Saturday, 28 February 2026

महापर्व होली का संपूर्ण वैज्ञानिक ‌ और धार्मिक विवेचन डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशकप्रस्तावना

: महापर्व होली का संपूर्ण वैज्ञानिक ‌ और धार्मिक विवेचन 
 डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक

प्रस्तावना 

महापर्व होली वैदिक काल से उपनिषद रामायण महाभारत से आज तक भारत के प्राचीनतम महापर्वों  में से एक है भारत के सबसे बड़े महापर्व दीपावली दशहरा रक्षाबंधन और होली में से होली इस समय सर्वाधिक लोकप्रिय महापर्व बन गया है होली का महापर्व हर वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा के दिन पड़ता है इसी दिन होलिका दहन होता है और अगले दिन लोग रंग भरी होली अबीर गुलाल फूलों की ओर भस्म की होली खेलते हैं लेकिन प्राचीन काल में गीले रंग की ‌‌ कीचड़ और डीजल मोबिल और गंदी चीजों तथा गोबर की होली का कहीं कोई अस्तित्व नहीं था।

होली मनाए जाने का कारण 

होली मनाये जाने के विभिन्न कारण है जिसमें पहला कारण है कि भगवान शिव को उनके अखंड समाधि से विचलित करने के कारण कामदेव ने बहुत ही सुंदर कामुक वातावरण पैदा कर अपनी पत्नी रति के साथ शिवजी को समाधि से जागृत कर दिया या और शिवजी ने तीसरा नेत्र खोल कर कामदेव को भस्म कर दिया जिससे पूरे विश्व में हाहाकार मच गया तब उन्होंने बिना शरीर के कामदेव को जीवन प्रदान किया होली मनाए जाने का यह एक प्रमुख कारण है दूसरा कारण है होलिका द्वारा प्रहलाद को जलाकर मारने का प्रयास जिसमें प्रहलाद भगवान श्री हरि विष्णु की कृपा से जीवित बच गए और होलिका भस्म हो गई उसका वरदान भी उसे नहीं बचा पाया इसलिए होली मनाई जाती है।

होली महापर्व से जुड़ी एक कथा ढुंढा नाम की राक्षसी की है जिसे शिवजी ने अमरत्व का वरदान दिया था उसने बच्चों पर भयंकर अत्याचार किया तब सम्राट रघु ने ब्रह्म ऋषि  वशिष्ठ की सलाह पर बच्चों से नाच गाना शोरगुल और हुड़दंग मचाकर लकड़ी उपले इकट्ठा करके उसमें अन्य जड़ी बूटियां डालकर मंत्र पढ़कर उसे जलाने का उपाय बताए जिससे ढुंढा नाम की राक्षसी का विनाश हो गया होली की की वर्तमान प्रथा ‌ और होलिका दहन अधिक से अधिक इसी पर आधारित है।

‌ होली शब्द का अर्थ और इसका ‌ वैज्ञानिक और  मनोवैज्ञानिक  कारण 

प्राचीन होलिका पर्व और वर्तमान स्वरूप वास्तव में होली वास्तव में होलका का शब्द से निकला है होलका का अर्थ कच्चा और आधा पक्का अन्न होता है होलिका दहन में आज भी अन्न को दहन करने की परंपरा तभी से चली आ रही है लेकिन वास्तव में होली का महापर्व ऋतु परिवर्तन का पर्व है जिसमें गर्मी आने वाली होती है और ठंडी विदा होने वाली होती है ऋतु परिवर्तन के संक्रमण काल में जब लोग प्राचीन काल में खाली रहते थे तब होली का पर्व शुरू हुआ इसे प्राचीन काल में अन्न का महापर्व और काम महोत्सव भी कहा जाता था इस समय लोगों का उत्साह उमंग और उत्तेजना चरम पर होती है यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो चुका है और होलिका पर्व के बाद यह तनाव उत्तेजना काफी हद तक दूर हो जाता है मनोवैज्ञानिक रूप से हर व्यक्ति होली में सहभागिता करके काफी हद तक अपने अकेलेपन की भावना से मुक्त हो जाता है उसे लगता है कि उसका भी संसार में कोई है।

‌ रंग वाली होली अकबर के समय से प्रारंभ हुई 

यह असत्य पर सत्य की अंधकार पर प्रकाश की और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का प्रतीक है  होली मनाने के बाद ही अन्न कटना शुरू हो जाता था क्योंकि फसलें तैयार हो जाती हैं 8 दिन का होलाष्टक पूरी तरह आराम करने का आमोद प्रमोद का और उमंग उत्साह का दिन होता है जहां तक होली पर रंग की बात है तो उसमें अबीर गुलाल सूखे रंग का प्रयोग होता था‌ मुझे वातावरण में शुद्ध हो जाता था और वातावरण में पहले हुए विषाणु जीवाणु कीटाणु रोगाणु नष्ट हो जाते थे लेकिन गीले रंग का प्रयोग अकबर के समय में उसकी रंगीन कामुक प्रकृति को पूरा करने के कारण शुरू हुआ मेवाड़ और विजयनगर की राजधानी हंपी में 16वीं शताब्दी के चित्रों में इसका वर्णन मिलता है रीतिकाल में भी रंग वाली होली का वर्णन मिलता है इसके पहले कहीं गीले रंग का वर्णन नहीं मिलता है।

होली पर्व के समय की प्रकृति और वातावरण 

वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो होली का महापर्व बसंत ऋतु में आता है इस समय संपूर्ण वातावरण फल फूल फसलों से भरा होता है और वातावरण में आम के बौर एक बहुत ही तीखी और कामोत्तेजक गंध छोड़ते हैं और सभी पेड़ पौधे पुष्पों से लदे रहते हैं शीतल मंद सुगंधित मलय पर्वत की हवा बहती हैं चारों ओर का वातावरण बहुत ही सुंदर सम्मोहक उत्तेजक होता है। ना अधिक ठंड और ना अधिक गर्म मौसम होता है यह समय प्रकृति प्रजनन और वंश वृद्धि के लिए सर्वोत्तम होता है इसके साथ-साथ चारों तरफ प्रकृति में अद्भुत छटा होती है और फसलों के पक जाने की खुशी भी रहती है होलिका दहन होने के कारण वातावरण में व्याप्त विषाणु कीटाणु रोगाणु जीवाणु नष्ट हो जाते हैं और विभिन्न जड़ी बूटियां और फसलों के आग में जलाने से उत्पन्न सुगंध संपूर्ण वातावरण को संतुलित करके हानिकारक प्रभाव को नष्ट कर देती है और वातावरण में फैले विषैले वातावरण और जहरीले जीव जंतुओं को भी बिलों के अंदर छुप जाने को बाध्य करती हैं इस प्रकार हर महापर्व की तरह होली का महापर्व भी पूरी तरह विज्ञान सम्मत प्रकृति और पर्यावरण पर आधारित है तेल और उबटन (सरसों का बुकवा)लगाने से शरीर की हड्डी नस नाड़ियां सभी स्वस्थ हो जाती हैं।

गीले रंगों का प्रयोग कब से शुरू हुआ 

गहराई से देखने पर पता चलता है कि गीले रंग का प्रयोग मुगलों के काल में शुरू हुआ जिसे अकबर ने खूब फैलाया अकबर का मीना बाजार तो जगत विख्यात है ही बाबर ने इस त्यौहार को मदिरा काम वासना से जोड़कर इस महापर्व को विकृत किया और जनता तथा राजपूतों को मांस मदिरा और नशे का अभ्यस्त कर दिया कालांतर में होली मांस मदिरा जुआ और अश्लीलता का पर्व बन गया और आज तक इसी रूप में चल रहा है इसको गंदा गंदा अश्लील और मैथुनी करने में भोजपुरी फिल्मों और बालीवुड फिल्मों का बड़ा हाथ है और अमिताभ बच्चन पवन सिंह हनी सिंह जैसे रसिक लोगों ने इसको गंदगी के रूप में बदलने में सबसे बड़ा योगदान दिया ।

आज तो लोग कीचड़ तेल मोबाइल यहां तक की मल मूत्र और गंदे चीजों गोबर  इत्यादि फेंक कर होली मनाते हैं और इसके रूप को विकृत और वीभत्स कर दिए हैं रसिक रंगीन मिजाज लोग होली को बिल्कुल नंगा कर दिए हैं और इसमें रसिक रंगीन मिजाज की महिलाएं सबसे आगे हैं जो अपने धर्म से गिरकर अधर्म का कार्य करती हैं भगवान श्री कृष्ण से गीले रंगों को जोड़ना ठीक उसी तरह की मूर्खता है जिस तरह से बौधायन के प्रमेय को पाइथागोरस का प्रमेय कहना । अश्लीलता और विकृत रूप मांस मदिरा का प्रचार प्रसार नशे की चीजें यह सभी समाज के गंदे प्रभावशाली लोगों की देन है होली में ऐसा पहले कुछ नहीं था अब धीरे-धीरे लोगों में चेतना लौट रही है और होली के गंदे काम उत्तेजक और विकृत रूप से लोग दूर है रहे हैं जिस तरह से मुगल काल के पहले राधा का कोई अस्तित्व नहीं है इस तरह होली में रंगों का अस्तित्व ही मुगल काल के पहले नहीं है पहले केवल अबीर गुलाल और सूखे रंग का फूलों प्रयोग होता था यह प्रामाणिक रूप से बिल्कुल सत्य है

होली का वास्तविक स्वरूप 

प्राचीन काल में कहीं भी होली में आज की होली का कोई भी अंश नहीं था पहले लोग अबीर गुलाल हल्दी और फूलों की होली खेलते थे जिससे वातावरण पूरी तरह शुद्ध हो जाता था लोगों में रोग बीमारियां दूर हो जाती थी समाज में सद्भावना और सौभाग्य तथा सदाचार की भावना की वृद्धि होती थी और इससे वातावरण के फैले हुए सूक्ष्म जीवाणु विषाणु रोगाणु नष्ट हो जाते थे और वातावरण सुगंधित हो जाता था अग्नि में दहन करते समय उसमें लकड़ी उपले और विभिन्न प्रकार के जड़ी बूटियां अन्न के जलने से वातावरण सुगंधित और दिव्य हो जाता था मुगलों के आगमन के पहले कहीं भी आज की गंदी-भद्दी अश्लील और मैथुनी होली का कहीं भी वर्णन नहीं है इसको मुगलों ने गंदा रूप दिया फिल्मों ने वीभत्स से बनाया भोजपुरी फिल्मों ने और उसके गायको ने होली को गंदी ब्लू फिल्मों का रूप दे दिया और आज इंटरनेट मीडिया और समाज के गंदे रसिक रंगीन मिजाज के लोगों ने औरतों को अपने जाल में फंसाने का एक साधन बनाकर होली को अश्लीलता और दुराचार से भर दिया है जिसे समाप्त होना अति आवश्यक है यही कारण है कि होलिका दहन से लेकर होली खेलने तक शायद ही कोई ऐसा गांव बचता है जहां मारपीट ना होती हो नशा और मदिरा का प्रयोग भी मुगलों के द्वारा किया गया जिसको आज प्रिंट इलेक्ट्रानिक और सोशल मीडिया ने थोड़ा सा लाभ पाने के लिए जमकर प्रोत्साहित किया है होली का वास्तविक रूप कहीं खो गया है जिसको पुनर्स्थापित करने की बहुत आवश्यकता है।

होलिका दहन की विधि ‌ वर्ष 2026

होलिका दहन में बसंत पंचमी के दिन एक जीवाणु नाशक टहनी सामान्य रूप से रेंड़ के डाली के स्थापना की जाती है होलिका तक वह सूख जाता है और उसके चारों ओर सूखी लकड़ियां पत्ते उपली डालकर उसमें जड़ी बूटियों और अधपके  अन्न की बालियां और अन्य चीजें शुभ मुहूर्त में डालकर अग्नि लगाई जाती हैं और अग्नि से होलिका से संबंधित मंत्र :: ऊं होलिकायै नमः;;भी पढ़े जाते हैं और संकल्प किया जाता है कि ज्ञान प्रकाश और अच्छाई का विस्तार हो अज्ञान का अंधकार का और बुराई का नाश हो ।संपूर्ण गांव ‌ मोहल्ले और कॉलोनी  के लोग एक साथ एकत्र होते हैं जिससे गांव में एकता और बंधुत्व की भावना भी प्रबल होती है और प्रचंड अग्नि की ज्वालाएं और उससे उठते हुए सुगंधि चारों ओर फैल जाती है इसके बाद लोग पके हुए अनाज की बालियां ‌ नारियल जड़ी बूटियां अपने-अपने घरों में लाकर उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं और घर में तेल और उबटन लगाने के बाद उसका बचा हुआ अंश भी होली जलाने पर डाल देते हैं जिससे माना जाता है कि सभी साल भर स्वस्थ रहते हैं

इस वर्ष होलिका दहन कब है और होली कब खेली जाएगी

सभी कारण पर भद्र और चंद्र ग्रहण पर सूतक काल पर उदय तिथि पर और पंचांग के अन्य सभी तत्वों पर विचार विमर्श करने के बाद हमारेअलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर ‌ द्वारा पूरे प्रमाण के साथ यह स्थापित किया जाता है कि इस वर्ष 3 मार्च को सायंकाल 6:48 से रात 8:51 के बीच होलिका दहन किया जाना सबसे उचित होगा अन्य कोई भी विकल्प नहीं है और धूलंडी अर्थात रंगोत्सव अर्थात होली के रंग का त्योहार 4 मार्च को मनाया जाएगा जो प्रतिपदा की तिथि है इसका कारण नीचे दिया जा रहा है 

होलिका दहन के लिए आवश्यक होता है कि पूर्णिमा की तिथि हो यदि उदय तिथि हो तो सबसे अच्छी बात है भद्रा और सूतक की छाया ना हो ‌ सूर्यास्त के बाद का समय अर्थात प्रदोष काल होना चाहिए और चंद्र ग्रहण नहीं पढ़ना चाहिए और यह सभी एक साथ तीन मार्च को प्राप्त हो रहा है 

इस वर्ष होलिका दहन पर भद्रा की छाया है ‌ 2 मार्च को पूर्णिमा की तिथि सायं कल 5:55 से प्रारंभ हो रही है और 3 मार्च को 5:07 पर समाप्त हो रही है इसके अतिरिक्त इस वर्ष पूर्णिमा की तिथि 3 मार्च को ही है क्योंकि चंद्र ग्रहण प्रामाणिक रूप से पूर्णिमा के दिन पड़ता है यह अटल वैज्ञानिक सत्य है ‌ यह चंद्र ग्रहण दोपहर के बाद 3:20 से सायं काल 6: 47 तक रहेगा ‌ इन सब कर्म से अनेक विद्वान और ज्योतिषी 2 मार्च को होलिका दहन आधी रात के बाद 12:50 से दो बजे रात के बीच करने का विचार देते हैं जो भद्रा पुच्छ की दशा है लेकिन यह भी बहुत उचित नहीं है इसलिए इस कालखंड में होलिका दहन नहीं हो सकता और इसका सूतक काल 9 घंटे पहले प्रारंभ होता है इसलिए भी इसके पहले होलिका दहन नहीं होगा इसलिए इस वर्ष 3 मार्च की रात में 6-48 से रात में 8-50 तक होलिका का दहन विधि विधान पूर्वक मंत्रों के उच्चारण के साथ किया जाएगा। मंगलवार का दिन और बसंत की ऋतु होगी।

