आज ही अर्थात 26 मार्च बृहस्पतिवार के दिन ही क्यों अष्टमी और नवमी तिथि है -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक
सनातन धर्म को समझना सबके बस की बात नहीं है यह पूर्ण वैज्ञानिक ढंग है जिसकी प्रामाणिकता और सत्यता के आगे सुपर कंप्यूटर और आधुनिक क्वांटम साइंस भी फेल है इसीलिए इसमें बड़े-बड़े धर्म के आचार्य ज्योतिषी और विद्वान किसी चीज का अंतिम रूप से निर्धारण करते हैं और इसका निर्धारण देश काल परिस्थिति वातावरण शुभ मुहूर्त लगन और पंचांग के पांचो अंगों का अध्ययन करके किया जाता है ।
आज अष्टमी की तिथि अर्थात माता महागौरी के समय का कल 11:45 पर समाप्त हो जाएगा इसलिए अष्टमी की पूजा शुभ मुहूर्त के अनुसार सुबह 6:16 से सुबह 7:48 के बीच में है समय के साथ लगन और शुभ मुहूर्त भी देखा जाता है इसके अलावा अशुभ मुहूर्त राहुकाल और तमाम योग भी देखे जाते हैं ।
धर्म और विज्ञान तथा ज्योतिष तीनों के अनुसार आज 11:49 दोपहर से महानवमी की तिथि लग रही है जो कल 10:05 से 10:06 के बीच सुबह समाप्त हो जाएगी ऐसे में वह दिया तिथि का कोई भी महत्व नहीं है जैसा कि कुछ मुर्ख लोग और कंप्यूटर और इंटरनेट पढ़कर तमाम लोग उदया तिथि कह कर चिल्ला रहे हैं जबकि ऐसा कुछ नहीं है एक दिन में 24 घंटे होते हैं और 24 घंटे में 4 घंटे किसी तिथि के रहने का कोई अर्थ नहीं होता है जबकि 20 घंटे पहले ही बीत जा चुके हैं और कल 10:00 बजे सुबह तक कोई विशेष शुभ मुहूर्त भी नहीं मिल रहा है ।
बहुत सी महिलाएं और टीवी और अखबार पढ़ कर तथा मोबाइल देखकर खुद को विद्वान बनाने वाले मूर्ख लोग उदय तिथि चिल्ला रहे हैं जबकि इन लोगों को 100 में 100 मालूम ही नहीं क्यों दया तिथि क्या है यदि इसे पूछा जाए कि राहुकाल क्या है तो बात नहीं पाएंगे जिस तरह तोता जीवन भर राम राम कहता है लेकिन उसकी मुक्ति नहीं होती और जिस तरह गंगा के पवित्र जल में अनगिनत मछली घड़ियाल मगरमच्छ और जीव जंतु रहते हैं लेकिन दिन-रात गंगा स्नान करके भी उनको मुक्ति नहीं मिलती क्योंकि उन्हें उसे चीज का महत्व ही नहीं पता है यदि किसी को तराशा हुआ हीरा और कच दे दिया जाए तो उसको समझ में ही नहीं आएगा कि एक हीरे का मूल्य इस वजन के कांच के मूल्य से अर्बन गुना अधिक है ।
ऊपर से मीडिया सोशल मीडिया इंटरनेट और टेलीविजन पर दुनिया भर की ज्ञान विज्ञान की चीज परोसकर सबको भ्रमित कर दिया गया है जबकि सारे इंटरनेट और पंचांग में नीचे लिखा रहता है कि इस कार्य को करने के पहले केवल हमारे ऊपर निर्भर ना रहे बल्कि विद्वान ज्योतिषी से संपर्क करें इसके बाद भी यदि लोगों को नहीं दिखाई पड़ता तो कोई क्या किया जाए ।
इन मूर्ख लोगों से पूछा जाए की करवा चौथ और श्री कृष्ण जन्माष्टमी जैसे महान पर्व क्या उदया तिथि से मनाया जाते हैं इसीलिए हर काम सबको नहीं करना चाहिए जिस तरह आज आरक्षण से बड़े-बड़े डॉक्टर इंजीनियर जज कलेक्टर अर्थ का अनर्थ कर रहे हैं वही हाल सबका हो रहा है और झोलाछाप डॉक्टर भी किताब पढ़ कर बड़े-बड़े ऑपरेशन कर दे रहे हैं और जबरदस्ती यमराज को बुला ले रहे हैं।
इस संदर्भ में एक बात और बताना चाहते हैं वाल्मीकि रामायण और समस्त धर्म ग्रंथो के अनुसार भगवान श्री राम का जन्म चैत्र मास की परम पवित्र नवमी तिथि को अभिजीत मुहूर्त में हुआ था जिसका समय 12:27 दोपहर है ऐसे में 27 को महानवमी और श्री राम की पूजा करने वाले लोग यह पूजा कैसे कर सकेंगे जबकि 10:00 बजे ही नवमी की तिथि समाप्त हो जा रही है।
