यदि आप सच्चे सनातनी हिंदू हैं अर्थात दुनिया का कोई भी वह व्यक्ति जो क्रिश्चियन मुसलमान और यहूदी नहीं है इस चित्र पर बहुत गहराई से विचार करें और अपना विचार व्यक्त करें -डॉ दिलीप कुमार सिंह
चित्र में राधा और कृष्णा जी को होली खेलते दिखाया गया है वह भी पिचकारी के द्वारा और जिस तरह उन्होंने वस्त्र पहने हैं वह कभी भी ना तो उचित है और ना शोभा दे रहा है ।
मैं सारे विद्वानों को चुनौती देता हूं कि वह अकबर के समय के पहले रंग वाली ग़दी होली का यदि एक भी उदाहरण दिखा दें तो मैं उनका मान लूंगा कि वह विद्वान है ।
होली विशुद्ध रूप से वसंत के आगमन का पर्व है यह फसलों का पर्व है उत्साह उमंग का पर्व है सत्य अज्ञान और अंधकार पर सत्य ज्ञान और प्रकाश का पर्व है यह लोगों को नैतिकता और सदाचार सीखने वाला पर्व है चाहे वह भक्त प्रहलाद की कहानी हो या धुंध नामक राक्षसी हो कहीं भी रंग वाला गंदा होली खेलने का वर्णन किसी भी धर्म ग्रंथ वेद पुराण में नहीं हुआ है ।
क्या आपको पता है कि यह सब क्यों हो रहा है यह सब हमारे सनातन धर्म को पूरी तरह मिटाने के लिए हो रहा है क्योंकि स्त्रियों किसी भी धर्म की धुरी होती हैं उदाहरण के लिए मुस्लिम और क्रिश्चियन धर्म को देख लो उनका सारा धर्म वहां की महिलाओं के द्वारा फैल रहा है और लगातार बढ़ रहा है आप सिर पटक कर मर जाओ लेकिन एक मुस्लिम महिला कभी भी नकाब हिजाब बुर्का नहीं छोड़ सकती चाहे भीषण गर्मी के पसीने में वह पूरी तरह से डूब जाए ।
यह 1000 वर्ष से अधिक समय से लगातार चल रहा है और हालत इतनी खराब हो चुकी है कि सारे देवी देवता गंदगी और अश्लीलता का पर्याय बन गए हैं यहां तक की भगवान कृष्ण को चूड़ी बेचने वाला बना दिया गया है जबकि उसे समय चूड़ी होती ही नहीं थी कब सुंदर सुगंधित फूलों की जगह महिलाओं ने सोना चांदी पहनना शुरू कर दिया उनको यह ज्ञान भी नहीं है ।
कब हमारे विवाह संस्कार और मांगलिक कार्य में डीजे आर्केस्ट्रा और गंदे गाने बजाने लगे यह भी लोग समझ नहीं पाए और धीरे-धीरे वही शुभ और मंगल कम तथा विवाह का प्रतीक बन गया और यदि आज पूछो तो सभी यही कहेंगे कि विवाह का अर्थ ही है डीजे आर्केस्ट्रा शराब पीकर गंदगी करना ।
इसी तरह त्यौहार में भी खुलकर मांस मदिरा और गंदगी का सैलाब रहता है जैसे कि आज होली में आप पूरे देश में देख सकते हैं धीरे-धीरे कब हम सभी लोग भोजन को खाना बधाई को शुक्रिया धन्यवाद मुबारक कहने लगे कब हम विवाह को शादी बोलने लगे और कब माता-पिता मम्मी पापा हो गए समझ ही में नहीं आया ।
हालात यहां तक बिगड़ चुकी है कि आज हम शुभ होली शुभ दीपावली की जगह हैप्पी होली कहकर बड़े प्रसन्न हो रहे हैं यही काम कभी वामपंथी और वृंदा करात कहा करते थे की मस्त-मस्त है चाहे गाय काहो चाहे सूअर काहो चाहे बकरी का हो जब उनसे प्रश्न किया गया कि महिला तो महिला है चाहे वह पत्नी हो मां हो बहन हो बेटी हो बहू हो तब से गायब हो गई है ।
