Monday 15 May 2023

जलकुंभी और सहजन थायराइड की एक अचूक दवा !

 जलकुंभी और सहजन थायराइड की एक अचूक दवा !

 एक जंगली पौधा है, जो नदी-तालाबों के रुके हुए पानी में आसानी से उग आता है. इसे घास-फूस की श्रेणी में रखा जाता है. पानी को साफ करने के लिए लोग अक्सर इस पौधे को यूं ही उखाड़कर फेंक देते हैं. लेकिन वास्तव में जलकुंभी औषधीय गुणों से भरपूर होती है. आयुर्वेद विशेषज्ञों की मानें तो जलकुंभी में ऐसे तमाम गुण होते हैं जो आजकल की लाइफस्टाइल डिजीज जैसे थायरॉयड, हाई बीपी, अस्थमा जैसी तमाम समस्याओं में रामबाण औषधि का काम कर सकते हैं !

सहजन के फायदे क्या है ?

 इस पेड़ के पत्ते बालों के झड़ने, एनीमिया, गठिया, थायराइड, अस्थमा, कमजोर प्रतिरक्षा, डायबिटीज और वजन कम करने तक सभी सभी विकारों में उपयोगी है।आयुर्वेद में इसे एक औषधीय पौधा माना गया है जिसका इस्तेमाल कई रोगों के उपचार में किया जाता है।

हाई बीपी !

अगर आप हाई बीपी की समस्या को दूर करना चाहते हैं तो जलकुंभी का इस्तेमाल कर सकते हैं. जलकुंभी कैल्शियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम से भरपूर होती है. ऐसे में ये हाई बीपी के मरीजों के लिए काफी लाभकारी मानी जाती है. इसके अलावा जलकुंभी को बच्चों की सेहत के लिए भी काफी अच्छा माना जाता है. जिन बच्चों के पेट में कीड़े हैं, उनके लिए भी इसका सेवन लाभकारी है.

थायरॉयड !

थायरॉयड आजकल की कॉमन समस्या है. हार्मोन से जुड़ी इस समस्या के कारण कई अन्य तरीके की परेशानियां पैदा होती हैं. इसलिए इसे नियंत्रित रखना बहुत जरूरी है. थायरॉयड के इलाज के लिए आप जलकुंभी का इस्तेमाल कर सकते हैं. आमतौर पर जलकुंभी को उबालकर इसका सेवन किया जाता है.

खांसी, जुकाम और बुखार !

जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर है, वे जल्दी जल्दी खांसी, जुकाम और बुखार के शिकार हो जाते हैं. लेकिन जलकुंभी के इस्तेमाल से आपका इम्यून सिस्टम मजबूत होता है. इम्युनिटी मजबूत होने से खांसी, जुकाम और बुखार ही नहीं, बल्कि कई अन्य तरह की परेशानियां भी दूर होती हैं.

अस्थमा !

जलकुंभी को अस्थमा के मरीजों के लिए भी लाभकारी माना जाता है. दरअसल अस्थमा के मरीजों को विटामिन सी लेने की सलाह दी जाती है. जलकुंभी में प्रचुर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है. जलकुंभी में कैंसर रोधी गुण भी पाए जाते हैं. कैंसर के मरीज अगर इसका सेवन करें तो ये कैंसर सेल्स को शरीर में बढ़ने से रोकती है.

अल्जाइमर !

जिन लोगों की याद्दाश्त कमजोर है, अल्जाइमर का रोग है, उनके लिए भी जलकुंभी काफी लाभकारी है. इसके अलावा माना जाता है कि इसका सेवन मोतियाबिंद के खतरे से बचाता है. स्ट्रोक आने पर ये ब्लीडिंग को कम करने में मददगार है. लेकिन जो लोग ब्लड थिनर ले रहे हैं, उन्हें इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

कैसे करें इस्तेमाल !

