भगवान श्री राम (एक अद्भुत कविता)
भगवान राम के जन्म दिवस के स्वागत के शुभ अवसर पर,
शीतल मंद सुगंध पवन लेकर बसंत ऋतु आई है,
कूक रही पेड़ों पर कोयल ध्वनि लगती शहनाई है ।
नया वर्ष भी शुरू हुआ है महक उठी अमराई है ,
सोने सी फसलें लहराती नई कोपलें छाई हैं ।
आंगन आंगन द्वार सजा है चहुंदिश बंदनवार सजा है ,
मलय पवन के झोंकों ने धरती पर स्वर्ग रचाई है ,
श्री राम जन्म के पावन तन शुभ अवसर पर शीतल मंद सुगंध पवन लेकर वसंत ऋतु आई हैं।
विश्वामित्र वशिष्ठ अयोध्या के जन हर्षित ,
माता पिता प्रजा सभी अतिशय हैं हर्षित ,
ऋषि मुनि सज्जन के सारे दुख है कर्षित ,
दानव राक्षस भाग चले देते ना कहीं दिखाई हैं ।
श्री राम जन्म के पावन तम शुभ अवसर पर शीतल मंद सुगंध पवन लेकर वसंत ऋतु आई हैं ।
जग में अब तक जो भी आए भगवान राम सर्वोत्तम हैं ,
उनका प्यारा न्यारा जीवन आदर्श और अति उत्तम है।
आओ हम सब मिलकर के श्रीराम नाम स्मरण करें ।
उनका जीवन अपना करके मानवता का कल्याण करें ।
भगवती सिया हनुमत लक्ष्मण सब रामचंद्र के अनुचर हैं,
सारी दुनिया का कण-कण ही श्री राम नाम का दर्पण है ,
दुख बीत गए सुख आया है, सारी वसुधा बैकुंठ बनी ,अद्भुत प्यारी छवि पा करके,
कोयल ने मीठी तान भरी ,
आकाश और पाताल सभी सुंदरतम बने दिखाई हैं ।
श्री राम जन्म के पावन तन शुभ अवसर पर शीतल मंद सुगंध पवन लेकर बसंत ऋतु आई हैं।
सभी को महानवमी और श्री राम जन्म दिन कीबधाई शुभकामनाएं अभिनंदन वंदन और नमन
वर्ष 1987 में रचित कविता प्रथम पुरस्कार प्राप्त पूर्वांचल विश्वविद्यालय में
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