Sunday, 12 April 2026

क्या गाय धरती गायत्री मंत्र गीता और गंगा नदी मां है -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

क्या गाय धरती गायत्री मंत्र गीता और गंगा नदी मां है -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 

गलत व्याख्या करके धर्म गुरु पंडा पुरोहित पुजारी ‌ आधे अधूरे ज्ञान के सन्यासी कथावाचक संत महंत सनातन धर्म को घोर संकट में डाल देते हैं गाय और धरती ‌ गंगा गीता गायत्री मां नहीं है मां जैसी हैं।‌ इतना ही नहीं अनाथ बच्चों का पालन पोषण करने वाली मां से बड़ी मानी जाती है यशोदा मां और हलीमा जैसे अनगिनत उदाहरण पड़े हुए हैं।

जिस तरह बालक को दूध पिलाने वाली दाई या धाय दूसरी मां के समान समझी जाती है इस तरह गाय का दूध बिल्कुल माता जैसा होता है इसके गोबर में गंध नहीं होती ‌ इसका प्रयोग लिपाई पुताई सहित हर काम में होता है परमाणु और हाइड्रोजन बम के विकिरण को रोकने वाली एकमात्र धरती पर यही वस्तु है और कोई भी पशु गाय के जितना पवित्र और उपयोगी नहीं है इसीलिए हमारे ऋषि मुनियों ने इसको बिल्कुल माता जैसी कहा ‌ गाय का हर चीज अमृत और दवा जैसा है गाय के मूत्र का पान करने वाले जो लोग हैं वह हमेशा स्वस्थ निरोग रहते हैं और सबसे महंगी दवाई भी गाय के मूत्र को मिलाकर बनती हैं।


इसी तरह धरती को मां इसीलिए कहा गया कि जिस तरह मां आज जीवन बच्चे का पालन पोषण करती है उसका मल मूत्र उठाती है फिर भी उससे घृणा नहीं करती धरती मां पर ही व्यक्ति का सारा जीवन बिताता है उसी पर वह मल मूत्र करता है थूकता है फिर भी वह आजीवन हर व्यक्ति का पालन ‌ पोषण बिना भेदभाव करती है यहां तक की मृत्यु के बाद भी व्यक्ति को विश्राम धरती की गोद में ही मिलता है ‌ जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी। 

इसी तरह गंगा को मां इसीलिए कहा जाता है कि वह मां के समान हर प्राणियों का उद्धार करने वाली और सारे पापी लोगों के पाप का हरण करने वाली है विज्ञान का सत्य है कि गंगाजल की तरह आज भी कोई जल पूरी दुनिया में नहीं होता किसी भी नदी का जल गंगा और नर्मदा को छोड़कर एक सप्ताह से अधिक रखने पर वह गंदा और विषैला हो जाता है ‌ गंगा का पानी बिल्कुल अमृत जैसा बहुत ही शीतल और स्वास्थ्यवर्धक होता है क्रिश्चियन और तुर्क मुस्लिम भी इसके जल का उपयोग करते थे।इसलिए गंगा को गंगा मां जैसा कहते हैं ।

इसी तरह गीता को भी भारत में उच्च स्थान प्राप्त है क्योंकि यह हमारा निर्देश सही मार्ग पर चलने को करती है ‌ इस तरह मां अपने बच्चों को सही रास्ते पर चलकर सर्वोच्च स्थान प्राप्त करना सिखाती है वैसे ही गीता में दिए गए दिशा निर्देश हमें सारे कर्म करते हुए अंत में मुक्ति या मोक्ष का मार्ग दिखाते हैं जहां सभी लोग एक जैसे समभाव वाले होते हैं इसलिए गीत धार्मिक ग्रंथ होने के साथ-साथ एक आध्यात्मिक मां के समान है ।

वेद मंत्र गायत्री को भी मां के समान कहा जाता है इसलिए गायत्री मंत्र ‌ सर्व सिद्ध कहा जाता है क्योंकि गायत्री मंत्र संपूर्ण वसुधा के हर प्राणी का कल्याण करने वाला है और इसको कोई भी पढ़ सकता है ‌ इसके मंत्र में अपूर्व और अद्भुत शक्ति होती है जिसका निर्माण ब्रह्म ऋषि विश्वामित्र ने किया और आज तक अवतार को छोड़ दिया जाए तो वह सबसे बड़े ब्रह्म ऋषि और सबसे बड़े अतिरथी योद्धा हैं।

जो सनातनी होकर भी विधर्मी लोगों के वीर्य से पैदा होकर छिपे हुए वर्ण शंकर और दोगले हैं जो विदेशी एजेंट है जो सनातन धर्म को खोखला कर रहे हैं जो सनातनी होकर भी काले अंग्रेज और मैकाले के मानस पुत्र तथा विदेशीकृत दास बनते हैं वही उपयुक्त चीजों पर प्रश्नचिन्ह लगाते हैं। 

वरना यह वैज्ञानिक धार्मिक और आध्यात्मिक सत्य है कि गंगा गीता गायत्री वसुधा और गाएं मां नहीं बल्कि मन से बढ़कर है मां का तो स्वार्थ होता है पुत्र से लेकिन इन चीजों का स्वार्थ किसी से कुछ भी नहीं होता। धन्य हैं भारतीय ऋषि मुनि और हमारे धर्म ग्रंथ जिन्होंने कहा कि जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी यह इसलिए लिखना पड़ा की तमाम दुष्ट विधर्मी और सनातन धर्म के भटके हुए लोग बार-बार इस तरह के प्रश्न पूछ कर हमारे सभी धर्म गुरु लोगों को निरुत्तर कर देते थे जो रसमलाई बैकुंठ भोग शिलाजीत वियाग्रा और लिबिडेक्स जैसी चीजें खाकर दुष्कर्म करते हुए जेल में जाकर सनातन धर्म को गहरा आघात पहुंचाते हैं ।‌ आप सोच लो यदि ईश्वर के धर्म स्थान पर भी विशिष्ट और अति विशिष्ट कतार लगाकर सामान्य ज्ञान को घंटा धूप में खड़ा रखकर ऐसे धनी लोग राजनेता अधिकारी लोगों को सीधे दर्शन कराया जाता है जो पाप अन्य अत्याचार के पुतले हैं तो लोगों की आस्था कैसे भगवान में जागेगी सबसे अधिक दुष्ट चौकिया धाम के पंडित पुजारी हैं जो निहायत लंपट कामुक छिनरा कुपंथी दुराचारी और मैथुनिक रावण ‌ जैसे होकर धर्मस्थल की मर्यादा को भंग करते हैं लगभग 97 से 99% पुजारी पांडे पूरे भारत में ऐसे ही हैं।

