Sunday, 12 April 2026

क्या गाय धरती गायत्री मंत्र गीता और गंगा नदी मां है -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

क्या गाय धरती गायत्री मंत्र गीता और गंगा नदी मां है -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 

गलत व्याख्या करके धर्म गुरु पंडा पुरोहित पुजारी ‌ आधे अधूरे ज्ञान के सन्यासी कथावाचक संत महंत सनातन धर्म को घोर संकट में डाल देते हैं गाय और धरती ‌ गंगा गीता गायत्री मां नहीं है मां जैसी हैं।‌ इतना ही नहीं अनाथ बच्चों का पालन पोषण करने वाली मां से बड़ी मानी जाती है यशोदा मां और हलीमा जैसे अनगिनत उदाहरण पड़े हुए हैं।

जिस तरह बालक को दूध पिलाने वाली दाई या धाय दूसरी मां के समान समझी जाती है इस तरह गाय का दूध बिल्कुल माता जैसा होता है इसके गोबर में गंध नहीं होती ‌ इसका प्रयोग लिपाई पुताई सहित हर काम में होता है परमाणु और हाइड्रोजन बम के विकिरण को रोकने वाली एकमात्र धरती पर यही वस्तु है और कोई भी पशु गाय के जितना पवित्र और उपयोगी नहीं है इसीलिए हमारे ऋषि मुनियों ने इसको बिल्कुल माता जैसी कहा ‌ गाय का हर चीज अमृत और दवा जैसा है गाय के मूत्र का पान करने वाले जो लोग हैं वह हमेशा स्वस्थ निरोग रहते हैं और सबसे महंगी दवाई भी गाय के मूत्र को मिलाकर बनती हैं।


इसी तरह धरती को मां इसीलिए कहा गया कि जिस तरह मां आज जीवन बच्चे का पालन पोषण करती है उसका मल मूत्र उठाती है फिर भी उससे घृणा नहीं करती धरती मां पर ही व्यक्ति का सारा जीवन बिताता है उसी पर वह मल मूत्र करता है थूकता है फिर भी वह आजीवन हर व्यक्ति का पालन ‌ पोषण बिना भेदभाव करती है यहां तक की मृत्यु के बाद भी व्यक्ति को विश्राम धरती की गोद में ही मिलता है ‌ जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी। 

इसी तरह गंगा को मां इसीलिए कहा जाता है कि वह मां के समान हर प्राणियों का उद्धार करने वाली और सारे पापी लोगों के पाप का हरण करने वाली है विज्ञान का सत्य है कि गंगाजल की तरह आज भी कोई जल पूरी दुनिया में नहीं होता किसी भी नदी का जल गंगा और नर्मदा को छोड़कर एक सप्ताह से अधिक रखने पर वह गंदा और विषैला हो जाता है ‌ गंगा का पानी बिल्कुल अमृत जैसा बहुत ही शीतल और स्वास्थ्यवर्धक होता है क्रिश्चियन और तुर्क मुस्लिम भी इसके जल का उपयोग करते थे।इसलिए गंगा को गंगा मां जैसा कहते हैं ।

इसी तरह गीता को भी भारत में उच्च स्थान प्राप्त है क्योंकि यह हमारा निर्देश सही मार्ग पर चलने को करती है ‌ इस तरह मां अपने बच्चों को सही रास्ते पर चलकर सर्वोच्च स्थान प्राप्त करना सिखाती है वैसे ही गीता में दिए गए दिशा निर्देश हमें सारे कर्म करते हुए अंत में मुक्ति या मोक्ष का मार्ग दिखाते हैं जहां सभी लोग एक जैसे समभाव वाले होते हैं इसलिए गीत धार्मिक ग्रंथ होने के साथ-साथ एक आध्यात्मिक मां के समान है ।

