Wednesday, 14 January 2026

*डर से आस्था को वापस पाना*इस्लाम के अनुयायी होने के नाते, बांग्लादेश में हाल ही में हुई लिंचिंग जैसी घटनाएँ हमें मुश्किल सवाल पूछने पर मजबूर करती हैं,

*डर से आस्था को वापस पाना*

इस्लाम के अनुयायी होने के नाते, बांग्लादेश में हाल ही में हुई लिंचिंग जैसी घटनाएँ हमें मुश्किल सवाल पूछने पर मजबूर करती हैं, दूसरों से नहीं, बल्कि खुद से। जब पैगंबर, कुरान या इस्लाम की रक्षा के नाम पर किसी इंसान को मार दिया जाता है, तो कुछ बहुत गलत हुआ है। आस्था, जो इंसान की गरिमा को बढ़ाने के लिए प्रकट हुई थी, उसका इस्तेमाल इसके बजाय इसे खत्म करने के लिए किया जा रहा है। यह सिर्फ एक राजनीतिक या कानूनी संकट नहीं है; यह एक नैतिक और धार्मिक संकट है। एक मुस्लिम विद्वान का दृष्टिकोण एक सरल लेकिन असहज सच्चाई से शुरू होता है: ईशनिंदा के आरोपों के जवाब में भीड़ की हिंसा का इस्लाम में कोई औचित्य नहीं है। यह कुरान, पैगंबर के उदाहरण और इस्लामी कानून के उद्देश्यों के विपरीत है।
कुरान बार-बार इंसान के जीवन की पवित्रता की पुष्टि करता है: "जो कोई भी एक निर्दोष आत्मा को मारता है, ऐसा है जैसे उसने पूरी मानवता को मार डाला हो" (कुरान 5:32)। यह आयत गुस्से, आहत भावनाओं या धार्मिक आक्रोश के लिए कोई अपवाद नहीं बनाती है। किसी इंसान का जीवन सांप्रदायिक अनुमोदन या सार्वजनिक भावना पर निर्भर नहीं है। फिर भी भारतीय उपमहाद्वीप के कई हिस्सों में, ईशनिंदा के आरोप सामूहिक उन्माद का कारण बन गए हैं। अफवाहें सबूतों की जगह ले लेती हैं, भीड़ अदालतों की जगह ले लेती है, और हिंसा न्याय की जगह ले लेती है। इसका परिणाम इस्लाम की रक्षा नहीं, बल्कि उसका विकृति है। इस्लाम को अपनी रक्षा के लिए भीड़ की ज़रूरत नहीं है। सच्चाई इतनी नाजुक नहीं है कि उसे जीवित रहने के लिए लिंचिंग की ज़रूरत पड़े।
कुरान स्वीकार करता है कि विश्वासियों को उपहास, अपमान और उकसावे का सामना करना पड़ेगा। लेकिन इसकी प्रतिक्रिया आश्चर्यजनक रूप से संयमित है: दूर चले जाओ। कुरान कहीं भी आम विश्वासियों को हिंसा से भाषण को दंडित करने का निर्देश नहीं देता है। यह चूक आकस्मिक नहीं है; यह एक गहरी नैतिक दृष्टि को दर्शाती है। दृढ़ विश्वास पर आधारित आस्था अपराध पर घबराती नहीं है। यह गरिमा के साथ प्रतिक्रिया करती है। ऐसे मामलों में जवाबदेही भगवान की है जब तक कि भाषण सीधे हिंसा या विद्रोह से जुड़ा न हो। यह व्याख्या आधुनिक तुष्टीकरण नहीं है; यह कुरान की अपनी नैतिक संरचना में निहित है।
पैगंबर मुहम्मद खुद अपमान से अछूते नहीं थे; वह अक्सर इसका निशाना बनते थे। उन्हें झूठा, कवि, पागल कहकर उपहास किया गया। उनकी प्रतिक्रिया सतर्कता न्याय नहीं, बल्कि नैतिक संयम थी। जब ताइफ़ में उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया, खून बह रहा था और अपमानित थे, तो उन्होंने दिव्य प्रतिशोध से इनकार कर दिया। जब मक्का में उनका अपमान किया गया, तो उन्होंने विजय के बाद माफ कर दिया। ये कमज़ोरी के नहीं, बल्कि नैतिक ताकत के संकेत थे। पैगंबर से प्यार का दावा करना और उनके आचरण को छोड़ देना एक विरोधाभास है। आप उनके चरित्र का उल्लंघन करके उनके सम्मान की रक्षा नहीं कर सकते।
विद्वान इस बात से इनकार नहीं करते कि क्लासिकल न्यायविदों ने ईशनिंदा पर बहस की थी। उन्होंने की थी, लेकिन हमेशा सख्त कानूनी ढाँचे के भीतर। यहाँ तक कि सबसे रूढ़िवादी न्यायविदों ने भी राज्य के अधिकार, उचित प्रक्रिया, सत्यापित सबूत और पश्चाताप के अवसर पर ज़ोर दिया। इब्न तैमियाह, जिन्हें अक्सर चुनिंदा रूप से उद्धृत किया जाता है, ने स्पष्ट रूप से भीड़ की कार्रवाई और अराजकता (फ़ितना) को खारिज कर दिया था। इमाम अबू हनीफ़ा ने मृत्युदंड को सीमित किया और संयम पर ज़ोर दिया। क्लासिकल कानून, चाहे उसके निष्कर्ष कुछ भी हों, कभी भी भावनात्मक, तात्कालिक या भीड़-संचालित नहीं था। आज हम जो देख रहे हैं वह "शरिया अमल में" नहीं, बल्कि उसका पतन है।
एक यथार्थवादी नज़रिए से ईशनिंदा के आरोपों के सामाजिक-राजनीतिक दुरुपयोग को भी पहचानता है। दक्षिण एशिया में, वे अक्सर धार्मिक अल्पसंख्यकों, गरीब और शक्तिहीन लोगों, असंतुष्टों और सुधारकों को निशाना बनाते हैं; जिनके पास सामाजिक सुरक्षा नहीं है। यह चयनात्मक प्रयोग समस्या को उजागर करता है: ईशनिंदा सम्मान के बारे में कम और नियंत्रण के बारे में ज़्यादा है। इस्लाम व्यक्तिगत हिसाब-किताब निपटाने और प्रभुत्व स्थापित करने का एक उपकरण बन जाता है। यह न्याय के साथ विश्वासघात है, जो कुरान का एक मुख्य मूल्य है।
शेख अब्दुल्ला बिन बय्याह जैसे विद्वान हमें याद दिलाते हैं कि कोई भी व्याख्या जो रक्तपात, अराजकता और भय की ओर ले जाती है, इन उद्देश्यों के विपरीत है, भले ही वह धार्मिक भाषा में लपेटी गई हो। जब ईशनिंदा के आरोप भीड़ को जन्म देते हैं, तो इस्लाम का नैतिक उद्देश्य विफल हो जाता है। मुस्लिम समाजों को रक्षात्मक आक्रोश से आगे बढ़कर नैतिक आत्मविश्वास की ओर बढ़ना चाहिए। इसके लिए धार्मिक नेताओं द्वारा भीड़ हिंसा की खुली सार्वजनिक अस्वीकृति, अपराधियों के लिए कानूनी जवाबदेही, नैतिकता पर आधारित धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को एक धार्मिक कर्तव्य के रूप में, न कि रियायत के रूप में, शामिल करना होगा। चुप्पी तटस्थता नहीं है। जब इस्लाम के नाम पर अन्याय होता है और मुसलमान चुप रहते हैं, तो खुद आस्था को नुकसान पहुँचता है।
हमारे सामने चुनाव स्पष्ट है। हम एक ऐसे रास्ते पर चल सकते हैं जहाँ आस्था भय, रक्तपात और ज़बरदस्ती से जुड़ी हो या हम इस्लाम को न्याय, दया और संयम में निहित एक नैतिक शक्ति के रूप में फिर से अपना सकते हैं। इस्लाम की रक्षा के लिए लोगों को मारने की ज़रूरत नहीं है। इसके लिए साहस, नैतिक साहस की ज़रूरत है, यह कहने के लिए कि यह हिंसा गलत है, गैर-इस्लामी है, और इसे रोकना होगा।