आप जलकुंभी का सूप बनाकर पी सकते हैं, इसके पत्तों की सब्जी बनाकर खा सकते हैं. जलकुंभी के पत्तों को उबालकर उसका पानी भी पीया जा सकता है. इसके अलावा जलकुंभी को स्प्राउट्स में डालकर खाया जा सकता है. लेकिन किसी बीमारी की दवा के तौर पर अगर आप इसका इस्तेमाल कर रहे हैं, तो एक बार विशेषज्ञ से सलाह जरूर कर लें. उनके द्वारा बताए गए तरीके और अनुपात में ही इसका सेवन करें, ताकि किसी तरह की समस्या न हो.
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 *🌹सहजन( moringa) के गुण एवं घरेलू उपयोग🌹*

सहजन से 300 से अधिक रोगो मे बहुत फायदेमंद इसकी जड़ से लेकर फुल, पत्ती, फली, तना, गोन्द हर चीज़ उपयोगी होती है *सहजन में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, विटामिन-ए, सी और बी कॉम्पलैक्स प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।*

इसमें दूध की तुलना में 4 गुना कैल्शियम और दुगना प्रोटीन पाया जाता है। प्राकृतिक गुणों से भरपूर सहजन इतने औषधीय गुणों से भरपूर है कि इसकी फली के अचार और चटनी कई बीमारियों से मुक्ति दिलाने में सहायक हैं। यह सिर्फ खाने वाले के लिए ही नहीं, बल्कि जिस जमीन पर यह लगाया जाता है, उसके लिए भी लाभप्रद है।

सहजन पेड़ नहीं मानव के लिए कुदरत का चमत्कार। इनका सेवन कर कई बीमारियों को बढ़ने से रोका जा सकता है, इसका बॉटेनिकल नाम ‘मोरिगा ओलिफेरा‘ है हिंदी में इसे सहजना, सुजना, सेंजन और मुनगा नाम से भी जानते हैं, जो लोग इसके बारे में जानते हैं, वे इसका सेवन जरूर करते हैं।

*सहजन का फूल पेट और कफ रोगों में, इसकी फली वात व उदरशूल में, पत्ती नेत्ररोग, मोच, साइटिका, गठिया आदि में उपयोगी है।*

इसकी छाल का सेवन साइटिका, गठिया, लीवर में लाभकारी होता है। सहजन के छाल में शहद मिलाकर पीने से वात और कफ रोग खत्म हो जाते हैं।

इसकी पत्ती का काढ़ा बनाकर पीने से गठिया, साइटिका, मधुमेह, पक्षाघात, वायु विकार में शीघ्र लाभ पहुंचता है। साइटिका के तीव्र वेग में इसकी जड़ का काढ़ा तीव्र गति से चमत्कारी प्रभाव दिखता है।

मोच इत्यादि आने पर सहजन की पत्ती की लुगदी बनाकर सरसों तेल डालकर आंच पर पकाएं और मोच के स्थान पर लगाने से जल्दी ही लाभ मिलने लगता है।

सहजन की फली की सब्जी खाने से पुराने गठिया, जोड़ों के दर्द , वायु संचय , वात रोगों में लाभ होता है।

इसके ताजे पत्तों का रस कान में डालने से दर्द ठीक हो जाता है साथ ही इसकी सब्जी खाने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी कटकर निकल जाती है।

*🌹सहजन के पौष्टिक गुणों की तुलना-*

1. 100 ग्राम सहजन फली में – 5 गिलास दूध जितनी ताकतवर होता है।
2. विटामिन C – संतरे से सात गुना (1 ग्राम सहजन) होती है।
3. विटामिन A –  सहजन) होता है।

*🌹सहजन के फूल, फल, छाल और पत्ती के गुण-*

इसकी जड़ की छाल का काढ़ा सेंधा नमक और हिंग डालकर पीने से पित्ताशय की पथरी में लाभ होता है।

सहजन के पत्तों का रस बच्चों के पेट के किड़े निकालता है और उल्टी-दस्त भी रोकता है।

ब्लड प्रेशर और मोटापा कम करने में भी कारगर सहजन का रस सुबह-शाम पीने से हाई ब्लड प्रेशर में लाभ होता है।

