर तक लें।
आंखों की ज्योति बढाने, नाखूनों की बीमारी होने पर, सफेद दाग, महिलाओं में गर्भाशय की समस्या में मुनक्का को दूध में उबालकर थोड़ा घी व मिश्री मिलाकर पीने से लाभ होता है।
जितना पच सके उतने मुनक्का रोज खाने से सातों धातुओं का पोषण होता है।
12 मुनक्का, 5 छुहारे, 6 फूलमखाने दूध में मिलाकर खीर बनाकर सेवन करने से शरीर पुष्ट होता है।
रात में लगभग 10 या 12 मुनक्का को धोकर पानी में भिगो दें। इसके बाद सुबह उठकर मुनक्का के बीजों को निकालकर इन मुनक्का को अच्छी तरह से चबाकर खाने से शरीर में खून बढ़ता है।
शाम को सोते समय लगभग 10 या 12 मुनक्का को धोकर पानी में भिगो दें। इसके बाद सुबह उठकर मुनक्का के बीजों को निकालकर इन मुनक्कों को अच्छी तरह से चबाकर खाने से शरीर में खून बढ़ता है।
250 ग्राम दूध में 10 मुनक्का उबालें फिर दूध में एक चम्मच घी व खांड मिलाकर सुबह पीएं। इससे वीर्य के विकार दूर होते हैं।
दस मुनक्का एक अंजीर के साथ सुबह पानी में भिगोकर रख दें। रात में सोने से पहले मुनक्का और अंजीर को दूध के साथ उबालकर इसका सेवन करें। ऐसा तीन दिन करें। कितना भी पुराना बुखार हो, ठीक हो जाएगा।
प्रतिदिन सोने से एक घंटा पहले दूध में उबाली गई 11 मुनक्का खूब चबा-चबाकर खाएं और दूध को भी पी लें। इस प्रयोग से कब्ज की समस्या में तत्काल फायदा होता है।
*घर में शुद्ध शहद की कैसे करें पहचान, जानिए शहद के बेहतरीन लाभ*
शहद के फायदों के साथ उसे पहचानने का तरीका भी जानें...
शहद का उचित मात्रा में उपयोग करने से शरीर स्वस्थ, सुंदर व स्फूर्तिवान बनता है।
शहद को घाव पर लगाने से घाव जल्दी भर जाते हैं।
शहद का पीएच मान 3 से 4.8 के बीच होने से जीवाणुरोधी गुण स्वतः ही पाया जाता है।
प्रातःकाल शौच से पूर्व शहद-नींबू पानी का सेवन करने से कब्ज दूर होता है, रक्त शुद्ध होता है और मोटापा कम होता है।
गर्भावस्था के दौरान स्त्रियों द्वारा शहद का सेवन करने से पैदा होने वाली संतान स्वस्थ एवं मानसिक दृष्टि से अन्य शिशुओं से श्रेष्ठ होती है।
त्वचा पर निखार लाने के लिए गुलाब जल, नींबू और शहद मिलाकर लगाना चाहिए।
गाजर के रस में शहद मिलाकर लेने से नेत्र-ज्योति में सुधार होता है।
उच्च रक्तचाप में लहसुन और शहद लेने से रक्तचाप सामान्य होता है।
त्वचा के जलने, कटने या छिलने पर भी शहद लगाने से लाभ मिलता है।
शुद्ध शहद की पहचान- कांच के एक साफ ग्लास में पानी भरकर उसमें शहद की एक बूंद टपकाएं, अगर शहद नीचे तली में बैठ जाए तो यह शुद्ध है और यदि तली में पहुंचने के पहले ही घुल जाए तो शहद अशुद्ध है। शुद्ध शहद में मक्खी गिरकर फंसती नहीं बल्कि फड़फड़ाकर उड़ जाती है।
शुद्ध शहद आंखों में लगाने पर थोड़ी जलन होगी, परंतु चिपचिपाहट नहीं होगी।
शुद्ध शहद कुत्ता सूंघकर छोड़ देगा, जबकि अशुद्ध को चाटने लगता है।
शुद्ध शहद का दाग कपड़ों पर नहीं लगता।
शुद्ध शहद दिखने में पारदर्शी होता है।
शीशे की प्लेट पर शहद टपकाने पर यदि उसकी आकृति सांप की कुंडली जैसी बन जाए तो शहद शुद्ध है।
नोट : गर्म करके अथवा गुड़, घी, शकर, मिश्री, तेल, मांस-मछली आदि के साथ शहद का सेवन नहीं करना चाहिए
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अस्थमा नाशक कल्पयोग :------
सांस की नलियों में जलन, सिकुड़न या सूजन की स्थिति और उनमें ज़्यादा बलगम बनना, जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है।
अस्थमा साधारण हो सकता है या इसके होने पर, दैनिक कार्यों में समस्या आ सकती है। कुछ मामलों में, इसके कारण से, जानलेवा दौरा भी पड़ सकता है।
अस्थमा की शुरुआत कैसे होती है?
अस्थमा तब होता है , जब वायुपथ फेफड़ों तक बढ़ जाता है और आसपास की मांसपेशियों को, कसने लगता है। इससे बलगम बनता है , जिससे वायुमार्ग अवरुद्ध हो जाता है । जो आगे फेफड़ों में , ऑक्सीजन की आपूर्ति को रोकता है। इसके फलस्वरूप दमा दौरा से खांसी आदि होती है।
अस्थमा एक ऐसा रोग है, जो आम तौर पर एलर्जी से जुड़ी हुई है। अस्थमा के महत्वपूर्ण कारकों में , वातावरण में धूल, धुआँ, जैसे कण हमारे सांस लेने के साथ ही , हमारी श्वास नली में पहुंच जाते हैं और व्यक्ति को , सांस लेने में समस्या होने लगती है। यही स्थिति आगे चलकर, धीरे-धीरे अस्थमा का रूप ले लेती है।
अस्थमा नाशक कल्पयोग के घटक द्रव्य -------
त्रिफला 50 ग्राम, अजवाइन भुनी 50 ग्राम,
सौंठ भुनी 50 ग्राम, गिलोय 50 ग्राम, हल्दी 50 ग्राम, चिरायता 50 ग्राम, अडूसा 20 ग्राम, लौंग का चूर्ण 20 ग्राम, हरड़ काली 20 ग्राम, अपामार्ग 20 ग्राम, बेरी की छाल 20 ग्राम, नौसादर 20 ग्राम, नागर मोथा 20 ग्राम, तेजपात 10 ग्राम, पीपल 10 ग्राम, बबूल के गोंद 10 ग्राम, काली मिर्च 10 ग्राम, भुनी हुई हींग 10 ग्राम, काला नमक 10 ग्राम, पीपर 5 ग्राम, काकड़ासिंगी 5 ग्राम, पुष्करमूल 5 ग्राम, गंधक का चूर्ण 5 ग्राम, कुलिंजन 5 ग्राम, गुग्गल 5 ग्राम, हारसिंगार 5 ग्राम, जावित्री 5 ग्राम, 300 ग्राम मदार के फूल । इन सभी का महीन चूर्ण बनाकर, एलोवेरा रस 500 ग्राम ताजा लेकर, उसकी एक भावना दे और धुप में सुखा लें।
मात्रा और अनुपान -------
दिन में, 3 बार 1 -1 चमच्च, 50 ग्राम गाय का मूत्र और 100 ग्राम पानी से ले।, जिद्दी अस्थमा भी नष्ट होता है । यह 90 दिन का कोर्स है।