फ़रहत अली खान 
एम ए गोल्ड मेडलिस्ट

Monday, 12 January 2026

हमारे केंद्र के द्वारा कुछ और महान भविष्यवाणी पहले भविष्यवाणी अमेरिका यूरोप और रूस चीन और कोरिया में बहुत ही भयंकर बर्फीला तूफान आएगा यहां तक कि ब्रिटेन जैसे कई देशों में आसमान का रंग लाल गुलाबी हो जाएगा

हमारे केंद्र के द्वारा कुछ और महान भविष्यवाणी 
पहले भविष्यवाणी अमेरिका यूरोप और रूस चीन और कोरिया में बहुत ही भयंकर बर्फीला तूफान आएगा यहां तक कि ब्रिटेन जैसे कई देशों में आसमान का रंग लाल गुलाबी हो जाएगा 

दूसरी भविष्यवाणी अमेरिका समर्थित देशद्रोही और अमेरिकी एजेंट ईरान में भयानक मार्केट दंगा फसाद करेंगे और अमेरिका जल्दी ही ईरान में सीमित सैन्य हस्तक्षेप करेगा 


तीसरी भविष्यवाणी ट्रंप की नाराजगी दूर करने के लिए भारत के अनुरोध और आग्रह पर बहुत जल्दी डोनाल्ड ट्रंप भारत की यात्रा कर सकते हैं 


उत्तरी गोलार्ध अमेरिका यूरोप रूस चीन और हिमालय क्षेत्र में कीर्तिमान बनाने वाली महा भयंकर हिमपात के चलते पूरी दुनिया और भारत में भीषण ठंड और गलन काफी लंबी चलेगी 


पांचवी भविष्यवाणी रूस और यूक्रेन और यूक्रेन समर्थित देश का युद्ध ‌बहुत जल्दी ही एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच जाएगा 

अगली भविष्यवाणी‌ दुनिया के कई देशों में शीत युद्ध और आतंकी युद्ध तथा हमले बहुत तेज होंगे इसका भारत में कश्मीर पंजाब महाराष्ट्र सहित कई जगहों पर भयानक असर होगा 


सातवीं भविष्यवाणी बहुत से बड़े-बड़े नेताओं को जेलहोगी और ‌ भारत से विश्व के कई नेताओं की हत्या होगी और कई लोग मर जाएंगे दुनिया के राजनीति में और भारत के कई राज्यों में भयानक राजनीतिक उथल-पुथल होगी डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

Sunday, 11 January 2026

सौर महापर्व मकर संक्रांति का संपूर्ण विवेचन** *डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

**सौर महापर्व मकर संक्रांति का संपूर्ण विवेचन**
 
*डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि*

वर्ष 2026 में कब मकर संक्रांति का महापर्व है -
वर्ष 2026 में 14 जनवरी को सूर्य संक्रांति है स्नान और दान इस दिन होगा और 15 जनवरी को मकर संक्रांति का उत्सव संपूर्ण भारत में एक साथ मनाया जाएगा 

‌ सारी शंकाओं भ्रम और संदेह का निवारण करते हुए मैं बिल्कुल स्पष्ट रूप से सभी को बताना चाहता हूं कि इस बार पूस महीने की कृष्ण पक्ष के 11 वीं तिथि तदनुसार 14  जनवरी 2026 बुधवार को पड़ने वाले सूर्य के महापर्व को संपूर्ण भारत में  ‌ मकर संक्रांति के रूप में और 15 जनवरी 2026 बृहस्पतिवार के दिन द्वादशी तिथि को  संक्रांति  ‌ अर्थात खिचड़ी के उत्सव के रूप में मनाया जाएगा और अलग-अलग नामों से जाना जाता है   किसी धर्म विशेष का नहीं संपूर्ण सृष्टि और प्रकृति का सर्वोत्तम महापर्व है जिस दिन सूर्य भगवान धनु राशि मकर राशि में दक्षिणी गोलार्ध में आते हैं‌ और दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं अर्थात उत्तरी गोलार्ध में प्रकाश लगातार बढ़ता जाता है और अंधकार घटता चला जाता है और सारे सनातन पर्व असत्य पर सत्य अंधकार पर प्रकाश और पाप पर पुण्य की विजय को ही दिखते हैं*

