: *श्रीगणेश - पुराण अध्याय – २२३:--*
*(१. वक्रतुण्ड अवतार – देवताओं को ' गं ' मन्त्र-जप का उपदेश)*
*दत्तात्रेय बोले - 'देवताओ ! परब्रह्म परमेश्वर ही उसे मारने में समर्थ हैं ।*
*वे ही प्रभु सब प्राणियों के दुःखों को दूर करने में समर्थ हैं । तुम उनके वक्रतुण्ड स्वरूप का ध्यान करते हुए एकाक्षरी मन्त्र 'गं' मन्त्र के जपानुष्ठान करो।*
*वे भगवान् तुम्हें अवश्य ही इस घोर संकट से छुड़ा देंगे।'*
*देवताओं ने भगवान् दत्तात्रेय से वक्रतुण्ड की उपासना और उनके 'गं' मन्त्र के जपानुष्ठान की विधि सीखी और फिर उनके द्वारा उपदिष्ट विधान से अनुष्ठान करने लगे ।*
*उनकी कठिन आराधना से भगवान् वक्रतुण्ड ने सन्तुष्ट होकर दर्शन दिए । उनके अद्वितीय तेज के कारण सभी के नेत्र मुँदे जा रहे थे।*
*तभी भगवान् वक्रतुण्ड ने कहा - 'देवगण ! मैं प्रसन्न हूँ । जो अभीष्ट हो वह वर माँगो।'*
*देवताओं ने उनके पद्मों में प्रणाम करके हाथ जोड़ते हुए निवेदन किया - 'प्रभो ! हम सब मत्सरासुर के भय से सर्वत्र मारे-मारे फिर रहे हैं। उससे निस्तार का कोई उपाय नहीं सूझता । कृपा कर हमें संकट से मुक्त कीजिए।'*
*वक्रतुण्ड बोले - 'देवताओ ! तुम चिन्ता का त्याग करो । मैं मत्सरासुर का समस्त गर्व खण्डित कर दूंगा।'*
*यह कहकर उन्होंने गणों का स्मरण किया, जिससे असंख्य गण प्रकट हो गए । उस समस्त सेना को और देवताओं को साथ लेकर वे प्रभु मत्सरासुर की राजधानी पर जा पहुँचे ।*
जय श्री कृष्णा
*श्रीरामचरितमानस*
*राम नाम बिनु गिरा न सोहा ।*
*देखु बिचारि त्यागि मद मोहा ।*
*बसन हीन नहिं सोह सुरारी ।*
*सब भूषन भूषित बर नारी ।।*
_(सुंदरकांड 22/2)_
_राम राम बंधुओं, हनुमान जी को मेघनाद नागपाश से बाँध कर रावण के दरबार में लाया है। रावण के प्रश्नों का उत्तर देने के बाद हनुमान जी रावण को समझाते हुए कहते हैं कि राम नाम के बिना वाणी की शोभा नहीं है, मद मोह को छोड़ विचार कर देखो। सब आभूषणों से लदी होने पर भी बिना वस्त्र के नारी शोभाहीन होती है।_
मित्रों! राम नाम वाणी का वह आभूषण है जिसने भी इसे धारण किया वह सुशोभित हो जाता है। परंतु राम नाम वही धारण कर सकता है जिसने अहंकार व मोह त्याग दिया हो। अहंकारी व मोह ग्रसित जीव अपना ही नाम धारण किए रहता है इसलिए अशोभनीय रहता है। अस्तु वाणी सहित अपना सब कुछ शोभित करने के लिए राम नाम धारण करें अतएव
🙏🏻श्रीराम जय राम
जय जय राम🙏🏻🚩🚩🚩
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