इसीलिए मैंने बार-बार 35 वर्ष से कहा कि जो खुद को संत महंत सन्यासी मठाधीश पुजारी पांडा पुरोहित बनाएं उसका बंध्याकरण कर दो असली होगा तो नागा साधु की तरह खुद ही अपने को बधिया कर लेगा नकली होगा तो मठ मंदिर धर्म स्थान छोड़कर भाग खड़ा होगा । इसीलिए आज तक लाखों करोड़ों वर्ष के इतिहास में नागा साधु संत होकर कोई आप नहीं लगा है।


जनता भी मूर्ख है वह कीचड़ की जगह संगमरमर के तालाब में कमल खोजती है और गाड़ी बंगला हवाई जहाज सारी सुख सुविधाओं वाले चमत्कारी ढोंगी हिंदू मुस्लिम ‌ क्रिश्चियन यहूदी सिख या बुद्ध धर्म गुरुओं ‌ पुजारी संत महंत कथा वाचक उपदेश पुरोहित पंडा साधु संत की शरण में जाकर हल होकर चली जाती है जिनके पास न ज्ञान है ना सदाचार है ना नैतिकता है इसमें एक दो प्रतिशत धर्म गुरु छोड़कर लगभग सभी धर्मगुरु शामिल है मेरी समझ से कीनाराम बाबा के अनुयाई अघोर पंथ के लोग और अड़गड़ानंद जी को छोड़कर बाकी सब के सब ढोंगी दुष्कर्म और भौतिक सुख सुविधाओं में लिप्त रहने वाले हैं इसके अलावा लाखों संत महात्मा हैं लेकिन वह अज्ञात जगह पर तब साधना करके भारत देश और सनातन धर्म को बचा रहे हैं ।

आसाराम संत रामपाल राम रहीम म***** मौलवी पादरी विश्व अशोक खैरात जैसे आजकल के भौतिक सुख सुविधा वाले 99 परीक्षित साधु संत महात्मा महाराज नेताओं और बड़े-बड़े धन कुबेर लोगों के बने होते हैं जो अपने काले धन को इनके माध्यम से सफेद करके पंच मकार का भोग उनके आश्रम में जाकर करके चले आते हैं और जब बड़े-बड़े अधिकारी राजनेता सांसद विधायक मंत्री प्रधानमंत्री राष्ट्रपति और धन कुबेर लोगों का भेद खुलने लगता है तो या तो इस बाबा को जेल में डाल देते हैं या ऐसे बाबो को दुनिया से ही विदा कर देते हैं 

गलत चीज का अंत हमेशा गलत ही होता है सच्चा साधु संत महात्मा धर्मगुरु पुरोहित कथा वाचक उपयुक्त लोगों से दूर रहकर की जनता की भलाई करते हुए साधना करता है और उसी के लिए गंगा गीता गायत्री गए सब मां जैसी होती हैं 

इसलिए है भारत की सनातन जनता गलत रास्ते पर मत जाओ अपने धर्म ग्रंथ पढ़ो उसमें सब कुछ दिया है साधु संत महात्मा सन्यासी पुरोहित पंडा में आज एक प्रेषित सही बच्चे हैं सोच समझकर इनके पास जाओ 

इतना आवश्यक कहना चाहूंगा कि उपर्युक्त सभी हमारी मां के समान है लेकिन देश का कोई पीता नहीं हो सकता है यदि राष्ट्रपिता जैसा कोई हो सकता है तो वह केवल भगवान श्री रामकृष्ण नानक महावीर भगवान बुद्ध जैसे लोग भर सकते हैं गांधी जैसा व्यक्ति राष्ट्रपति पिता होने को तो छोड़ दो एक सामान्य व्यक्ति भी होने योग्य नहीं है 

इसलिए निश्चित रूप से बिना किसी संदेह के गए धरती गंगा गीता और गायत्री मां के समान होने के कारण माही हैं जो हमारे धर्म ग्रंथो में और वैज्ञानिक ग और दर्शन में लिख दिया गया वह संसार में कोई नहीं काट सकता है जबकि अन्य धर्म के लोग अपने धर्म को आंख मुड़ कर मानते हैं जबकि उनका धर्म पूरी तरह गलत सदाचार हिंद मानवता के विरुद्ध हिंसा और हत्याओं से भरा हुआ है जिसमें धरती को चपटी बताया गया है चंद्रमा के दो टुकड़े करना बताने से लेकर सूर्य को कीचड़ में डूबना और अनगिनत सत्य बात बताई गई है इसलिए अपने सनातन धर्म को आप मानकर सरकारी राजनीति में नवोदयते हुए जितने भी धरती पर गैर मुस्लिम गैर ईसाई गैर यहूदी है सबको सनातन धर्म में लाने का प्रयास कीजिए ‌ क्योंकि यह सभी सनातन ही हैं वैसे क्रिश्चियन यहूदी और मुस्लिम भी सनातन धर्म से ही परिवर्तित हुए हैं।तभी धरती पर शांति होगी समृद्धि होगी स्वस्थ लोग होंगे और राम राज्य कायम होकर सनातन धर्म पूरी दुनिया में फैल जाएगा

Saturday, 11 April 2026

क्या होता है चपरासी का पद

क्या होता है चपरासी का पद

चपरासी शब्द सुना है आपने? जो पुराने लोग होंगे उन्होंने जरूर सुना होगा। #चपरासी का क्या मतलब होता है । आप सोच रहे होंगे कि आज अचानक मैंने ये बिंदु क्यों उठाया। तो दिल थाम के बैठिए कि ये चपरासी की कहानी क्या गुल खिलाने वाली है।