इसकी पत्तियों के रस के सेवन से मोटापा धीरे-धीरे कम होनेलगता है। इसकी छाल के काढ़े से कुल्ला करने पर दांतों के कीड़े नष्ट होते है और दर्द में आराम मिलता है।

इसके कोमल पत्तों का साग खाने से कब्ज दूर होता है इसके अलावा इसकी जड़ के काढ़े को सेंधा नमक और हिंग के साथ पीने से मिर्गी के दौरों में लाभ होता है।

इसकी पत्तियों को पीसकर लगाने से घाव और सूजन ठीक होते हैं
पानी के शुद्धिकरण के रूप में कर सकते हैं इस्तेमाल सहजन के बीज से पानी को काफी हद तक शुद्ध करके पेयजल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

इसके बीज को चूर्ण के रूप में

पीसकर पानी में मिलाया जाता है। पानी में घुल कर यह एक प्रभावी नेचुरल क्लेरीफिकेशन एजेंट बन जाता है यह न सिर्फ पानी को बैक्टीरिया रहित बनाता है , बल्कि यह पानी की सांद्रता को भी बढ़ाता है।

*🌹काढ़ा पीने से क्या-क्या हैं फायदे*

कैंसर और पेट आदि के दौरान शरीर के बनी गांठ , फोड़ा आदि में सहजन की जड़ का अजवाइन , हींग और सौंठ के साथ काढ़ा बनाकर पीने का प्रचलन है यह भी पाया गया है कि यह काढ़ा साइटिका (पैरों में दर्द) , जोड़ों में दर्द, लकवा, दमा,सूजन, पथरी आदि में लाभकारी है।

सहजन के गोंद को जोड़ों के दर्द और शहद को दमा आदि रोगों में लाभदायक माना जाता है। आज भी ग्रामीणों की ऐसी मान्यता है कि सहजन के प्रयोग से वायरस से होने वाले रोग, जैसे चेचक के होने का खतरा टल जाता है

*🌹शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है*

सहजन में हाई मात्रा में ओलिक एसिड होता है , जो कि एक प्रकार का मोनोसैच्युरेटेड फैट है और यह शरीर के लिए अति आवश्यक है। सहजन में विटामिन-सी की मात्रा बहुत होती है। यह शरीर के कई रोगों से लड़ता है।

*🌹सर्दी-जुखाम*

यदि सर्दी की वजह से नाक-कान बंद हो चुके हैं तो , आप सहजन को पानी में उबालकर उस पानी का भाप लें। इससे जकड़न कम होगी।

*सहजन के 35 फायदे-*
1. 🌹सहजन के फूल उदर रोगों व कफ रोगों में इसकी फली वात व उदरशूल में पत्ती नेत्ररोग, मोच ,शियाटिका ,गठिया आदि में उपयोगी है।

2.🌹 सहजन की जड़ दमा, जलोधर, पथरी,प्लीहा रोग आदि के लिए उपयोगी है तथा छाल का उपयोग साईटिका, गठिया, यकृत आदि रोगों के लिए श्रेयष्कर है।

3. 🌹सहजन के विभिन्न अंगों के रस को मधुर,वातघ्न,रुचिकारक, वेदनाशक,पाचक आदि गुणों के रूप में जाना जाता है।

4. 🌹सहजन के छाल में शहद मिलाकर पीने से वातए व कफ रोग शांत हो जाते है, इसकी पत्ती का काढ़ा बनाकर पीने से गठिया, शियाटिका, पक्षाघात, वायु विकार में शीघ्र लाभ पहुंचता है। साईटिका के तीव्र वेग में इसकी जड़ का काढ़ा तीव्र गति से चमत्कारी प्रभाव दिखता है।

5.🌹 सहजन की पत्ती की लुगदी बनाकर सरसों तेल डालकर आंच पर पकाएं तथा मोच के स्थान पर लगाने से शीघ्र ही लाभ मिलने लगता है।

6🌹. सहजन को अस्सी प्रकार के दर्द व बहत्तर प्रकार के वायु विकारों का शमन करने वाला बताया गया है।