पूर्णिमा की तिथि 2 मार्च को 5.55 पर लगेगी और 3 मार्च को सायंकाल 5.07 पर समाप्त हो जाएगी इसलिए रंग वाली होली बिना किसी दुविधा के 4 मार्च को खेली जाएगी जिसमें कोई असमंजस की स्थिति नहीं है जबरदस्ती कोई करे तो अलग बात है धुलंडी अर्थात होली खेलना कृष्ण पक्ष प्रथम को होता है और इस प्रकार भी यह 4 मार्च को ही है इसमें कोई भी संदेह की बात नहीं है इतना अवश्य है कि  के बाद ही होली खेलने प्रारंभ किया जाए वह उत्तम रहेगा क्योंकि इस समय से कृष्ण पक्ष प्रारंभ होगा।

होलिका दहन में पूजा पाठ का विधान 

लोक आचार विचार और धर्म ग्रंथो के अनुसार होलिका दहन में**ऊं होलीकायै नमः **का मंत्र पढ़ा जाता है जिसमें गेहूं की बाली और अन्न के दाने कच्चा सूत जड़ी बूटियां नारियल और जल का अर्पण किया जाता है इसके अतिरिक्त दिन में लगाए जाने वाला उबटन का शरीर से गिरा हुआ भाग भी होलिका में जलाया जाता है शांति के साथ भगवान श्री हरि विष्णु और भक्त प्रहलाद और माता लक्ष्मी का ध्यान करना चाहिए कि ‌ और होलिका की परिक्रमा करके भुना हुआ अन्न का दाना लाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करना चाहिएया तो आप अपने इष्ट किसी भी देवी देवता का या श्री हनुमान जी का ध्यान कर सकते हैं यह बात बिल्कुल याद रखें की होली प्रमुख रूप से अन्न का पर्व है या वसंत के आगमन का महापर्व है इसके अतिरिक्त सनातन धर्म के हर महापर्व की तरह यह भी बुराई पर अच्छाई सत्य पर सत्य और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है किसी भी प्रकार का गलत कार्य दुराचार होली की आड़ में गंदे क्रियाकलाप किसी भी प्रकार के मांस मदिरा नशा का सेवन एवं पराई स्त्री पराये पुरुष का सेवन उनका मर्दन होली के सारे अच्छे फल को नष्ट करके पूरे परिवार पर आपदा विपत्ति और अंधकार का साया देता है वैसे कलयुग है जिसका जो मन में आ रहा है वही कर रहा है इसलिए उसका फल भी वैसे ही प्राप्त हो रहा है

Friday, 27 February 2026

दीवानी न्यायालय अधिवक्ता संघ जौनपुर सुभाष चंद्र यादव ‌ द्वारा मध्यस्थता केंद्र के बारे में श्रीमती रजनी सिंह और विजय शंकर श्रीवास्तव द्वारा स्थाई लोक अदालत के बारे उस्मान अली के द्वारा विधियों के में ‌ बताया गया।

राज्य ‌ विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के निर्देशन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में ‌ जनपद नया अध्यक्ष श्री सुशील कुमार शास्त्री के नेतृत्व और सचिव पूर्ण कालिक सिविल जज सुशील कुमार कुमार सिंह के ‌ देख रेख में ‌ आज 1:00 बजे साक्षरता जागरूकता कार्यक्रम लिंग की समानता स्त्री लोक अदालत स्थाई लोक अदालत लिंग चयन और बच्चों के लिंग में गिरावट कन्या भ्रूण हत्या के बारे में ‌‌ मोहम्मद हसन स्नातकोत्तर महाविद्यालय जौनपुर में आयोजित किया गया। इस विधिक साक्षरता जागरूकता शिविर में सिविल जज सीनियर डिवीजन/ सचिव ‌ सुशील कुमार सिंह डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह प्राचार्य डॉक्टर अब्दुल कादिर ‌ दीवाने अधिवक्ता संघ सुभाष चंद्र यादव विजय शंकर यादव रजनी सिंह आर पी सिंह ‌ सहित अन्य गणमान्यजन   ‌ शिक्षक और शिक्षिकाएं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
[2/26, 12:04 PM] Dileep Singh Rajput Jounpur: कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के वंदना के साथ हुआ और सभी उपस्थित अतिथियों का माल्यार्पण किया गया। महाविद्यालय के छात्र छात्राओं द्वारा स्वागत गीत सरस्वती मां के गीत और अन्य कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए ‌

संबोधित करते हुए सचिव पूर्णकालिक सीनियर डिवीजन‌‌ सुशील कुमार सिंह ने कहा कि चोपराधिकरण वर्तमान समय में अपने कार्य और उद्देश्य के बारे में बहुत व्यापक हो चुका है ‌ इसमें महिलाओं बच्चियों और पीड़ित व्यक्तियों क्तियों को निःशुल्क सहायता प्रदान की जाती है विद्वान और योग्य अधिवक्ता पैनल लायर ‌ परलीगल वॉलिंटियर्स एवं अन्य सदस्य गण विद्यमान है जो प्राधिकरण के साथ मिलकर पूरी तरह से निशुल्क सहायता देने में मदद करते हैं
[2/26, 12:25 PM] Dileep Singh Rajput Jounpur: डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह डिफेंस काउंसिल ‌ जनपद न्यायालय जौनपुर द्वारा बताया गया कि जब देश में मुकदमा की संख्या करोड़ों की संख्या में पर हो गए तब जस्टिस पी एन भगवती और जस्टिस भी कृष्णा अय्यर के नेतृत्व में गंभीर विचार विमर्श के बाद ‌ ‌ विधिक सेवा अधिनियम के अंतर्गत ‌ राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की स्थापना ‌ की गई ।‌‌‌ उसके बाद सफलता से प्रभावित होकर जल्दी है संपूर्ण भारत में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और सभी जिलों में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की स्थापना की गई‌। नियम कानून का उल्लंघन होता है तो सचिव पूर्णकालिक ‌‌ ‌ जनपद के किसी भी‌  अधिकारी को आदेश निर्देश जारी कर सकता है।‌ उन्होंने उपस्थित लोगों से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण स्थाई लोक अदालत और राष्ट्रीय लोक अदालतों से अधिक से अधिक लाभ उठाने का आग्रह किया
 इसी क्रम में अध्यक्ष ‌दीवानी न्यायालय अधिवक्ता संघ जौनपुर सुभाष चंद्र यादव ‌ द्वारा मध्यस्थता केंद्र के बारे में श्रीमती रजनी सिंह और विजय शंकर श्रीवास्तव द्वारा स्थाई लोक अदालत के बारे उस्मान अली के द्वारा विधियों के में ‌ बताया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता और आभार ज्ञापन प्राचार्य डॉ अब्दुल कादिर द्वारा किया गया

Wednesday, 25 February 2026

‌ एक 26 फरवरी से 10 मार्च तक मौसम की भविष्यवाणी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर

‌ एक 26 फरवरी से 10 मार्च तक मौसम की भविष्यवाणी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर 

‌ आज अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस रहेगा जबकि कल 30 डिग्री सेल्सियस तापमान पर हो जाएगा और न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस रहेगा।कल से बहुत तेजी से बढ़ेगी गर्मी और मार्च के प्रथम सप्ताह में भीषण गर्मी पड़ेगी‌ जौनपुर पूर्वांचल आसपास उत्तर प्रदेश पश्चिम उत्तर मध्य और दक्षिण भारत के अनेक भागों में तापमान अचानक ही उछलकर 35 से 40 डिग्री सेल्सियस के भीषण स्तर पर पहुंच जाएगा 

जबकि इस कालखंड में न्यूनतम तापमान 15 से 17 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहेगा अर्थात सुबह और रात सुहानी होगी बढ़ती हुई प्रचंड अचानक गर्मी का असर हर जीव जंतु मनुष्य और पेड़ पौधों पर पड़ेगा इससे देर से बोई गई फसलों के उत्पादन पर भी असर पड़ेगा ‌ महाराष्ट्र राजस्थान पंजाब हरियाणा मध्य प्रदेश और उड़ीसा तथा दक्षिण के पथरी भागों पर अचानक इस भरी हुई गर्मी के कारण 10 मार्च से 20 मार्च के बीच संपूर्ण भारत में अनेक मौसम के परिवर्तन आंधी तूफान झंझा झकोर घन गर्जन वज्रपात वारिदमाला बिजली की चमक और गरज ‌ के साथ तेज हवाओं या आंधी तूफान का जन्म होगा और गई हुई विक्षोभ बनेंगे। जिसके कारण प्राकृतिक आपदाओं का भी सामना करना होगा भारत के अलावा भूमध्य रेखा से कर्क रेखा और मकर रेखा के बीच के स्थान में एवं दक्षिण पूर्वी एशिया में भूकंप ज्वालामुखी सुनामी लहरें ‌ और कहीं कहीं भीषण वर्षा भूस्खलन देखने को मिलेगा हिंद महासागर और प्रशांत महासागर तथा अटलांटिक महासागर के कई क्षेत्रों में भीषण समुद्री चक्रवातों के जन्म होने की संभावना प्रतीत हो रही है। 

अचानक एकदम तेजी से बढ़ाने वाली गर्मी का कारण सूर्य के अंदर प्रचंड विस्फोट सौर कलंक और सौर ज्वालाओं का बना है इसमें पृथ्वी पर उत्पन्न भीषण विविध प्रकार के प्रदूषण और जहरीली हवा एवं प्लास्टिक के कूड़ा कचरा का भी बहुत बड़ा हाथ है जिसके कारण उत्पन्न जहरीली हवा अनेक परिवर्तन संपूर्ण दुनिया में करेगी। इस बार की गर्मी 1 मार्च से लेकर 15 अक्टूबर तक चलेगी और 15 अप्रैल से लेकर 15 जून तक पूरे देश में गर्मी अपने चरम शिखर पर होगी उत्तर के मैदाने में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस एवं भारत के कई स्थानों में 49 डिग्री सेल्सियस के बीच अंतर को पार करेगी

होलाष्टक और शुभ तथा मांगलिक कार्य-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि ‌ प्रस्तावना

होलाष्टक और शुभ तथा मांगलिक कार्य-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 
‌ प्रस्तावना 
होलाष्टक एक महत्वपूर्ण कालखंड है होली के 8 दिन पहले शुरू होता है और होलिका दहन के साथ समाप्त हो जाता है जब बसंत रितु चरम पर होती है और शीतल मंद सुगंधित पवन ‌ के झोंके जीवन को नई स्फूर्ति से भर देते हैं और नए जीवन का उत्साह हो जाता है इस कालखंड में होलाष्टक होली का महापर्व और बसंत रितु तथा नया सनातन भारतीय वर्ष परम पावन नवरात्रि और श्री रामनवमी पड़ते हैं जो भारत के लिए एक नवीन चेतना का संचार करते हैं।

किस लिए होलाष्टक का कालखंड पड़ा 

होलाष्टक का कार्य ‌ कालखंड भक्त शिरोमणि प्रहलाद और हिरण्यकश्यप के साथ जुड़ा हुआ है प्रहलाद श्री हरि विष्णु के अनन्य भक्त थे और हिरण्यकश्यप स्वयं को ईश्वर मानता था इसलिए उसने स्वयं को ईश्वर घोषित कर दिया और सारी प्रजा को ईश्वर मानने को बाध्य किया।‌ लेकिन प्रह्लाद ने अपने पिता को बहुत बार समझाया कि श्री हरि विष्णु ही ईश्वर है उन्हीं की पूजा करो क्रोधित होकर पहले तो हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को अपनी बहन को लेकर के साथ जलाने का प्रयास किया इसके बाद पहाड़ से नीचे धकेल दिया फिर हाथी से कुचलकर मारने का प्रयास किया और अनगिनत कष्ट दिए अंत में प्रहलाद को खंभे से बांधकर कहा अपने ईश्वर को बुलाओ अन्यथा तुम्हारा वध कर दूंगा तभी भगवान नरसिंह इस खंबे से निकल पड़े और हिरण्यकश्यप का अपनी जगह पर बैठ कर अपने नाखून से चीर डाला तभी से 8 दिन का होलाष्टक का पर्व ईश्वर भक्ति और प्रहलाद की भक्ति की शक्ति के रूप में मनाया जाता है।

‌ होलाष्टक में क्या-क्या पूरी तरह से वर्जित है 


होलिका दहन से 8 दिन पहले तक सभी प्रकार के शुभ मांगलिक कार्य पूरी तरह से वर्जित किए गए हैं इस कालखंड में गृह प्रवेश करना मना है कोई भी विवाह करना पूरी तरह वर्जित है वहां मकान सहित हर खरीदारी भी पूरी तरह वर्जित है इसके अलावा नया कार्य शुरू करने की भी पूरी तरह माना ही है इस कालखंड में ग्रह नक्षत्र और मौसम के प्रभाव से ‌ धूम धड़ाका हर्षोल्लास गाजा बाजा और संगीत पूरी तरह सेमाना है‌ ऐसा न करने पर आने वाले समय में उसका भीषण परिणाम दिखाई देता है इस बार यह 24 फरवरी से लेकर 3 मार्च होलिका दहन के दिन तकहै। 


होलाष्टक में क्या-क्या करना चाहिए 

प्लास्टिक में भगवान श्री हरि विष्णु माता लक्ष्मी भगवान शिव मां पार्वती बजरंगबली की पूजा उपासना करना चाहिए अपने इष्ट देवी देवता का ध्यान पूजन भी कर सकते हैं इसके अलावा हनुमान जी का नाम लेकर हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ भी करना चाहिए अपना ध्यान भक्ति आराधना में लगाने से इस कालखंड में सत्य की मानसिक अनुभूति होती है और मां को बहुत ही गहरी शांति प्राप्त होती है जीवन को नई दिशा भी मिलती है 

उपसंहार 

यदि सांस्कृतिक और वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो यह कालखंड बहुत ही संक्रमण कालीन होता है इस समय हर्ष और उल्लास का कार्य करने से मन में विरोधी शक्तियां प्रकट हो जाती हैं और शुभ मांगलिक कार्य का अच्छा परिणाम नहीं निकलता है इस कालखंड में होने वाले विवाह वहां खरीददारी इत्यादि भी अंत में बुरा प्रभाव ही देता है यह जाड़े के अंत और गर्मी के प्रारंभ का बसंत ऋतु का मौसम है हमारे प्राचीन ऋषि मुनि और मनुष्यों ने बहुत ही गहन अध्ययन और अनुसंधान करके विभिन्न प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्य तथा व्रत पर्व अनुष्ठान पूजा पाठ यज्ञ हवन का आविष्कार किया है जिसे आज पूरी दुनिया मान रही है लेकिन हम लोग भटक गए हैं यह देखकर बड़ा आश्चर्य हो रहा है कि तमाम लोग विवाह पूजा पाठ अखंड रामायण जैसे कार्य भी इस कालखंड में कर रहे हैं इसका निर्णय व स्वयं करेंगे कि इसका क्या परिणाम होता है।

Monday, 16 February 2026

दीवानी न्यायालय जौनपुर में महाशक्तिशाली बम की फैल गई भगदड़ सड़कों पर पैर रखने की जगह नहीं बची हाहाकार मचा देखो विस्फोट होता है कि आजमगढ़ की तरह केवल अफवाह ही निकलती है जौनपुर: .