या
एक चम्मच चुर्ण, 2 स्वास दमन वटी के साथ दिन में 3 बार ताजे पानी से सेवन करे।
परहेज ----
खट्टी व तली औऱ दूध की बनी वस्तु का सेवन न करे।
घरेलू उपचार
दंत मंजन :--------
* आम के हरे पत्ते सुखाकर व जलाकर पीस लें। राख के बराबर मात्रा में , आम की गुठली का महीन चूर्ण को मिलाकर, नित्य मंजन करने से, दांत स्वच्छ होकर चमकने लगते है ।
* नींबू का एक छोटे टुकडे़ से, रोजाना दांत पर मलने से , दांत मोती की तरह चमकने लगते है ।
* जामुन के पत्तों दो किलो लेकर सुखा कर, जला लें और महीन पीस लें।इससे मञ्जन करने से, मसूढे़ और दांत मजबूत और निरोग होते है । जामुन भी सेवन करना चाहिए ।
* मसूर की राख से मंजन करना अत्यंत लाभदायक है । इस राख में , अन्य गुणकारी ( जैसे , बबूल, नीम, लौंग आदि ) औषध के महीन चूर्ण मिलाकर और प्रभावशाली बना सकते है ।
* बहुत महीन सेंधा नमक, नींबू का रस, थोड़ी सी लाल फिटकरी का महीन चूर्ण को , सरसों के तैल में मिलाकर, रोजाना मंजन करने से, दांतों व मसूढो़ के रोग ( जैसे दांतों के कीडे़, दांत दर्द, मसूढो़ का फूलना ) में , आराम मिलता है और दांत स्वच्छ व मजबूत हो जाते है तथा पाचन - संस्थान भी सही रहता है ।
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आयुर्वेद में मधुमेह : -------
चरक संहिता में मधुमेह का कारण -------
" ओज: पुनर्मधुर स्वभावं तद् रौक्ष्याद् वायु: कषायत्वेनाभि संसृज्य मूत्राशवाऽभिवहन मधुमेहं
करोति। "
मधुमेह कफ मेद आदि के द्वारा, आवरण वात प्रकोपक व्याधि है। अत: जो व्यक्ति मधुर रस, भारी और तले तथा अधिक चिकनाई वाले आहार, नये अन्न का सेवन (नया अन्न कफकारक होता है) करता है।
दिन में सोना, रात में जागना, श्रम नहीं करना, मलमूत्र के वेगों को रोकना आदि। जिसकी आदत बन चुके हैं, उसके कफ, पित्त, मेद और मांस बढ़ जाते हैं और पाचनशक्ति कमजोर पड़ जाती है। जिसके चलते खाया भोजन, न तो ठीक तरह से पच पाता है और न ही , उससे रसादि धातुओं का निर्माण हो पाता है।
मधुमेह के संबंध में आयुर्वेद में एक विशेष बात यह भी देखने में आती है कि, इसमें मधुमेह के दो प्रकार के रोगी मानकर, चिकित्सा कही गई है। लेकिन आधुनिक चिकित्सा में, ऐसे रोगियों में कोई भेद नहीं किया गया है। आयुर्वेदानुसार भेद --------
1. स्थूल मधुमेही (मोटापायुक्त रोगी)
2. कृश मधुमेही (दुबला-पतला रोगी)
स्थूल रोगी के रोग का कारण, चिकनाई युक्त आहार का अधिकता से, सेवन करना बताया गया है।
कृश रोगी के, रोग का कारण धातुक्षय बताया गया है। आयुर्वेदाचार्यों का मानना है कि, अगर स्थूल रोगी सुपाच्य तथा हल्का आहार लें और कृशकाय रोगी वातनाशक, ओजवर्धक, बलवर्धक आहार का सेवन करते रहें, तब मधुमेह के दुष्प्रभावों से बचे रह सकते हैं।
क्रमशः . . . . . .
घरेलू उपचार
------: रस :------
रस फल या सब्जी के ऊतकों में निहित, एक प्राकृतिक तरल है। रस को , ताजे फल या सब्जियों से उष्मा या विलायक का प्रयोग किए बिना, या तो याँत्रिक विधि से निचोड़ कर या फिर सिझा कर निकाला जाता है। उदाहरण के लिए, संतरे का रस, संतरे के फल को दबा कर या निचोड़ कर निकाला जाता है।
विशेषज्ञ के अनुसार, जूस पीने का सबसे अच्छा समय, सुबह का माना जाता है। दरअसल, जब आप आठ घंटे बाद सोकर उठते हैं, तो उस समय कुछ खाने की इच्छा नहीं होती है। लेकिन फिर भी , आपकी शरीर को , ईंधन की आवश्यकता होती है। ऐसे में, जूस पीना एक अच्छा विचार है। क्योंकि, इससे आपके शरीर को कई तरह के, पोषक तत्व मिल जाते हैं।
* जामुनों को, 2 घंटे पानी में पडी़ रहने के बाद, गठलियां निकाल कर रस निकालें।
* गाजर और पालक के रस में , जीरा भूना और काला नमक मिलाकर, सेवन करने से , उसकी गुणवत्ता बढ़ जाती है ।
गाजर का रस, सभी प्रकार के ज्वर, कमजोरी, नाडी़ सबंधी रोग, और निराशा की अवस्था में लाभ देता है ।
सर्दी के मौसम में , गाजर के सेवन से शरीर गर्म रहता है और सर्दी से बचाव होता है । विभिन्न रोगो से ग्रस्त व्यक्तियों को गाजर का रस लेने से, स्वास्थ्य में , शीघ्र सुधार होता है ।
* लौकी के रस का नित्य सेवन करने से, ह्रदय की धमनियों में आयी रूकावट दूर होती है । घबराहट दूर होती है और दिल के दर्द में लाभ होता है । कोलेस्ट्रल और ट्रग्लिजराइड्स अपनी सामान्य अवस्था में आ जाते है । ह्रदय की रूकावट ( Blockage ) नष्ट होते है । ह्रदय को शक्ति मिलती है और उसके कार्य करने की क्षमता में विकास होता है । रस का निरंतर सेवन करें , लाभ होगा।
लौकी के रस से अम्लपित्त, आंतों के घाव, यकृत, प्लीहा, पेट का भारीपन, आमाशय, पक्वाशय, रक्त की कमी, मासिक धर्म में अधिक रक्त का आना, भूख न लगना, गैस आदि रोगों में भी लाभ होता है । कभी-कभी व्यक्तियों को लौकी का रस सेवन से, दस्तों की शिकायत हो जाती है तो शुरूआत कम मात्रा से करें और धीरे - धीरे मात्रा को बढा़वें।
* करेले के रस का एक गिलास (200 ml) की मात्रा में , दिन में तीन बार सेवन करें । इसका ताजे रस का ही सेवन लाभदायक होता है ।
करेले का सेवन कम मात्रा में करना चाहिए । अधिक मात्रा में सेवन करने से , प्यास अधिक लगती है और गले व सीने में जलन होती है । शुरूआत में, रस का सेवन कम मात्रा से करें , मात्रा को, धीरे - धीरे बढा़वें ।
क्रमशः . . . . . . .