मकर संक्रांति पर्व पर हमेशा क्यों भ्रम और संदेह की स्थिति रहती है -

मकर संक्रांति पर आपने देखा होगा कि हमेशा इसको मनाया जाने को लेकर ब्रह्म और संदेह की स्थिति बनी रहती हैं ऐसा इसलिए है कि यह महान पर्व पूरी तरह सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने पर दक्षिणायन से उत्तरायण होने पर निर्भर है यदि सूर्य सूर्यास्त के बाद या देर रात में धनु से मकर राशि में प्रवेश करता है तब अगले दिन अर्थात 15 जनवरी को मकर संक्रांति होती है और मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है लेकिन अगर यह सूर्यास्त से पहले ही संक्रांति कर लेता है तो 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति का महापर्व मनाया जाता है‌ वास्तव में ऐसा होता है कि सूर्य 100 से 2 वर्षों तक एक ही तिथि को संक्रांति करता है अर्थात धनु से मकर राशि में जाता है इसलिए लंबे समय के कारण लोग ऐसा मान लेते हैं कि यह एक ही तिथि को मनाया जाता है जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है प्रत्येक 100 या 200 वर्ष के बाद इसकी तिथि में परिवर्तन हो जाता है इधर काफी दिनों से 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति सूर्य संक्रांति के कारण पढ़ रही थी इसलिए लोगों ने यह मान लिया था की हमेशा 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति कब पर्व मनाया जाएगा लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है ‌ प्रमाण के रूप में स्वामी विवेकानंद जी का जन्म 12 जनवरी को हुआ था और उसे दिन मकर संक्रांतिथी। 

इस वर्ष संक्रांति और मकर संक्रांति की क्या स्थिति बन रही हैं। 

हमारे अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र के अनुसार अत्यंत सूक्ष्म गणनाओं के आधार पर इस वर्ष 14 जनवरी को 2026 ईस्वी में लगभग 3:00 बजे सूर्य की संक्रांति हो रही है इसलिए यह संदेह और भी अधिक बढ़ गया है यदि यही संक्रांति 2 घंटे बाद होती तो निश्चित रूप से यह महान पर्व 15 जनवरी को ही मनाया जाता दूसरी बात इस पर्व में उदय तिथि का भी कोई बहुत महत्वपूर्ण भाग नहीं होता है और इसलिए 14 जनवरी को भी 3:13 शाम से लेकर 5:45 शाम तक स्नान दान का परम पवित्र महापर्व है जबकि 15 जनवरी को सुबह 7:21 से शाम 5:55 तक इस संक्रांति का समय है एक प्रकार से संपूर्ण दिन भर इस संक्रांति का महापर्व रहेगा। 15 जनवरी को राहुकाल 8:37 सुबह से 9:55 सुबह तक है और ऐसे समय में स्नान दान या पुण्य कार्य पूरी तरह से वर्जित रहेगा ‌ सारांश रूप में मैं अपने गहन अध्ययन के अनुसार यह बताना चाहूंगा कि संक्रांति अर्थात दान और स्नान का पर्व तो इस वर्ष 14 जनवरी को मनाया जाएगा लेकिन संक्रांति उत्सव अर्थात खिचड़ी का महापर्व इस वर्ष 15 जनवरी को मनाया जाएगा इसमें कोई भी संदेह नहीं है क्योंकि बृहस्पतिवार का दिन होने से खिचड़ी को बनाया खाया और दान नहीं किया जा सकता है इसके अलावा बृहस्पतिवार के दिन कालिदास सरसों का तेल चावल पैसों और काले कपड़े कंबल और केला जैसे फल का भी दान नहीं किया जा सकता इसलिए भी स्नान दान करने का दिन निश्चित रूप से 14 जनवरी को ही है।

संपूर्ण सौरमंडल का स्वामी सूर्य हैं जिन्हें सनातन धर्म में ईश्वर भी कहा जाता है जो सच भी है क्योंकि सारी सृष्टि सूर्य के ऊर्जा और प्रकाश से ही चल रही है और सूर्य का प्रकाश सूर्य के चारों ओर 200 करोड़ किलोमीटर तक फैला हुआ है ‌ और सूर्य का प्रभाव दो प्रकाश वर्ष अर्थात 190 खरब किलोमीटर तक है वैसे तो ग्रहों के अधिपति सूर्य 14 जनवरी को दोपहर में ‌ लगभग 3:00 पर ही मकर राशि में ‌ धनु राशि से गोचर करेंगे लेकिन उदया तिथि 15 जनवरी को प्राप्त हो रही है इसलिए बिना किसी संदेह के वर्ष 2026 में विक्रम संवत 2083 ई में मकर संक्रांति ‌ मैं स्नान दान का पर्व बुधवार के दिन 14 जनवरी को  ‌ और मकर संक्रांति उत्सव अर्थात खिचड़ी का पर्व 15 जनवरी बृहस्पतिवार को संपूर्ण भारत में एक साथ मनाई जाएगी सभी विद्वानों से निवेदन है कि 2 दिन का चक्कर छोड़कर सनातन धर्म में एकरूपता लाने के लिए यह घोषित कर दें कि 15 जनवरी को ही मकर संक्रांति का महापर्व मनाया जाएगा।

*सनातन धर्म के सभी पर्व उत्सव त्यौहार और सामाजिक सांस्कृतिक कार्यक्रम पूरी तरह प्राकृतिक पर्यावरण और विज्ञान पर आधारित हैं -

मकर संक्रांति भी सृष्टि चक्र का एक महान पर्व है जो भगवान सूर्य देव को समर्पित है जिन की कृपा से न केवल पृथ्वी बल्कि सौर मंडल के सभी ग्रह उपग्रह अवांतर ग्रह धूमकेतु इत्यादि का जीवन चक्र चलता है पृथ्वी के अलावा सौरमंडल में बुध शुक्र है मंगल बृहस्पति शनि अरुण वरुण यम और सैकड़ों उपग्रह हैं और सौरमंडल का विस्तार लगभग 2 प्रकाश वर्ष में है मकर संक्रांति नाम क्यों पड़ा है मकर संक्रांति पृथ्वी के परिक्रमण अर्थात सूर्य के चारों ओर घूमने तथा परिभ्रमण अर्थात अपने अक्ष या दूरी पर चारों ओर घूमने से जुड़ा है जब सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होते हुए धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है तो उसे संक्रांति कहते हैं और मकर में प्रवेश करने के कारण ही इसे मकर संक्रांति कहते हैं* ।