ख़बर सूत्रों से::;दीवानी न्यायालय जौनपुर में महाशक्तिशाली बम की फैल गई भगदड़ सड़कों पर पैर रखने की जगह नहीं बची हाहाकार मचा देखो विस्फोट होता है कि आजमगढ़ की तरह केवल अफवाह ही निकलती है      परिसर में अफरा तफरी का माहौल 
 जौनपुर: .                सूचना की कॉपी 
        सोर्स  : डिफेंस काउंसिल डा दिलीप सिंह 
जौनपुर कचहरी और पुलिस लाइन को बम से उड़ाने की धमकी

जौनपुर: दिवानी कचहरी और पुलिस लाइन को बम से उड़ाने की धमकी भरा एक ई-मेल मंगलवार की सुबह पुलिस अधीक्षक के सरकारी ई-मेल पर आते ही हड़कंप मच गया। तत्काल पुलिस की अलग अलग टीमों ने कचहरी पहुंचकर सघन जांच अभियान शुरू कर दिया। बार एसोसिएशन के सहयोग से कचहरी को खाली कराया जा रहा है। पुलिस और बार के पदाधिकारियों ने सभी से अपील किया कि कचहरी को जितना जल्दी हो परिसर को खाली कर दें।  जिस समय धमकी भरा ई-मेल आया उस समय कचहरी में करीब 5 से 8 हजार लोगों की भीड़ थी।  अचानक बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल प्राप्त होते ही हड़कंप की स्थिति मन गई। लोग अचानक जब कचहरी से बाहर निकले तो बाहर गांधी तिराहे तक भीषण जाम लग गया। पुलिस लाइन में भी आंतरिक दस्ते की टीम ने सघन जांच अभियान शुरू किया। एसएसपी कुंवर अनुपम सिंह ने बताया कि ई-मेल मिलने के बाद जांच की जा रही है। अभी तक कुछ मिला नहीं है।

 भारत का कोई सबसे चालाक व्यक्ति भी किसी अन्य देश की सीमा पार नहीं कर सकता है यहां सैना पुलिस बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स और ‌ सात स्तरीयगुप्तचर तंत्र के रहते हुए भी 100/1000/ 100000 लाख नहीं करोड़ों की संख्या में ‌ बांग्लादेशी रोहिंग्या आतंकी घुस बैठिए पाकिस्तान और तमाम मुस्लिम देशों को लोग  ‌ एक अंदामाद की तरह नहीं डरता से भाई रोक-टोक आ रहे हैं ‌ 1947 से यही कम चल रहा है सरकार कोई हो प्रधानमंत्री कोई हो लेकिन लाल बहादुर शास्त्री को छोड़कर इनका अवैध घुसपैठ कभी नहीं रुक सबसे अधिक मोदी जी के शासनकाल में आए हैं और इनकी संख्या 20 करोड़ हो गई है किसी भी सुरक्षा तंत्र या एजेंसी का अब कोई मतलब नहीं रह गया है जब जहां चाहेंगे आतंकी वही विस्फोट करके उड़ा देंगे इसके पहले भी अनगिनत हमले हुए हैं कुछ नहीं कर पाए लोग आखिर भारत में ही क्यों ‌ दूसरे देश में घुसते ही तुरंत गोली मार दिया जाता है और यहां कबाब बिरयानी खिलाकर 20 से 30 साल तक उसका परीक्षण किया जाता है।दुनिया का हर व्यक्ति घुस जाता है एक ही अर्थ हो सकता है या तो सरकार ऐसा चाहती होगी या तो सारे तंत्र बिक चुके हैं।

‌‌ और यह भी निश्चित है कि कहीं ना कहीं ऐसा कांड होगा क्योंकि शैतान सारे देश में फैल चुके हैं और 2047 तक अपना लक्ष्य पाने के लिए हर रास्ता अपनाने को तैयार हैं जब सब लोग निश्चित हो जाएंगे तब यह कांड होगा और जहां कह रहे हैं वहां नहीं होगा इस देश की हालत इतनी खराब है कि थाने में घुसकर भी पूरे थाने को बम से उड़ाया जा सकता है बाकी की बात ही छोड़ दीजिए सबसे सुरक्षित सैन्य विभाग में पुलवामा जैसा कांड हो सकता है तो पूरा देश असुरक्षित ही है आप स्वयं सुरक्षित रहें तभी सुरक्षित रह पाएंगे‌ इसमें कहीं ना कहीं योगी जी के विरुद्ध भी षड्यंत्र और साजिश गहरा है

आज वर्ष का प्रथम सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है लेकिन भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए भारत में ग्रहण और उसके सूतक का कोई प्रभाव नहीं होगा इसलिए आज भारतीय पंचांगों में इस ग्रहण की कोई परिचर्चा नहीं की गई है

आज वर्ष का प्रथम सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है लेकिन भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए भारत में ग्रहण और उसके सूतक का कोई प्रभाव नहीं होगा इसलिए आज भारतीय पंचांगों में इस ग्रहण की कोई परिचर्चा नहीं की गई है 

यह ग्रहण अंटार्कटिका ऑस्ट्रेलिया और दक्षिणी अमेरिका तथा आसपास के कुछ भागों में दिखाई देगा भारतीय समय के अनुसार या 3:26 मिनट दोपहर के बाद से प्रारंभ होगा और रात में 7:58 तक चलेगा और 5:37 पर इसका चरम उत्कर्ष होगा 

हमारे केंद्र ने इस ग्रहण का इसलिए वर्णन नहीं किया कि इसका भारत में ना तो कोई असर होगा और ना कहीं से दिखाई देगा 

फिर भी यदि कोई सावधानी करना चाहे तो खाने-पीने की सामानों में तुलसी के पत्ते एवं दूब घास डालकर आराम से बिना किसी दुविधा के अपना कार्य रोज की तरह करते रहें 

इस ग्रहण का प्रभाव भारत पर कुछ विशेष नहीं पड़ेगा लेकिन इतना अवश्य है कि इसका प्रभाव अमेरिका ऑस्ट्रेलिया दक्षिण पूर्वी एशिया चीन और अरब देशों पर भीषण रूप से पड़ेगा जिसके कारण हिंसा मार्केट अचानक भयानक युद्ध समुद्र में उथल-पुथल सुनामी लहरें ज्वालामुखी विस्फोट एवं कुछ मध्यम तेज भूकंप एक सप्ताह के अंदर इन क्षेत्रों में एवं आसपास आ सकते हैं कभी-कभी इसके प्रभाव से दूरस्थ भागों में भी ऐसी घटनाएं हो सकती हैं रोग बीमारियों का प्रभाव भी उपयुक्त क्षेत्र में अधिक होगा-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं दीर्घकालिक ‌ विज्ञान अनुसंधान केंद्रजौनपुर

Sunday, 15 February 2026

हक से नतीजों तक: MGNREGA को VBGRAM-G से बदलने का मामला*

*हक से नतीजों तक: MGNREGA को VBGRAM-G से बदलने का मामला* 

पब्लिक पॉलिसी को नतीजों से आंका जाना चाहिए, न कि भावना, पुरानी यादों या राजनीतिक निशानियों से। MGNREGA को रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण एक्ट, 2025 के लिए विकसित भारत गारंटी से बदलने पर उम्मीद के मुताबिक विरोध शुरू हो गया है। आलोचकों का कहना है कि नया कानून अधिकारों को कमजोर करता है, राज्यों पर बोझ डालता है, ताकत को सेंट्रलाइज़ करता है और महात्मा गांधी की विरासत को मिटा देता है। हालांकि, ये आपत्तियां असल पॉलिसी डिज़ाइन के बजाय राजनीतिक सोच के बारे में ज़्यादा बताती हैं।

यह मुख्य दावा कि VB GRAM G अधिकारों पर आधारित फ्रेमवर्क को खत्म करता है, इस गलत सोच पर आधारित है कि कानूनी हक अपने आप ताकत में बदल जाता है। MGNREGA के साथ दो दशकों का अनुभव इस सोच की सीमाएं दिखाता है। लगातार वेतन में देरी, मांग पूरी न होना, खराब क्वालिटी की संपत्ति बनाना और असमान तरीके से लागू करना, उस अधिकार को लगातार खोखला कर रहा है जिसे न्यायसंगत माना जाना चाहिए था।  एक अधिकार जो समय पर, बड़े पैमाने पर और लगातार नहीं दिया जा सकता, वह असल में अधिकार के तौर पर काम करना बंद कर देता है। VB GRAM G रोज़गार में मदद देने की राज्य की ज़िम्मेदारी को वापस नहीं लेता है। यह टाइमलाइन लागू करके, फंडिंग को नतीजों से जोड़कर और जवाबदेही को इंस्टीट्यूशनल बनाकर उस ज़िम्मेदारी को फिर से बनाता है। यह कमज़ोरी नहीं है। यह सुधार है।

असल में, नया एक्ट भारत की विकास की सोच में एक ज़रूरी बदलाव को दिखाता है। MGNREGA को बहुत ज़्यादा ग्रामीण संकट के समय में राहत देने के तरीके के तौर पर डिज़ाइन किया गया था। संकट में रोज़गार को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक स्थायी हिस्सा मानने से ठहराव के सामान्य होने का खतरा है। VB GRAM G साफ़ तौर पर शॉर्ट टर्म रोज़गार को रोज़ी-रोटी बनाने, स्किलिंग और प्रोडक्टिव एसेट बनाने से जोड़ता है। काम के दिनों की गिनती से लेकर सस्टेनेबल आजीविका बनाने तक का बदलाव एक बुनियादी सच्चाई को पहचानता है। इज़्ज़त सिर्फ़ से नहीं मिलती रोज़गार से नहीं, बल्कि इनकम में स्थिरता, प्रोडक्टिविटी और ऊपर की ओर बढ़ने की संभावना से आती है। एक वेलफेयर सिस्टम जो समय के साथ नहीं बदलता, वह गरीबी खत्म करने के बजाय निर्भरता को और मज़बूत करता है।

राज्यों पर बढ़ते वित्तीय बोझ की चिंताएं भी जांच करने पर खत्म हो जाती हैं।

पहले के फ्रेमवर्क के तहत, राज्यों को केंद्रीय फंड मिलने में देरी, बिना प्लान वाली देनदारियों और पिछली लागत शेयरिंग विवादों के कारण अक्सर अनिश्चितता का सामना करना पड़ता था।

VB GRAM G स्पष्ट वित्तीय भूमिकाएं, मध्यम अवधि की प्लानिंग और नतीजों से जुड़ी फंडिंग लाता है। अनुमान लगाना ही असली वित्तीय संघवाद की नींव है। राज्यों को आग बुझाने के बजाय प्लान बनाने की क्षमता मिलती है। इससे प्रशासनिक स्वायत्तता कमज़ोर होने के बजाय मज़बूत होती है।

इसी तरह, अत्यधिक केंद्रीकरण के आरोप राष्ट्रीय मानक तय करने को माइक्रोमैनेजमेंट के साथ मिला देते हैं। इतने बड़े कार्यक्रम में, पारदर्शिता, पात्रता और निगरानी के लिए एक जैसे बेंचमार्क ज़रूरी हैं। स्थानीय संस्थाएं काम की पहचान करना, प्रोजेक्ट को लागू करना और डिलीवरी की निगरानी करना जारी रखती हैं। जो बदला है, वह है परफॉर्मेंस और जवाबदेही पर ज़ोर। बिना निगरानी के विकेंद्रीकरण से ऐतिहासिक रूप से मज़दूरों से ज़्यादा बिचौलियों को फायदा हुआ है। VB GRAM G उस संरचनात्मक कमी को ठीक करने की कोशिश करता है।

सबसे भावनात्मक आलोचना कानून से महात्मा गांधी का नाम हटाने से जुड़ी है। यह तर्क असलियत की जगह प्रतीकों को रखता है। गांधी के आर्थिक दर्शन ने उत्पादक श्रम, आत्मनिर्भरता, विकेंद्रीकृत विकास और नैतिक ज़िम्मेदारी पर ज़ोर दिया। सिस्टम की अक्षमता को बर्दाश्त करते हुए उनका नाम बनाए रखना उस विरासत का सम्मान नहीं है। एक कार्यक्रम जो टिकाऊ सामुदायिक संपत्तियों, स्थानीय उद्यम और आजीविका की स्थिरता पर केंद्रित है, वह गांधीवादी सिद्धांतों के कहीं ज़्यादा करीब है, बजाय इसके कि जो जीवनयापन के काम को अपने आप में एक लक्ष्य मानता है।

सुधार से स्वाभाविक रूप से विरोध होता है, खासकर जब यह पुरानी राजनीतिक कहानियों को बाधित करता है। लेकिन सामाजिक नीति समय के साथ स्थिर नहीं रह सकती। भारत की जनसंख्या का दबाव, वित्तीय मजबूरियां और विकास की महत्वाकांक्षाएं इसकी मांग करती हैं। ऐसे साधन जो मापने योग्य नतीजे देते हैं। VB GRAM G ग्रामीण रोज़गार नीति को इनपुट-आधारित अधिकार से आउटकम-आधारित गारंटी की ओर ले जाने का एक जानबूझकर किया गया प्रयास है। इस बदलाव के लिए सतर्कता, सुधार और अनुशासित कार्यान्वयन की ज़रूरत होगी। लेकिन सुधार का पूरी तरह से विरोध करना ज़्यादा बड़ी विफलता होगी।