*तुरंत एनर्जी चाहिए तो जरूर खाएं यह चीजें...*
* रोजाना 10-12 गिलास पानी पीना चाहिए, साथ ही नाश्ते के रूप में ऐसे पदार्थ लें, जिसमें प्रत्येक से 200 कैलोरी प्राप्त हो। नाश्ते में खड़ा अनाज उगाकर लें, चोकर से बना केक खाएं, चोकर में मेग्निशियम पर्याप्त होता है।
* आलू के दो पराठे के साथ लगभग 50 ग्राम दही का सेवन करें, यह ऊर्जा का अच्छा स्रोत है।
* ड्रायफ्रूट्स से बेहतर तो कुछ हो ही नहीं सकता। सस्ता मेवा खाना है तो एक मुट्ठी मूंगफली के दाने सेंककर, 10 ग्राम गु़ड़ के साथ चबा-चबाकर नाश्ते के तौर पर सेवन करें, यह ऊर्जा का पर्याप्त भण्डार हैं।
@#कपूर से आश्चर्यजनक उपाय#@
शास्त्रों के अनुसार देवी-देवताओं के समक्ष कर्पूर जलाने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है। अत: प्रतिदिन सुबह और शाम घर में संध्यावंदन के समय कर्पूर (कपूर) जरूर जलाएं।
#पितृदोष और कालसर्पदोष से मुक्ति हेतु: कपूर जलाने से देवदोष व पितृदोष का शमन होता है। अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि हमें शायद पितृदोष है या काल सर्पदोष है। दरअसल, यह राहु और केतु का प्रभाव मात्र है। इसको दूर करने के लिय प्रतिदिन सुबह, शाम और रात्रि को तीन बार घी में भिगोया हुआ कपूर जलाएं। घर के शौचालय और बाथरूप में कपूर की 2-2 टिकियां रख दें। बस इतना उपाय ही काफी है।
#आकस्मिक घटना या दुर्घटना से बचाव : आकस्मिक घटना या दुर्घटना का कारण राहु, केतु और शनि होते हैं। इसके अलावा हमारी तंद्रा और क्रोध भी दुर्घटना का कारण बनते हैं। इसके लिए रात्रि में हनुमान चालीसा का पाठ करने के बाद कपूर जलाएं।
हालांकि प्रतिदिन सुबह और शाम जिस घर में कर्पूर जलता रहता है उस घर में किसी भी प्रकार की आकस्मिक घटना और दुर्घटना नहीं होती। रात्रि में सोने से पूर्व कपूर जलाकर सोना तो और भी लाभदायक है।
#सकारात्मक उर्जा और शांति के लिए : घर में यदि सकारात्मक उर्जा और शांति का निर्माण करना है तो प्रतिदिन सुबह और शाम कपूर को घी में भिगोकर जलाएं और संपूर्ण घर में उसकी खुशबू फैलाएं। ऐसा करने से घर की नकारात्मक उर्जा नष्ट हो जाएगी। दु:स्वप्न नहीं आएंगे और घर में अमन शांति बनी रहेगी है।
वैज्ञानिक शोधों से यह भी ज्ञात हुआ है कि इसकी सुगंध से जीवाणु, विषाणु आदि बीमारी फैलाने वाले जीव नष्ट हो जाते हैं जिससे वातावरण शुद्ध हो जाता है तथा बीमारी होने का भय भी नहीं रहता।
#अचानक धन प्राप्ति का उपाय:- गुलाब के फूल में कपूर का टुकड़ा रखें। शाम के समय फूल में एक कपूर जला दें और फूल को देवी दुर्गा को चढ़ा दें। इससे आपको अचानक धन मिल सकता है।
यह कार्य आप कभी भी शुरू करके कम से कम 43 दिन तक करेंगे तो लाभ मिलेगा। यह कार्य नवरात्रि के दौरान करेंगे तो और भी ज्यादा असरकारक होगा।
#वास्तु दोष मिटाने के लिए : यदि घर के किसी स्थान पर वास्तु दोष निर्मित हो रहा है तो वहां एक कपूर की 2 टिकियां रख दें। जब वह टिकियां गलकर समाप्त हो जाए तब दूसरी दो टिकिया रख दें। इस तरह बदलते रहेंगे तो वास्तुदोष निर्मित नहीं होगा।
#भाग्य चमकाने के लिए : पानी में कपूर के तेल की कुछ बूंदों को डालकर नहाएं। यह आपको तरोताजा तो रखेगा ही आपके भाग्य को भी चमकाएगा। यदि इस में कुछ बूंदें चमेली के तेल की भी डाल लेंगे तो इससे राहु, केतु और शनि का दोष नहीं रहेगा, लेकिन ऐसे सिर्फ शनिवार को ही करें।
#पति-पत्नी के बीच तनाव को दूर करने हेतु : रात को सोते समय पत्नी अपने पति के तकिये में सिंदूर की एक पुड़िया और पति अपनी पत्नी के तकिये में कपूर की 2 टिकियां रख दें। प्रातः होते ही सिंदूर की पुड़िया घर से बाहर कही उचित स्थान पर फेंक दें तथा कपूर को निकाल कर शयन कक्ष में जला दें।
यदि ऐसा नहीं करना चाहते हैं तो प्रतिदिन शयनकक्ष में कपूर जलाएं और कपूर की 2 टिकियां शयनकक्ष के किसी कोने में रख दें। जब वह टिकियां गलकर समाप्त हो जाए तो दूसरी रख दें।
#धन-धान्य के लिए : रात्रि काल के समय रसोई समेटने के बाद चांदी की कटोरी में लौंग तथा कपूर जला दिया करें। यह कार्य नित्य प्रतिदिन करेंगे तो धन-धान्य से आपका घर भरा रहेगा। धन की कभी कमी नहीं होगी।
#विवाह बाधा हेतु : विवाह में आ रही बाधा को दूर करना चाहते हैं तो यह उपाय बहुत ही कारगर है। 36 लौंग और 6 कपूर के टुकड़े लें, इसमें हल्दी और चावल मिलाकर इससे मां दुर्गा को आहुति दें।
#मनचाही भूमि या भवन पाने के लिए : यह उपाय नवरात्रि के दिन करने का है। सबसे पहले उस स्थान की थोड़ी-सी मिट्टी लाकर एक कांच की शीशी में उसे डालें। उसमें गंगा जल और कपूर डालकर उसे पूजा में जौ के ढेर पर स्थापित कर दें। नवरात्र भर उस शीशी के आगे नवार्ण मन्त्र ‘ऐं हीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे’ का पांच माला जप करें और जौ में रोज गंगा जल डालें। नवमी के दिन थोड़े से अंकुरित जौ निकाल लें और ले जाकर मनचाही जगह पे डाल दें। कांच की शीशी को छोड़कर शेष सामग्री को नदी में डाल दें।
#कपूर
पूजा पाठ में विशेष तौर पर कपूर का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार घर से नाकारात्मक ऊर्जा को दूर करने में कपूर का छोटा सा टुकड़ा बेहद लाभकारी है। कपूर अकेले ही कई वास्तु दोष को दूर करता है और घर में खुशहाली लाता है। इसके अलावा कपूर आर्थिक परेशानियों को भी निपटाने में लाभकारी है। तो आइए जानते हैं कैसे कपूर का इस्तेमाल करके आप अपने घर का वास्तु दोष दूर कर सकते हैं।
यदि आप नौकरी और व्यवसाय में तरक्की पाना चाहते हैं तो रसोई घर का सारा काम खत्म करने के बाद एक कटोरी में कपूर और लौंग जलाएं। ऐसा करने से घर परिवार के सदस्यों की तरक्की होना शुरू हो जाती है और काम के नए अवसर भी मिलने लगते हैं।
यदि आप आर्थिक संकट से जूझ रहें और कमाई से ज्यादा आपके खर्चे हो रहे हों या फिर आप पर अधिक कर्ज हो गया हो तो हो सकता है कि आपके घर की रसोई में वास्तु दोष हो। ऐसे में अपने रसोई घर में चांदी की एक कटोरी में कुछ कपूर और लौंग जलाएं। रोजाना ऐसा करने से आपके परिवार पर मां लक्ष्मी की कृपा बरसेगी और आपके आर्थिक संकट दूर होंगे। साथ ही मान्यता है कि ऐसा करने से रूके हुए काम भी पूरे होते हैं। वास्तु शास्त्र के मुताबिक रोजाना घर की दक्षिण-पूर्व दिशा में कपूर जलाने से आर्थिक समृद्धि बनी रहती है।
कई बार होते है कि परिवार के लोगों को आपसी तालमेल अच्छा होने के बाद भी सदस्यों में मनमुटाव रहता है। ऐसे में आपको देसी घी में कपूर को रोजाना भिगोकर जलाएं। इसे घर के ऐसे स्थान पर रखें जहां से पूरे घर में इसकी खूशबू फैले। ऐसे करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास हो और सुख शांति बनी रहेगी। इतना ही नहीं इससे परिवार के सदस्य भी रोज मुक्त होते हैं।
*धरती का अमृत, नोनी*
नोनी एक चमत्कारी फल हैं जो लाइलाज एड्स और कैंसर तक को जड़ से खत्म करने में है कारगर !