तो पहले बता दूँ कि चपरासी शब्द बना चपरास से बना है जिसकी उत्पत्ति तुर्की मूल की है और जिसके मायने होते हैं धातु का बिल्ला।

चपरास' असल में धातु (पीतल या तांबा) की एक तख्ती या बिल्ला होता था। पुराने समय में राजाओं, नवाबों और फिर ब्रिटिश काल के दौरान सरकारी अधिकारियों के संदेशवाहकों या अर्दली के पास यह बिल्ला होता था।

यह चपरास आमतौर पर एक चमड़े के पट्टे पर लगा होता था, जिसे कंधे से कमर तक तिरछा पहना जाता था। इस धातु की पट्टी पर उस विभाग या अधिकारी का नाम या पद गुदा होता था, जिसका वह व्यक्ति प्रतिनिधित्व करता था।

स्वतंत्रता के बाद में भी सरकारी कार्यालयों में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी को चपरासी ही कहा जाता था। लेकिन समय के साथ ऐसा महसूस किया जाने लगा कि ये शब्द #गुलामी का प्रतीक है और इसलिए इसे हटा कर ‘कार्यालय सहायक’ कहा जाने लगा।

इसी तरह बहुत से ऐसे शब्दों को जो व्यक्ति की गरिमा को कम करते थे उन्हें हटाया गया। जैसे घरों में काम करने वाले लोगों को ‘हाउस हेल्प’ कहा जाने लगा। इसी प्रकार विकलांग को ‘ दिव्यांग’, पागल को ‘ मानसिक अस्वस्थ’, भंगी को ‘ सफ़ाई मित्र ‘, मेहतर को ‘ पर्यावरण सहायक ‘, नौकर को ‘ डोमेस्टिक हेल्प ‘ कहा जाने लगा है। यहाँ तक कि वेश्या के लिए ‘ सेक्स वर्कर ‘ शब्द का प्रयोग किया जाने लगा है।

शब्दों का यह बदलाव केवल 'नाम बदलना' नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि समाज अब काम के आधार पर व्यक्ति की गरिमा को नहीं आंकना चाहता। भाषा का यह परिमार्जन हमें अधिक सभ्य और संवेदनशील बनाता है।

एक ओर हम व्यक्ति की गरिमा के सम्मान के लिए इतने बदलाव कर रहे हैं दूसरी ओर राजनीति में ठीक इसके उलट हो रहा है। अभी कल मैं संसद में नेता विपक्ष का आसाम की किसी चुनावी सभा का वीडियो देख रहा था। उस वीडियो में वो असम के मुख्यमंत्री के लिए जिस तरह की भाषा का प्रयोग कर रहे थे किसी सड़क झाप टपोरी से भी बदतर थी।

अभी आप में से बहुत लोग ये कहेंगे कि भाजपा मे भी लोग ऐसी भाषा का प्रयोग करते हैं आपको केवल राहुल जी ही क्यों दिखते हैं। मोदी नहीं दिखते? दिखते हैं, लेकिन मोदी कभी इस तरह नहीं बोलते कि राहुल ऐसा करता है या वैसा करता है। राहुल जी उम्र में लगभग बीस साल छोटे हैं फिर भी मोदी जी ऐसे नहीं बोलते। दूसरी बात राहुल जी कांग्रेस के सबसे बड़े नेता हैं, #संसद में #नेताविपक्ष हैं और उनसे ये उम्मीद की जाएगी कि वो भाषा में संयम रखें और किसी भी व्यक्ति की गरिमा को नीचा न दिखायें। 

जब वो एक राज्य के चुने हुए #मुख्यमंत्री के प्रति ऐसे शब्दों का प्रयोग करते हैं तो वो अपनी पार्टी के नेताओं के साथ कैसे पेश आते होंगे ये सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है।

Tuesday, 7 April 2026

गैस सिलेंडरों की भयानक कालाबाजारी का डरावना सच भारत में यदि रहना है चींटी हाथी उठा के ले गई तब भी हां हां कहना है

गैस सिलेंडरों की भयानक कालाबाजारी का डरावना सच 

भारत में यदि रहना है चींटी हाथी उठा के ले गई तब भी हां हां कहना है

बिना प्रमाण के कुछ भी कहना और लिखना नहीं चाहिए विशेष करके तब जब सरकारी तंत्र के विरुद्ध लिखना हो आज हम एक ऐसी ज्वलंत समस्या की सच्चाई लिख रहे हैं जिससे सारा देश विशेष कर 95 परीक्षित जनता जूझ रही हैं 

जब से खाड़ी युद्ध छिड़ है तब से आप लोग बराबर मोदी जी सभी मुख्यमंत्री जिम्मेदार तंत्र ‌ सांसद विधायक मंत्रियों और सुजाता शर्मा सचिव को सुन रहे हैं कि देश में गैस सिलेंडरों की कोई कमी नहीं है सब कुछ सामान्य है कुछ विरोधी तत्व और विपक्षी दल इसका झूठ उसे प्रचार कर रहे हैं।

उनका यह भी कहना था कि प्रिंट इलेक्ट्रानिक और सोशल मीडिया में जो गैस एजेंसी पर लंबी लाइन गैस न मिलने की समस्या और डिलीवरी तीन दिन में न मिलने की शिकायत है सब झूठी है और प्रायोजित है इसलिए मैंने समय की प्रतीक्षा किया और तब तक प्रतीक्षा किया जब तक अपना खुद का गैस सिलेंडर बुकिंग नहीं कराया 

आज जबकि कल ही ईरान ने अमेरिका के पैरों पर झुक कर समर्पण कर दिया है और हॉरमुज का जल डमरू मध्य खोल दिया है तब तो स्थितियां सामान्य होनी चाहिए थी लेकिन कहानी उल्टी है अब आप खुद ही देख लीजिए।