नीति निर्माताओं के सामने असली विकल्प करुणा और दक्षता, या अधिकारों और सुधार के बीच नहीं है। यह एक ऐसी कल्याणकारी व्यवस्था के बीच है जो बदलती वास्तविकताओं के अनुकूल हो और दूसरी जो अपनी सीमाओं के सामने आने के बहुत बाद भी पुरानी व्यवस्थाओं से चिपकी रहे। VB GRAM G सोच में एक विकास का संकेत देता है। यह सार्वजनिक खर्च को स्थायी ग्रामीण समृद्धि में बदलना चाहता है। यही महत्वाकांक्षा, न कि राजनीतिक पुरानी यादें, राष्ट्रीय बहस को परिभाषित करनी चाहिए।

लेखक के बारे में: निर्वा मेहता एक राजनीतिक विश्लेषक और स्तंभकार हैं जो सार्वजनिक नीति, शासन और राष्ट्रीय सुरक्षा पर लिखती हैं। उनका काम भारत और उससे बाहर सत्ता संरचनाओं, राज्य के व्यवहार और नीतिगत विकल्पों के दीर्घकालिक परिणामों पर केंद्रित है। फरहत अली खान 
एम ए गोल्ड मेडलिस्ट

Saturday, 14 February 2026

12 फरवरी से 25 फरवरी तक मौसम की भविष्यवाणी

12 फरवरी से 25 फरवरी तक मौसम की भविष्यवाणी 

आज जौनपुर और आसपास अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस रहेगा सुबह बहुत ठंडी और गलन रहेगी दिन में सुहावना मौसम रहेगा 15 फरवरी तक इसी तरह मौसम बना रहेगा वायु गुणवत्ता सूचकांक 100 से 200 के बीच पराबैंगनी किरणों की तीव्रता 5 से 7 वायु की दिशा पश्चिम और गति 11 से 20 किलोमीटर प्रति घंटा बहुत तेज होगी प्रदूषण और जहरीली हवा की मात्रा भयानक रहेगी सापेक्षिक आर्द्रता 50% से 80% के बीच रहेगी 

कल के मौसम के बारे में आकलन है कि अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगी वायु गुणवत्ता सूचकांक 100 से 200 के बीच ही रहेगा पराबैंगनी किरणों की तीव्रता भी और अन्य चीजें भी कल जैसी रहेंगी 

हिमालय के पर्वतों पर उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर हिमाचल प्रदेश नेपाल भूटान सिक्किम अरुणाचल प्रदेश में बर्फबारी के कारण उसका असर ठंड और गलन के रूप में उत्तर के मैदान में भी पड़ेगा मध्य और दक्षिण भारत में गर्मी तेजी से बढ़ेगी 

अभी जौनपुर और आसपास तथा उत्तरी भारत में वर्षा की संभावना 25 फरवरी तक बहुत ही काम है इसलिए किसानों को चाहिए तत्काल सिंचाई कर दें फरवरी के अंत और मार्च के प्रथम सप्ताह में एक बार मौसम में फिर से परिवर्तन और बादल तथा बूंदाबांदी की संभावना बन रही है 

कुल मिलाकर 15 मार्च तक अंतिम रूप से ठंड गलन और शीत का मौसम पूरी तरह समाप्त हो जाएगा ‌ इसके बाद गर्मी तेजी से बढ़ेगी जो मार्च के अंदर तक बहुत ही तेज और उग्र हो जाएगी फरवरी की तरह मार्च महीने में भी काफी परिवर्तन और झंझावात का योग बन रहा है उत्तरी और पश्चिमी उत्तरी मध्य और दक्षिणी भारत हर जगह गर्मी फैल जाएगी 

जहां तक विश्व के मौसम की बात है तो अमेरिका कनाडा ग्रीनलैंड यूरोप रूस चीन कोरिया जापान मंगोलिया और उत्तरी अरब प्रायद्वीप में बर्फबारी जारी रहेगी और ठंड का असर बढ़ता रहेगा 

फरवरी के अंतिम और मार्च के प्रथम 15 दिनों में विश्व में विशेष कर दक्षिण पूर्वी एशिया दक्षिणी अमेरिका अब प्रायद्वीप ईरान भारत पाकिस्तान जापान अफगानिस्तान नेपाल में कई स्थानों पर हाल के माध्यम और कुछ भयानक भूकंप आने की प्रबल संभावना है रूस का पूर्वी इलाका भी इसकी चपेट में आएगा 

अमेरिका यूरोप और उत्तरी एशिया में भयानक बवंडर प्रचंड बर्फ के तूफान और कुछ वहां चक्रवातों का जन्म होगा अटलांटिक और प्रशांत महासागर इसके केंद्र बिंदु में रहेंगे-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर

Friday, 13 February 2026

जनपद न्यायालय जौनपुर के जनपद न्यायाधीश सुशील कुमार शशि के नेतृत्व और सचिन सिविल जज सुशील कुमार सिंह की देखरेख में एक विधिक जागरूकता साक्षरता शिविर का आयोजन

‌‌ आज जनपद न्यायालय जौनपुर के जनपद न्यायाधीश सुशील कुमार शशि के नेतृत्व और सचिन सिविल जज सुशील कुमार सिंह की देखरेख में एक विधिक जागरूकता साक्षरता शिविर का आयोजन
जिला महिला चिकित्सालय जौनपुर में आयोजित किया गया ‌ इसमें सुशील कुमार सिंह सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल जनपद न्यायालय जौनपुर देवेंद्र कुमार यादव काउंसलर परिवार न्यायालय सीमा सिंह काउंसलर जिला चिकित्सालय जौनपुर देवव्रत यादव श्रम आयुक्त चिकित्सा अधीक्षक और उपमुख्यमंत्री चिकित्सा अधीक्षक श्रम प्रवर्तन अधिकारी एवं चिकित्सालय के डॉक्टर नर्स एवं अन्य कर्मचारी गण उपस्थित रहे 

इस विषय में कन्या भ्रूण हत्या एवं घटना हुआ लिंग अनुपात पर सिविल जज सचिव सुशील कुमार सिंह ने लिंग अनुपात सुधारने पर जोर दिया और बताया कि इसके उल्लंघन पर 3 से 5 वर्ष की सजा एवं 10000 से लेकर उससे अधिक का अर्थ दंड देने के साथ ही ऐसे प्रयोगशाला क्लिनिक और पैथोलॉजी का रजिस्ट्रेशन हमेशा के लिए निरस्त किया जा सकता है उन्होंने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा इस विषय में हर संभव सहायता देने की बातकही ।

डॉ दिलीप कुमार सिंह डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल ने कहा कि भारत में कभी महिला और पुरुष में कोई भेदभाव नहीं रहा इसलिए यहां नारी को ‌ पुरुष से छोटा या बड़ा नहीं कह कर उसे अर्धांगिनी कहा गया और देवों के देव महादेव का एक नाम अर्धनारीश्वर भी है यहां की संस्कृत में नारियों की पूजा होती है और यह देश गार्गी मैत्री आपला घोषा  विश्वावारा सीता अनसूया सावित्री पार्वती कल्पना चावला सुनीता विलियम्स बछेंद्री पाल मेरी काम पीटी उषा साइना नेहवाल का देश है उन्होंने कहा कि इस विषय पर नारियों को आगे आकर जन जागरूकता फैलानी होगी ‌।‌ जब नारी के अश्रु गिरे तो देश उजड़ वह जाए जब नारी खिलखिला उठे मधुमय वसंत छा जाए। ‌ उन्होंने कहा कि घटाताइलिंग अनुपात और स्त्रियों की संख्या देश में अराजकता अपराध और यौन अपराधों को जन्म दे रहे हैं।
इसी क्रम में देवेंद्र कुमार यादव ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और उसके द्वारा दी जा रही सहायता के बारे में विस्तार से बताया श्रम आयुक्त देवव्रत यादव ने नई नारियों को दी जाने वाली सरकारी सुविधाओं की विस्तार से चर्चा किया उपमुख्यमंत्री चिकित्सा अधीक्षक ने कन्या भ्रूण हत्या और घटते लिंगानुपात पर विस्तार से जानकारी दिया और धन्यवाद मुख्य चिकित्सा अधीक्षक द्वारा दिया गया संचालन काउंसलर सीमा सिंह के द्वारा किया गया।

महाशिवरात्रि पर बनने वाले राजयोग और पूजा पाठ विधान -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

महाशिवरात्रि पर बनने वाले राजयोग और पूजा पाठ विधान -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 
इस बार महाशिवरात्रि 15 फरवरी को रविवार के दिन पड़ रहा है उसे दिन उत्तराखंड नक्षत्र वनिज और शकुनी करण और चंद्रमा मकर राशि में रहेगा इसलिए सर्वार्थ सिद्ध योग बन रहा है पंचग्रही योग भी बन रहा है क्योंकि सूर्य चंद्र बुध शुक्र राहु एक साथ कुंभ राशि में रहेंगे इस बार बुध आदित्य योग लक्ष्मी नारायण धन और शुक्र आदित्य राज्यों बन रहा है ‌ फाल्गुन माह की चतुर्दशी तिथि बहुत विशेष होती है।

 इस दिन पूजा का समय रात्रि में 11:49 से रात्रि में 12:40 तक रहेगा इस दिन भगवान शिव माता पार्वती का पूजा पाठ और रुद्राभिषेक करने से मां और आत्म शांति होती है और कार्य पूरे होते हैं भगवान शिव और माता पार्वती ही अनंत कोटि ब्रह्मांडों के निर्माता है और उन्हें में समग्र विश्व समाया हुआ है इस दिन पूजा पाठ करने से अनिष्ट ग्रहों की शांति भी होती है और मृत्यु का भय तथा कालसर्प दोष दूर होते हैं पूजा पाठ करते समय अपना नाम पिता का नाम और गोत्र बोलने पर पूजा और प्रभावी हो जाते हैं शिवरात्रि के दिन प्रथम पहर में अर्थात सुबह 6 से 9 बजे एक बार पूजा पाठ करना विशेष फलदाई होता है।


हिमवान पर्वत जो हिमालय में स्थित है वहीं पर माता पार्वती का जन्म हुआ था इसीलिए उन्हें पर्वत पुत्री पार्वती कहा जाता है‌ भगवती पार्वती की मां मैना देवी और पिता हिमवान थे जो सती के रूप में पुनर्जन्म ली थी ऐसा माना जाता है कि रुद्रप्रयाग में त्रियुगीनारायण गांव में गंगा और मंदाकिनी नदी के संगम पर भगवान से और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था इसलिए यहां पर शिव पार्वती और भगवान नारायण की पूजा होती है यह बसंत की ऋतु होती है और मौसम बहुत ही शानदार रहता है वैसे तो भगवान शिव केवल नाम लेने से ही प्रसन्न हो जाते हैं बशर्ते मन और आत्मा शुद्ध हो यदि उन्हें अर्पित करना चाहे तो जल से रुद्राभिषेक कर सकते हैं जल के अलावा दूध दही मक्खन शहर घी से भी रुद्राभिषेक किया जाता है बेलपत्र बेल के फल भांग और धतूरा जैसे फल और श्वेत पुष्प तथा माता पार्वती के लिए लाल या पीले रंग के पुष्प चढ़ाना फलदाई होता है

Thursday, 12 February 2026

संपूर्ण सृष्टि में सबसे अद्भुतआदि देव भगवान शिव और महाशिवरात्रि -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विद ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक

संपूर्ण सृष्टि में सबसे अद्भुतआदि देव  भगवान शिव और महाशिवरात्रि -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विद ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक 

देवों के देव आदि देव भगवान शिव और उनकी शक्ति स्वरूपा देवी पार्वती शिवा सृष्टि का मूल है सृष्टि के प्रथम और अंतिम ईश्वरीय तत्व और ईश्वर हैं उनसे ही सारी सृष्टि का निर्माण हुआ है विश्व के हर धर्म सभ्यता और संस्कृति में एक समान रूप से वंदनीय हैं चाहे वह प्राचीन अमेरिका यूनान मिश्र भारत अरब की सभ्यता हो या आधुनिक काल की कोई भी सभ्यता हर जगह भूत भावन अघोरेईश्वर विश्व के कल्याणकारी जो स्वयं ही कल्याण के मूर्तिमान स्वरूप आशुतोष भगवान भोलेनाथ की जय जयकार हो रही है भगवान भोलेनाथ परम अद्भुत चिंतन और कल्पना से परे और देवी सती के साथ मिलकर अर्धनारीश्वर सृष्टि के अंतिम रहस्य हैं।

वैसे तो भगवान शिव और भगवती पार्वती को समझ पाना किसी भी जड़ चेतन या मानव के बस के कल्पना के परे की बात है फिर भी जो कुछ स्वरूप स्वयं भगवान शिव और माता पार्वती ने स्वयं बताया है या जो कुछ अन्य देवी देवताओं और महान शिव भक्तों के द्वारा वर्णित किया गया है उसके अनुसार भगवान शिव का मनमोहक स्वरूप इतना अदभुत है कि जिसको देखकर सृष्टि का जड़ चेतन ही नहीं देवी देवता ही नहीं स्वयं माता पार्वती भगवान गणेश और भगवान विष्णु भी सम्मोहित हो गए थे मोहिनी के रूप को धारण करते हुए भगवान श्री हरि विष्णु और बारात के समय असली स्वरूप में आने पर देवी पार्वती सहित समस्त उपस्थित लोग और परिजन विस्मय विमुग्ध हो गए थे इसीलिए भगवान भोलेनाथ शमशान में या कैलाश पर्वत पर अपने सबसे वीभत्स या अघोरी स्वरूप में रहते हैं सफेद कपूर जैसा गौर वर्ण शरीर पर मसान की भस्म लपेटे हुए अद्भुत लालिमा लिए हुए पैर शरीर पर बाघंबर हृदय में पार्वती मां सर पर गंगा देवी माथे पर जटा जूट और उसमें सुशोभित चंद्रमा गले में पूरे विश्व को भस्म कर देने वाला कालकूट हलाहल विष मस्तक पर सुशोभित तीन नेत्र एक हाथ में त्रिशूल और उसमें बंधा हुआ डमरू दूसरे हाथ में अभय दान की मुद्रा जिसमें समस्त अस्त्र-शस्त्र दिव्यास्त्र और संपूर्ण शास्त्र छिपे हुए होते हैं बगल में बैठे हुए नंदीश्वर और चारों ओर भूत प्रेत पिशाच डाकिनी शाकिनी महाकाली देवी और भैरव जी तथा बाल गणेश और स्वामी कार्तिक देव चारों तरफ हिममंडित पर्वत के उत्तम शिखर और कैलाश का वह शिखर जिस पर आज तक कोई भी चढ़ नहीं सका है और बगल में बिल्कुल स्वच्छ अमृत जैसी नीले हरे रंग की मानसरोवर झील और चारों ओर अद्भुत ओमकार का स्वर अद्भुत परम शांति और भगवान शिव के बगल में बैठी हुई सृष्टि का निर्माण करने वाले भगवती पार्वती मां सभी को आश्चर्यचकित कर एक परम पावन कैलाश लोक का निर्माण करता है।