7.🌹 सहजन की सब्जी खाने से पुराने गठिया और जोड़ों के दर्द व वायु संचय , वात रोगों में लाभ होता है।

8. 🌹सहजन के ताज़े पत्तों का रस कान में डालने से दर्द ठीक हो जाता है।

9. 🌹सहजन की सब्जी खाने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी कटकर निकल जाती है।

10. सहजन की जड़ की छाल का काढा सेंधा नमक और हिंग डालकर पीने से पित्ताशय की पथरी में लाभ होता है।

11.🌹 सहजन के पत्तों का रस बच्चों के पेट के कीड़े निकालता है और उलटी दस्त भी रोकता है।

12.🌹 सहजन फली का रस सुबह शाम पीने से उच्च रक्तचाप में लाभ होता है।

13.🌹 सहजन की पत्तियों के रस के सेवन से मोटापा धीरे धीरे कम होने लगता है।

14. 🌹सहजन की छाल के काढ़े से कुल्ला करने पर दांतों के कीड़ें नष्ट होते है और दर्द में आराम मिलता है।

15.🌹 सहजन के कोमल पत्तों का साग खाने से कब्ज दूर होती है।

16🌹. सहजन की जड़ का काढे को सेंधा नमक और हिंग के साथ पिने से मिर्गी के दौरों में लाभ होता है।

17🌹. सहजन की पत्तियों को पीसकर लगाने से घाव और सुजन ठीक होते है।

18🌹. सहजन के पत्तों को पीसकर गर्म कर सिर में लेप लगाए या इसके बीज घीसकर सूंघे तो सर दर्द दूर हो जाता है।

19🌹. सहजन के गोंद को जोड़ों के दर्द और शहद को दमा आदि रोगों में लाभदायक माना जाता है।

20. 🌹सहजन में विटामिन सी की मात्रा बहुत होती है। विटामिन सी शरीर के कई रोगों से लड़ता है खासतौर पर सर्दी जुखाम से। अगर सर्दी की वजह से नाक कान बंद हो चुके हैं तोए आप सहजन को पानी में उबाल कर उस पानी का भाप लें। इससे जकड़न कम होगी।

21🌹. सहजन में कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है जिससे हड्डियां मजबूत बनती है। इसके अलावा इसमें आयरन, मैग्नीशियम और सीलियम होता है।

22🌹.सहजन का जूस गर्भवती को देने की सलाह दी जाती है। इससे डिलवरी में होने वाली समस्या से राहत मिलती है और डिलवरी के बाद भी मां को तकलीफ कम होती है।

23.🌹 सहजन में विटामिन ए होता है जो कि पुराने समय से ही सौंदर्य के लिये प्रयोग किया आता जा रहा है। इस हरी सब्जी को अक्सर खाने से बुढापा दूर रहता है। इससे आंखों की रौशनी भी अच्छी होती है।

24🌹. सहजन का सूप पीने से शरीर का रक्त साफ होता है। पिंपल जैसी समस्याएं तभी सही होंगी जब खून अंदर से साफ होगा।

25🌹. सहजन के बीजों का तेल शिशुओं की मालिश के लिए प्रयोग किया जाता है। त्वचा साफ करने के लिए सहजन के बीजों का सत्व कॉस्मेटिक उद्योगों में बेहद लोकप्रिय है। सत्व के जरिए त्वचा की गहराई में छिपे विषैले तत्व बाहर निकाले जा सकते हैं।

26.🌹 सहजन के बीजों का पेस्ट त्वचा के रंग और टोन को साफ रखने में मदद करता है।मृत त्वचा के पुनर्जीवन के लिए इससे बेहतर कोई रसायन नहीं है। धूम्रपान के धुएँ और भारी धातुओं के विषैले प्रभावों को दूर करने में सहजन के बीजों के सत्व का प्रयोग सफल साबित हुआ है।

27.🌹 सहजन पाचन से जुड़ी समस्याओं को खत्म कर देता है। हैजा, दस्त, पेचिश, पीलिया और कोलाइटिस होने पर इसके पत्ते का ताजा रस, एक चम्मच शहद, और नारियल पानी मिलाकर लें, यह एक उत्कृष्ट हर्बल दवाई है।

