Sunday, 11 December 2022

संविधान में अभिव्यक्ति की आजादी जरूर मिली हुई है, लेकिन बोलने से पहले यह विचार अवश्य किया जाना चाहिए कि विषय उचित है या नहीं, या फिर इससे सामाजिक सद्भाव तो नहीं बिगड़ेगा

*राष्ट्र विरोधी कदम*

*विश्व को दिशा देने का अवसर* (1)

*पारदर्शी नहीं न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया* (2)

👉 *राष्ट्रघाती समस्या* (3)

👉 *राष्ट्र चुनौती बना छल बल से मतानतरण*(4)

👉 *तकनीक के दौर में गुम होता बचपन*(5)

👉 *न्याय में अवरोध*(6)

👉 *मतानतरण रोधी कानून*(7)
++++++++++++++++++++
👉 *संविधान का अपमान*
👉  *शैक्षणिक परिसर पठन-पाठन के लिए होते हैं और वहां राजनीति भी छात्र हितों के इर्द-गिर्द होनी चाहिए*
👉 *संविधान में अभिव्यक्ति की आजादी जरूर मिली हुई है, लेकिन बोलने से पहले यह विचार अवश्य किया जाना चाहिए कि विषय उचित है या नहीं, या फिर इससे सामाजिक सद्भाव तो नहीं बिगड़ेगा!! - 6 दिसंबर को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों ने विवादित ढांचा गिराने के विरोध में काला दिवस मनाते हुए धार्मिक नारे लगाकर ऐसा ही कृत्य किया है!! विश्वविद्यालय परिसर में ऐसा किया जाना तो और भी आपत्तिजनक है!! अयोध्या में मंदिर - मस्जिद का मुद्दा अब समाप्त है और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को सभी पक्षों ने स्वीकार कर लिया है!! ऐसे में किसी विश्वविद्यालय परिसर में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना करना संविधान का अपमान करना है!! इससे शांति व्यवस्था भंग होने का खतरा भी पैदा होता है!! शैक्षणिक परिसर  पठन-पाठन के लिए होते हैं और वहां राजनीति भी छात्र हितों के इर्द-गिर्द होनी चाहिए!! विद्यालय की भी यह जिम्मेदारी होती है कि ऐसी गतिविधियों पर निगाह रखें और यदि कुछ छात्र ऐसे कदम उठाते हैं तो उन्हें सख्ती से रोका जाए!! धार्मिक विषयों से जुड़े मामलों पर टिप्पणी जन भावनाओं को आहत करती है और छात्रों को इसका ध्यान रखना चाहिए*!!
👉 *अदालतें न्याय का मंदिर है और उनके फैसलों के प्रति लोगों में आस्था का भाव होना चाहिए!! सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अस्वीकार करने का अधिकार जनता को नहीं होता है!! विश्वविद्यालय के छात्र जागरूक और विवेकशील होते हैं और उन्हें यह जानकारी भी होगी!! ऐसे में यदि वे कोई अनुचित कदम उठाते हैं तो उसके पीछे की मंशा पर सवाल जरूर खड़े होंगे!! कुछ लोग जानबूझकर ऐसे बयान देते हैं जिससे वे चर्चा में आए, और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का प्रकरण भी कुछ ऐसा ही प्रतीत होता है!! समाज में वैमनस्य न  फेले, यह हम सब की जिम्मेदारी है, इसलिए संवेदनशील मुद्दों पर सार्वजनिक मंचों से टिप्पणी उचित नहीं!! छात्रों ने यह कदम उठाया है तो विश्वविद्यालय प्रबंधन को भी इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए!! किसी भी विश्वविद्यालय परिसर में यदि इस तरह  के विरोध - प्रदर्शन होते हैं तो वहां के अधिकारियों की भी जवाबदेही बनती ही है!! इसका संज्ञान लिया जाना चाहिए*!!

No comments:

Post a Comment