*NONI मतलब*
*N 👉🏻No*
*O 👉🏻Operation*
*N 👉🏻No*
*I 👉Injection*
या फिर
*NONI का उल्टा *IN>>ON*
*मतलब जब NONI, IN होगी तब उसका काम ON हो जाएगा।*
*नोनी फल क्या है?*
इस फल का वैज्ञानिक नाम मोरिन्डा सिट्रीफोलिया है। नोनी फल में 150 से अधिक पोषक तत्व होते हैं। यह फल आलू के आकार की तरह होता है। इसका रंग हरा, पीला और सफेद हो सकता है। नोनी फल में एंजाइम की मात्रा चालीस गुना रहती है। वैज्ञानिकों ने कई साल तक किए शोध के आधार पर नोनी फल के गुणों के बारे में बताया है। इस फल में जेरोनाइन होता है जो शरीर के छिद्रों के आकार को बढ़ाता है।
ये फल एंटी-वायरल, एंटी-ट्यूमर और एंटी बक्टेरियल है जो हमारे शरीर के मेटाबोलिक सिस्टम, खून का संचार और बालों के विकास में सहायक होता है।
यह फल इंसान की उम्र को 100 साल तक की दीर्घायु प्रदान करने में मदद करता है।
*नोनी फल के अद्भुत फायदे*
👉नोनी फल के सेवन से अनेकों बीमारियों से बचा जा सकता है।
👉एक्जीमा, मुंहासों और सोरियासिस को ठीक करने में मदद करता है।
👉जोड़ों के दर्द को ठीक करता है। शरीर की एवं मांसपेशियों की अकड़न को दूर करने में मदद करता है।
👉माइग्रेन और हाई ब्लडप्रेशर की समस्या को ठीक करता है क्योंकि इसका चरित्र एडाप्टोजेन का है जिसमे हाई और लो दोनों ही बैलेंस हो जाते हैं।
👉यदि आप मधुमेह से परेशान हैं तो नोनी फल का सेवन करें। ये फल ब्लड शुगर स्तर को नियंत्रित करता है।
👉बालों की हर तरह की समस्या जैसे गंजापन और रूखापन दूर करता है ये फल। दस्त और कब्ज की समस्या को दूर करता है। ये फल।
👉सांस से संबंधित रोग जैसे अस्थमा जैसी भयंकर बीमारियों को भी ठीक करने में मदद करता है। माइग्रेन जैसी गंभीर समस्या को खत्म करने में मदद करता है नोनी का फल।
👉महिलाओं में माहवारी, लुकोरिया, बांझपन जैसी समस्या को ठीक करने में मदद करता है ये फल।
👉🏼नोनी में मौजूद डैमनाकेन्थाल एंज़ाइम कैंसर सेल की ग्रोथ को तुरन्त रोकने में मदद करता है।
👉🏼नोनी में मौजूद कॉक्स एंज़ाइम शरीर के किसी भी प्रकार के दर्द को रोकने या ठीक या शरीर को दर्द मुक्त करने में मदद करता है।
👉🏼नोनी विश्व का सर्वश्रेष्ठ एन्टी ऑक्सीडेंट फल है।
👉नोनी फल के फायदों के बारे में अभी तक जितनी भी जानकारी हमारे वैज्ञानिकों से मिली है वह हमारी सेहत को लंबे समय तक स्वस्थ और निरोगी रखने में मदद करती है।
👉🏼नोनी फल के ऊपर अभी भी रिसर्च भारत की इलाहाबाद और मद्रास यूनिवर्सिटी कर रही है, इससे होने वाले अन्य फायदों को जानने के लिये।
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*लो ब्लड प्रेशर की समस्या...*
जब किसी व्यक्ति को लो ब्लडप्रेशर (निम्न रक्तचाप) का रोग हो जाता है तो उसके शरीर की धमनियों के द्वारा रक्त की संचारण गति कम हो जाती है जिसके कारण से शरीर के अन्य भागों तथा मस्तिष्क के भागों में रक्त बहुत कम मात्रा में पहुंचता है और इन भागों का सही से विकास होना रुक जाता है। इस रोग के हो जाने के कारण शरीर में रक्त (खून) की मात्रा कम हो जाती है। यह रोग पुरुषों से ज्यादा स्त्रियों को होता है।
*लो ब्लडप्रेशर (निम्न रक्तचाप) रोग के लक्षण-*
लो-ब्लडप्रेशर रोग से पीड़ित रोगी के शरीर में हर समय सुस्ती सी छाई रहती है। रोगी व्यक्ति को किसी भी कार्य को करने में मन नहीं लगता है तथा उसे थकान अधिक महसूस होती है।
लो-ब्लडप्रेशर के रोग में रोगी की स्मरणशक्ति (याद्दाश्त) कम हो जाती है जिसके कारण रोगी व्यक्ति कुछ भी सोचने समझने में असमर्थ रहता है। कभी-कभी तो रोगी व्यक्ति को चक्कर भी आने लगते हैं तथा उसे आत्महत्या करने का मन करता है।
इस रोग से पीड़ित रोगी के सिर में हर समय दर्द होता रहता है।
रोगी की धड़कन की गति कम हो जाती है तथा उसे अधिक कमजोरी भी महसूस होने लगती है।
लो ब्लडप्रेशर रोग के कारण रोगी व्यक्ति को चिड़चिड़ापन, आलस्य, चक्कर आना, घबराहट महसूस होना, पसीना आना आदि समस्याएं पैदा हो जाती हैं।
इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति की नाड़ी धीमी तथा कमजोर हो जाती है जिसे उंगुलियों से कलाइयों को दबाकर आसानी से महसूस किया जा सकता है।
लो ब्लडप्रेशर (निम्न रक्तचाप) से पीड़ित रोगी कई बार चलते-चलते बेहोश होकर गिर पड़ता है।
*लो ब्लडप्रेशर (निम्न रक्तचाप) रोग होने का कारण-*
लो ब्लडप्रेशर होने का सबसे प्रमुख कारण शरीर में विटामिन `बी´ तथा `सी´ की कमी होना है।
असंतुलित भोजन तथा गलत तरीके से खानपान के कारण रक्तचाप गिर जाता है और लो ब्लडप्रेशर का रोग हो जाता है।
शरीर में खून की कमी तथा क्षय (टी.बी.) रोग के कारण भी यह रोग हो सकता है।
लो ब्लडप्रेशर (निम्न रक्तचाप) का रोग कई प्रकार के रोग होने के कारण भी हो सकता है जैसे- तेज उल्टिया होना, हैजा, टायफाइड तथा दस्त आदि।
आग से जलने के कारण या शरीर में तरल पदार्थों की कमी हो जाने के कारण भी लो ब्लडप्रेशर का रोग हो जाता है।
मानसिक कार्य की अधिकता या मानसिक भावुकता के कारण भी यह रोग हो सकता है।
पेट में कब्ज बनी रहने के कारण भी लो ब्लडप्रेशर का रोग हो जाता है।
स्त्रियों को मासिक धर्म से सम्बन्धित रोग हो जाने के कारण भी लो ब्लडप्रेशर का रोग हो जाता है।