28🌹. सहजन के पत्ते का पाउडर कैंसर और दिल के रोगियों के लिए एक बेहतरीन दवा है। यह ब्लडप्रेशर कंट्रोल करता है। इसका प्रयोग पेट में अल्सर के इलाज के लिए किया जा सकता है। यह पेट की दीवार के अस्तर की मरम्मत करने में सक्षम है। यह शरीर की ऊर्जा का स्तर बढ़ा देता है।

29.🌹 इसके बीज में पानी को साफ करने का गुण होता है। बीज को चूर्ण के रूप में पीस कर पानी में मिलाया जाता है। पानी में घुल कर यह एक प्रभावी नेचुरल क्लैरीफिकेशन एजेंट बन जाता है। यह पानी को बैक्टीरिया रहित बनाता है ।

30. कुपोषण पीड़ित लोगों के आहार के रूप में सहजन का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। एक से तीन साल के बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह वरदान माना गया है।
31🌹. सहजन की जड़ का अजवाइन, हींग और सौंठ के साथ काढ़ा बनाकर पीने का प्रचलन है। इसका काढ़ा साइटिका रोग के साथ ही, पैरों के दर्द व सूजन में भी बहुत लाभकारी है।

32. 🌹इसका जूस प्रसूता स्त्री को देने की सलाह दी जाती है। इससे डिलवरी में होने वाली समस्या से राहत मिलती है और डिलवरी के बाद भी मां को तकलीफ कम होती है। सहजन की पत्तियों के साथ ही सजहन का फल विटामिन्स से भरा होता है। सहजन में विटामिन ए होता है, इसीलिए यह सौन्दर्यवर्धक के रूप में काम करता है। साथ ही, यह आंखों के लिए भी लाभदायक होता है।

33.🌹 पिंपल्स की प्रॉब्लम हो तो सहजन का सेवन करना चाहिए। इसके सूप से शरीर का खून साफ होता है। चेहरे पर लालिमा आती है और पिंपल्स की समस्या खत्म हो जाती है। सहजन की पत्तियों से तैयार किया गया सूप तपेदिक, अस्थमा और ब्रोंकाइटिस आदि रोगों में भी दवा का काम करता है।

34.🌹 इसमें कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है, जिससे हड्डियां मजबूत बनती है। इसके अलावा इसमें आयरन, मैग्नीशियम और सीलियम होता है। इसीलिए महिलाओं व बच्चों को इसका सेवन जरूर करना चाहिए। इसमें जिंक भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो कि पुरुषों की कमजोरी दूर करने में अचूक दवा का काम करता है। इसकी छाल का काढ़ा और शहद के प्रयोग से शीघ्र प-तन की बीमारी ठीक हो जाती है और शारीरिक दुर्बलता भी समाप्त हो जाती है।

35. *🌹सहजन में ओलिक एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है। यह एक तरह का मोनोसैच्युरेटेड फैट है और यह शरीर के लिए अति आवश्यक है। साथ ही सहजन में विटामिन सी बहुत मात्रा में होता है। यह कफ की समस्या में भी रामबाण दवा की तरह काम करता है। जुकाम में सहजन को पानी में उबाल कर उस पानी का भाप लें*।
🙏  हर घर सहजन घर घर सहजन  🌱   सहजन  के पौधे व बीज नि:शुल्क लेने के लिए संपर्क करे सुरेश सहू दुर्जाना 9983839398🙏नोट=- कृपया बीज का दुरुपयोग ना करे लग्न से पौधे बनाए और इसे अभियान के रूप में कामयाब करे हम समय समय पर आपके पौधो की फोटो अपलोड करते रहेंगे!  एडंवास बुकिंग के लिए अपना नाम गाँव का नाम लिखकर मुझे उपरोक्त नंबर पर  what's up करें

उपयोग करने से पूर्व अपने वैध या चिकित्सक की सलाह जरूर लें

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