ऐसा इसलिए है कि हम अपने धर्म ग्रंथ को पढ़ने नहीं है पढ़ कर समझते नहीं हैं जो नहीं समझना है वही ज्यादा पढ़ते हैं जैसे ढोल गंवार शूद्र पशु नारी यह तो पढ़ेंगे लेकिन क्यों कहा गया और किसने कहा यह कभी नहीं पड़ेंगे इसलिए सच नहीं जान पाते अहिंसा परमो धर्म कह कर गांधी ने देश बर्बाद कर दिया जबकि उसके साथ जुड़ा है धर्म हिंसा तदैव च।
देश धीरे-धीरे कर बन गया यहां तक अफवाह फैला दी गई की महाभारत पढ़ने वाले घर में रोज लड़ाई झगड़ा होता है जबकि महाभारत और गीता पढ़ने वाले घर में धीर-वीर गंभीर माता-पिता के आज्ञाकारी बालक और बालिका जन्म लेते हैं ।
हमारा देश अहिंसा कैसे मान सकता है जिसके सभी देवी देवता एक से बढ़कर एक भयंकर अस्त्र-शस्त्र और दिव्यास्त्र से सुशोभित हैं कोई भी ऐसा देवी देवता आप नहीं दिखा सकते जिसके हाथों में अस्त्र-शस्त्र ना हो फिर कहां से और कैसे हम कर बन गए और अपने बच्चे बच्चियों को नाच गाना डांस सिखाने लगे जबकि पहलेकी माता बेटी बहन पत्नी उनको हथियार चलाना और वीर बना सिखाती थी । हमारे परमवीर तो तपस्या में भी अपना अस्त्र-शस्त्र नहीं छोड़ते थे तो अहिंसा इसमें कहां से आ गई अहिंसा शक्तिशाली लोगों का धर्म है कर और कमजोर लोगों का नहीं।
आज अंग्रेजी भाषा और क्रिश्चियन संस्कृति सभ्यता हमारे लिए सम्मान और अनुकरण का प्रतीक चिन्ह बना कर रह गई है हिंदी और अपनी भाषाएं लोग इसलिए बोलते हैं कि जीवन भर पढ़ने के बाद भी धड़ल्ले से अंग्रेजी पढ़ लिख बोल और समझ नहीं पाते अन्यथा कोई भी हिंदी अपनी भाषा बोलना ही बंद कर देगा यह सब पाटन की चरम सीमाएं हैं और अनेक गद्दार चापलूस चापलूस मक्खनबाज दलाल चमचे 420 इस पोस्ट को पढ़कर लाल पीला हरा नीला आग बबूला हो जाए तो क्या कहा जाए
आज से 100 साल पहले हमारे देश की स्त्रियां बिना कलंकित और अपवित्र हुए पूरा जीवन बिता देती थी और आज सब कुछ उपलब्ध होने पर भी क्यों वह कुपन्थी और गंदगी की ओर दौड़ नहीं है इसमें स्त्रियों का दोष नहीं है सारा दोस्त यहां के पुरुष लोगों का है ।
मैं सभी सच्चे सनातनी स्त्री पुरुषों से आवाहन करूंगा कि इस तरह अपने देश के धाम सदाचार नैतिकता और सच्ची बातों का वर्णन अवश्य करें अन्यथा जो पापी और विधर्मी शैतान चाहते हैं वह अपने कार्य में सफल होंगे ।
जितने भी हमारे खलनायक है उनको महानायक बनाया गया चाहे दुर्योधन हो चाहे कारण हो चाहे रावण हो चाहे जरासंध हो सबसे बड़ा उदाहरण कर्ण का देना चाहता हूं जिसको जबरदस्ती बहुत बड़ा उदार और मानवता का रक्षक कहा जाता है ।
करण जैसा कुटिल ना राधा झूठा मक्कार व्यक्ति कहीं हो ही नहीं सकता उसने साक्षात भगवान परशुराम से झूठ बोलकर दिव्य अस्त्र-शस्त्र प्राप्त किया द्रोपदी के स्वयंवर में जब वह धनुष बाण नहीं चढ़ा सका तो द्रौपदी को पाने के लिए सारे कुकर्म कर डाला और इतना गंदी बात बोला की वेश्या का धर्म क्या धर्म क्या उसने गाय की हत्या किया यह जानते हुए भी की अभिमन्यु उसका सभा भतीजा है उसने उसका कवच काट डाला पांडव लोग उसके भाई थे उसको मालूम था फिर भी उसने दुर्योधन का साथ दिया ऐसे धार्मिक कर्ण को हम आप नहीं हमारे विदेशी शत्रु विख्यात कर रहे हैं जिससे अर्जुन जैसे महावीर पीछे चले जाएं । मित्रता का उदाहरण कारण का नाटक था वास्तव में वह अधर्मी था सत्य और धर्म का अनुसरण नहीं करने वाला था।