अंत:स्रावी ग्रन्थियों में किसी प्रकार से विकृति आ जाने के कारण लो ब्लडप्रेशर का रोग हो जाता है।
किसी-किसी व्यक्ति को यह रोग आनुवंशिकता के कारण भी हो जाता है और यह पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहता है। यह रोग व्यक्ति को उनके माता-पिता के रोगग्रस्त होने के कारण भी हो सकता है।
हृदय रोग होने के कारण रक्त संचारण में कमी आ जाती है जिसके कारण से हृदय की पेशी परिसंचरण में पर्याप्त खून नहीं पहुंच पाता है और व्यक्ति को लो ब्लडप्रेशर का रोग हो जाता है।
अधिक उपवास रखने के कारण भी यह रोग हो सकता है क्योंकि उपवास रखने से शरीर का भरपूर मात्रा में पोषण नहीं हो पाता है और लो ब्लडप्रेशर का रोग हो जाता है।
भोजन में पौष्टिक पदार्थों का अभाव, ताजे फल तथा हरी साग-सब्जियों का सेवन न करने तथा बासी भोजन करने आदि के कारण भी यह रोग हो जाता है।
यह रोग व्यक्ति को तब भी हो जाता है जब वह अन्य रोगों से पीड़ित हो जैसे- शरीर में खून की कमी, हृदय धमनी रोग, टी.बी. रोग, टायफाइड तथा शोक आदि।
*लो ब्लडप्रेशर (निम्न रक्तचाप) रोग को ठीक करने के लिए प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार-*
लो ब्लडप्रेशर रोग को ठीक करने के लिए दवाइयों का सेवन करना हानिकारक होता है इसलिए दवाइयों के सहारे लो ब्लडप्रेशर रोग का उपचार नहीं कराना चाहिए बल्कि इस रोग का उपचार प्राकृतिक चिकित्सा से कराना चाहिए।
लो ब्लडप्रेशर रोग को ठीक करने के लिए रोगी व्यक्ति को अधिक से अधिक पानी पीना चाहिए तथा रसदार फलों का सेवन करना चाहिए।
रोगी को भोजन में उबली हुई सब्जियां, सब्जियों का सूप, दूध, शहद, दही तथा भिगोई हुई किशमिश, मुनक्का तथा चोकर समेत आटे की रोटी का सेवन करना चाहिए।
पुदीने का पानी तथा चुकन्दर का रस लो ब्लडप्रेशर रोग को ठीक करने में लाभदायक होता है।
तुलसी के ताजे पत्तों के रस में शहद मिलाकर पीने से यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
लो ब्लडप्रेशर रोग को ठीक करने के लिए रोगी को गुनगुने पानी से एनिमा क्रिया करके अपने पेट को साफ करना चाहिए ताकि उसका कब्ज रोग दूर हो सके। इसके बाद रोगी को अपने पेट पर मिट्टी की गीली पट्टी का लेप करना चाहिए तथा इसके बाद रीढ़ की हड्डी पर मालिश करनी चाहिए और अपने शरीर पर गीली चादर लपेटनी चाहिए। रोगी व्यक्ति को सप्ताह में एक बार वाष्पस्नान, गर्म पादस्नान करना चाहिए। रोगी व्यक्ति को स्नान करने से पहले कम से कम 15 मिनटों तक सूखा घर्षण क्रिया करनी चाहिए। इस प्रकार से उपचार करने से लो ब्लडप्रेशर का रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
लो ब्लडप्रेशर रोग को ठीक करने के लिए 25 ग्राम किशमिश तथा 50 ग्राम चनों को रात में सोते समय पानी में भिगोने के लिए रख दें तथा सुबह के समय में उठकर इसे चबा-चबाकर खा लें तथा इसके पानी को पी लें।
प्रतिदिन इस प्रकार का प्रयोग करने से कुछ ही दिनों में यह रोग ठीक हो जाता है।
रोजाना ककड़ी तथा खीरे का रस पीने से लो ब्लडप्रेशर का रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
मठे (लस्सी) में काला नमक, कालीमिर्च पाउडर तथा 2 चुटकी हींग डालकर प्रतिदिन पीने से लो ब्लडप्रेशर (निम्न रक्तचाप) रोग ठीक हो जाता है।
रोजाना आधा कप आंवला के रस में 2 चम्मच शहद डालकर पीने से यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
लो ब्लडप्रेशर रोग से पीड़ित रोगी को सुबह के समय में हरी घास पर नंगे पैर चलने से बहुत अधिक लाभ मिलता है।
इस रोग से पीड़ित रोगी को ज्यादा सोच-विचार का कार्य नहीं करना चाहिए तथा अधिक से अधिक आराम करना चाहिए।
*क्या आप आसव और अरिष्ट के बारे में जानते हैं.?*
आयुर्वेद में औषधि तैयार करने की दो प्रमुख विधियाँ आसव और अरिष्ट हैं।
*आसव जड़ी बूटियों के आसवन से तैयार एक दवा को संदर्भित करता है।*
*अरिष्ट का अर्थ है किसी भी जड़ी बूटी का एक चौथाई तैयार क्वाथ जिसे काढ़ा कहा जाता है।*
अरिष्ट बनाने की प्राचीन विधि में अरिष्ट बनाने के लिए काढ़े को धान, महुआ या गुड़ के साथ लंबे समय तक रखा जाता था, लेकिन अब इसे तैयार करने के लिए सीमेंट के बड़े टैंकों का उपयोग किया जाता है।
*अर्जुनारिष्ट*
शरीर में अतिरिक्त हवा, अत्यधिक पसीना, शुष्क मुँह, नींद न आना, घबराहट, फेफड़ों के रोग और हृदय रोग के कारण दिल की धड़कन बढ़ जाना।
*दसमूलारिस्ट*
शक्ति, वीर्य और शक्ति को बढ़ाता है और प्रभावी होता है। महिलाओं के गर्भवती रोग, एनोरेक्सिया, पेट का दर्द, कण्ठमाला, कुष्ठ रोग, प्रदर, श्वास, खांसी, वात रोग, दुर्बलता आदि प्रसिद्ध औषधि हैं। शरीर पुष्टि करता है कि इसका सेवन प्रसूति महिलाओं के बाद और प्रसव के बाद करना चाहिए।
*कुमार्यासव*
पेट के सभी प्रकार के रोग, तिल्ली और यकृत का बढ़ना, गुल्म (वायु गोला), भोजन के बाद पेट दर्द आदि, पेट के रोग नष्ट हो जाते हैं। भोजन ठीक से पचता है और एनोरेक्सिया दूर होता है। श्वास, खांसी, बवासीर, पीलिया, धात्विक, हृदय रोग, कब्ज और वात रोग नष्ट होते हैं। यकृत रोग में विशेष लाभकारी।
*कुमार्यासव*
(लौह निहित)