वेद मंत्र गायत्री को भी मां के समान कहा जाता है इसलिए गायत्री मंत्र ‌ सर्व सिद्ध कहा जाता है क्योंकि गायत्री मंत्र संपूर्ण वसुधा के हर प्राणी का कल्याण करने वाला है और इसको कोई भी पढ़ सकता है ‌ इसके मंत्र में अपूर्व और अद्भुत शक्ति होती है जिसका निर्माण ब्रह्म ऋषि विश्वामित्र ने किया और आज तक अवतार को छोड़ दिया जाए तो वह सबसे बड़े ब्रह्म ऋषि और सबसे बड़े अतिरथी योद्धा हैं।

जो सनातनी होकर भी विधर्मी लोगों के वीर्य से पैदा होकर छिपे हुए वर्ण शंकर और दोगले हैं जो विदेशी एजेंट है जो सनातन धर्म को खोखला कर रहे हैं जो सनातनी होकर भी काले अंग्रेज और मैकाले के मानस पुत्र तथा विदेशीकृत दास बनते हैं वही उपयुक्त चीजों पर प्रश्नचिन्ह लगाते हैं। 

वरना यह वैज्ञानिक धार्मिक और आध्यात्मिक सत्य है कि गंगा गीता गायत्री वसुधा और गाएं मां नहीं बल्कि मन से बढ़कर है मां का तो स्वार्थ होता है पुत्र से लेकिन इन चीजों का स्वार्थ किसी से कुछ भी नहीं होता। धन्य हैं भारतीय ऋषि मुनि और हमारे धर्म ग्रंथ जिन्होंने कहा कि जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी यह इसलिए लिखना पड़ा की तमाम दुष्ट विधर्मी और सनातन धर्म के भटके हुए लोग बार-बार इस तरह के प्रश्न पूछ कर हमारे सभी धर्म गुरु लोगों को निरुत्तर कर देते थे जो रसमलाई बैकुंठ भोग शिलाजीत वियाग्रा और लिबिडेक्स जैसी चीजें खाकर दुष्कर्म करते हुए जेल में जाकर सनातन धर्म को गहरा आघात पहुंचाते हैं ।‌ आप सोच लो यदि ईश्वर के धर्म स्थान पर भी विशिष्ट और अति विशिष्ट कतार लगाकर सामान्य ज्ञान को घंटा धूप में खड़ा रखकर ऐसे धनी लोग राजनेता अधिकारी लोगों को सीधे दर्शन कराया जाता है जो पाप अन्य अत्याचार के पुतले हैं तो लोगों की आस्था कैसे भगवान में जागेगी सबसे अधिक दुष्ट चौकिया धाम के पंडित पुजारी हैं जो निहायत लंपट कामुक छिनरा कुपंथी दुराचारी और मैथुनिक रावण ‌ जैसे होकर धर्मस्थल की मर्यादा को भंग करते हैं लगभग 97 से 99% पुजारी पांडे पूरे भारत में ऐसे ही हैं।

इसीलिए मैंने बार-बार 35 वर्ष से कहा कि जो खुद को संत महंत सन्यासी मठाधीश पुजारी पांडा पुरोहित बनाएं उसका बंध्याकरण कर दो असली होगा तो नागा साधु की तरह खुद ही अपने को बधिया कर लेगा नकली होगा तो मठ मंदिर धर्म स्थान छोड़कर भाग खड़ा होगा । इसीलिए आज तक लाखों करोड़ों वर्ष के इतिहास में नागा साधु संत होकर कोई आप नहीं लगा है।


जनता भी मूर्ख है वह कीचड़ की जगह संगमरमर के तालाब में कमल खोजती है और गाड़ी बंगला हवाई जहाज सारी सुख सुविधाओं वाले चमत्कारी ढोंगी हिंदू मुस्लिम ‌ क्रिश्चियन यहूदी सिख या बुद्ध धर्म गुरुओं ‌ पुजारी संत महंत कथा वाचक उपदेश पुरोहित पंडा साधु संत की शरण में जाकर हल होकर चली जाती है जिनके पास न ज्ञान है ना सदाचार है ना नैतिकता है इसमें एक दो प्रतिशत धर्म गुरु छोड़कर लगभग सभी धर्मगुरु शामिल है मेरी समझ से कीनाराम बाबा के अनुयाई अघोर पंथ के लोग और अड़गड़ानंद जी को छोड़कर बाकी सब के सब ढोंगी दुष्कर्म और भौतिक सुख सुविधाओं में लिप्त रहने वाले हैं इसके अलावा लाखों संत महात्मा हैं लेकिन वह अज्ञात जगह पर तब साधना करके भारत देश और सनातन धर्म को बचा रहे हैं ।