आप बुकिंग रसीद देख लीजिए 5 दिन पहले की है सरकार के दिशा निर्देशों के अनुक्रम में और जिलापुर के अधिकारी और जिलाधिकारी जौनपुर के आश्वासन के क्रम में मैंने तीन दिन प्रतीक्षा किया चौथे दिन भी प्रतीक्षा किया लेकिन बुकिंग होने के बाद भी गैस सिलेंडर नहीं आया 

इसके बाद मैं गैस देने वाले नौकर से बात किया तो उसने कहा साहब मैं अभी गैस गोदाम से लौटा हूं एक भी सिलेंडर ना आया है ना गैस गोदाम में है इसके बाद मैं एजेंसी के मालिक से बात किया उन्होंने भी यही बात दोहराई 

अब आप ही बताओ कि ऐसी स्थिति में जनता चोरी बेईमानी कालाबाजारी ना करे तो क्या करें अगर आपातकाल के लिए सिलेंडर का भंडारण न करे तो क्या करें‌ उन लोगों की हालत सोचो जिनके एक ही सिलेंडर होगा और गैस खत्म होने के बाद 5 दिन वह कैसे भोजन पानी कर रहे होंगे। 

देश के पांच प्रेषक तंत्र जिसमें अधिकारी सरकारी कर्मचारी सांसद विधायक मंत्री प्रधानमंत्री राष्ट्रपति बड़े-बड़े लोग माफिया और धन कुबेर और ‌ विपक्षी दलों के सांसद विधायक जिला स्तर के राजनेता हैं उनको तो कभी कोई कमी नहीं होगी क्योंकि उनके पास भी ना कहे ही एक फोन पर सिलेंडर यही एजेंसी के मालिक लोग पहुंचा देंगे लेकिन सामान्य जनता का क्या 

आप आए दिन रोज इन सभी उत्तरदाई तंत्र सरकार उसके मंत्री सांसद विधायक जिला स्तर के नेता जिला अधिकारी जिला पूर्ति अधिकारी को सुनते होंगे कि देश में सब कुछ सामान है कहीं भी गैस सिलेंडर की कमी नहीं है और 90 लाख सिलेंडर की रोज बुकिंग हो रही है तो आखिर वह जा कहां रही है यही यक्ष प्रश्न है 


जब खाड़ी युद्ध प्रारंभ नहीं हुआ था तो 24 घंटे में सिलेंडर स्वयं एजेंसी के नौकर पहुंचा देते थे बल्कि पूछते थे कि सिलेंडर चाहिए तो बता दो तो क्या सामान्य जनता की यह शिकायत सही है कि गैस सिलेंडर हर जगह उपलब्ध है लेकिन ₹100 से ₹1000 अलग से देने पर कालाबाजारी में चाहे जितने सिलेंडर ले लो इसी का लाभ उठा कर होटल और रेस्टोरेंट वाले बड़े-बड़े लोग और अन्य लोग गैस सिलेंडरों का भंडारण कर रहे हैं आज तक एक भी होटल या रेस्टोरेंट बंद नहीं हुआ 

अब ऐसे में भारत की क्या दशा और दिशा होगी यह तो जिम्मेदार सरकार और तंत्र एवं उनके चापलूस चाटुकार दलाल चमचे मक्खनबाज और 420 लोग ही जाने जो मॉल मलाई से भरपूर मक्खन रसमलाई मोहन भोग बैकुंठ भोग शिलाजीत वियाग्रा और लिपिडेक्स जैसी चीज दिखाकर गाल गुलाबी नैन शराबी होकर अशोक खरात जैसे कामों का अंजाम दे रहे हैं 


सरकार को शायद धरातल की सच्चाई मालूम नहीं है कि यदि आज चुनाव हो जाए तो भाजपा 100 सीट भी नहीं पहुंच पाएगी जिसका प्रमाण पांच राज्यों में हो रहे चुनाव का है यदि असम में किसी तरह भाजपा की सरकार वह भी हेमंत विश्व शर्मा के नाते बन जाए तो बहुत बड़ी बात है मोदी जी को कोई चिंता नहीं है उन्होंने तो भरपूर राजभोग बुढ़ापे में कर ही लिया है और फकीर की तरह झोला उठाकर चल देंगे विधर्मी शैतानों का भरपूर विकास हो गया और देश की सारी सुविधाओं का 60% वही लोग मजा ले रहे हैं 


ऐसे सभी लोग जिनके अंदर मानवता बची हुई है और जो सच्चाई पसंद करते हैं अपना विचार इस पोस्ट पर अवश्य लिखेंगे और शायद सरकार और उसके तंत्र का डर है कि कोई व्यक्ति सामने नहीं आता है आने वाला नेस्तनाबूद हो जाता है ‌ प्रिंट इलेक्ट्रानिक मीडिया की भी एक सीमा है वह क्या कर सकते हैं सरकार से कोई लड़ नहीं सकता 

इसीलिए कहा गया है कि इस घर को आग लग गई घर के चिराग से -डॉ दिलीप कुमार सिंह

संपूर्ण देश के मौसम की विस्तृत भविष्यवाणी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

संपूर्ण देश के मौसम की विस्तृत भविष्यवाणी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 

आज हल्के बादल और मध्यम गर्मी और कल ‌ 8 अप्रैल को जौनपुर और आसपास होने वाली हैं वर्षा ‌ गिरेगा तापमान

 ‌‌ जौनपुर और आसपास आज का अधिकतम तापमान 35 डिग्री और न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस रहेगा कल अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना ‌ जौनपुर और आसपास के जिलों में आजकल और परसों तेज बारिश और ओलावृष्टि का खतरा टला‌ लेकिन तेज हवा आंधी तूफान का मौसम जारी रहेगा 8 अप्रैल को एक बार फिर वर्षा की संभावना बन रही है  ‌ 9 अप्रैल के बाद कम से कम 10 दिनों तक मौसम सूखा और शांत तथा फसलों की कटाई मड़ाई के योग्य रहेगा