उसे समय पूरे ब्रह्मांड में दो सबसे सुंदर स्त्रियां थी एक उर्वशी और दूसरी उत्तर जिसमें उत्तर केवल 16 वर्ष की कन्या थी और उर्वशी तो सारे ब्रह्मांड की सर्वश्रेष्ठ सुंदरी थी दोनों से अर्जुन को विवाह करने का सुनहरा अवसर र्मिला लेकिन उन्होंने एक को मां कहा और दूसरी को बेटी क्या आज कोई ऐसा व्यक्ति है जो इस तरह का उदाहरण दे सके आज तो गुरु लोग अपनी शिक्षाओं के साथ ही कुकर्म करते हुए रोज पकड़े जाते हैं ।
कहने का अर्थ यह है कि हम इतने गिर गए हैं की सबसे गिरे हुए विधर्मी सूअर शैतान भी हमको अच्छा लगने लगे हैं उनका सड़ा गला पाव टोस्ट रोटी बिस्किट मुर्गी मुर्गा सेवई हमको अच्छा लगने लगा है जबकि हमारी दादी और अम्मा के समय तक ऐसा था कि मुस्लिम घर का छुआ पानी भी नहीं पीते थे एक बार खुद मेरे सामने पिताजी और माताजी में जमकर झगड़ा हुआ था क्योंकि पड़ोस में रहने वाली एक मुस्लिम महिला थी उसके यहां से सेवई आ गया था इसके लिए पूरा महाभारत मचा और अंत में उसे फेंकना पड़ा था ।
एक और घटना बता रहा हूं एक बार हमारे गांव का एक हरिजन मुकदमा लड़ने आया तब मैं हाई स्कूल में पढ़ रहा था जब मैं उसको भोजन दिया तब उसने हाथ जोड़कर कहा बाबूजी आप किसी चीज में हमें खिला दीजिए लेकिन मुस्लिम के हाथ का छुआ बर्तन हमको मत देना। मैं उनसे कहा हमारे घर में ऐसा कुछ नहीं है हम सारे सनातनी हिंदू लोगों को उसी बर्तन में खिलाते हैं जिसमें खुद खाते हैं लेकिन उसकी पवित्र भावना देखकर मैं समझ गया कि जिसको कुछ मूर्ख इतना अछूत समझते हैं वह हरिजन भी एक मुस्लिम से लाखों गुना अच्छा है आज भी मैं वह घटना नहीं भूल पाया ।
इसलिए है आर्य पुत्रों भारत की महिलाओं लड़के लड़कियों जागो सपने में मत रहो गांधी चीजों से दूर हटो और विदेशी तथा देश के गद्दारों के मिले-जुले प्रयास को समाप्त करो वैसे भी सनातन धर्म कभी समाप्त नहीं होगा एक ही रामकृष्ण गौतम बुद्ध महावीर स्वामी नानक शिवाजी राणा प्रताप मांधाता चाणक्य चंद्रगुप्त पैदा होंगे और सारे विधर्मी शैतानों का जड़ से संघार कर देंगे ।
इसीलिए तो दुनिया में अनगिनत पुल बने और टूट गए लेकिन 1700000 साल पहले भगवान राम का बनाया रामसेतु आज भी जिंदा है जूनागढ़ टूटा किंतु खड़ा गिरनार है होते ही रहेंगे सिंह यहां की गुफाओं में आर्य भूमि अंत में रहेगी आर्य भूमि ही-
जिन विधर्मी म्लेच्छ शैतानों की छाया से भी दूर रहने के लिए हमारे देश की महिलाओं ने लाखों की संख्या में अग्नि में कूद कर जौहर कर लिया आज इस महान गड्ढे और नीच लोगों के साथ हमारे धर्म की लड़कियां औरतें भाग रही है यही दिखता है कि हम पतन की सारी सीमाओं को तोड़कर बहुत अधिक पतित हो चुके हैं हालत इतनी खराब है कि आज होली जैसे महापर्व पर भी दक्षिण भारत के अनेक राज्यों में स्कूल कॉलेज और बड़ी-बड़ी कंपनियां खुली हुई है लेकिन क्या ईद बकरीद और क्रिसमस तथा न्यू इंग्लिश ईयर पर एक भी कंपनी स्कूल कॉलेज खुला रहता है यदि हां तो बता दीजिए
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