*मकर संक्रांति कश्मीर से केरल और तमिलनाडु तथा राजस्थान गुजरात से असम अरुणाचल प्रदेश सहित पूरे भारत में मनाया जाता है इसके अलग-अलग नाम है पंजाब में से लोहरी तो कश्मीर में इसे मर संक्रांति उत्तर प्रदेश बिहार में खिचड़ी बंगाल इत्यादि में पौष संक्रांति गुजरात इत्यादि में इसको उत्तरायण और दक्षिण भारत में इसे पोंगल असम और पूर्वोत्तर भारत में बिहू महाराष्ट्र तिलगुल में हरियाणा मे सकरात हिमाचल में माघी कहते हैं । इसके अलावा इस महापर्व को सुर पर्व फसल पर्व उत्तर संक्रांति मकर संक्रांति माघ औरमाघी भोगी पोंगल खिचड़ी माघे शेशुर संक्रांति ‌ दही चूड़ा के नाम से जानते हैं भारत के अलावा पूरे विश्व में यह किसी ने किसी रूप में मनाया जाता है विशेष करके दक्षिण पूर्वी एशिया में इसको आज भी मानते हैं और इसे थाईलैंड में सोंगक्रान‌ म्यांमार में थिग्याम ‌ कंबोडिया में मोहन सॉन्गक्रान‌ कहते हैं।

क्यों बदलता रहता है खिचड़ी महापर्व ‌ का समय 

 सूर्य का अपने परिवार के साथ अपनी आकाशगंगा की परिक्रमा करने में 22 करोड़ वर्ष लगते हैं।और इसलिए प्रत्येक 100 वर्ष के बाद मकर संक्रांति आगे बढ़ जाती है आज से 100 वर्ष पहले 11/12 जनवरी को मनाई जाती थी धीरे-धीरे 13 और 14 को मनाई जाने लगी और अब यह 14 या 15 जनवरी को मनाई जाती है और आने वाले 100 वर्षों के बाद यह 16 और 17 जनवरी को मनाई जाएगी इस प्रकार ‌ मकर संक्रांति का महापर्व स्थिर नहीं है इसका क्रम बदलता रहता है 12 जनवरी को जब स्वामी विवेकानंद का जन्म हुआ था तब उसी दिन मकर संक्रांति का महापर्व था इस वर्ष14/ 15 जनवरी को ‌ बुधवार और बृहस्पतिवार के दिन ‌ सत्याभिषा नक्षत्र वरीघा योग में‌ मकर संक्रांति मनाया जाएगा और ‌ अभिजीत मुहूर्त दोपहर में 12:10 से 12:51 तक रहेगा*

 *भारतीय विज्ञान और ज्योतिष शास्त्र आकाश को समस्त विश्व की कक्षा मानकर कुल 12 राशियां मानता है 

हर राशि में सूर्य 1 महीने तक रहता है 2 राशियों के बीच जब सूर्य रहता है तो उसे संक्रांति कहते हैं और इसका समय 24 घंटे से 30 घंटे तक होता है पिछले 22 वर्ष में 12 वर्ष मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को पड़ा है और 10 बार 14 जनवरी को पड़ा है वर्ष 2003 2004 2007 2008 20 11 2012 2014 2015 2018 2019 2020 में 15 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनाया गया* ।इसी दिन से सूर्य उत्तरायण होता है और प्रकाश की मात्रा दिन का समय बढ़ने लगता है अंधकार की मात्रा और रात्रि का समय घटने लगता है जो अंधकार से प्रकाश की ओर और असत्य से सत्य की ओर ले जाने का प्रतीक है बहुत से विद्वान जैसे आचार्य लगध इससे नए युग का आरंभ मानते हैं इसी समय से देवताओं का दिन और दैत्यों की रात शुरू होती हैं आप सबको ज्ञात है कि किस तरह पितामह भीष्म ने अपार कष्ट शरसैया पर रहते हुए भी अपने प्राणों का त्याग सूर्य के उत्तरायण होने अर्थात मकर संक्रांति के दिन ही किया था इसी के साथ ही समस्त मांगलिक कार्य विवाह व्रत पूजन हवन दान भी शुरू हो जाता है*

‌ स्नान और दान का स्थान 

 *इस दिन नदी समुद्र झील झरने पोखर तालाबों में और कुछ ना मिलने पर घर ही गंगाजल मिलाकर स्नान को परम पवित्र माना गया है और गंगा यमुना अदृश्य सरस्वती के संगम पर स्नान सभी प्रकार के दैहिक दैविक भौतिक ताप को हरण करता है और महा पवित्र विश्व का सबसे बड़ा सम्मेलन महाकुंभ अभी मकर संक्रांति के दिन से ही शुरू होते हैं अयोध्या मथुरा काशी कांची अवंतिका पुरी द्वारका जैसे जगह स्नान करना परम पवित्र माना जाता है इस दिन काले तिल अक्षत और लाल फूल से सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है भोजन में जल में मिष्ठान में तेल में तिल का प्रयोग करते हुए दान में भी तिल को अवश्य ही शामिल करना चाहिए यह समय फसलों का भी होता है‌ कई चीजों का दान बृहस्पतिवार के दिन नहीं किया जाता है इसलिए भी दान करने का दिन 14 जनवरी बुधवार को ही होगा इसके साथ अक्षत का विधान बृहस्पतिवार को नहीं होता है काली सरसों और सरसों के तेल का दान और काला तथा काले वस्त्र और कंबल भी बृहस्पतिवार को दान नहीं दे सकते हैं और न पैसे ही दिए जाते हैं इसीलिए बृहस्पतिवार के दिन दान देना मना किया गया है* 

 प्रकृति का महापर्व

‌ मकर संक्रांति को प्रकृति का महापर्व भी कहा जाना उचित होगा इस दिन रात्रि में देवता लोग स्नान करते हैं और भोर में अर्थात आठवें पर हर में 4:00 बजे से लेकर 7:00 बजे तक स्नान मनुष्य लोगों का करना परम पवित्र माना जाता है मकर संक्रांति को मनाने का सबसे अच्छा विधि विधान यह है कि प्रातः काल सूर्योदय से पहले स्नान कर ले संभव हो तो पवित्र नदी के बहते जल में स्नान करें या गंगा जी में स्नान करें अन्यथा गंगा जल के साथ पानी में काला तिल भी मिला लेंमिलाकर स्नानघर भी कर सकते हैं उसने पवित्र मंत्र बोलते हुए स्नान करने के बाद साफ सुथरा कपड़ा पहनकर तांबे के लोटे में पानी भर लो उसमें काला तिल गुड़ का छोटा टुकड़ा गंगाजल लाल चंदन लाल पुष्प अक्षत लेकर सूर्य देव के मंत्र का जाप करते हुए सूर्यदेव को अर्घ्य दीजिए और शनिदेव को भी जल अर्पित करें इसके बाद गरीबों को तिल गुड़ खिचड़ी इत्यादि का दान दें अगर मंत्र ना याद हो तो ओम सूर्याय नमः का जाप करना काफी है* 