3 अप्रैल से 9 अप्रैल तक‌ संपूर्ण भारत में मौसम तूफानी झंझा झकोर घन गर्जन वज्रपात वारिदमाला बिजली ‌ और घनघोर गरज चमकगर्जन वाला रहेगा इस कालखंड में अधिकांश देश में बूंदाबांदी  से लेकर हल्की वर्षा होगी और कहीं कहीं ओलावृष्टि का भी खतरा बना हुआ है 

इस कालखंड में संपूर्ण देश में अधिकांश जगह 20 किलोमीटर से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवाएं चलने आंधी तूफान का खतरा बना हुआ है और कहीं धूल भरी आंधी तो कहीं हल्की वर्षा बूंदाबांदी के साथ आंधी तूफान आएगा और कहीं-कहीं बहुत प्रचंड बवंडर का रूप भी धारण करके आंधी की गति 70 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा हो सकती है ।

जौनपुर और आसपास के जनपदों में इस आंधी तूफान का विशेष कर वर्ष का खतरा सबसे कम है लेकिन यहां भी गोदावरी से हल्की वर्षा इस कालखंड में होगी ।

पूरे देश की वायु गुणवत्ता में आश्चर्यजनक रूप से कल्पना के पार सुधार हुआ है और कहीं-कहीं तो यह वायु गुणवत्ता सूचकांक शून्य से 30 तक पहुंच गई है जैसे कि तिरुअनंतपुरम कन्याकुमारी और आसपास के क्षेत्र में पूर्वोत्तर भारत में जौनपुर और मुंबई तथा अन्य भागों में भी वायु गुणवत्ता सूचकांक बहुत ही अच्छी 30 से लेकर 60 के बीच बनी हुई है ऐसा बहुत लंबे समय बाद देखा गया है जबकि वर्ष कल में भी इन स्थानों की वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 से 100 के बीच रहता है ।

रौद्र नामक नए वर्ष के आरंभ होने के कारण सूर्य मंडल पर प्रचंड विस्फोट और भयंकर सौर ज्वालाओं के कारण‌ लाखों किलोमीटर की लंबी विकिरण वाली सौर ज्वालाएं अंतरिक्ष में फैल रही हैं जिनकी गति हजारों किलोमीटर प्रति घंटा है इससे दुनिया भर में अनेक विक्षोभ बना रहे हैं और आंधी तूफान चक्रवात ज्वालामुखी विस्फोट के साथ-साथ अफगानिस्तान ईरान भारत दक्षिण पूर्वी एशिया जापान और अमेरिका के तटवर्ती भागों में चार से लेकर 8 सेक्टर पैमाने पर एक महीने तक भूकंप आने का खतरा बना रहेगा 

भारत में इस काल खंड में अधिकतम तापमान 30 से लेकर 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 17 से लेकर 22 डिग्री सेल्सियस बना रहेगा 10 अप्रैल से भयंकर गर्मी पड़ेगी और उमस रहेगी इस समय हवा की दिशा भी पूरे भारत में लगातार परिवर्तित होती रहेगी मौसम के इस भयानक मोड लेने के कारण सबको हर जगह बहुत सावधान रहने की आवश्यकता है विशेष क्रांति के समय सुरक्षित रहें घर के अंदर रहे इस वर्ष तूफान और झंझावात का असर सबसे पहले पाकिस्तान उत्तर पश्चिम भारत इसके बाद मध्य और पूर्वी भारत और अंत में पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में पड़ेगा।
[4/8, 5:40 AM] Dr  Dileep Kumar singh: हमारे केंद्र की भविष्यवाणी के अनुसार आज सुबह से ही वर्षा शुरू हो जाएगी जो दिन में दो-तीन बार होगी तेज हवा के झोंकों के साथ आज मौसम बहुत ही ठंडा और सुहाना रहेगा अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस रहेगा झंझा झकोर घन गर्जन वज्रपात वारिदमाला ‌ और बिजली की गलत चमक के बीच वर्षा होगी ‌ कल हमारे केंद्र की भविष्यवाणी के अनुसार जम्मू कश्मीर पाकिस्तान राजस्थान गुजरात से लेकर लखनऊ तक वर्षा हुई और आज जौनपुर प्रतापगढ़ मिर्जापुर भदोही सोनभद्र मिर्जापुर आजमगढ़ गाजीपुर अंबेडकर नगर अयोध्या और आसपास के समस्त पूर्वांचल के जिले सम्मिलित रहेंगे

कल के बारे में अनुमान है कि मौसम धीरे-धीरे साफ हो जाएगा और कई दिनों तक आप मौसम रहेगा कल का अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस रहेगा

डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल द्वारा अभियुक्त को दोष मुक्त कराया गया

डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल द्वारा अभियुक्त को दोष मुक्त कराया गया 
मुकदमा नंबर सत्र परीक्षण संख्या 352 /11 स्टेट प्रति नीरज मिश्रा न्यायालय द्वितीय अपर सत्र न्यायालय जौनपुर थाना कोतवाली धारा 489 बी 489 सी मुकदमा अपराध संख्या 123 सन 11 ‌ के प्राचीन मुकदमे में डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल जनपद न्यायालय जौनपुर डॉ दिलीप कुमार सिंह के द्वारा अभियुक्त नीरज मिश्रा को दोष मुक्त कराया गया ।

मुकदमा उपर्युक्त में पुलिस द्वारा अभियुक्त नीरज मिश्रा को जाली नोटों के साथ पकड़ने का आरोप लगाया गया था जिसे सिद्ध करने में अभियोजन पक्ष पूरी तरह असफल रहा और मामले के तथ्य और परिस्थितियों को देखते हुए डिफेंस काउंसिल के विद्वतापूर्ण तर्क के द्वारा ‌ संतुष्ट होकर विद्वान न्यायाधीश अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वितीय शौरिक सिद्दीकी ‌ ‌ द्वारा उभय पक्ष की बात सुनने के उपरांत मेरिट पर अभियुक्त नीरज मिश्रा को मुक्त कर दिया तरफ अभियोजन पक्ष से अरुण कुमार पाठक द्वारा किया गया था।

