Sunday, 11 December 2022

भ्रष्टाचार का फैला हुआ जाल...... .. आखिर दोषी कौन*❓ जाल...... .. आखिर दोषी कौन*❓*भ्रष्टाचार का कारोबार* *सरकार की जमीन पर झुग्गी माफिया अपनी बस्ती बनाते रहे और अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी*

भ्रष्टाचार का फैला हुआ जाल...... .. आखिर दोषी कौन*❓ जाल...... .. आखिर दोषी कौन*❓

*भ्रष्टाचार का कारोबार*
   *सरकार की जमीन पर झुग्गी  माफिया अपनी बस्ती बनाते रहे और अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी*
👉 *तंत्र में भ्रष्टाचार का घुन लग जाता है तो जिम्मेदार अधिकारी अपने मूल दायित्वो के प्रति भी उदासीन हो जाते हैं! यही वजह है कि लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास परिषद, और रेलवे की जमीनों पर शहर के बीच ही अवैध बस्तियां बसती रही और किसी ने उसे नोटिस तक नहीं लिया!! एलडीए की सेक्टर सी अलीगंज विस्तार योजना का पार्क तो एक उदाहरण है, ऐसी बस्तियां प्रदेश के सभी महानगरों में बस गई हैं, और इनमें कौन रह रहा है, वह क्या कर रहा है, यह किसी को पता नहीं!! अधिकारी इसकी जरूरत ही नहीं महसूस करते क्योंकि उनकी ही शह पर यहां समानांतर व्यवस्था बन गई है! जिसमें प्राधिकरण, निगम, बिजली विभाग, पुलिस, आदि विभागों के अधिकारी भी सहभागी हैं!! यह समानांतर व्यवस्था ही  4 हजार रुपए में सरकारी जमीन पर झोपड़ी बेच रही है और ₹30 महीने पर बिजली कनेक्शन उपलब्ध करा रही है!!.. मीडिया के स्टिंग ने इस भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए कदम बढ़ाया तो इसका अर्थतंत्र भी सामने आया!! इन झोपड़पट्टीयो से हर महा लखनऊ में 4:30 करोड़ रुपए वसूले जा रहे हैं और यह धनराशि किन लोगों में बांट रही है,, यह समझा जा सकता है*!!
👉 *किसी के घर में घुसपैठ हो और वह उसे गंभीरता से ना ले  तो घर की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी!! इन अवैध बस्तियों को प्रश्रय देकर अधिकारी और उनके कुछ कारिंदे लाभ जरूर कमा रहे हैं!! लेकिन कानून व्यवस्था को खतरा है!! ऐसी ही झोपड़पट्टी से पिछले दिनों प्रतिबंधित संगठन पीएफआई का एक सदस्य पकड़ा गया था!! झोपड़ियों में जो लोग रह रहे हैं, उनमें बांग्लादेशियों के साथ रोहिंग्या भी हैं!! फिर भी पुलिस इसे गंभीरता से नहीं लेती!! सरकारी जमीन पर कब्जा हो रहा है और जनप्रतिनिधियों को भी यह दिखाई नहीं देता!! जरूरत इस बात की है कि सिर्फ लखनऊ ही नहीं,, प्रदेश की सभी महानगरों में बसी ऐसी बस्तियों की पड़ताल की जाए और सरकारी जमीन को खाली कराकर उसे लोकहित में प्रयुक्त किया जाए!! ऐसी अवैध बस्तियां बसाने के लिए जिन विभागों के अधिकारी जिम्मेदार हैं,, उनके खिलाफ  भी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए*!!

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