*नदियों में स्नान सबसे पवित्र माना गया है ऐसा इसलिए भी अनिवार्य बनाया गया था जिससे लोग नदी झील पोखर तालाब समुद्र को गंदा और प्रदूषित ना करें वरना स्नान कैसे करेंगे इसी के कारण आज से 50 वर्ष पहले तक पूरे भारत के नदी ताल पोखर झील झरने और गंगासागर द्वारिका के समुद्र तट परम पवित्र थे और निर्मल थे यह एक प्रकार से विज्ञान का महान पर्व भी है क्योंकि इससे ही निश्चित होता है की दिन बड़ा और रात छोटी होनी शुरू हो जाती है और कहीं भी तिथियों का व्यतिक्रम नहीं होता है*

14 जनवरी की नहीं है खिचड़ी मनाने का समय 

*क्योंकि काफी दिनों से मकर संक्रांति 14 जनवरी को ही मनाई जाती रही है इसीलिए लोगों को यह लगने लगा है कि 14 जनवरी को ही खिचड़ी का महापर्व होता है जबकि यह गलत है हर से 200 वर्षों में यह 1 दिन आगे बढ़ जाता है क्योंकि इस वर्ष सूर्य धनु राशि से मकर राशि में रात्रि को 8:21के आसपास प्रवेश करेंगे इसलिए 14 जनवरी को किसी हाल में मकर संक्रांति मनाया नहीं जा सकता रविवार को दोपहर तक खिचड़ी का पुण्य समय है इस दिन 3 ग्रह योग शश योग सुकर्मयोग वाशी योग बालव करण योग इत्यादि योग बन रहे हैं और शनिवार को ब्रह्मा योगाआदि योग महा और के योग रात्रि योग सूर्य शनि की युति का दुर्लभ योग भी बन रहे हैं इस वर्ष दोपहर तक पुण्य कॉल रहेगा डॉ दिलीप कुमार सिंह ज्योतिष शिरोमणि तथा निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम विज्ञान अनुसंधान केंद्र

*मकर संक्रांति के दिन संभव है तो बहते हुए नदी में या गंगा नदी में या संगम में स्नान करें अन्यथा भगवान सूर्य का नाम लेकर गंगा जल मिलाकर घर में ही स्नान करें और तांबे के लोटे में अक्षत अर्थात बिना टूटा हुआ चावल लाल पुष्प काला तिल मिलाकर स्नान करें यह एक संपूर्ण प्रामाणिक वैज्ञानिक महापर्व है जो सूर्य पर आधारित है इसको मकर संक्रांति उत्तरायण खिचड़ी पोंगल बिहू मकर संक्रांति इत्यादि नामों से जाना जाता है इस काल में सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं इसी दौरान जब तक ध्यान पूजा-पाठ और दान का अत्यधिक महत्व होता है इसी दिन से दिन बड़ा और रात छोटी होने लगते हैं अर्थात या प्रकाश का महापर्व है ज्ञान का और सत्य कभी महापर्व है*

*ऐसा माना जाता है कि भगवान सूर्य से दिन अपने पुत्र शनि देव से मिलने उनके घर जाते हैं शनि मकर राशि के देवता हैं इसलिए से मकर संक्रांति कहा जाता है इसी दिन महा प्रतापी परम शूरवीर गंगापुत्र भीष्म पितामह ने इच्छा मृत्यु के बाद स्वर्गारोहण किया था क्योंकि दक्षिणायन  सूर्य रहने पर मरने वाले को स्वर्ग नहीं मिलता इसलिए इसे भीष्मा स्त्री पर्व भी कहते हैं और यह भी माना जाता है कि इसी दिन मकर संक्रांति के दिन गंगा मां का स्वर्ग से अवतरण हुआ था‌ और कपिल मुनि के आश्रम में गंगासागर से गंगा जी का मिलन हुआ था इसलिए वहां बहुत बड़ा स्नान पर्व और मेला लगता है। और इसी दिन यशोदा ने भगवान श्री कृष्ण के लिए व्रत रखा था‌ और इसी दिन भगवान श्री हरि विष्णु ने राक्षसों का विनाश किया था*

*महापर्व में खिचड़ी गुड़ काला तिल इत्यादि का दान सच्चे मन से किया जाता है काला तिल शनि का प्रतीक तो है ही ऐसा माना जाता है कि इसकी उत्पत्ति भगवान विष्णु से हुई थी वैसे भी तेल शरीर को स्वस्थ निरोग रखता है और शरीर में गर्मी का संचार करता है यह संपूर्ण भारत वर्ष में मनाया जाता है डॉ दिलीप कुमार सिंह*

Saturday, 10 January 2026

कानपुर में गैंगरेप का आरोपी पत्रकार गिड़गिड़ायाःबोला- मुझे फंसाया गया, लड़की को कभी देखा नहीं; स्कॉर्पियो में दरोगा संग की दरिंदगीसाहब, मैंने रेप नहीं किया। उस लड़की को न कभी देखा, न कभी बात हुई। आप मेडिकल करा लीजिए। मैं निर्दोष हूं। अगर दोषी मिलता हूं, तो जेल भेज दीजिएगा। मुझे रंजिशन फंसाया जा रहा है।

कानपुर में गैंगरेप का आरोपी पत्रकार गिड़गिड़ायाः
बोला- मुझे फंसाया गया, लड़की को कभी देखा नहीं; स्कॉर्पियो में दरोगा संग की दरिंदगी
साहब, मैंने रेप नहीं किया। उस लड़की को न कभी देखा, न कभी बात हुई। आप मेडिकल करा लीजिए। मैं निर्दोष हूं। अगर दोषी मिलता हूं, तो जेल भेज दीजिएगा। मुझे रंजिशन फंसाया जा रहा है।

