Friday, 3 July 2026

अनंत ब्रह्मांड के डरावने मन बुद्धि और कल्पना के परे के भयानक सच -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

अनंत ब्रह्मांड के डरावने मन बुद्धि और कल्पना के परे के भयानक सच -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि 

दिन में नीला और रात में कल दिखाई देने वाला आसमान बहुत ही विराट है लेकिन यह इस अनंत ब्रह्मांड का बहुत ही छोटा भाग है प्राचीन काल में भारत के ऋषि मुनि और वैज्ञानिक लोगों ने ईश्वर के साथ अंतरिक्ष और ब्रह्मांड को भी अनंत और नेति नेति कहा था‌ जिसे आधुनिक वैज्ञानिकों ने बहुत हल्के में लिया और उसकी हंसी उड़ाई थी लेकिन विज्ञान और टेक्नोलॉजी तथा आश्चर्यजनक दूरबीन और रेडियो दूरबीन की खोज के बाद उनको यह अच्छी तरह से अनुभव हो गया कि जो कुछ भारतीय मनुष्यों ने कहा वही अंतिम सच है इस लेख को पढ़ने के लिए संपूर्ण मन बुद्धि एकाग्र कर लें तभी यह लेख अच्छी तरह समझ में आएगा 

हमारी धरती खाने को तो बहुत बड़ी है जो हमारे देश से सैकड़ो गुनी भारी है लेकिन पृथ्वी से हजारों गुना बड़ा बृहस्पति है और बृहस्पति से लाखों गुना बड़ा सूर्य है और सूर्य से बड़ा उसका सौरमंडल या सौर तंत्र है ‌ जो लगभग दो प्रकाश वर्ष की परिधि में फैला हुआ है अर्थात प्रकाश को भी इस पार करने में 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड किधर से 2 वर्ष लग जाएंगे लेकिन इससे भी बड़ी बात है कि हमारी अपनी आकाशगंगा हमारे सौर परिवार से लाखों गुना बड़ी है जो 1 लाख प्रकाश वर्ष से अधिक फैली हुई है जिसमें हमारे सूर्य जैसे चार से पांच खरब तारे और उनके परिवार है‌ लेकिन यह आकाशगंगा भी अनंत ब्रह्मांड के आगे बहुत छोटी है क्योंकि एक लाख प्रकाश वर्ष में पहले अपनी आकाशगंगा से भी करोड़ अर्बन गुना बड़ा अपना ब्रह्मांड है जो 100 से लेकर 500 अरब प्रकाश वर्ष में फैला हुआ है।

अब आप सोच रहे होंगे कि यह तो वास्तव में अनंत है इसको इस प्रकार भी समझ सकते हैं यदि हम पृथ्वी से चंद्रमा पर प्रकाश गति से चले तो चंद्रमा पर एक सेकंड से कुछ अधिक समय में पहुंच जाएंगे सूर्य पर पहुंचने में 8 मिनट 20 सेकंड का समय लगेगा यह अर्थात प्लूटो पार करने में 5 घंटे का समय लगेगा ‌ अपने सौरमंडल को पार करने में दो वर्ष प्रॉक्सिमा सेंटूरी को पार करने में 5 वर्ष अपने आकाशगंगा पार करने में 100000 वर्ष और जितना दिखाने लायक ब्रह्मांड है उसे पार करने में 100 अरब वर्ष से अधिक समय लग जाएगा जो मानव की बुद्धि और गणना के परे है।

और यही इस ब्रह्मांड का अंत नहीं है 100 से 500 अब आकाशगंगा वाले इस दृश्यमान ब्रह्मांड जैसे अनगिनत ब्रह्मांड है लेकिन वहां पहुंचनाअसंभव है‌। क्योंकि ना कोई ऐसा ज्ञान है जो अरबों साल चलता रहेगा और ना कोई मानो है जो अरबों साल जीवित रहेगा। मानव सभ्यता 10 से 20000 वर्ष पुरानी कही जाती है हालांकि हमारे ग्रंथो में इसको 100 लाख वर्ष पुराना कहा जाता है और पृथ्वी अर्थात सृष्टि पंच अरब वर्ष पुरानी है ‌ इसका अर्थ यह हुआ कि यदि कोई अंतरिक्ष यात्री प्रकाश यह पर बैठकर यात्रा करें और 10 अब वर्ष के बाद वापस लौटे तो यहां न धरती रहेगी ना सूर्य और ना सौरमंडल और 20 अरब वर्ष बाद लौटेगा तो अपनी आकाशगंगा भी यहां पर नहीं मिलेगी ‌ अब आप खुद ही सोच लीजिए यह कितना भयानक डरावना और हृदय और मस्तिष्क को कंपा देने वाला तथ्य है 

चंद्रमा के बाद जाने पर एक सबसे डरावना और दिल दहला देने वाला मस्तिष्क को सुन्न कर देने वाला तथ्य आता है की कोई भी वस्तु हम उसके असली समय में नहीं देख सकते। उदाहरण के लिए चंद्रमा से जो दृश्य दिखाई देता है यह सुनाई पड़ता है वह 3 सेकंड के बाद का समय होता है इसी तरह सूर्य पर जो कुछ दिखाई देता है वह 16 मिनट 40 सेकंड बाद का होता है अर्थात आप कल्पना करें कि यदि सूर्य किसी कारणवश गायब हो जाए या नष्ट हो जाए तो भी वह हमें 16 मिनट 40 सेकंड तक दिखाई देगा और उसकी गर्मी प्रकाश हमें इतने समय मिलती रहेगी अब सोच लीजिए कितना डरावना सच है 


