Sunday, 11 December 2022

अम्बेडकर नगर ! बिचौलिए चला रहे है पीसीएफ सेंटर, डीएस पर लगे गंभीर आरोप*

*अम्बेडकर नगर ! बिचौलिए चला रहे है पीसीएफ सेंटर, डीएस पर लगे गंभीर आरोप*

अम्बेडकरनगर 
जनपद में पीसीएफ सेंटर पर दलाल व विचौलिए हावी मीडिया पड़ताल में आधे से ज्यादा पीसीएफ सेंटरों पर अवैधानिक व नियमों को ताक पर रखकर किसानों से खरीद न करके व्यापारी विचौलियों से खरीद की जा रही है। किसान अपनी फसल में पूरे साल अपनी मेहनत के साथ-साथ अपना खून पसीना इस उम्मीद में लगाता है कि समय आने पर वो अपनी फसल का सही दाम पाएगा। जिससे वो अपने परिवार और अपने बच्चों के भविष्य की बेहतरी के लिए कुछ अच्छा कर सके। सरकार भी इसी मंशा को पूरा करने के लिए तरह-तरह योजनाएं बनाती है लेकिन योजनाएं तब सिर्फ कागज तक सीमित रह जाती है।अधिकारी सरकार की नीतियों और किसान के हित के बजाय अपनी जेब भरने के लिए काम कर रहे हैं। विश्वस्तसूत्रों द्वारा जानकारी मिली है कि 200 बोरा सेंटरों पर भेजा जा रहा है खरीद 300 कुंटल की हो रही है। ये कैसे संभव है? और उन बोरों की एंट्री शाम के समय की जा रही है धान की ज्यादा खरीद सिर्फ कागजों पर हो रही है अभी तक रिकॉर्ड अनुसार 1 नवंबर 2022 से अभी तक कुल 1 लाख 31 हजार कुंटल खरीद हुई है जबकि इतना धान किसी भी स्टोर या पीसीएफ सेंटरों पर फिजिकल रूप में मौजूद नहीं है। कुछ पीसीएफ सेंटरों के सचिव से इस मामले मे जानकारी किया उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बताया की जिला प्रबंधक पीसीएफ सुशील कुमार द्वारा उन पर विचौलिया व व्यापारियों से खरीद करने का दबाव बनाया जा रहा है नाम न छापने की शर्त पर यह भी बताया गया कि जिन केंद्रों से ₹5 बोरी के हिसाब से पैसा नहीं दिया जाता उनको ऑनलाइन सिस्टम में बोरा उपलब्ध नहीं करवाया जाता। जहां पर निजी स्वार्थ में लिप्त अधिकारी को सुविधा शुल्क प्राप्त हो रही है वहां पर ऑनलाइन बोरे की कोई कमी नहीं है। जबकि ऑफलाइन बोरा उनके पास पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है उच्च अधिकारियों द्वारा पूछने पर उनको यह मजबूर होकर कहना पड़ता है कि उनके पास बोरा है। किसानों द्वारा केंद्र प्रभारी से पूछे जाने पर किसानों से यह कहा जाता है कि हमारे पास पर्याप्त मात्रा में बोरे तो उपलब्ध है परंतु जब ऑनलाइन मेरी आईडी पर बोरा नहीं सो करेगा तब तक हम खरीद किस प्रकार कर सकेंगे। सचिव द्वारा यह भी कहा गया अधिकारियों से कौन पंगा से हमे अपना परिवार देखना है। सूत्रों द्वारा जानकारी मिली है की डी एस द्वारा मोटा पैसा लखनऊ के उच्च अधिकारी को पहुंचाया जा रहा इसलिए इनके ऊपर उच्च अधिकारी को कार्यवाही करने से बच रहे हैं। इस मामले पर जब जिला प्रबंधक सुशील कुमार से बात करने की कोशिश की गई तो उनका नंबर स्विच ऑफ बताया। कई किसानों और सेंटर संचालकों से बात करने पर पूरे जिले के पीसीएफ सेंटरों की हालत काफी खराब दिख रही है इस पर उच्च अधिकारियों को जांच कर सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है बाकी किसान तो है ही राम भरोसे।

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