सोमवार रात अमित दरोगा का फोन आया। कहा, आरपीएफ में नए इंस्पेक्टर आए हैं। लोहा चोरी हुआ है, मिलना चाहते हैं। अपने पत्रकार साथियों से पता करो। हम बाइक से 35 नंबर सोना क्रॉसिंग पहुंचे। वहां आरपीएफ इंस्पेक्टर मिले, साथ में अमित दरोगा थे। इसी बीच लड़के अपनी बहन को ढूंढते हुए आए। मुझे भी देख लिया, तो मेरा भी नाम लिख दिया।

क्रॉसिंग के पास फिंगर का ठेला लगाने वाले लड़के से लड़की का अफेयर चल रहा है। उससे पता करा लीजिए। वह उससे मिलता रहता है। जांच करा लीजिए, पूरी सच्चाई सामने निकलकर आ जाएगी।

ये बातें रो-रोकर गैंगरेप के आरोपी पत्रकार शिवबरन ने पुलिस के सामने बताईं। कानपुर के सचेंडी थाने में मंगलवार को 14 साल की लड़की ने बिठूर में तैनात दरोगा अमित मौर्या और पत्रकार शिवबरन पर गैंगरेप की फिर दर्ज कराई है। पत्रकार शिवबरन को बुधवार को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी दरोगा अभी फरार है। उसकी तलाश में चार टीमें लगी हुई हैं। मामले में लापरवाही बरतने पर डीसीपी वेस्ट को हटा दिया है।
पत्रकार ने सफाई में क्या-क्या कहा, पढ़िए

पत्रकार ने बताया- सोमवार रात आरपीएफ इंस्पेक्टर का फोन आया। उन्होंने कहा- भीमसेन के पास रेलवे लाइन से लोहा काटा गया है, चोरी का खुलासा कराओ, ऊपर से आदेश हैं। इस पर मैंने उनसे कहा- सर, जानकारी करेंगे। फिर उन्होंने मुझे बुला लिया। मैं बाइक से पहुंचा। वहां दरोगा अमित मिले। आधे घंटे तक हम अमित दरोगा की स्कॉर्पियो में बैठे रहे।

इंस्पेक्टर सफेद कार से आए। काफी देर तक हम लोगों में बातचीत हुई। इसके बाद आरपीएफ इंस्पेक्टर चले गए। मैं भी बाइक से घर लौट रहा था, तभी याद आया कि मफलर दरोगा की स्कॉर्पियो में ही छूट गया। मैंने दरोगा को फोन किया, तब उन्होंने कहा कि मैं अभी यहीं हूं। मैं दरोगा के पास पहुंचा तो शंकरपुरवा के दो लड़के आ गए।
हमने उनसे पूछा- यहां क्या कर रहे हो? लड़कों ने कहा- हम अपनी बहन को ढूंढ रहे हैं। इसके बाद मैं घर चला आया। अगले दिन यानी मंगलवार सुबह मैं फिर बाइक से जा रहा था। उस वक्त खेत में कुछ लोग पानी लगा रहे थे। जो लड़के सोमवार को मिले थे, वे चिल्लाकर कह रहे थे- एक दरोगा आए थे और एक गोरा लड़का था, उसी ने मेरी बहन से छेड़छाड़ की।
मैं तुरंत दौड़कर उनके पास गया। पूछा- तुमने हमें छेड़छाड़ करते देखा था क्या, झूठ मुझे क्यों फंसा रहे हो? जवाब मिला- नहीं, बहन ने ये सब बताया है। हमने कहा कि बहन को बुलाओ, तो वह लड़का बोला कि मेरी बहन चौकी गई है, जिसके बाद मैं तुरंत चौकी भागकर आया। मैं कुछ भी नहीं जान पा रहा हूं कि मुझे क्यों फंसाया गया है।

अब पढ़िए स्कॉर्पियो से लड़की को किडनैप कियाः सचेंडी थाना क्षेत्र में रहने वाली लड़की ने बताया- मैं सोमवार रात करीब 10 बजे घर से निकली थी। इस दौरान स्कॉर्पियो सवार दो लड़कों ने मुझे जबरन गाड़ी के अंदर खींच लिया। इनमें एक पुलिस वाला था। आरोपी सचेंडी में रेलवे ट्रैक के किनारे सुनसान जगह पर ले गए। दोनों ने स्कॉर्पियो के अंदर ही मेरे साथ गैंगरेप किया।
गैंगरेप के बाद लड़की को फेंककर भागे: भाई ने बताया-दरोगा अमित कुमार और शिवबरन ने गैंगरेप किया। करीब 2 घंटे बाद दोनों युवक मेरी बहन को घर के बाहर बेहोशी की हालत में फेंककर भाग गए। रात 12 बजे मैंने देखा कि बहन घर के बाहर बदहवास पड़ी थी। हम उसे अंदर लेकर गए और होश में लाए। बहन हमें घटना के बारे में बताया। इसके बाद मैंने तत्काल डायल-112 पर पुलिस को सूचना दी। तब पुलिस मौके पर पहुंची।

पुलिस ने पीड़ित और उसके भाई को भगायाः भाई ने बताया- पुलिस मुझे और बहन को भीमसेन चौकी पर ले गई। लेकिन, जब हमने बताया कि आरोपियों में एक पुलिस वाला है, तो हमें चौकी से भगा दिया गया। मंगलवार को हम लोग पुलिस अफसरों के पास पहुंचे। इसके बाद पुलिस ने हमारी रिपोर्ट तो दर्ज की, लेकिन आरोपियों के नाम हटवा दिए। अज्ञात के खिलाफ गैंगरेप और अपहरण की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की है। मुकदमा दर्ज होने के बाद मंगलवार देर रात किशोरी का मेडिकल कराया गया।

डीसीपी हटाए गए, इंस्पेक्टर सस्पेंडः बुधवार को पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने डीसीपी वेस्ट दिनेश चंद्र त्रिपाठी को हटाकर डीसीपी हेड क्वार्टर से अटैच कर दिया। आरोप-उनके क्षेत्र का मामला था और उसमें लापरवाही बरती गई। सचेंडी इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को सस्पेंड कर दिया है। आरोप है कि मुकदमे में उन्होंने पॉक्सो एक्ट की धाराएं नहीं लगाईं। तथ्यों में तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया।