उपरोक्त गुणों के अतिरिक्त पथरी, मिरगी, फुंसी तथा पेट के रोग नष्ट होते हैं तथा रक्त की वृद्धि करते हैं। साइटिका, मिर्गी, कृमि रोग, वीर्यपात आदि में मूत्र लाभकारी होता है।
*द्राक्षारिस्ट*
सीने में दर्द, कूकर की खांसी, गले के रोग, श्वास, बेंत, सड़न, दुर्बलता और फेफड़ों की कब्ज में उबटन लाभकारी और बलवान होता है।
*अर्जुनारिष्ट*
शरीर में अतिरिक्त हवा, अत्यधिक पसीना, शुष्क मुँह, नींद न आना, घबराहट, फेफड़ों के रोग और हृदय रोग के कारण दिल की धड़कन बढ़ जाना।
*ध्यान दें...*
अधिकतर, 10 से 25 मिलीलीटर पानी के साथ मिश्रित पानी और भोजन के बाद दोनों बार सेवन किया जाता है। आप अभी भी अपने किसी विशेषज्ञ से सलाह ले सकते हैं।
*गले और छाती में जमा कफ...*
*सर्दी जुखाम, वायरल बुखार, इन्फेक्शन और ठंड लगने के कारण अक्सर गले में अथवा छाती में कफ का जमने की शिकायत होने लगती है। उसको दूर करने के लिए अपनायें ये देसी घरेलू नुस्खे...*
1. गले की बलगम का देसी इलाज करने के लिए दो कप पानी में 30 काली मिर्च पीस कर उबालें,
जब पानी एक चौथाई रह जाये
तब इसे छान कर इसमें 1 चम्मच शहद मिलाये और सुबह शाम इसका सेवन करे।
इस होम रेमेडीज से कफ वाली खांसी और कफ दोनों से छुटकारा मिलता है।
2. लहसुन खाने से गले में जमा कफ बाहर निकलता है, इस देसी घरेलू नुस्खे से टी. बी. के रोग में भी राहत मिलती है।
3. अदरक छील कर इसका छोटा टुकड़ा मुंह में रख कर चूसने से कफ आसानी से बाहर निकल जाती है।
4. छोटे बच्चे की छाती में जमा कफ (baby cough) निकालने के लिए गाय के घी बच्चे की छाती पर मले। इस उपाय से जमा हुआ बलगम बाहर निकल जाता है।
5. एक चम्मच शहद और 2 चम्मच निम्बू का रस गर्म पानी में मिला कर पिए।
इस उपाय से गला साफ़ होगा क्यूंकि नींबू बलगम को काटने का काम करेगा और शहद से गले को आराम मिलेगा।
*प्रकृति एवं प्राकृतिक नियम*
*नॉन वेज होना कहां तक उचित..??*
प्राकृतिक नियम कहता है धरती पर जितने मनुष्य हैं उससे लगभग 2.5 गुणा जल में रहने वाले जीव चाहिये,
5 गुणा पेड़ पौधे,
3 गुणा कीड़े मकोड़े,
लगभग 3 गुणा पक्षी और
7 गुणा पशु होने चाहिये..
तभी प्रकृति संतुलित रहेगी.!
किंतु आज का मानव पशुओं को काट काट कर खा गया,
पेड़-पौधों को विकास की भेंट चढ़ा दिया,
जल में रहने बाले जीवों को भी खा गया और कुछ तो नदियां तालाब प्रदुषित होने से खत्म हो रहे,
पक्षी भी विकास की भैंट चढ़ रहे।
अब बच गये कीड़े मकोड़े.?
तो अब उनको भी खाना आरम्भ कर दिया है!
और अब पशुओं, पंछियों, कीड़े मकोड़ों की खेती कर रहा है क्योंकि प्राकृतिक तौर पर उतने हो नी पा रहे तो मछली पालन कर रहा, कीट पालन कर रहा, मुर्गी पालन कर रहा ताकी मांस की आपूर्ति हो सके!
इससे अधिक प्राकृतिक असंतुलन क्या हो सकता है और इस असंतुलन के उत्तरदायी स्वयं को मानव समझने वाले हम दो पैरों वाले पशु ही तो हैं!
अब समय आ चुका है कि...
अनियंत्रित हो चुकी भोगवादी मानव की बढ़ती आबादी पर अंकुश लगे और वो मात्र और मात्र परम चेतना ही लगा सकती है!
🙏🏻🙏🏻
*जीवन मे उत्पन्न दुःखों के लिए कौन कौन जिम्मेदार है..???*
*जी, सच मानिये कि वो...*
*👉🏻ना तो भगवान,*
*👉🏻ना ही गृह-नक्षत्र,*
*👉🏻ना भाग्य,*
*👉🏻ना रिश्तेदार,*
*👉🏻ना पडोसी,*
*👉🏻ना सरकार,*
*बल्कि उसके...*
*जिम्मेदार आप स्वयं है*
*(1). आपका सरदर्द,*
*फालतू विचारों का परिणाम.!*
*(2). पेट दर्द,*
*गलत खाने का परिणाम.!*
*(3). आपका कर्ज,*
*जरूरत से ज्यादा खर्चे का परिणाम.!*
*(4). आपका दुर्बल /मोटा /बीमार शरीर,*
*गलत जीवन शैली का परिणाम.!*
*(5) आपके कोर्ट केस,*
*आप के अहंकार का परिणाम.!*
*(6). आपके फालतू विवाद,*
*ज्यादा व् व्यर्थ बोलने का परिणाम*
*उपरोक्त कारणों के अलावा सैकड़ों और अन्य कारण हैं,*
*जिनके कारण हम जीवन में तकलीफें उठाते रहते हैं और*
*बेवजह दोषारोपण दूसरों पर करते रहते है.!*
*परमहंस श्री योगा नन्द जी ने अपनी पुस्तक योगी कथामृत मे एक जगह लिखा है,*
*मेरा अस्वस्थ होना किसी प्राकृतिक नियम की अवहेलना मात्र है,*
*इसमें ईश्वर दोषी नहीं है!*
*अगर हम इन कष्टों के कारणों पर बारीकी से विचार करें तो पाएंगे कि कहीं न कहीं हमारी मूर्खताएं ही इनके पीछे है।*
*● प्रकृति का नियम, कर्म का प्रतिकर्म, एक्शन का रिएक्शन,*
*याद रखें, दिमाग़ 95% व्यर्थ की बातें सोचता है, जो किसी काम की नहीं होती, सिर्फ भय उत्पन्न करती है।*
*सलाह, शांत चित्त हो कर, बुद्धि, विवेक से निर्णय लें, परिणाम अच्छा ही होगा !!*
साभार अग्रेसक
नेचुरोपैथ कौशल
*100% नेचुरल, नैसर्गिक प्राकृतिक शक्तियों से भरपूर पूरे परिवार के लिए "बी-पोलेन"...*
*प्रोडक्ट कोड 7/10/Bee*
*अधिकांश लोगों से अनजान अद्भुत अमृतमय मधुमक्खियों द्वारा निर्मित धरती का अमृत "पराग" या "बी-पॉलन".!*
*क्या आप मात्र एक चम्मच से 5 किलो गाय का दूध, 5 किलो हरी सब्जियां, 5 किलो फल और बहुत सारे एन्टी ऑक्सीडेंट्स चाहते हैं.?*
*बी-पॉलन में फूलों का पराग, रस, एन्ज़ाइम्स, शहद और बी सीक्रेशन का मिक्सचर होता है!*
*मधुमक्खी जब अपने छत्ते पर शहद इकठ्ठा करती है तो शहद के साथ साथ उस छत्ते पर कुछ पराग कण भी इकठ्ठा हो जाते हैं और फिर ये दानों का आकार ले लेते हैं यही दाने सूखकर बी-पॉलन (Bee-Pollen) कहलाते हैं।*