यह तो भगवान शिव के धर्म और अध्यात्म का स्वरूप हुआ अब इसको थोड़ा विज्ञान की दृष्टि से देखा जाए भगवान शिव का पैर सदैव बर्फ से ढके हुए कैलाश शिखर पर आता है जो यह प्रदर्शित करता है कि वह बर्फ की तरह कोमल स्वच्छ और किसी भी प्रकार के प्रदूषण से मुक्त हैं शरीर पर बाघंबर इस बात का प्रतीक होता है कि हिंसक से हिंसक जीव जंतु भी उनके लिए वस्त्राभूषण के समान हैं और बाघ का वस्त्र पहन कर व्यक्ति आसानी से साधना में डूब जाता है हृदय में इलेक्ट्रॉन रूपी पार्वती मां सारी सृष्टि को अपने अंदर समाहित किए हुए हैं जो ऋणात्मक अर्थात स्त्री तत्व हैं और जब उसमें प्रोटॉन अर्थात भगवान शिव का मिलन होता है तब एक आदि कण परमाणु का निर्माण होता है और इसके बिना सृष्टि असंभव है गले में हलाहल विष समग्र विश्व की कल्याण कामना को दिखाता है और जिस हलाहल विष की गर्मी को तीनों लोक में कोई सहन नहीं कर सका उसको भगवान शिव ने खेल-खेल में पी लिया था और तीनों लोकों की रक्षा किया था अर्थात विश्व का सृष्टि का कल्याण भगवान शिव का सबसे बड़ा लक्ष्य है

भगवती गंगा देवी के रौद्र स्वरूप को जो धरती को चूर-चूर कर देता उसके अनंत वेग को रोककर भगवान शिव ने गंगा को भागीरथी बनाकर समग्र विश्व में पूजनीय बनाकर उसे देव नदी बना दिया और बताया कि महानता कल्याण में होती है विनाश में नहीं जटा जूट पर सुशोभित चंद्रमा जो अमृत तत्व का भंडार है वह हलाहल विष के तेज को शांत करता रहता है संसार के सभी अस्त्र-शस्त्र और दिव्यास्त्र को अपने अंदर समाहित करने वाला भगवान शिव का पिनाक त्रिशूल जहां एक और इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन और न्यूट्रॉन तो दूसरी तरफ अल्फा बीटा गामा किरणों को दिखाता है। 

और उसमें लेजर क्वाजार और एक्स किरणें इतनी भयंकर मात्रा में उपस्थित होती है कि एक दो आकाशगंगा नहीं अरबों विश्व समुदाय और अरबों कृष्ण नक्षत्र अर्थात ब्लैक होल को पल मात्र में भस्म किया जा सकता है डमडम निनाद का प्रतीक डमरू समस्त विद्या और ध्वनि ऊर्जा का प्रतीक है और ध्वनि से ही संपूर्ण विद्या ज्ञान विज्ञान कला साहित्य प्रकट होता है किसी डमरू को 14 बार बजा कर भगवान शिव ने महान पाणिनि को 14 सूत्रों का उपदेश दिया जिससे संपूर्ण संस्कृत भाषा का निर्माण हुआ और कालांतर में इसी संस्कृत भाषा से दुनिया की अनगिनत भाषाएं देश काल बोली और परिस्थितियों के अनुक्रम में उत्पन्न हुई।

भगवान शिव के बगल स्थित नंदीश्वर बैल स्वरूप में सारे विश्व और कृषि कार्यों के प्रतीक हैं जो उसे गाय के पुत्र स्वरूप उत्पन्न होते हैं जो मानव श्रेष्ठ की दूसरी मां कही जाती है और जिसका दूध अमृत माना जाता है और जो हर व्यक्ति के लिए कल्याणकारी है भूत प्रेत और उनके गण यह दिखाते हैं कि  सृष्टि में कोई भी चीज भयंकर नहीं है भयंकर से भयंकर वस्तु भी सृष्टि और मानव के लिए कल्याणकारी है गले में लिपटा भयंकर नाग भी इस बात को दिखाता है की अपनी शक्ति प्रेम और ऊर्जा से विश्व के सबसे खतरनाक जीव नाग को भी वश में किया जा सकता है और परम भयंकर नग धारण करना भगवान शिव के बस की ही बात है चाहे मसान हो चाहे कैलाश पर्वत का क्षेत्र हो वहां पर अपूर्व शांति और असली जीवन का तत्व छिपा रहता है और यहीं पर आकर मनुष्य को अपूर्व शांति और सही जीवन का बोध होता है शरीर पर लपेटा हुआ भस्म यह दिखाता है कि अंत में मानव जीव जंतु जड़ चेतन ही नहीं संपूर्ण सृष्टि आकाशगंगा परम विश्व ब्लैक होल में और ब्लैक होल महाकाली में और महाकाली अंत में शिव में विलीन हो जाती हैं इस प्रकार भगवान शिव का स्वरूप परम कल्याणकारी चिंतन मनन कल्पना के परे हैं।

भगवान भोलेनाथ शिव को और उनकी परमप्रिया अर्धांगिनी देवी सती को समझ पाना मन बुद्धि कल्पना के परे हैं अपने भक्तों की रक्षा के लिए काल से नहीं साक्षात महाकाल से भी लड़कर मार्कंडेय ऋषि जैसे अबोध बालक को अमरत्व प्रदान करने वाले भस्मासुर जैसे लोगों को अपने ही विनाश का वरदान देने वाले जालंधर जैसे त्रिलोक विजेता का वध करने वाले रावण को सोने की लंका प्रदान करने वाले और कैलाश पर्वत उठाने का प्रयास करने पर उसे कुचल देने वाले अपने भक्तों की रक्षा के लिए भगवान श्री राम श्री कृष्ण और भगवान श्री राम और श्री हरिविष्णु से भी लड़ने वाले कठोरता की मूर्ति बनकर जहां 87000 वर्षों तक भगवती सती का त्याग कर दिया  और कामदेव को भस्म कर दिया वहीं पर कोमलता की मूर्ति माता सती के अपने पिता के यज्ञ की अग्नि में सती हो जाने पर वीरभद्र और महाकाली को उत्पन्न कर सभी दुष्ट और दक्ष के विनाश का कारण बनने वाले हनुमान को अभय दान देने वाले सत्यम शिवम सुंदरम के साक्षात स्वरूप विश्व की प्रथम और अंतिम अंतरिक्ष नगरी तारकापुरी को नष्ट कर तारकासुर का संघार करने वाले अनंत वेग के स्वामी और समस्त ब्रह्मांड और ब्लैक होल सहित सब कुछ निगल जाने को तैयार माता महाकाली के पैर के नीचे आकर उनका क्रोध शांत करने वाले भगवान शिव की महिमा अनंत है ।

जिसका बखान वेदों से लेकर शिव पुराण और सभी धर्म और साहित्य काव्य जगत में आज भी गुंजित हो रहा है उनकी महिमा एक छोटे से लेख में सीमित नहीं जा सकती है भगवान शिव की कृपा और उनके आशीर्वाद से ही इस लेख का निर्माण हो सका है अभी तक जो कुछ भी विज्ञान और मनुष्य को टेक्नोलॉजी के सहारे ज्ञात है तो उसके अनुसार हमारी अपनी आकाशगंगा में पांच खरब सूर्य हैं ऐसी 1000 खरब आकाशगंगाए खोजी जा चुकी हैं और इन सभी आकाशगंगाओं का समूह परम विश्व अर्थात यूनिवर्स होता है और अभी तक 100 अरब यूनिवर्स खोजे जा चुके हैं और यह केवल देखे जा सकने वाले ब्रह्मांड का 10% भाग है और इन सभी को पलक झपकते ही भगवान शिव अपने डमरू के निनाद से और त्रिशूल से नष्ट कर देते हैं उनका रौद्र और भीषण रूप देखकर समस्त जड़ चेतन भयानक डर से कांप उठते है ग्रह नक्षत्र चूर-चूर हो जाते हैं आकाशगंगा बिखर जाती हैं परम विश्व और प्रति परम विश्व टूट कर महाकृष्ण विवर में और महा कृष्ण विवर महाकाली में समाहित हो जाता है द्रव्य प्रति द्रव्य ऊर्जा प्रति ऊर्जा श्वेत और श्याम ऊर्जा श्वेत और श्याम परम कृष्ण नक्षत्र  सब कुछ भगवान शिव अपने एक अंगूठे में धारण कर लेते हैं ऐसे भगवान शिव भोलेनाथ को नमन है।

 महाशिवरात्रि संपूर्ण पृथ्वी पर एक अत्यंत विशेष दिन होता है जो शिव भक्तों का सबसे प्रमुख दिन होता है इसी दिन भगवान शिव लेजर किरणों अनंत आकाशगंगाओं का तेज प्रकट करते हुए लिंग के रूप में पैदा हुए थे और ब्रह्मा जी और भगवान विष्णु ने उस लिंग की पूजा किया था इसी दिन भगवती पार्वती का भगवान भोलेनाथ से विवाह हुआ था इसीलिए प्रत्येक जगह शिव बारात का आयोजन किया जाता है महाशिवरात्रि की रात अत्यंत ही फलदाई होती है लेकिन उसके लिए आपको अलग से कुछ करने की आवश्यकता नहीं संपूर्ण श्रद्धा विश्वास के साथ भगवान शिव भगवती पार्वती की मन वचन कर्म से आराधना करें तो भी वही फल मिलता है जो निराहार व्रत रखने वाले को मिलता है भगवान शिव सत्य शिव सुंदर तत्व के प्रतीक हैं और निश्चल भक्त लोगों को बहुत आसानी से प्राप्त हो जाते हैं भगवान शिव बेल के पेड़ से जुड़े हुए हैं यही उनके निवास है इसलिए इनको बेलपत्र अत्यंत प्रिय है वैसे भी तीन या उससे अधिक पत्तों वाले पेड़ शिवजी को बहुत ज्यादा पसंद है जो कि विश्व की तीनों शक्तियों धन ऋण और उदासीन तत्व का प्रतीक है।

इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी के दिन पड़ रही है क्योंकि इसी दिन फाल्गुन मास की चतुर्दशी तिथि पड़ रही है और निशीथपूजा रात में 12 बज का 9 मिनट से 12:59 तक है और व्रत का पारण सूर्योदय के तत्काल बाद किया जाएगा भगवान शिव को शुद्ध और स्वच्छ चित्त से भविष्य में कोई पाप और गलत कामना न करने की प्रतिज्ञा करते हुए बेल का पत्र बेर का फल अबीर धतूरे का फल मदार का फूल श्वेत रंग की मिठाई श्वेत वस्त्र श्वेत पुष्प जैसी चीजों का अर्पण करना चाहिए इसके साथ-साथ माता पार्वती का पूजन आवश्यक है जिसके लिए आप हल्के गुलाबी या हल्के रंगों का वस्त्र फूल मिठाई इत्यादि का प्रयोग कर सकते हैं कुछ भक्त निराहार रहकर शिवजी की पूजा आराधना करते हैं तो अधिकांश लोग दूध फल सूखा मेवा खाते हुए भगवान शिव की अर्चना करते हैं लेकिन भगवान शिव को इन सब से कोई अंतर नहीं पड़ता है जो लोग निराहार नहीं रह सकते हैं या बालक वृद्ध हैं या रोगी हैं वह फलाहार दुग्धाहार कर सकते हैं सच्चे मन वचन कर्म से महाशिवरात्रि का व्रत करने वाले न केवल भगवान शिव भगवती पार्वती की कृपा आशीर्वाद प्राप्त करते हैं बल्कि जन्म मरण के चक्र से छोड़कर मोक्ष को प्राप्त करते हैं।