घटना में इस्तेमाल स्कॉर्पियो जब्तः पुलिस कमिश्नर ने बताया कि शुरुआत में अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। पीड़िता ने अपने बयान में बिठूर में तैनात दरोगा अमित मौर्या और पत्रकार शिवबरन का नाम लिया। इसके बाद दोनों को मुकदमे में नामजद किया गया। घटना में इस्तेमाल की गई स्कॉर्पियो (अप 78 जेजे 9331) को पुलिस ने जब्त कर लिया है। यह स्कॉर्पियो दरोगा अमित कुमार मौर्या की है। घटना के समय दरोगा की सचेंडी में मौजूदगी पाई गई है, जबकि उसकी तैनाती बिठूर थाने में थी।

फोरेंसिक टीम ने सबूत जुटाए: मामले की जांच एडीसीपी वेस्ट कपिल देव सिंह को सौंपी गई है। एडीसीपी वेस्ट ने बुधवार को जांच शुरू की। वह सबसे पहले सचेंडी में रेलवे ट्रैक के किनारे पहुंचे, जहां पीड़िता ने अपने साथ गैंगरेप होने की बात बताई थी। इस दौरान उन्होंने घटनास्थल के आसपास मौजूद दुकानदारों से पूछताछ की। वहीं फोरेंसिक टीम ने मौके से सबूत भी जुटाए।

आरोपी दरोगा की धमकियों से परिजन डरे
पीड़िता ने बताया कि घटना के बाद से उसका मोबाइल पुलिस ने जब्त कर लिया है। मेडिकल के बाद भी पुलिस ने उसे घर नहीं भेजा। परिजनों के अनुरोध पर पुलिस ने कहा कि कोर्ट में बयान दर्ज कराने के बाद ही घर भेजा जाएगा। उसे रात करीब 3 बजे छोड़ा गया। आरोपी दरोगा की लगातार धमकियों से परिजन डरे हुए हैं।
हाल ही में दरोगा का हुआ था तबादला
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि कुछ समय पहले तक आरोपी दरोगा अमित कुमार मौर्या भीमसेन चौकी प्रभारी था। कुछ दिन पहले डीसीपी वेस्ट दिनेश चंद्र त्रिपाठी ने उसका तबादला बिठूर थाने में किया था, लेकिन अभी उसकी रवानगी नहीं हुई थी। भीमसेन चौकी के नए प्रभारी छुट्टी पर थे।
इसी दौरान दरोगा का क्षेत्र में आना-जाना बना रहा। जांच में सामने आया है कि दरोगा की पत्रकार शिवबरन से दोस्ती है और दोनों को साथ जाते हुए देखा गया था। पुलिस कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि आरोपी दरोगा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। शेयर जरूर करें ऐसे दरिन्दों को फांसी होनी चाहिए फोलो और शेयर धन्यवाद 

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1️⃣0️⃣❗0️⃣1️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣5️⃣*आज का अमृत**धीरज, धर्म, मित्र अरु नारी।**आपद काल परखिए चारि।।**अर्थ:* धीरज, धर्म, मित्र और पत्नी की परीक्षा अति विपत्ति के समय ही की जा सकती है। इंसान के अच्छे समय में तो उसका हर कोई साथ देता है, जो बुरे समय में आपके साथ रहे वही आपका सच्चा साथी है। उसी के ऊपर आपको सबसे अधिक भरोसा करना चाहिए..!!

1️⃣0️⃣❗0️⃣1️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣5️⃣
*आज का अमृत*
*धीरज, धर्म, मित्र अरु नारी।*
*आपद काल परखिए चारि।।*
*अर्थ:* धीरज, धर्म, मित्र और पत्नी की परीक्षा अति विपत्ति के समय ही की जा सकती है। इंसान के अच्छे समय में तो उसका हर कोई साथ देता है, जो बुरे समय में आपके साथ रहे वही आपका सच्चा साथी है। उसी के ऊपर आपको सबसे अधिक भरोसा करना चाहिए..!!
           *एक दिन का पुण्य*
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किसी आश्रम में एक साधु रहता था। काफी सालों से वह इसी आश्रम में रह रहा था। अब वह काफी वृद्ध हो चला था और मृत्यु को वह निकट महसूस कर रहा था , लेकिन संतुष्ट था कि 30 साल से उसने प्रभु का सिमरन किया है, उसके खाते में ढूंढ ढेर सारा पुण्य जमा है इसलिए उसे मोक्ष मिलना तो तय ही है।
       
एक दिन उसके ख्याल में एक स्त्री आयी। स्त्री ने साधु से कहा"अपने एक दिन के पुण्य मुझे दे दो और मेरे एक दिन के पाप तुम वरण कर लो।"
        
इतना कह कर स्त्री लोप हो गयी।साधु बहुत बेचैन हुआ कि इतने बरस तो स्त्री ख्याल में ना आयी, अब जब अंत नजदीक है तो स्त्री ख्याल में आने लगी।फिर उसने ख्याल झटक दिया,और प्रभु सुमिरन में बैठ गया।स्त्री फिर से ख्याल में आयी। फिर से उसने कहा कि"एक दिन का पुण्य मुझे दे दो और मेरा एक दिन का पाप तुम वरण कर लो।"
       
इस बार साधु ने स्त्री को पहचानने की कोशिश की लेकिन स्त्री का चेहरा बहुत धुंधला था, साधु से पहचाना नहीं गया! साधु अब चिंतित हो उठा कि एक दिन का पुण्य लेकर यह स्त्री क्या करेगी! हो ना हो ये स्त्री कष्ट में है! लेकिन गुरु जी ने कहा हुआ है कि आपके पुण्य ही आपकी असल पूंजी है, यह किसी को कभी मत दे बैठना। और इतनी मुश्किल से पुण्यो की कमाई होती है, यह भी दे बैठे तो मोक्ष तो गया। हो ना हो ये मुझे मोक्ष से हटाने की कोई साजिश है।
      
साधू ने अपने गुरु के आगे अपनी चिंता जाहिर की।गुरु ने साधु को डांटा।मेरी शिक्षा का कोई असर नहीं तुझ पर? पुण्य किसी को नहीं देने होते। यही आपकी असली कमाई है।"
       
साधु ने गुरु जी को सत्य वचन कहा और फिर से प्रभु सुमिरन में बैठ गया।स्त्री फिर ख्याल में आ गयी,बोली-तुम्हारा गुरु अपूर्ण है,इसे ज्ञान ही नहीं है, तुम तो आसक्ति छोड़ने का दम भरते हो, बीवी-बच्चे,दीन-दुनिया छोड़ कर तुम इस अभिमान में हो कि तुमने आसक्ति छोड़ दी है। तुमने और तुम्हारे गुरु ने तो आसक्ति को और जोर से पकड़ लिया है।किसी जरूरतमंद की मदद तक का चरित्र नहीं रहा तुम्हारा तो।"
     