Sunday, 5 April 2026

देश में कितना भयानक परिवर्तन आ रहा है एक झलक मिलते हैं लोग कहीं जाते हैं

देश में कितना भयानक परिवर्तन आ रहा है एक झलक मिलते हैं लोग कहीं जाते हैं यदि छोटा भी पुरस्कार सम्मान ही स्मृति चिन्ह पाए जाते हैं या फूल माला से उन्हें सम्मानित किया जाता है तो अपने साथ अपने फोटोग्राफर लेकर चलते हैं और उसको खूब बढ़ा चढ़ा कर इस तरह से उच्च प्रदर्शन अर्थात हाईलाइट करते हैं मानो उन्हें भारत रत्न और संयुक्त राष्ट्र संघ का पुरस्कार और नोबेल पुरस्कार मिल गया है ।‌ और बहुत बाद में मुझे पता चला की बड़े-बड़े नेता नेती और अन्य लोग अपने चापलूसों की फौज भी ताली बजाने के लिए साथ लेकर जाते हैं इसलिए जब यह 10 20 50 100 लोग ताली पीटते हैं तो बाकी को भी पीटना पड़ता है।

एक हम लोगों का समय था 1971 से लेकर आज तक ‌ जनपद अस्त्र से लेकर प्रदेश देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार स्मृति चिन्ह सम्मान पत्र प्रमाण पत्र एवं अनगिनत विजेता वैजयंती अर्थात ट्रॉफी इतना प्राप्त किया जिसको 1 दिन में कोई गिन नहीं सकता । ‌ एक बात और है कि मैं बहुत पहले से ही शायद 1990 से ऐसी जगह पर जाना छोड़ दिया था जहां छोड़ डकैत बलात्कारी दुष्कर्म धन माफिया और गबन करने वाले ‌ जनता का धन चूसने वाले भ्रष्ट और घूसखोरी लोग अध्यक्ष मुख्य अतिथियों संचालक नियुक्त होते हैं क्योंकि वहां जनक खुद को अपमानित करने के बराबर है यह ऐसा न करता तो आज एक कमरा भरकर केवल पुरस्कार प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह से भरा होता।

यह पुरस्कार स्मृति चिन्ह ट्रॉफी सम्मान पत्र और प्रमाण पत्र दर्जन या सौ नहीं बल्कि हजारों की संख्या में है और आश्चर्य की बात है कि हजारों में से मैंने एक भी छायाचित्र किसी से कहकर नहीं खिंचवाया ‌ कुछ असली शुभचिंतक लोगों ने खींच कर भेज दिया वहीं पड़े हुए हैं यदि मैं ऐसा करता तो आज मेरे घर में इन सबको रखने की जगह नहीं होती आज भी नहीं है ।‌ इतना अवश्य है कि हमारे 99% सहयोगी साथी और विभाग में साथ का काम करने वाले लोगों ने और ऊपर से शुभचिंतक बनने का ढोंग करने वालों ने कभी भी एक भी छायाचित्र या वीडियो बनाकर मुझे आज तक नहीं भेजा है।

यही कारण है कि आज 1 वर्ष में एक जिले में हजारों लोग अचानक बड़ी तेजी से ऊपर उठते हैं या यूं कहिए कि ऊपर उठाए जाते हैं और अगले वर्ष उनका नाम और निशान नहीं रहता इसलिए बाद कम कीजिए पुरस्कार इसमें चिन्ह तो नश्वर है बहुत जल्दी समाप्त हो जाएंगे यदि चाहते हो दुनिया तुम्हें याद करे तो तुम दुनिया के ऊपर दया करो यदि चाहते हो कि तुमको लाभ हो तो सब का भला करो याद रखो ।

अनगिनत राही गये इस राह से उनका पता क्या।
 पर गए कुछ छोड़ ईश्वर अपने पैरों की निशानी।


यही हाल भारत के हर क्षेत्र का है लाल बहादुर शास्त्री को छोड़कर आज तक कोई भी प्रधानमंत्री ऐसा नहीं हुआ जिसको याद किया जा सके जो भारत भक्ति सनातन भक्त हो इसी तरह डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को छोड़कर कोई भी सनातन भक्त भारत भक्ति राष्ट्रपति नहीं हुआ इसलिए किसी का नाम याद नहीं किया जाता ।


अच्छे लोगों का नाम धीरे-धीरे फैलता है और मरने के बाद पूरी दुनिया में छा जाता है जबकि जबरदस्ती चमचों के सहारे पाए हुए लोग अधिक स्थाई नहीं रहते यही हाल संत महंत धर्म गुरु मताधिक और उपदेश तथा वाचन का है जो अंदर से बिल्कुल काले और अधिकांश दुष्कर्म होते हैं और पड़कर जेल जाते हैं अपना नुकसान तो करते ही हैं इससे देश कलंकित होता है और धर्म का सम्मान घटना है जितने भी धर्मगुरु हैं यह सभी इसी श्रेणी के हैं इसमें अपवाद केवल बाबा कीनाराम ‌ भगवान अवधूत राम और अघोर पंथ के अनुयाई और चुनार के पीठाधीश्वर कहे जा सकते हैं जिनका मुख्यालय शक्तेशगढ़ में है । वैसे तो और भी बहुत है लेकिन धन कुबेर राजनेताओं और अपराधियों का संरक्षण न देने के कारण इनका नाम प्रचारित प्रसारित नहीं है यही कारण है कि मंचों पर अपराधी दुराचारी दुष्कर्म बलात्कारी और पानी की तरह पैसा बहाने वाले जब सादा जीवन उच्च विचार और सदाचार का उपदेश देते हैं तो जनता को यही लगता है कि इनको जूता चप्पल निकाल कर मर जाए।