जो लोग डायबिटीज, हाइपरटेंशन, ऑटो इम्यून या कैंसर जैसी बीमारियों से ग्रसित हैं उन्हें बी-पॉलन का सेवन ज़रूर करना चाहिये।
बी-पॉलन और उसके फायदों के बारे में अभी भी बहुत कम लोग जानते हैं।
आपको बता दें कि यह मधुमक्खियों द्वारा इकठ्ठा किया गया फूलों के परागकण का ढेर होता है जो उनके आहार के रूप में काम आता है।
इसमें लगभग 40% प्रोटीन पाया जाता है और इसके अलावा इसमें पोषक तत्वों की मात्रा भी काफी ज्यादा होती है। इसका सेवन इंसानों के लिए भी बहुत फायदेमंद है।
काफी समय पहले से ही बी-पॉलन को न्यूट्रीशनल सप्लीमेंट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
ताजे बी-पॉलन में प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स, कार्बोहाइड्रेट के अलावा लैक्टिक एसिड और फ्लेवेनॉयड जैसे यौगिक भी होते हैं।
चायनीज मेडिसन में इसके फायदों को देखते हुए जर्मन फेडरेल बोर्ड ऑफ़ हेल्थ द्वारा इसे ऑफिशियल मेडिसिन घोषित किया है।
*इन्फ्लेमेशन (सूजन) कम करने में मदद :*
साल 2010 में फार्मसूटिकल बायोलॉजी जर्नल के अनुसार बी-पॉलन में ऐसे एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जिस वजह से ये जोड़ों के दर्द, एक्ने और कई इंफ्लेमेटरी डिजीज से राहत दिलाने में मदद करती है।
*मांसपेशियों की मजबूती :*
फ्रेश बी पॉलन मसल्स रिकवरी रेट को बढ़ाने में बहुत मदद करते हैं।
साल 2014 में किये शोध के अनुसार जो लोग पोषक तत्वों की कमी से होने वाले रोगों से परेशान रहते हैं उनके लिए यह बहुत ही फायदेमंद है।
अगर आप वजन कम करने की सोच रहे हैं तो आपको बी-पोलन का सेवन बढ़ा देना चाहिये।
जो लोग डायबिटीज, हाइपरटेंशन या कैंसर जैसी बीमारियों से ग्रसित हैं उन्हें बी-पोलन का सेवन ज़रूर करना चाहिये।
*एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर :*
आप कैफीन युक्त ड्रिंक पीने की बजाय बी-पॉलन से निर्मित चाय का सेवन कर सकते हैं।
इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट की मात्रा बहुत ज्यादा होती है और इसी वजह से जो लोग कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों, डायबिटीज, हाइपरटेंशन या कैंसर जैसी बीमारियों से ग्रसित हैं उनके लिए बी-पॉलन बहुत ज्यादा फायदेमंद है।
*इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार :*
साल 2014 में एक शोध में बताया गया कि बी-पॉलन में पर्याप्त मात्रा में एंटी-माइक्रोबियल, एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी क्षमताएं होती हैं और इसके सेवन से कैंडिडा और स्टाफ इन्फेक्शन जैसी बीमारियों से बचाव होता है।
निरोगी काया के लिये बी-पॉलन की बिक्री मैं किलो में ही करता हूं क्योंकि ये महंगाई के अनुसार तो महंगा है परन्तु स्वास्थ्य की दृष्टि से एकदम सस्ता या मुफ्त जैसा है।
ये ग्रेन्युल के रूप में आता है।
₹6700/- प्रति किलो
₹3500/- का आधा किलो,
₹1800/- का 250 ग्राम
एवं
कोरियर एवं व्यक्तिगत सलाह मशविरा एकदम फ्री सम्पूर्ण भारत में।
विशुद्ध एवं फ़्रेश बी-पॉलन के लिये मुझसे सम्पर्क कर सकते हैं।
: *तुलसी मुख्यतः रूप से पांच प्रकार की पायी जाती है...*
*श्याम तुलसी,*
*राम तुलसी,*
*श्वेत/विष्णु तुलसी,*
*वन तुलसी और*
*नींबू तुलसी।*
*इन पांच प्रकार की तुलसी का अर्क निकाल कर पंचतुलसी का निर्माण किया जाता है।*
*तुलसी संसार की एक बेहतरीन*
*एंटी-ऑक्सीडेंट,*
*एंटी- बैक्टीरियल,*
*एंटी- वायरल,*
*एंटी- फ्लू,*
*एंटी-बायोटिक,*
*एंटी-इफ्लेमेन्ट्री व*
*एंटी–डिजीज है।*
*(1). पंच तुलसी अर्क के एक बून्द एक ग्लास पानी में या दो बून्द एक लीटर पानी में डाल कर पांच मिनट के बाद उस जल को पीना चाहिए। इससे पेयजल विष और रोगाणुओं से मुक्त होकर स्वास्थवर्धक पेय हो जाता है।*
*(2). पंच तुलसी अर्क 200 से अधिक रोगो में लाभदायक है जैसे के फ्लू, स्वाइन फ्लू, डेंगू, जुखाम, खासी, प्लेग, मलेरिया, जोड़ो का दर्द, मोटापा, ब्लड प्रेशर, शुगर, एलर्जी, पेट के कीड़ो, हेपेटाइटिस, जलन, मूत्र सम्बन्धी रोग, गठिया, दमा, मरोड़, बवासीर, अतिसार, दाद, खाज, खुजली, सर दर्द, पायरिया, नकसीर, फेफड़ो सूजन, अल्सर, हार्ट ब्लोकेज आदि।*
*(3). पंच तुलसी एक बेहतरीन विष नाशक है और शरीर से विष (toxins) को बाहर निकालती है।*
*(4). पंच तुलसी स्मरण शक्ति को बढ़ाता है और साथ ही साथ शरीर के लाल रक्त सेल्स (Haemoglobin) को बढ़ने में अत्यंत सहायक है।*
*(5). पंच तुलसी भोजन के बाद एक बूँद सेवन करने से पेट सम्बन्धी बीमारियां बहुत काम लगाती है।*
*(6). पंच तुलसी के 4–5 बूँदे पीने से महिलाओ को गर्भावस्था में बार बार होने वाली उलटी के शिकायत ठीक हो जाती है।*
*(7). आग के जलने व किसी जहरीले कीड़े के कांटने से पंच तुलसी को लगाने से विशेष रहत मिलती है।*
*(8). दमा व खाँसी में पंच तुलसी अर्क की दो बुँदे थोड़े से अदरक के रस और शहद के साथ मिलाकर सुबह– दोपहर– शाम सेवन करे।*
*(9). यदि मुँह में से किसी प्रकार की दुर्गन्ध आती हो तो पंच तुलसी की एक बूँद मुँह में डाल ले दुर्गन्ध तुरंत दूर हो जाएगी।*