और इसके आगे अगर आप जाते हैं तो और भी भयानक और डरावना सच सामने आता है ‌ उदाहरण के लिए यदि हम किसी तरह प्रॉक्सिमेट सेंचुरी सबसे नजदीक कार्य पर पहुंच गए और वहां पर धरती के लोगों से बात करें तो वह 10 वर्ष बाद सुनाई देगा और हमारा फोटो या हम स्वयं भी 10 वर्ष बाद दिखाई देंगे तब तक कोई कहां रहेगा परिस्थितियों क्या रहेगी कोई बात नहीं सकता इसी तरह यदि अपनी आकाशगंगा गायब हो जाए तो भी हमें वह 200000 वर्ष तक लगातार दिखाई देती रहेगी और उसकी उसका प्रकाश ऊर्जा हमको मिलता रहेगा इसको इस तरह समझ लीजिए कि आकाशगंगा पर जो भी हम देख रहे हैं या देख सकते हैं वह 2 लाख वर्ष पहले का चित्र है आज का चित्र नहीं है 


इस अनंत ब्रह्मांड में अनेक डरावनी चीज हैं ब्रह्मांड इतनी तेज फैल रहा है कि हम कभी इसके पर नहीं जा सकते अंतिम छोर पर तो ब्रह्मांड प्रकाश की गति से भी अधिक तेजी से फैल रहा है अर्थात प्रकाश यान बनाकर भी हम अपने आकाशगंगा के पार नहीं जा सकते‌ इसीलिए अपने सौर परिवार या आसपास के तारों को छोड़ दिया जाए तो किसी भी परग्रही एलियन से मिल पाना और उससे बात कर पाना लगभग असंभव है।

यदि हम मानव उपलब्ध सबसे अधिक गति की सीमा वाला पायनियर यह बना ले जो लगातार 73 वर्ष से चलते हुए केवल 25 अरब किलोमीटर जा पाया है‌ प्रकाश वर्ष की भाषा में यह एक प्रकाश दिन है अर्थात वहां से कोई भी संदेश पहुंचाने में हमें 48 घंटे लग जाएंगे और वहां का अंतरिक्ष यात्री हमें 48 घंटे बाद अपनी मूल स्थिति में दिखाई देगा इस गति से यदि हम सबसे निकट के तारे पर जाएं तो 73000 साल वहां पहुंचने में लगेगा‌ इस प्रकार अंतरिक्ष की अनंत दूरियां एक जेल की तरह हैं जिसके आर पार जाना संभव नहीं है और इसीलिए हर सभ्यता अपने में अकेली है और दूसरी सभ्यता से उसकी भेंट लगभग असंभव है 

इस प्रकार आपने देखा की अनंत अंतरिक्ष कितना विराट मन बुद्धि से परे डरावना और भयानक है एक और डरावना सच है जो इससे भी भयानक है इस अनंत ब्रह्मांड में 99% भाग खाली है 99% भाग हमारे शरीर में भी खाली है जिस कुर्सी मेज चारपाई पर हम बैठे हैं उसका भी 99% भाग खाली है‌ खाने का अर्थ है कि अनंत ब्रह्मांड में आकाशगंगाएं छोटी-छोटी बिंदु जैसी हैं और आकाशगंगा में सूर्य और ग्रह एक छोटे-छोटे बिंदु जैसे हैं और सौरमंडल में भी सूर्य ग्रह उपग्रह एक छोटे-छोटे बिंदु में है सौरमंडल के सभी ग्रह अगर एक सीधी रेखा में रखे जाए तो पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी में समा जाएंगे अर्थात सब कुछ शून्य है इसीलिए हमारे वेद शास्त्र पुराण और महाकाव्य तथा अन्य ग में कहा गया है यह अभी शून्य था वह अभी शून्य था शून्य से शून्य उत्पन्न होता है शून्य में से शून्य निकाल देने पर जो कुछ बचता है वह भी शून्य है 

इसके आगे जब हम और भी आगे जाते हैं तो ऐसे ऐसे विराट निहारिकाएं मिलती हैं जिसमें से हर समय लाखों सूर्य पैदा होते हैं और उनके सौरमंडल बनते बिगड़ते रहते हैं हर एक आकाशगंगा के केंद्र में एक बहुत शक्तिशाली ब्लैक होल अर्थात कृष्ण विवर होता है जिसमें अंत में सारी आकाशगंगा समा जाती है और यह कृष्ण विवर भी आगे चलकर श्वेत विवर में समा जाता है ‌ श्वेत विवरांत में महाकाली में और महाकाली अंत में भगवान शिव में समाहित होकर बिंदु मात्र हो जाती हैं जब शिव और शक्ति कल्पना करते हैं कि मैं एक से बहुत हो जाऊं तब फिर से सृष्टि का विस्तार होता है और पल भर में अनंत ब्रह्मांड का निर्माण होता है महा विस्फोट की ऐसी सिद्धांत को बिग बैंग थ्योरी कहा जाता है इसीलिए कहा गया है हरि अनंत हरि कथा अनंता। ‌ यही अनंत ब्रह्मांड की अनंत और परम डरावनी कथा का एक छोटा सा अंश है प्राचीन ग्रंथो में इसी को समय यात्रा अर्थात टाइम ट्रेवल कहा जाता है।‌ कृष्ण और अर्जुन की यात्रा और राजा नील माधव की ब्रह्मा जी के पास की यात्रा ब्रह्मा जी का कृष्ण के पास आना इसी समय यात्रा का अंश है और ब्रह्मांड के समानांतर अनेक ब्रह्मांड है और एक ही व्यक्ति एक साथ एक से अधिक जगह पर एक ही समय उपस्थित रह सकता है जितने लोग यहां धरती पर हैं उनका प्रतिरूप किसी न किसी ग्रह नक्षत्र ब्रह्मांड में अवश्य ही होगा

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