युवा और डिजिटल दुनिया की चुनौतियां

युवा और डिजिटल दुनिया की चुनौतियां
युवा किसी भी देश और राष्ट्र की असली पूंजी होते हैं। राष्ट्र की प्रगति और उज्ज्वल भविष्य युवाओं की सोच और उनके विकास पर निर्भर करता है। आधुनिक तकनीक की बदौलत आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां ज्ञान प्राप्ति के साधन और कौशल विकास के अपार अवसर पैदा हुए हैं, वहीं व्यक्तित्व निर्माण और नैतिक मूल्यों के पतन का खतरा भी मंडरा रहा है। आज के युवाओं ने डिजिटल दुनिया में खुद को इतना डुबो लिया है कि उन्हें अपने व्यक्तित्व को निखारने पर ध्यान देने की जरूरत भी महसूस नहीं होती। नतीजा यह है कि हमारे युवा डिजिटल दुनिया के नकारात्मक प्रभावों से बेखबर होकर इसके 'साइड इफेक्ट्स' को नजरअंदाज कर रहे हैं, जिसका असर न केवल उनके निजी जीवन पर दिख रहा है बल्कि समाज भी इन प्रभावों से सुरक्षित नहीं है।
आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया और इंटरनेट केवल सूचना, संपर्क और मनोरंजन के साधन नहीं रह गए हैं, बल्कि ये लोगों को गलत जानकारी और भ्रामक विचारों की ओर धकेलने के लिए भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं। युवा, जो तकनीकी रूप से तो दक्ष हैं लेकिन अनुभव और नैतिक समझ के मामले में अभी नए हैं, अक्सर ऑनलाइन सामग्री के प्रभाव में आ जाते हैं। उनकी ऊर्जा और जोश की भावनात्मक संवेदनशीलता उन्हें और अधिक प्रभावित करती है। इस उम्र में युवा सामाजिक व्यवस्था, अन्य धर्मों और न्याय के मुद्दों के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं, और यही भावनात्मक तीव्रता उन्हें "गलत या भ्रामक संदेशों" का शिकार बना सकती है—खासकर तब जब ये संदेश हिंसा या तोड़-मरोड़ कर पेश किए गए सिद्धांतों का समर्थन करते हों। इसलिए सोशल मीडिया का उपयोग करते समय सावधानी अनिवार्य है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के 'एल्गोरिदम' यह सुनिश्चित करते हैं कि यूजर को वही सामग्री बार-बार दिखाई जाए जिसे उसने पहले देखा, लाइक किया या फॉलो किया हो। इस प्रक्रिया के दौरान यूजर के 'फीड' में उसी तरह की भ्रामक या पक्षपातपूर्ण जानकारी आने लगती है, जिससे यह आभास होता है कि उसके विचार और भावनाएं ही सार्वभौमिक सत्य हैं। समय के साथ युवा अनजाने में खुद को इनसे जोड़ लेते हैं। कभी उन्हें महसूस होता है कि उनका जीवन निरर्थक है, जिससे उनके मन पर निराशा छाने लगती है। कभी उन्हें लगता है कि वे "अलग" या "पीड़ित" हैं, तो यह अहसास उन्हें आक्रामकता या हानिकारक कदमों को सही ठहराने का आधार बन जाता है। कभी उन्हें लगता है कि जो कुछ वे देख रहे हैं वही असली दुनिया है, जिससे उनकी संबद्धता और गहरी हो जाती है। इसके प्रभाव में वे किसी भी नकारात्मक या कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित होकर ऐसा कदम उठा लेते हैं जिसका असर न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन पर, बल्कि उनके परिवार और समाज पर भी पड़ता है, जिसकी भरपाई संभव नहीं होती।
इस 'एल्गोरिद्मिक' प्रभाव को आमतौर पर "फिल्टर बबल" कहा जाता है, जो व्यक्ति को उसके पहले से मौजूद विश्वासों तक सीमित कर देता है और वैकल्पिक दृष्टिकोणों को छिपा देता है। परिणामस्वरूप, युवा यह मानने लगते हैं कि भ्रामक नैरेटिव ही वास्तविकता है। इस संदर्भ में कुरान हमें स्पष्ट मार्गदर्शन देता है: "ऐ ईमान वालों! किसी भी खबर को बिना जांच-पड़ताल के न मानो और जब तक तुम्हें प्रमाण न मिले, किसी पर विश्वास न करो।" (सूरह अल-हुजरात, 49:6)। यह आयत युवाओं को संदेश देती है कि किसी भी ऑनलाइन जानकारी पर बिना सत्यापन के भरोसा न करें।
कुछ ऑनलाइन पेज, चैनल और वेबसाइटें विशेष रूप से युवाओं को भ्रामक संदेशों के जरिए प्रभावित करने की रणनीति अपनाते हैं। ये प्लेटफॉर्म न केवल कट्टरपंथी विचार पेश करते हैं, बल्कि युवाओं में यह धारणा भी पैदा करते हैं कि समाज उन्हें नहीं समझता। उदाहरण के तौर पर, कुछ सोशल मीडिया अकाउंट युवाओं को बताते हैं कि दूसरों के त्योहारों में शामिल होना या विभिन्न समुदायों से संपर्क रखना गलत है। इस तरह युवा धीरे-धीरे लोकतांत्रिक सिद्धांतों और सामाजिक समरसता के बुनियादी मूल्यों से दूर हो जाते हैं।
अक्सर ये समूह युवाओं के मनोविज्ञान का फायदा उठाते हैं और उन्हें महसूस कराते हैं कि उनके साथ अन्याय हो रहा है और उन्हें इसके खिलाफ "अपने हक" के लिए लड़ना चाहिए। सोशल मीडिया एल्गोरिदम इस संदेश को बार-बार दिखाते हैं, जिससे भावुक या अकेलेपन का शिकार युवा इसे गंभीरता से लेने लगते हैं। भारत में ऐसी घटनाएं तुलनात्मक रूप से कम हैं, क्योंकि यहां का पारिवारिक ढांचा काफी मजबूत है जो युवाओं को ऐसे नकारात्मक रुझानों से बचाने में मददगार होता है। इसके अलावा, कुछ समूह व्यक्तिगत संदेशों, गेम्स और क्विज़ के माध्यम से युवाओं की पहचान करते हैं और धीरे-धीरे अपनी सोच उन पर थोपने की कोशिश करते हैं।
युवाओं के लिए इन समस्याओं का समाधान केवल पाबंदी नहीं है, बल्कि उन्हें विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी प्राप्त करने के लिए मार्गदर्शन देना जरूरी है। युवाओं को चाहिए कि वे राष्ट्रीय मुख्यधारा के मीडिया, प्रतिष्ठित पत्रकारों, विश्वविद्यालय की पुस्तकों और प्रमाणित शोध पत्रिकाओं से तथ्य प्राप्त करें और अपने शिक्षकों या अभिभावकों से मार्गदर्शन लेते रहें। इससे वे न केवल भ्रामक सामग्री से सुरक्षित रहेंगे, बल्कि अपने विचारों को लोकतांत्रिक और नैतिक आधार पर विकसित कर सकेंगे। युवाओं को यह समझना चाहिए कि एल्गोरिदम उनके दृष्टिकोण को सीमित कर सकते हैं, इसलिए किसी भी संदेश को बिना शोध के स्वीकार न करें।
इस प्रक्रिया में दोस्तों, परिवार और शिक्षकों के साथ संवाद करना आवश्यक है। किसी भी संदिग्ध या परेशान करने वाली सामग्री को साझा करने के बजाय अनुभवी लोगों से सलाह लें। अपनी भावनात्मक प्रतिक्रिया पर गौर करें कि क्या कोई सामग्री आपको डरा रही है या "तत्काल प्रतिक्रिया" के लिए उकसा रही है। यदि ऐसा है, तो रुकें, सोचें और लाइक या शेयर करने से पहले उसके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं पर विचार करें। कुरान भी हमें ज्ञान के महत्व की याद दिलाता है: "अल्लाह ने इंसान को ज्ञान दिया, और जो सही ज्ञान (हिदायत) प्राप्त करता है, वह पथभ्रष्टता से सुरक्षित रहता है।" (सूरह ताहा, 20:123)।
सामूहिक स्तर पर, समाज और शैक्षणिक संस्थान डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षित कर सकते हैं। यदि युवा यह समझ जाएं कि उनकी सोच किस तरह प्रभावित हो रही है और सोशल मीडिया उनकी मानसिक सेहत पर कैसे असर डाल रहा है, तो वे अधिक सुरक्षित रह सकेंगे। ऑनलाइन भ्रामक सूचनाओं से निपटना केवल तकनीकी समाधान तक सीमित नहीं है; यह नैतिक शिक्षा, धार्मिक समझ और सामाजिक सहयोग का मिश्रण है। युवाओं को यह समझना होगा कि आज के डिजिटल युग में असत्यापित सामग्री का प्रसार न केवल भ्रामक है, बल्कि इसका बिना सोचे-समझे उपयोग इस्लामी शिक्षाओं के विरुद्ध और लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक सद्भाव तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता के लिए भी खतरा है।
फरहत अली खान 
एम ए गोल्ड मेडलिस्ट

Wednesday, 11 February 2026

ज्योतिष के दर्पण में ईरान इजरायल का भयानक युद्ध-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

ज्योतिष के दर्पण में ईरान इजरायल का भयानक युद्ध-डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 

अभी कुछ महीने पहले ईरान और इजराइल में भयानक युद्ध हुआ जिसमें इजरायल की तरफ अमेरिका और उसके मित्र देश थे जबकि ईरान का समर्थन करने वाले तुर्की मुस्लिम देश एवं चीन तथा रूस थे जिसमें दोनों देशों का भीषण विनाश हुआ उसे समय भी हमारे अल्का शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र ने बिल्कुल स्पष्ट भविष्यवाणी किया था कि यह युद्ध जल्दी ही समाप्त हो जाएगा और किसी बड़े युद्ध का कारण नहीं बनेगा और वैसा ही हुआ‌ और दोनों देश भयानक विनाश के पहले ही पीछे हट गए और एक अल्पकालिक अघोषित समझौता अमेरिका के दबाव में हो गया ।

इस समय अमेरिका निर्विवाद रूप से विश्व की सबसे बड़ी महाशक्ति है वैसे तो 1945 से लेकर आज तक अमेरिका को कोई भी चुनौती नहीं दे सका है ‌ जिसका सबसे बड़ा कारण है कि अमेरिका एक तो सबसे अधिक धन संपन्न देश है जो सबसे बड़ी अर्थशक्ति खेल शक्ति है और सैन्य शक्ति है दूसरी तरफ वह संपूर्ण दुनिया से बिल्कुल अलग अलग है और उसके शत्रु देश उसे इतनी अधिक दूर हैं कि वह लगभग पूरी तरह सुरक्षित है और आकार में भी इतना बड़ा है कि उसको इसराइल क्यूबा या कोरिया की तरह मिट जाने का खतरा नहीं है ।

‌ इसके अतिरिक्त अमेरिका जल थल नभ में अत्यंत शक्तिशाली है थोड़ी बहुत बराबरी रूस और चीन उसकी कर सकते हैं लेकिन अधिक नहीं उत्तर कोरिया ने निश्चित रूप से प्रक्षेपास्त्र के निर्माण में और परमाणु बम बनाने में बहुत अधिक उन्नत किया है लेकिन वह इतना छोटा है कि अमेरिका के दो हाइड्रोजन बम ही उसका नाम नक्शे से मिट जाएगा इसलिए फिलहाल अमेरिका को बहुत अधिक खतरा नहीं है मध्य पूर्व के दो दर्जन देशों में अमेरिका का सैनिक अड्डा है ‌ पाकिस्तान सीधे-सीधे अमेरिका के कब्जे में है जहां सैकड़ों परमाणु बम अमेरिका ने रखे हुए हैं ‌ अमेरिका के बी-52 बमबर्षकों का कोई जवाब भी नहीं है।इसके अतिरिक्त इसराइल इसका प्रमुख शक्ति केंद्र है हिंद महासागर के डिगो गार्सिया में अमेरिका का बहुत ही शक्तिशाली नौसैनिक अड्डा है और जापान अमेरिका द्वारा पोषित देश है जहां अमेरिकी सेना जापान की रक्षा करती है इस परिप्रेक्ष्य में भारत का कहीं कोई महत्व ही नहीं है और ना दुनिया में कोई भारत की राय विश्व शांति के लिए लेता ही है।


फरवरी मार्च से लेकर जून जुलाई के बीच ज्योतिष के दर्पण में एक बहुत ही भयानक और विनाशकारी युद्ध ईरान और अरब देशों तथा इजरायल के बीच होता हुआ दिखाई पड़ रहा है जिसमें ईरान का भयानक विध्वंस होना निश्चित है प्रारंभिक सको के बाद इजरायल संभल जाएगा और अमेरिका तथा उसके मित्र देशों की मदद से ईरान पीछे हटेगा और उसकी सीधे सहायता देने वाला कोई भी देश आगे खड़ा नहीं होगा ऐसा ज्योतिष और ज्योतिर्विविज्ञान के दर्पण में बिल्कुल स्पष्ट दिखाई दे रहा है ।

आने वाले समय में फरवरी से लेकर जून जुलाई तक पूरी दुनिया के लिए बहुत ही भयानक विनाशकारी और युद्ध के उन्माद वाला है इस कालखंड में भारत को भी पड़ोसी देशों से युद्ध लड़ना पड़ सकता है बांग्लादेश में भारत विरोधी सरकार का चुना जाना निश्चित है ‌ सबसे अधिक नाजुक स्थिति इस समय पूरी दुनिया में इजरायल भारत क्यूबा और कोरिया की है और युद्ध काल में भारत का साथ देने वाला कोई नहीं मिलने वाला है।।

ज्योतिष के दर्पण में ईरान और इजरायल इजरायल और अब देश बेर और केला के समान है जिनका एक साथ रह पाना संभव है‌। कुछ समय की शांति भले हो लेकिन यह देश एक साथ इस तरह नहीं रह सकते जैसे भारत और पाकिस्तान तथा बांग्लादेश का एक साथ अधिक दिनों तक रह पाना संभव है या तो पाकिस्तान बांग्लादेश को मिटना होगा या फिर भारत को बर्बाद होना निश्चित है‌ पाकिस्तान से भी भयानक और विनाशकारी खतरा बांग्लादेश भारत के लिए होगा ऐसा में कई बार कह चुका हूं और उसमें चीन और अमेरिका बहुत बड़ा खेल खेल रहे हैं और भारतीय नेतृत्व इससे अनजान है। वास्तव में अमेरिका इजरायल और उसके मित्र देशों की जासूसी संस्थाएं हर देश की इतनी जानकारी रखती हैं जितना उसे देश का नेतृत्व खुद नहीं रखता है यही वजह है कि इन देशों को दुनिया की एक-एक चीज  ‌ पता रहती है।

ज्योतिष के दर्पण में ऐसा प्रतीत होता है कि प्रारंभ में इजरायल अमेरिका के उकसावे में आकर इसराइल और उसके तथा अमेरिका के समुद्री बेड़े पर प्रक्षेपास्त्रों से सामूहिक हमला करेगा और जवाबी आक्रमण में ईरान का बहुत भारी विध्वंस होगा लड़ाई भयानक रूप ले लेगी और ईरान अकेला पड़ जाएगा यह एक ऐसा युद्ध है जिसमें 1945 के बाद पहली बार परमाणु हाइड्रोजन जैव और रासायनिक बमों का इस्तेमाल होता हुआ दिखाई पड़ रहा है हो सकता है कि अभी यह युद्ध चल जाए लेकिन 1 वर्ष के भीतर ऐसा अवश्य ही होगा इजरायल की वायु सेना और परमाणु केंद्र पूरी तरह से नष्ट हो जाएंगे और इजराइल का क्षेत्रफल बहुत अधिक विस्तृत हो जाएगा ईरान का कई टुकड़ों में विभाजन भी उसी तरह अमेरिका द्वारा होगा जैसे ब्रिटेन ने भारत के 11 टुकड़े कर डाले हैं इस युद्ध से संपूर्ण विश्व प्रभावित होगा इसके अतिरिक्त यूरोप में गृह युद्ध आतंकवाद के भीषण हमले भारत चीन भारत पाकिस्तान और कोरिया में भी युद्ध की स्थितियां बनेंगी भविष्य में ग्रीनलैंड अमेरिका के द्वारा और आस्ट्रेलिया चीन के द्वारा कब्जा किया जाना निश्चित है।


इस प्रकार अंत में इतना लगभग निश्चित हो रहा है कि अब से लेकर जुलाई के अंदर कभी भी ईरान और इजरायल का युद्ध प्रारंभ होगा जो विश्व में कई युद्ध और लड़ाइयां का कारण बनेगा जिसके कारण विश्व में महंगाई और बेरोजगारी और भी भीषण हो जाएगी और युद्ध की एक श्रृंखला प्रारंभ होगी जिसमें कई अनजाने अनदेखे अस्त्र शस्त्रों का प्रयोग किया जाएगा और धरती पर व्यापक तबाही मचेगी।‌ इस्लामी संगठन बनाने का प्रयास सफल होगा और अरब देशों में व्यापक फूट पड़ जाएगी