*(10). दांत का दर्द, दांत में कीड़ा लगना, मसूड़ों में खून आना आदि में पंचतुलसी की 4–5 बूँदे पानी में डालकर कुल्ला करने से तुरन्त आराम मिलता है।*
*(11). सर दर्द, बालो का झड़ना बाल सफ़ेद होना व सिकरी आदि समस्याओं में पंचतुलसी की 8–10 बूंदे हर्बल हेयर आयल के साथ मिलाकर सर, माथे तथा कनपटियों पर लगाये।*
*(12). पंच तुलसी के 8–10 बूँदे नारियल तेल में मिलाकर शरीर पर मलकर रात्रि में सोये , मच्छर नहीं काटेंगे।*
*(13). कूलर के पानी में पंचतुलसी की 8–10 बूँदे डालने से सारा घर विषाणु और रोगाणु से मुक्त हो जाता है तथा मक्खी, मच्छर भी घर से भाग जाते है।*
*(14). पंचतुलसी में सुन्दर और निरोग बनाने की शक्ति है। यह त्वचा का कायाकल्प कर देती है। यह शरीर के खून को साफ करके शरीर को चमकीला बनती है।*
*(15). पंचतुलसी की दो बूँदे एलोवेरा जैल में मिलाकर चेहरे पर सुबह व रात को सोते समय लगाने पर त्वचा सुन्दर व कोमल हो जाती है तथा चेहरे से प्रत्येक प्रकार के काले धेरे, झाइयां, कील मुँहासे व झुरिया नष्ट हो जाती है।*
*(16). पंचतुलसी के नियमित उपयोग से कोलेस्ट्रोल का स्तर कम होने लगता है, रक्त के थक्के जमने कम हो जाते है व हार्ट अटैक और कोलैस्ट्रोल की रोकथाम हो जाती है।*
*(17). पंचतुलसी को एलोवेरा जेल में मिला कर लगाने से प्रसव के बाद पेट पर बनने वाले लाइने (स्ट्रेच मार्क्स) दूर हो जाते है।*
*हमारा पंचतुलसी अर्क*
*मात्रा 30ml*
*एमआरपी ₹283/-*
अधिक जानकारी और पंच तुलसी अर्क हेतु संपर्क करे वरना लूटने के लिए दुनियां बैठी है:-
नाक & गलेका
हाल में बहुत ही
वायरल चला रहा है
हरेक को नाक बन्ध हो जाना
गला खराब आवाज बन्ध
सुस्ती पृरे शरीर मे दर्द
थकान सी
ये सब परेशानी ने पलक में
छूट कारा पाए
👉1 चमच हल्दी पावडर मुह में रखे 30 मिनीट ओर
बाद में निकाल दे और गर्म नमक वाला पानी से गारगलीन करे
😊प्रयोग करे तब ये ध्यान रहे हल्दी गलेसे नीचे नही उतर ने देना
डो अशोकभाई के चौहाण
सूजोक मास्टरमाइंड
पुरेदीन गर्म सुठ वाला पानी ही पिये
😊ये नीचे वाले पोइन्ट करे
100 % फायदा
🗣🗣🗣🗣👇🏼👇🏼👇🏼
: घरेलू उपचार
------: रोग निरोधक शक्ति :------
* वर्षा और ठंड के मौसम में , तो नींबू का प्रयोग करना लाभदायक रहता है । क्योंकि , नींबू शरीर में रोग - प्रतिरोधक क्षमता का विकास करके, इन मौसम में , स्वस्थ रखता है ।
* मौसमी के रस का सेवन करने से, रोग - निरोधक शक्ति और जीवनीय शक्ति का विकास होता है । मौसमी में ' क्षार तत्व ' पाया जाता है , जो रक्त की अम्लता को कम करता है । इसके सेवन से पेट की अम्लता भी नष्ट होती है और भूख लगने लगती है ।
* अंगूर का भी सेवन करने से, रोग - प्रतिरोधक क्षमता की वृद्धि होती है और मन प्रसन्न रहता है ।
* आंवला चूर्ण का , एक चम्मच, यदि सुबह - शाम प्रयोग किया जाए तो पर्याप्त रूप से रोग - निरोधक शक्ति का विकास होता है ।
इस चूर्ण को दाल, चटनी व सब्जी में डालकर भी खटाई के रूप में प्रयोग कर सकते है ।
गर्मी के दिनों में , शीतल पानी में , चीनी व आंवला डालकर व शर्बत बनाकर पी सकते है । इसको अधिक स्वादिष्ट बनाने के लिए, इसमें नमक व भूना पिसा जीरा डालकर या जलजीरा बना कर भी पी सकते है ।
* केला एक संपूर्ण आहार है । एक बार में , 3 केले से अधिक का सेवन न करें । रात को , केले का सेवन करने से, गैस बनती है । वात, पित्त व कफ की शांति के लिए, केला व शक्कर का सेवन करें । केले से अजीर्ण होने पर, इलायची का सेवन करें । इसके नियमित सेवन से, शरीर स्वस्थ और स्फूर्तिवान रहता है। त्वचा कांतिमय बनी रहती है और रोग - प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है ।
* नियमित दही का सेवन करने वाले व्यक्ति का , कई रोगों से बचाव होता है ।ह्रदय रोग नही होता है और तनाव से संबंधित रोग भी, निकट नही आते है ।
*मेथी खाने के फायदे जानकर रह जाएंगे दंग*
1. वज़न होता है कम-
मेथी में भरपूर मात्रा में फाइबर और प्रोटीन पाया जाता है जिससे बार-बार भूक लगने की समस्या दूर होती है। मेथी के दानों को भी वज़न कम करने के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है।
2. डायबिटीज के लिए फायदेमंद-
डायबिटीज रोगियों के लिए मेथी बहुत फायदेमंद होती है क्योंकि इसके सेवन से ब्लड शुगर कंट्रोल होता है और यह इम्युनिटी को भी बेहतर बनाती है। आप मेथी का सूप या साग का सेवन कर सकते हैं और साथ ही खाली पेट भिगोई हुई मेथी के दानों का पानी भी पी सकते हैं।
3. पाचन रहता है बेहतर-
मेथी में फाइबर और विटामिन C जैसे पोषक तत्व होने के कारण ये पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाती है और गैस, पेट में जलन जैसी समस्या से भी बचाती है।
4. स्वस्थ ह्रदय-
मेथी में आयरन की मात्रा होने के कारण शरीर में रक्त बढ़ता है, जिससे ह्रदय स्वस्थ रहता है। साथ ही मेथी खून में बैक्टीरिया से भी बचाती है, जिससे खून साफ़ रहता है।
5. त्वचा होती है साफ़-
आयरन और विटामिन C त्वचा को साफ़ और निखरी रखने में मदद करते है। साथ ही मेथी कोलेजन भी बढ़ाती है, जिससे त्वचा जवान और निखरी लगती है। अगर आपकी त्वचा बेजान हो चुकी है तो आप मेथी के जूस का सेवन कर सकते हैं।
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