यही कारण है कि जौनपुर के 99% लोग 10 साल पहले के किसी भी प्रख्यात विभूति का नाम पूछने पर नहीं बता सकते हैं ‌ वास्तव में यदि देखा जाए तो राजनेता धर्म गुरु कथावाचक माफिया आवर्धन कुबेर एक दूसरे की मदद करते हुए उनका महिमा मंडल करके मान सम्मान प्राप्त करते हैं जिसके वह पात्र नहीं होते हैं इसलिए एक दूसरे के सहयोग से सभी फलते फूलते रहते हैं और विधान संविधान के समानांतर गुंडा माफिया नक्सलवाद का राज चलता रहता है।

इस देश में सबसे कठिन काम है सच को उजागर करना और सही बात करना क्योंकि ऐसा करने पर सबसे पहले आपके अपने लोग फिर बाहरी लोग फिर मठाधीश और राजनेता और धन कुबेर माफिया सभी क्रोधित हो जाते हैं और यही कारण है आपने देखा कि यदि पश्चिम के एपस्टीन फाइल्स  की तरह भारत में ऐसी कोई फाइल बनाई जाए तो 99% राजनेता धर्मगुरु कथा वाचक माफिया और धन कुबेर और बड़े-बड़े अधिकारी पश्चिम फाइल की जद में आएंगे लेकिन जो भी इसको खोलना है या तो मार दिया जाता है या ब्लैकमेल किया जाता है या फिर साम दाम दंड भेद से पटा लिया जाता है जैसे इस समय कई लोगों ने बड़े-बड़े नेताओं की पोल खोलने का प्रयास किया लेकिन प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने डर के कारण नहीं छापा क्योंकि यह इतने बड़े घड़ियाल के बारे में है जो सबको निगल जाएंगे तो अपने साथ अपने फोटोग्राफर लेकर चलते हैं और उसको खूब बढ़ा चढ़ा कर इस तरह से उच्च प्रदर्शन अर्थात हाईलाइट करते हैं मानो उन्हें भारत रत्न और संयुक्त राष्ट्र संघ का पुरस्कार और नोबेल पुरस्कार मिल गया है ।‌ और बहुत बाद में मुझे पता चला की बड़े-बड़े नेता नेती और अन्य लोग अपने चापलूसों की फौज भी ताली बजाने के लिए साथ लेकर जाते हैं इसलिए जब यह 10 20 50 100 लोग ताली पीटते हैं तो बाकी को भी पीटना पड़ता है।

एक हम लोगों का समय था 1971 से लेकर आज तक ‌ जनपद अस्त्र से लेकर प्रदेश देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार स्मृति चिन्ह सम्मान पत्र प्रमाण पत्र एवं अनगिनत विजेता वैजयंती अर्थात ट्रॉफी इतना प्राप्त किया जिसको 1 दिन में कोई गिन नहीं सकता । ‌ एक बात और है कि मैं बहुत पहले से ही शायद 1990 से ऐसी जगह पर जाना छोड़ दिया था जहां छोड़ डकैत बलात्कारी दुष्कर्म धन माफिया और गबन करने वाले ‌ जनता का धन चूसने वाले भ्रष्ट और घूसखोरी लोग अध्यक्ष मुख्य अतिथियों संचालक नियुक्त होते हैं क्योंकि वहां जनक खुद को अपमानित करने के बराबर है यह ऐसा न करता तो आज एक कमरा भरकर केवल पुरस्कार प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह से भरा होता।

यह पुरस्कार स्मृति चिन्ह ट्रॉफी सम्मान पत्र और प्रमाण पत्र दर्जन या सौ नहीं बल्कि हजारों की संख्या में है और आश्चर्य की बात है कि हजारों में से मैंने एक भी छायाचित्र किसी से कहकर नहीं खिंचवाया ‌ कुछ असली शुभचिंतक लोगों ने खींच कर भेज दिया वहीं पड़े हुए हैं यदि मैं ऐसा करता तो आज मेरे घर में इन सबको रखने की जगह नहीं होती आज भी नहीं है ।‌ इतना अवश्य है कि हमारे 99% सहयोगी साथी और विभाग में साथ का काम करने वाले लोगों ने और ऊपर से शुभचिंतक बनने का ढोंग करने वालों ने कभी भी एक भी छायाचित्र या वीडियो बनाकर मुझे आज तक नहीं भेजा है।

यही कारण है कि आज 1 वर्ष में एक जिले में हजारों लोग अचानक बड़ी तेजी से ऊपर उठते हैं या यूं कहिए कि ऊपर उठाए जाते हैं और अगले वर्ष उनका नाम और निशान नहीं रहता इसलिए बाद कम कीजिए पुरस्कार इसमें चिन्ह तो नश्वर है बहुत जल्दी समाप्त हो जाएंगे यदि चाहते हो दुनिया तुम्हें याद करे तो तुम दुनिया के ऊपर दया करो यदि चाहते हो कि तुमको लाभ हो तो सब का भला करो याद रखो ।

अनगिनत राही गये इस राह से उनका पता क्या।
 पर गए कुछ छोड़ ईश्वर अपने पैरों की निशानी।


यही हाल भारत के हर क्षेत्र का है लाल बहादुर शास्त्री को छोड़कर आज तक कोई भी प्रधानमंत्री ऐसा नहीं हुआ जिसको याद किया जा सके जो भारत भक्ति सनातन भक्त हो इसी तरह डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को छोड़कर कोई भी सनातन भक्त भारत भक्ति राष्ट्रपति नहीं हुआ इसलिए किसी का नाम याद नहीं किया जाता ।


अच्छे लोगों का नाम धीरे-धीरे फैलता है और मरने के बाद पूरी दुनिया में छा जाता है जबकि जबरदस्ती चमचों के सहारे पाए हुए लोग अधिक स्थाई नहीं रहते यही हाल संत महंत धर्म गुरु मताधिक और उपदेश तथा वाचन का है जो अंदर से बिल्कुल काले और अधिकांश दुष्कर्म होते हैं और पड़कर जेल जाते हैं अपना नुकसान तो करते ही हैं इससे देश कलंकित होता है और धर्म का सम्मान घटना है जितने भी धर्मगुरु हैं यह सभी इसी श्रेणी के हैं इसमें अपवाद केवल बाबा कीनाराम ‌ भगवान अवधूत राम और अघोर पंथ के अनुयाई और चुनार के पीठाधीश्वर कहे जा सकते हैं जिनका मुख्यालय शक्तेशगढ़ में है । वैसे तो और भी बहुत है लेकिन धन कुबेर राजनेताओं और अपराधियों का संरक्षण न देने के कारण इनका नाम प्रचारित प्रसारित नहीं है यही कारण है कि मंचों पर अपराधी दुराचारी दुष्कर्म बलात्कारी और पानी की तरह पैसा बहाने वाले जब सादा जीवन उच्च विचार और सदाचार का उपदेश देते हैं तो जनता को यही लगता है कि इनको जूता चप्पल निकाल कर मर जाए।