थोड़े में इतना ही कहूंगा कि विदेशी सुपर कंप्यूटर और विदेशी ढांचे पर आधारित मोबाइल इंटरनेट टेलीविजन समाचार पत्र सनातन धर्म के बच्चे खुशी अंश को भी नष्ट बर्बाद कर रहे हैं और यही वजह है कि हमारे धार्मिक ग्रंथ रामायण महाभारत वेद पुराण असल में लिखा कुछ गया है और उसको दिखाया कुछ जाता है इसलिए विद्वान लोगों को यह चाहिए की सोच समझ कर ही कोई काम करें और जो रास्ता हमारे विद्वान धर्मगुरु ज्योतिषी और सच्चे वैज्ञानिक बताते हैं उसका पालन करें ।
एक और उदाहरण देना चाहता हूं कि अभी होलाष्टक में लाखों विवाह संपन्न हुए लाखों लोगों ने मकान दुकान खरीदे वाहन खरीदे उनका क्या हाल होगा अगले साल आप खुद देख लेना जबकि होलाष्टक में समस्त शुभ और पवित्र चीज पूरी तरह वर्जित हैं वहां किसी को उदया तिथि अस्थि तिथि का ज्ञान नहीं हुआ इसी तरह विवाह में पूरी तरह से अंग्रेजी वेशभूषा पहन कर लोग अश्लील गंदे गाने गाते हुए शराब पीकर राजा रानी बनाकर सिंहासन पर बैठ जाते हैं यह सब किस धर्म ग्रंथ में लिखा है यदि पूछा जाए तो इन सब की नानी मर जाती हैं आप बताओ जब अंग्रेजी भाषा में पूजा पाठ करोगे तो उसका कौन सा फल मिलेगा यदि आप साइकिल की चाबी को कर की चाबी में लगाओगे या रेडियो का रिमोट टेलीविजन में डालोगे तो क्या वह चलेगा क्या किसी जानवर से या पक्षी से स्त्री या पुरुष विवाह कर ले तो उस वंश की उत्पत्ति होगी मूर्ख लोगों को मूर्ख की बात समझाना ही उचित है ।
बाकी यह कलयुग है तो कलयुग का प्रभाव पादना निश्चित है परम पूजनीय तुलसीदास जी पहले ही कह गए कि आजकल रास्ता वही है जो सबको पसंद में आता है पंडित वही है जो गाल बजाता है सच्ची पतिव्रता नारियां या तो गहनों से हीन या तो नाममात्र के गहने पहने होती हैं वही वेश्या प्रकृति की स्त्रियां गहनों से सर से पैर तक लड़ी हुई दिखाई देती हैं जिसके बड़े-बड़े नाखून बाल और दाढ़ी होती है वही महा पंडित कहा जाता है जो ज्यादा दिखावा करता है वह बड़ा कथावाचक संत महात्मा हो जाता है और अंत में बलात्कार करता हुआ जेल में जाता है जिसकी पत्नी मर जाए संपूर्ण संपत्ति नष्ट हो जाए वह विभिन्न पत्नियों औरतों को भोगने के लिए और औरतों से भोग करने के लिए सन्यासी बनाकर सारे कुकर्म करता हुआ भगवा वस्त्र और भारत के साधु संतों को बदनाम करता है । और रोज ऐसे ही समाचार पढ़ रहे हैं संत रामपाल आसाराम ज्योतिष तांत्रिक मुल्ला***** मौलवी फादर साब जेल जा रहे हैं
इसलिए विवश होकर यह लेख लिखना पड़ा और सारे लेख का अंत यही है कि 26 तारीख को 11:00 बजे के पहले महा अष्टमी समाप्त हो जाएगी और इसमें पूजा पाठ का समय 6:16 से 6:48 तक है यदि किसी कारण से यह पूरा ना हो तो इस समय के अंदर ही पूजा पाठ प्रारंभ कर देना चाहिए।
और महानवमी पर्व में हवन पूजन 11 बज कर 49 मिनट से 12: 57 के भीतर ही कर लेना चाहिए और 1:00 बजे के बाद तो हवन पूजन करने का कोई अर्थ ही नहीं रह जाएगा।
बाकी उदया तिथि वालों का हाल में बता दे रहा हूं जितने लोग उदय तिथि को लेकर 27 मार्च को महानवमी मनाएंगे उन सबके यहां अंबानी और अदाणी नौकर बनकर उनकी हाजिरी लगाने आ जाएंगे इन सब का नाम पता नोट करो और देखो उनके अगले साल गाड़ी बंगला हाथी घोड़े हवाई जहाज सब हो जाएंगे जिस तरह होलाष्टक और बिना लग्न के विवाह और अन्य शुभ कार्य करने वाले आज बिल गेट्स और मार्क जुकरबर्ग बनकर घूम रहे हैं और अधातु के चक्कर लगाते हुए खुद को धन्य समझ रहे हैं -डॉ दिलीप कुमार सिंह
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