आसाराम संत रामपाल राम रहीम म***** मौलवी पादरी विश्व अशोक खैरात जैसे आजकल के भौतिक सुख सुविधा वाले 99 परीक्षित साधु संत महात्मा महाराज नेताओं और बड़े-बड़े धन कुबेर लोगों के बने होते हैं जो अपने काले धन को इनके माध्यम से सफेद करके पंच मकार का भोग उनके आश्रम में जाकर करके चले आते हैं और जब बड़े-बड़े अधिकारी राजनेता सांसद विधायक मंत्री प्रधानमंत्री राष्ट्रपति और धन कुबेर लोगों का भेद खुलने लगता है तो या तो इस बाबा को जेल में डाल देते हैं या ऐसे बाबो को दुनिया से ही विदा कर देते हैं 

गलत चीज का अंत हमेशा गलत ही होता है सच्चा साधु संत महात्मा धर्मगुरु पुरोहित कथा वाचक उपयुक्त लोगों से दूर रहकर की जनता की भलाई करते हुए साधना करता है और उसी के लिए गंगा गीता गायत्री गए सब मां जैसी होती हैं 

इसलिए है भारत की सनातन जनता गलत रास्ते पर मत जाओ अपने धर्म ग्रंथ पढ़ो उसमें सब कुछ दिया है साधु संत महात्मा सन्यासी पुरोहित पंडा में आज एक प्रेषित सही बच्चे हैं सोच समझकर इनके पास जाओ 

इतना आवश्यक कहना चाहूंगा कि उपर्युक्त सभी हमारी मां के समान है लेकिन देश का कोई पीता नहीं हो सकता है यदि राष्ट्रपिता जैसा कोई हो सकता है तो वह केवल भगवान श्री रामकृष्ण नानक महावीर भगवान बुद्ध जैसे लोग भर सकते हैं गांधी जैसा व्यक्ति राष्ट्रपति पिता होने को तो छोड़ दो एक सामान्य व्यक्ति भी होने योग्य नहीं है 

इसलिए निश्चित रूप से बिना किसी संदेह के गए धरती गंगा गीता और गायत्री मां के समान होने के कारण माही हैं जो हमारे धर्म ग्रंथो में और वैज्ञानिक ग और दर्शन में लिख दिया गया वह संसार में कोई नहीं काट सकता है जबकि अन्य धर्म के लोग अपने धर्म को आंख मुड़ कर मानते हैं जबकि उनका धर्म पूरी तरह गलत सदाचार हिंद मानवता के विरुद्ध हिंसा और हत्याओं से भरा हुआ है जिसमें धरती को चपटी बताया गया है चंद्रमा के दो टुकड़े करना बताने से लेकर सूर्य को कीचड़ में डूबना और अनगिनत सत्य बात बताई गई है इसलिए अपने सनातन धर्म को आप मानकर सरकारी राजनीति में नवोदयते हुए जितने भी धरती पर गैर मुस्लिम गैर ईसाई गैर यहूदी है सबको सनातन धर्म में लाने का प्रयास कीजिए ‌ क्योंकि यह सभी सनातन ही हैं वैसे क्रिश्चियन यहूदी और मुस्लिम भी सनातन धर्म से ही परिवर्तित हुए हैं।तभी धरती पर शांति होगी समृद्धि होगी स्वस्थ लोग होंगे और राम राज्य कायम होकर सनातन धर्म पूरी दुनिया में फैल जाएगा

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