यही कारण है कि जौनपुर के 99% लोग 10 साल पहले के किसी भी प्रख्यात विभूति का नाम पूछने पर नहीं बता सकते हैं ‌ वास्तव में यदि देखा जाए तो राजनेता धर्म गुरु कथावाचक माफिया आवर्धन कुबेर एक दूसरे की मदद करते हुए उनका महिमा मंडल करके मान सम्मान प्राप्त करते हैं जिसके वह पात्र नहीं होते हैं इसलिए एक दूसरे के सहयोग से सभी फलते फूलते रहते हैं और विधान संविधान के समानांतर गुंडा माफिया नक्सलवाद का राज चलता रहता है।

इस देश में सबसे कठिन काम है सच को उजागर करना और सही बात करना क्योंकि ऐसा करने पर सबसे पहले आपके अपने लोग फिर बाहरी लोग फिर मठाधीश और राजनेता और धन कुबेर माफिया सभी क्रोधित हो जाते हैं और यही कारण है आपने देखा कि यदि पश्चिम के एपस्टीन फाइल्स  की तरह भारत में ऐसी कोई फाइल बनाई जाए तो 99% राजनेता धर्मगुरु कथा वाचक माफिया और धन कुबेर और बड़े-बड़े अधिकारी पश्चिम फाइल की जद में आएंगे लेकिन जो भी इसको खोलना है या तो मार दिया जाता है या ब्लैकमेल किया जाता है या फिर साम दाम दंड भेद से पटा लिया जाता है जैसे इस समय कई लोगों ने बड़े-बड़े नेताओं की पोल खोलने का प्रयास किया लेकिन प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने डर के कारण नहीं छापा क्योंकि यह इतने बड़े घड़ियाल के बारे में है जो सबको निगल जाएंगे

Friday, 3 April 2026

संपूर्ण देश के मौसम की विस्तृत भविष्यवाणी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

संपूर्ण देश के मौसम की विस्तृत भविष्यवाणी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 
3 अप्रैल से 9 अप्रैल तक‌ संपूर्ण भारत में मौसम तूफानी झंझा झकोर घन गर्जन वज्रपात वारिदमाला बिजली ‌ और घनघोर गर्जन वाला रहेगा इस कालखंड में अधिकांश देश में गोदावादी से लेकर हल्की वर्षा होगी और कहीं कहीं ओलावृष्टि का भी खतरा बना हुआ है 

इस कालखंड में संपूर्ण देश में अधिकांश जगह 20 किलोमीटर से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवाएं चलने आंधी तूफान का खतरा बना हुआ है और कहीं धूल भरी आंधी तो कहीं हल्की वर्षा बूंदाबांदी के साथ आंधी तूफान आएगा और कहीं-कहीं बहुत प्रचंड बवंडर का रूप भी धारण करके आंधी की गति 70 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा हो सकती है 


जौनपुर और आसपास के जनपदों में इस आंधी तूफान का विशेष कर वर्ष का खतरा सबसे कम है लेकिन यहां भी गोदावरी से हल्की वर्षा इस कालखंड में होगी 

पूरे देश की वायु गुणवत्ता में आश्चर्यजनक रूप से कल्पना के पार सुधार हुआ है और कहीं-कहीं तो यह वायु गुणवत्ता सूचकांक शून्य से 30 तक पहुंच गई है जैसे कि तिरुअनंतपुरम कन्याकुमारी और आसपास के क्षेत्र में पूर्वोत्तर भारत में जौनपुर और मुंबई तथा अन्य भागों में भी वायु गुणवत्ता सूचकांक बहुत ही अच्छी 30 से लेकर 60 के बीच बनी हुई है ऐसा बहुत लंबे समय बाद देखा गया है जबकि वर्ष कल में भी इन स्थानों की वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 से 100 के बीच रहता है 


रौद्र नमक नए वर्ष के आरंभ होने के कारण सूर्य मंडल पर प्रचंड विस्फोट और भयंकर सौर ज्वालाओं के कारण‌ लाखों किलोमीटर की लंबी विकिरण वाली सौर ज्वालाएं अंतरिक्ष में फैल रही हैं जिनकी गति हजारों किलोमीटर प्रति घंटा है इससे दुनिया भर में अनेक विक्षोभ बना रहे हैं और आंधी तूफान चक्रवात ज्वालामुखी विस्फोट के साथ-साथ अफगानिस्तान ईरान भारत दक्षिण पूर्वी एशिया जापान और अमेरिका के तटवर्ती भागों में चार से लेकर 8 सेक्टर पैमाने पर एक महीने तक भूकंप आने का खतरा बना रहेगा 

भारत में इस्कल खंड में अधिकतम तापमान 30 से लेकर 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 17 से लेकर 22 डिग्री सेल्सियस बना रहेगा 10 अप्रैल से भयंकर गर्मी पड़ेगी और उमस रहेगी इस समय हवा की दिशा भी पूरे भारत में लगातार परिवर्तित होती रहेगी मौसम के इस भयानक मोड लेने के कारण सबको हर जगह बहुत सावधान रहने की आवश्यकता है विशेष क्रांति के समय सुरक्षित रहें घर के अंदर रहे इस वर्ष तूफान और झंझावात का असर सबसे पहले पाकिस्तान उत्तर पश्चिम भारत इसके बाद मध्य और पूर्वी भारत और अंत में पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में पड़ेगा