Sunday, 8 February 2026

‌ मृत्यु भोज का विरोध विदेशी षड्यंत्र का परिणाम है -डॉ दिलीप कुमार सिंह

‌ मृत्यु भोज का विरोध विदेशी षड्यंत्र का परिणाम है -डॉ दिलीप कुमार सिंह 
गद्दार और देशद्रोही तथा विदेशी लोगों से पैसा लेकर ऐसा कह रहा है। ‌ वरना यह और इसके जैसे धर्म गुरु संत महंत आचार्य महात्मा दहेज प्रथा का समाज में फैले हुए धन के असमान वितरण का बहुत महंगे और ऊंचे होटल में आयोजित होने वाले विवाह और मांगलिक समारोह का पैसा लेकर धर्म कथा और राम कथा कहने वाले लोगों का विदेशी परिधान और डीजे आर्केस्ट्रा फिल्मी और भोजपुरी गंदे गानों पर होने वाले विवाह और मंगल समारोह का समाचार पत्र और टेलीविजन चैनल और सोशल मीडिया पर आने वाले अश्लील कामसूत्र और एवं शक्ति वर्धक विज्ञाप और गंदे विज्ञापनों का विरोध करते ‌ और इन्हीं लोगों के कारण सनातन धर्म के देवी देवताओं धर्म कर्म की हंसी पूरी दुनिया में उड़ाई जाती है क्योंकि यह नकली साधु संत है जिनके पास ब्रह्मचर्य तपस्या और सदाचार जैसा कुछ भी नहीं है।

मृत्यु भोज खाने से लोगों की ऊर्जा इसलिए नष्ट होती है क्योंकि वह मरे हुए व्यक्ति का थोड़ा बहुत पाप अपने ऊपर लेते हैं इससे उसे व्यक्ति के पापों का बोझ कम हो जाता है और नरक की आग से छुटकारा मिल जाता है ।

रसमलाई रबड़ी काजू किशमिश बादाम शिलाजीत केसर और यौन शक्ति वर्धक दवाई का सेवन करके एक कुंतल की दें और गाल गुलाबी नैन शराबी वाले ऐसे ही साधु संत सनातन धर्म को बर्बाद कर रहे हैं और इनको पड़ा गठबंधन का पूरा सहयोग भी मिलता है ।

जब मूर्ख लोगों के हाथ में व्याख्या पड़ जाती है तो ऐसे ही अर्थ का अनर्थ हो जाता है मृत्यु भोज संस्कार इसलिए बनाया गया है कि किसी के मर जाने पर इसी बहाने लोग एकत्र होते हैं मृतक परिवार के सुख-दुख में सहभागिता करते हैं और उसे लगता है कि वह दुनिया में अकेला नहीं है उसके अपने बहुत से लोग हैं जैसे आप किसी विपत्ति में पड़ जाते हैं तो डूबते को तिनके का सहारा मिल जाता है ।

यहां एक बात बता देना चाहते हैं कि प्राचीन काल से लेकर अभी 50 वर्ष पहले तक किसी की मृत्यु हो जाने पर लोग अपना सहयोग करते थे और कुछ भी खाते पीते नहीं थे दास संस्कार हो जाने पर लोग गुड़ खाकर पानी पीकर घर चले जाते थे और आज के लोग मरे हुए परिवार से रसमलाई और खोवा छेना  ‌ उच्चतम श्रेणी की मदिरा और यौन शक्तिवर्धकदवाएं लेते हैं तब ऐसे मोटे ताजे संत कुछ नहीं कहते ।

मैं इन मोटे ताजे संत ‌ महात्मा बुद्धिजीवी धर्मगुरु ‌ जो हजारों लोगों का भजन रोज का जाते हैं और एक से पांच कुंतल देने वाले नैन शराबी गाल गुलाबी हैं और उनके समर्थक लोगों विदेशी गद्दारों और इनका पालन पोषण करने वाले देश के छिपे देशद्रोहियों से पूछना चाहता हूं कि किसी भी विवाह में केवल दो संस्कार होते हैं पहले सप्तपदी और दूसरा सिंदूरदान है ।बाकी  वर यात्रा जिसको आर्केस्ट्रा डीजे कोट पैंट सूट बूट शर्ट टाइ असली नाच गाने नग्न और अर्धनग्न होकर सड़कों पर गंदे भद्दे अश्लील दो अर्थी मैथुनिक फिल्मी और भोजपुरी गीत गाने का नियम किस वेद पुराण रामायण महाभारत महाकाव्य धर्म ग्रंथ जातक जैन कथाओं में या गुरु नानक देव के ग में लिखा हुआ है । इसका यह लोग कभी विरोध क्यों नहीं करते रात्र में होने वाले विवाह संस्कार का विरोध क्यों नहीं करते।


एक बार और बता देना चाहते हैं कि यदि क्षत्रिय और ब्राह्मण सचमुच सुधर जाएंगे तो यह सब करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी जब वह खुद ही गिर गए हैं तो दूसरों को अपने से ऊंचा समझ रहे हैं और इसीलिए समाज नष्ट और बर्बाद हो रहा है क्योंकि जब ब्राह्मण रूपी समाज का मस्तिष्क और ‌ सबको शरण देखकर रक्षा करने वाली क्षत्रिय रूपी भुजा समाप्त हो जाएगी तो यह सारा धन दौलत गाड़ी बंगला कर घर की सुंदर स्त्रियां बच्चे सब विदेशी विधर्मी शैतान कब्जा कर लेंगे ‌ 58 मुस्लिम देश संपूर्ण यूरोप और अमेरिका कश्मीर बंगाल केरल बांग्लादेश पाकिस्तान अफ़गानिस्तान का हाल देख रहे हो फिर भी समझ में नहीं आ रहा है उसे पर यह लोग कुछ नहीं बोल रहे हैं जबकि चाहते तो एक करोड़ की संख्या के 1 से 5 कुंतल वाले लोग इन सभी शैतानों का सफाया कर देते इसीलिए ‌ मृत्यु भोज और अन्य चीजों के बहाने इन संत महंतों को आगे करके शंकराचार्य की तरह सनातन धर्म को नष्ट और बर्बाद किया जा रहा है ।


इन लोगों से पूछो कि इन्हें तो जंगल में आश्रम कुटी बनाकर धर्म कर्म करके सत्य धर्म का प्रचार करना चाहिए फिर यह चार्टर्ड हवाई जहाज और रेल के सबसे ऊंचे दर्जे में सबसे कुछ श्रेणी का भोजन किस लिए करते हैं ‌ क्यों बड़े-बड़े लोगों के यहां पंचमकार का सेवन करते हैं और तामसी भोजन का सेवन करके रक्षा बनाकर लोगों को देवता बनने का उपदेश देते हैं बड़े-बड़े हमारे योग और धर्म के आचार्य सब कुछ विदेशी ढंग का यहां तक की शौचालय भी विदेशी ढंग का प्रयोग करके सबको स्वदेशी का भाषण देते हैं ।क्या हमारे ऋषि मुनि तपस्वी विश्वामित्र ब्रह्म ऋषि जैसे लोग राज पाठ में सूरज सुंदरी में डूब कर सत्य और धर्म का प्रचार करते थे ।

एक बात और बता दे आज बंदर के हाथ में छुरा और पागल के हाथ में स्टेनगन देकर देश धर्म को और भारत को बचाने का जिम्मा ऐसे लोगों को दिया जा रहा है जो खुद ही इसको बर्बाद कर देंगे मैं जो भी कहता हूं सत्य धर्म और अपने सनातन ग्रंथो को प्रामाणिक रूप में ‌ अध्ययन करके कहता हूं अब इस एक कुंतल की तोंद वाले गाल गुलाबी नैन शराबी लोगों के समर्थन में और मुझे बताएं कि इसमें एक भी शब्द क्या गलत कहा गया है 

**दुनिया भर को इस्लाम बनाओ** वैदिक सूत्र से लिया गया है जिसमें कहा गया है **समस्त विश्व को आर्य बनाओ** वास्तव में जितने भी हमारे युद्ध हुए हैं वह सभी अरब और यूरोप के राक्षसी शैतानी शक्तियों से हुए हैं चाहे वह विश्वामित्र और वशिष्ठ के समय दश राजाओं का युद्ध हो चाहे रावण का युद्ध हो याद रखें रावण लंका का नहीं था वह भी अब देश का ही था चाहे सिकंदर का चाहे अन्य जंगली शैतानी जातियों का आक्रमण रहा हो ।

इसलिए इन सब के चक्कर में पड़कर वाद विवाद करने की आवश्यकता नहीं है नए बने हुए बौद्ध लोग भी यही करते हैं बस केवल थोड़ा सा रूप बदल दिया गया है और बाकी लोग भी यही करते हैं जो संस्कार सनातन धर्म के है वही क्रिश्चियन और यहूदी करते हैं और वही मुस्लिम भी करते हैं जो कार्य बनारस में और गया में पिंडदान का होता है वही मक्का मदीना में हज की यात्रा करते समय भी किया जाता है इसमें बहुत कुछ देशकाल और परिस्थितियों का भी अंतर होता है ।


बर्फ वाले प्रदेशों में और रेगिस्तान में जहां लकड़ी उपलब्ध नहीं थी जहां पानी उपलब्ध नहीं था वहां लकड़ी और पानी बचाने के लिए अनेक नियम बनाए गए थे जैसे की लाशों को दफन कर देना वहां जनसंख्या भी बहुत कम थी एवं ऐसे बर्तनों का आविष्कार करना जिससे पानी कम से कम खर्च हो भारत में हर चीज की प्रचुरता थी इसलिए यहां पर हर कार्य स्नान करने के बाद का नियम बनाया गया यहां जलवायु भी अच्छी और गर्म है ‌ वहां जंगली असभ्य म्लेच्छ ‌ जैसी अपराधी प्रकृति की भारत से निकल गई जातियों का निवास है जहां स्त्रियों की कमी है इसलिए एक स्त्री सेकंड लोगों का काम चला सकती है लूटमार ही इनका धंधा था क्योंकि वहां पहले कुछ होता नहीं था भारत में ऐसी चीज बनाने की क्या आवश्यकता है।

चलते-चलते एक बात बता दे यदि ब्राह्मण क्षत्रिय लाला और बनिया वर्ग अभी भी सुधर जाएं और सफल जाएं तो किसी भी सरकारी नियम की सहायता की उनको आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी मैं तो कहता हूं सारी नौकरी सारे पद और सारी सी अनुसूचित जाति जनजाति और पिछड़ी जातियों का बना दो और 5 साल में देखो क्या से क्या हो जाता है जिस तरह बिना देश के इसराइल महाशक्ति बन गया। नहीं तो गुजराती मारवाड़ी ‌ पंजाबी सिंधी लोग कितने ऐसे हैं जो नौकरी करते हैं और पूरी दुनिया में इनका राज है यहूदी लोगों को भी देख सकते हैं दुनिया में सबसे कम है और सबसे अधिक इन्हीं का दबदबा कायम है 58 मुस्लिम देश इनका कुछ नहीं उखाड़ सकते।

 वैसे ही यदि जाग सके तो क्षत्रिय ब्राह्मण वैश्य और लाला लोग आज भी 10 वर्ष में पूरी दुनिया में अपना साम्राज्य खड़ा कर सकते हैं लेकिन यह पतित हो गए हैं और योग्यता बढ़ाने की जगह आरक्षण जैसी चीजों का व्यर्थ में विरोध करके अपनी ऊर्जा समाप्त कर रहे हैं ‌ इससे अच्छा होता कि सारा समय अपने योग्यता और प्रतिभा बढ़ाने में करते दुनिया भर के दरवाजे खुले हैं लेकिन दुर्भाग्य से अभी पंचमकार वाली मैथुनी संस्कृत के जाल में और सूरज सुंदरी में डूब रहे हैं

चलते चलते आपको बता दे की देवताओं को संविधान नियम विधान और कानून की आवश्यकता नहीं है और राक्षसों के लिए शैतानों के लिए कानून बनाना व्यर्थ है क्योंकि वह उसका पालन ही नहीं करेंगे सारे नियम कानून मनुष्य अर्थात मनु की संतानों के लिए बने हैं इसलिए अन्य धर्म के लोगों को मानव समझने की भूल मत करो यह चलते फिरते विषैला सांप हैं जो कहीं भी आपको डंस कर खत्म कर देंगे एपस्टीन फाइल्स को ‌ देख लो जो लोग मनु की संतान अर्थात मानव नहीं है वह कैसी शैतानी हरकतें कर रहे हैं यही इनके सभ्यता की चरम उन्नति का फल है जिसमें सनातन धर्म को छोड़कर बाकी सारे धर्म शामिल हैं और सनातन धर्म का अर्थ है वह सारे लोग जो क्रिश्चियन मुस्लिम और यहूदी नहीं है इसमें हिंदू सिख जैन बौद्ध आस्तिक नास्तिक चार्वाक जंगली गुफा वाशी वनवासी सब शामिल है-डॉ दिलीप कुमार सिंह

Friday, 6 February 2026

*संघ प्रमुख मोहन भागवत जी के खिलाड़ी संवाद गोष्ठी में शामिल होंगे खेल गुरु फरहत अली खान*

*संघ प्रमुख मोहन भागवत जी के खिलाड़ी संवाद गोष्ठी में शामिल होंगे खेल गुरु फरहत अली खान* 
क्रीड़ा भारती द्वारा 20 फरवरी को मेरठ में आयोजित खेल संवाद में रामपुर से संघ के द्वारा फरहत अली खान को निमंत्रण भेजकर आमंत्रित किया गया है।
फ़रहत अली खान ने कहा के यह उनके जीवन में निमंत्रण ही नहीं बल्कि उपलब्धि है।
जब राष्ट्र को समर्पित संस्थाएं समाज के साथ साथ खेलों पर भी ध्यान केंद्रित करेंगी तब भारत को खेल महाशक्ति बनने से कोई नहीं रोक सकता।
देश की खेलनीति के अनुसार 2036 का ओलंपिक जो भारत आयोजित कर सकता है योजना बनाई जा रही है ऐसी जानकारी मिल रही है।
 इस होने वाले ओलिंपिक में हमारा देश खेलने ही नहीं बल्कि हर खेल स्पर्धा में गोल्ड जीतकर ही दिखाएगा ऐसी आशा ही नहीं विश्वास है। 
उन्होंने कहा खेल जुनून ही विजय बनाता किसी भी महान खिलाड़ी की गाथा पढ़ लो।
खेल में शोक,मेहनत, अभ्यास,जुनून, खेल से इश्क,अनुशासन, देश प्रेम और ईमानदार गुरु की ज़रूरत होती है।
पहले आलस,लालच और समस्याओं से जीतना सीखो , जिले से लेकर विश्व स्तर और ओलिंपिक का पदक आपके गले की शान बनने के इंतजार में है।
आज ही और अभी से देश के हर खिलाड़ी को यह सोच बनाने की जरूरत है हम नौकरी पाने के लिए नहीं ,
देश के तिरंगे की शान और सम्मान के लिए खेल रहे हैं यह विश्वसनीय सोच जो खिलाड़ी को हमेशा के लिए देश की शान बना देती है।
उन्होंने आर एस एस द्वारा भेजे गए आमंत्रण का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया है।

मड़ियाहूं में विधिक साक्षात है जागरूकता शिविर का किया गया आयोजन

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर के तत्वावधान में जनपद न्यायाधीश अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ‌ सुशील कुमार शशि जौनपुर के निर्देशन और सचिव सुशील कुमार सिंह की देखरेख में एक विधिक साक्षरता जागरूकता  सेमिनार का आयोजन ‌‌ तहसील सभागार मड़ियाहूं जनपद जौनपुर में आयोजित किया गया ‌ इस सेमिनार में  ‌ सचिव सुशील कुमार सिंह डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह  ‌ तहसीलदार मडियाहू राकेश कुमार प्राधिकरण के सुनील कुमार मौर्य डाटा एंट्री ऑपरेटर शिव शंकर सिंह और सुभाष यादव पीएलबी और राकेश कुमार यादव उपस्थित रहे ।
 वक्ताओं के क्रम में सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ‌ सुशील कुमार सिंह जौनपुर ‌ के द्वारा  ‌ बच्ची देवी बना स्टेट के बारे में माननीय उच्च और उच्चतम न्यायालय के दिशा निर्देशों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यों को विस्तार से समझाया गया और बताया । कन्या भ्रूण हत्या एवं महिला सशक्तिकरण के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा की महिलाएं जागरूक होगी तो देश भी जागरूक होगा ‌उन्होंने लोगों से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सहायता लेने के लिए भी प्रेरित किया।‌ उन्होंने कहा कि समाज और देश की आवश्यकता अनुसार विधियो में परिवर्तन और संशोधन होता रहता है। इसके अतिरिक्त बच्चों के अधिकार और स्थाई लोक अदालत के बारे में भी विस्तार से जानकारी देते हुए इस संबंध के टोल फ्री नंबर को याद रखने की बात कही गयी। उनके द्वारा बताया गया कि व्यक्तिगत बंदी की सामाजिक आर्थिक रिपोर्ट आ जाने के बाद संबंधित न्यायालय को तत्काल बंदी के जमानत प्रक्रिया को मानवीय एवं संवैधानिक अनुक्रम में त्वरित गति से किया जाना आवश्यकहै।‌ उन्होंने 14 मार्च को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक विवादों को सुलह समझौते द्वारा निश्चित करने पर बल दिया और कहा कि यह एक अस्थाई समाधान है और इसमें कोर्ट फीस भी वापस हो जाती है ।

डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल डॉ दिलीप कुमार सिंह के द्वारा ‌ महिलाओं और बच्चों के अधिकार के बारे में महिला सशक्तिकरण के बारे में बताया गया की प्राचीन काल में भारत में महिला और पुरुष में कोई भी विभेद नहीं था ‌ स्त्री और बालकों को विधान और संविधान में संपूर्ण सुरक्षा दी गई है किसी महिला को पुलिस सूर्यास्त के बाद गिरफ्तार नहीं कर सकती 14 वर्ष से कम बालकों को खतरनाक कामों में लगाया नहीं जा सकता है ‌ समान काम के लिए महिलाएं समान वेतन पाने और मातृत्व अवकाश की हकदार हैं।और उन्हें प्राधिकरण से भी हर संभव सहायता दी जाती है और उन्होंने कहा कि यदि नारियां संकल्प कर ले तो दहेज इत्यादि प्रथम अपने आप समाप्त हो जाएगी। ‌ बच्ची देवी बनाम स्टेट में माननीय सर्वोच्च और उच्च न्यायालय के द्वारा दिशा निर्देश दिए गए हैं कि यदि मुकदमे में 7 वर्ष या उससे कम की सजा है तो पुलिस सामान्य रूप से ऐसे लोगों को गिरफ्तार नहीं करेगी और चार्जशीट प्रस्तुत होने पर उन्हें व्यक्तिगत बंधपत्र या एकल जमानत पर छोड़े जाने का प्रावधान के बारे में व्यापक दिशा निर्देश  हैं जमानत एवं स्वतंत्रता हर व्यक्ति का अधिकार है और उन्हें अकारण जेल में बंद नहीं रखना चाहिए जमानत की प्रक्रियाओं को सरल और मानवीय होना अत्यंत आवश्यक है । सत्येंद्र अंटील ‌ मुशीर आलम जैसे मामलों के दिशा निर्देश का पालन किया जाना आवश्यक हैदेश प्रेम अनुशासन बच्चों को समय का सदुपयोग करने‌ और मोबाइल की अश्लीलता से बचकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया‌ साथ ही साथ कहा की 100, 112, 1098,333 101 जैसे आवश्यक नंबर सबको याद रखना चाहिए।

‌ तहसीलदार मडियाहू राकेश कुमार के द्वारा शासन और प्रशासन की महिलाओं और बच्चों के बारे में दिए जा रहे सहायता और सुविधाओं का विस्तार से उल्लेख किया और बताया कि प्रशासन प्राधिकरण के दिशा निर्देशों के अनुक्रम में संपूर्ण सहयोग देने को तात्पर्य है इसी क्रम में ‌ थाना प्रभारी मडि़याहूं के द्वारा भी बच्चों और महिलाओं के बारे में पुलिस के द्वारा दी गई सहायता और सुविधाओं के बारे में जानकारी दी गई

Sunday, 1 February 2026

भारतीय मुसलमान: स्टेकहोल्डर, बाहरी नहीं*

*भारतीय मुसलमान: स्टेकहोल्डर, बाहरी नहीं*

नागरिकता कोई तोहफ़ा नहीं है जो ज़्यादातर लोग किसी माइनॉरिटी को देते हैं, बल्कि यह पहचान और अपनेपन से जुड़ा एक अंदरूनी दावा है। भारतीय मुसलमानों के लिए, यह दावा सिर्फ़ कानूनी नहीं है - यह पुरखों का, सांस्कृतिक और बहुत इमोशनल है। भारतीय मुसलमानों को स्टेकहोल्डर कहना उस लगातार चलने वाली कहानी को चुनौती देना है जो उन्हें या तो बाहरी या इतिहास का हमेशा शिकार बताती है। कोई भी लेबल उस समुदाय की ज़िंदादिली के साथ न्याय नहीं करता जो एक हज़ार साल से ज़्यादा समय से इस ज़मीन की सीमाओं के अंदर रहा है और जिसने सक्रिय रूप से इसकी आत्मा को आकार दिया है। भारत के मुसलमानों के लिए गणतंत्र के बराबर नागरिक बनने का सफ़र कोई पैसिव नहीं था। यह एक सोच-समझकर, मुश्किल से लिया गया फ़ैसला था। जब 1947 में सबकॉन्टिनेंट का बँटवारा हुआ, तो लाखों लोगों ने यहीं रहने का फ़ैसला किया, क्योंकि उन्हें पक्का यकीन था कि उनकी किस्मत एक सेक्युलर भारत के कई लोगों वाले नज़रिए से जुड़ी है।
मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने लोगों को याद दिलाया कि दिल्ली के पत्थर और गंगा का पानी उनके पुरखों के पसीने और खून के गवाह हैं। उनके शब्द सिर्फ़ शांति से साथ रहने की अपील नहीं थे - उन्होंने देश के होने और पॉलिटिकल प्रोसेस में बराबर हिस्सेदारी और मालिकाना हक पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि हज़ार साल की मिली-जुली ज़िंदगी ने हिंदुओं और मुसलमानों को एक ही देश, एक कौम-ए-वाहिद में मिला दिया है, जहाँ एक का योगदान दूसरे से अलग नहीं था।
मालिकाना हक की यह भावना एक ऐसे इतिहास में निहित है जो आज की बांटने वाली बातों की छोटी-छोटी बातों से कहीं आगे है। अंग्रेजों के आने से बहुत पहले, इंडो-इस्लामिक कल्चर ने सबकॉन्टिनेंट में सोशल लाइफ में क्रांति ला दी थी, जिसमें साइंस और एस्थेटिक्स भी शामिल थे। दिल्ली सल्तनत और मुगलों के एडमिनिस्ट्रेटिव सुधारों - शेर शाह सूरी के लैंड रेवेन्यू सिस्टम से लेकर फतवा-ए-आलमगिरी लीगल फ्रेमवर्क तक - ने मॉडर्न इंडियन स्टेट की नींव रखी। साइंस और टेक्नोलॉजी में भी, योगदान उतने ही ज़रूरी थे। कागज़ बनाने की शुरुआत करने और मिडिल एज की ऑब्ज़र्वेटरी में एस्ट्रोलैब को बेहतर बनाने से लेकर टीपू सुल्तान की मशहूर रॉकेटरी (जिसे ब्रिटिश मिलिट्री ने भी अपनी रॉकेटरी से बेहतर माना था) तक, इंडियन मुसलमान इनोवेशन के पायनियर थे। आजकल की कहानी अक्सर इन स्ट्रक्चरल योगदानों को छोड़ देती है, और विक्टिमहुड पर फोकस करना पसंद करती है। असली सोशियो-पॉलिटिकल चुनौतियों पर आधारित होने के बावजूद, यह तरीका अक्सर कम्युनिटी की प्रोएक्टिव एजेंसी, साइंटिफिक सख्ती और क्रिटिकल सोच को नज़रअंदाज़ करता है। स्टेकहोल्डर होने का मतलब है शिकायत से आगे बढ़ना और अपनी सही जगह पर ज़ोर देना। यह बात भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सबसे ज़्यादा दिखी। 1857 के ज़बरदस्त विद्रोह से, जहाँ बहादुर शाह ज़फ़र एकजुट भारतीय विरोध के सिंबॉलिक हेड बने, अशफ़ाक़उल्ला खान के क्रांतिकारी जोश तक, जो आज़ाद भारत का सपना देखते हुए फांसी पर चढ़ गए - मुस्लिम भागीदारी ज़रूरी थी। इंडियन नेशनल कांग्रेस के तीसरे प्रेसिडेंट बदरुद्दीन तैयबजी ने ज़ोर दिया कि भारतीय मुसलमानों को नेशनल मूवमेंट में एक अलग एंटिटी के तौर पर नहीं, बल्कि भारतीय बॉडी पॉलिटिक्स के ज़रूरी हिस्सों के तौर पर हिस्सा लेना चाहिए। आज़ादी के बाद के दौर में, यह विरासत लड़ाई के मैदान से लैब, कोर्टरूम और बाज़ार में बदल गई। डॉ. ज़ाकिर हुसैन और मौलाना आज़ाद जैसे लोगों ने सिर्फ़ लीडरशिप ही नहीं की - उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया और इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (IITs) जैसे इंस्टीट्यूशन बनाए, जिससे यह पक्का हुआ कि नए बने रिपब्लिक के पास बने रहने के लिए इंटेलेक्चुअल इंफ्रास्ट्रक्चर हो। साइंस में, डॉ. APJ अब्दुल कलाम की बड़ी मौजूदगी ने यह याद दिलाया कि भारतीय स्ट्रेटेजिक और साइंटिफिक सोच के सबसे ऊंचे लेवल को मुस्लिम दिमागों ने बनाया था। आज, यह भावना ग्लोबल कॉर्पोरेशन्स के बोर्डरूम और भारतीय स्टार्टअप्स के हब में भी जारी है। फार्मास्यूटिकल्स में हबील खोराकीवाला के वॉकहार्ट से लेकर डिजिटल मीडिया में अज़हर इकबाल के इनशॉर्ट्स तक, कम्युनिटी का एंटरप्रेन्योरियल फुटप्रिंट बढ़ रहा है, जिसे एक ऐसी पीढ़ी चला रही है जो सिर्फ़ लिमिटेशन से डिफाइन होने से इनकार करती है।
अलग-थलग करने वाली बातों और सिस्टमिक चुनौतियों से बढ़ रहा अलगाव का मौजूदा माहौल, बिना किसी शक के घेराबंदी की भावना पैदा करता है। हालांकि, ज़मीन पर पहले से ही एक काउंटर-नैरेटिव लिखा जा रहा है, अक्सर ऐसी जगहों पर जहां उम्मीद नहीं थी। उत्तर प्रदेश, हैदराबाद और केरल के बीचों-बीच एक इनोवेशन क्रांति हो रही है, जहाँ युवा मुस्लिम महिलाएँ पारंपरिक शिक्षा से AI और कोडिंग में करियर बना रही हैं। यह भारतीय मुस्लिम स्टेकहोल्डर का नया चेहरा है - जो धार्मिक पहचान को प्रोफेशनल एक्सीलेंस के साथ बैलेंस करता है, उन्हें विरोधाभासी नहीं मानता। वे राज्य के उन्हें ऊपर उठाने का इंतज़ार नहीं कर रहे हैं। वे शिक्षा और माइक्रोफाइनेंस का सेल्फ-सस्टेनिंग इकोसिस्टम बना रहे हैं, संवैधानिक देशभक्ति के ज़रिए अपनी एजेंसी वापस पा रहे हैं।
भारतीय मुसलमानों को विक्टिम के नज़रिए से देखना उनके मज़बूत इतिहास को नकारना है। उदाहरण के लिए, पसमांदा आंदोलन समुदाय के अंदर ही एक डेमोक्रेटाइज़ेशन को दिखाता है, क्योंकि समाज के हाशिए पर रहने वाले लोग स्टेकहोल्डर पाई में अपना हिस्सा माँग रहे हैं। यह अंदरूनी मंथन एक हेल्दी, एक ऐसा समुदाय जो लगातार विकसित हो रहा है और लोकतांत्रिक ढांचे के भीतर अपने अधिकारों और शक्ति के बारे में ज़्यादा जागरूक हो रहा है। वे अब सिर्फ़ वोट बैंक नहीं हैं जिन्हें मैनेज किया जा सके, बल्कि एक ऐसी नागरिक शक्ति हैं जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। समानता के लिए उनका संघर्ष बाहरी होने का संकेत नहीं है - यह हितधारक होने का सबसे बड़ा सबूत है।
भारत का भविष्य उसके अलग-अलग समुदायों के बीच ज़ीरो-सम गेम नहीं है। यह एक सहयोगी प्रोजेक्ट है जहाँ भारतीय मुसलमान भारतीय लोकतंत्र से अलग नहीं हैं - वे इसके निर्माताओं में से हैं। अलगाव की पुरानी कहानियों से आगे बढ़कर और देश की सामाजिक-आर्थिक प्रगति में सक्रिय भूमिका निभाकर, यह समुदाय यह सुनिश्चित कर सकता है कि उसका योगदान हमेशा की तरह ज़रूरी और लगातार बना रहे। भारतीय मुसलमान भारत की बहुलता की आत्मा हैं। उनके बिना, भारत की कहानी अधूरी है।
फ़रहत अली खान 
एम ए गोल्ड मेडलिस्ट