साधु बहुत परेशान हो गया! वह फिर से गुरु के पास गया। स्त्री की बात बताई। गुरु ने फिर साधु को डांटा, "गुरु पर संदेह करवा कर वह तुम्हे पाप में धकेल रही है। जरूर कोई बुरी आत्मा तुम्हारे पीछे पड़ गयी है।"
       
साधु अब कहाँ जाए! वह वापिस लौट आया और फिर से प्रभु सुमिरन में बैठ गया।स्त्री फिर ख्याल में आयी।उसने फिर कहा"इतने साल तक अध्यात्म में रहकर तुम गुलाम भी बन गए हो। गुरु से आगे जाते। इतने साल के अध्ययन में तुम्हारा स्वतंत्र मत तक नहीं बन पाया। गुरु के सीमित ज्ञान में उलझ कर रह गए हो। मैं अब फिर कह रही हूँ, मुझे एक दिन का पुण्य दे दो और मेरा एक दिन का पाप वरण कर लो। मुझे किसी को मोक्ष दिलवाना है। यही प्रभु इच्छा है।"साधु को अपनी अल्पज्ञता पर बहुत ग्लानि हुई। संत मत कहता है कि पुण्य किसी को मत दो और धर्म कहता है जरूरतमंद की मदद करो। यहां तो फंस गया।गुरु भी राह नही दे रहा कोई, लेकिन स्त्री मोक्ष किसको दिलवाना चाहती है।
      
साधु को एक युक्ति सूझी,जब कोई राह ना दिखे तो प्रभु से तार जोड़ो। प्रभु से राह जानो। प्रभु से ही पूछ लो कि उसकी रजा क्या है,उसने प्रभु से उपाय पूछा,आकाशवाणी हुई।
       
वाणी ने पूछा-"पहले तो तुम ही बताओ कि तुम कौन से पुण्य पर इतरा रहे हो?"
       
साधु बोला,-"मैंने तीस साल प्रभू सुमिरन किया है। तीस साल मैं भिक्षा पर रहा हूँ। कुछ संचय नही किया। त्याग को ही जीवन माना है। पत्नी बच्चे तक सब त्याग दिया।"
       
वाणी ने कहा- "तुमने तीस बरस कोई उपयोगी काम नही किया। कोई रचनात्मक काम नही किया। दूसरों का कमाया और बनाया हुआ खाया। राम-राम, अल्लाह-अल्लाह, गॉड-गॉड जपने से पुण्य कैसे इकठा होते है मुझे तो नही पता। तुम डॉलर-डॉलर, रुपिया-रुपिया जपते रहो तो क्या तुम्हारा बैंक खाता भर जायेगा? तुम्हारे खाते में शून्य पुण्य है।"
    
साधु बहुत हैरान हुआ। बहुत सदमे में आ गया।लेकिन हिम्मत करके उसने प्रभु से पूछा कि "फिर वह स्त्री पुण्य क्यो मांग रही है।"
      
प्रभु ने कहा"क्या तुम जानते हो वह स्त्री कौन है?"साधु ने कहा, "नही जानता लेकिन जानना चाहता हूं।"
       
प्रभु ने कहा- "वह तुम्हारी पत्नी है। तुम जिसे पाप का संसार कह छोड़ आये थे। कुछ पता है वह क्या करती है?"साधु की आंखे फटने लगी। उसने कहा"नही प्रभु। उसके बारे में मैं कुछ नहीं जानता!"

        प्रभु ने कहा, "तो सुनो, जब तुम घर से चुपचाप निकल आये थे तब वह कई दिन तुम्हारे इन्तजार में रोई। फिर एक दिन संचय खत्म हो गया और बच्चों की भूख ने उसे तुम्हारे गम पोंछ डालने के लिए विवश कर दिया। उसने आंसू पोंछ दिए और नौकरी के लिए जगह-जगह घूमती भटकती रही।वह इतनी पढ़ी लिखी नही थी। तुम बहुत बीच राह उसे छोड़ गए थे । उसे काम मिल नही रहा था इसलिए उसने एक कुष्ठ आश्रम में नौकरी कर ली। वह हर रोज खुद को बीमारी से बचाती उन लोगो की सेवा करती रही जिन्हे लोग वहां त्याग जाते हैँ। वह खुद को आज भी पापिन कहती है कि इसीलिए उसका मर्द उसे छोड़ कर चला गया!"
      
प्रभु ने आगे कहा"अब वह बेचैन है तुम्हे लेकर। उसे बहुत दिनों से आभास होंने लगा है कि उसका पति मरने वाला है। वह यही चाहती है कि उसके पति को मोक्ष मिले जिसके लिए वह घर से गया है। उसने बारंबार प्रभु को अर्जी लगाई है की प्रभु मुझ पापिन की जिंदगी काम आ जाये तो ले लो। उन्हें मोक्ष जरूर देना। मैंने कहा उसे कि अपना एक दिन उसे दे दो। कहती है मेरे खाते में पुण्य कहाँ, होते तो मैं एक पल ना लगाती। सारे पुण्य उन्हें दे देती। वह सुमिरन नहीं करती,वह भी समझती है कि सुमिरन से पुण्य मिलते हैं।"
      
मैंने उसे नहीं बताया कि तुम्हारे पास अथाह पुण्य जमा हैं। पुण्य सुमिरन से नहीं आता। मैंने उसे कहा कि एक साधु है उस से एक दिन के पुण्य मांग लो, अपने एक दिन के पाप देकर। उसने सवाल किया कि ऐसा कौन होगा जो पाप लेकर पुण्य दे देगा। मैंने उसे आश्वस्त किया कि साधु लोग ऐसे ही होते हैं।"
       
"वह औरत अपने पुण्य तुम्हे दे रही थी और तुम ना जाने कौन से हिसाब किताब में पड़ गए। तुम तो साधु भी ठीक से नहीं बन पाए। तुमने कभी नहीं सोचा कि पत्नी और बच्चे कैसे होंगे।लेकिन पत्नी आज भी बेचैन है,कि तुम लक्ष्य को प्राप्त होवो,तुम्हारी पत्नी को कुष्ठ रोग है,वह खुद मृत्यु शैया पर है लेकिन तुम्हारे लिए मोक्ष चाह रही है। तुम सिर्फ अपने मोक्ष के लिए तीस बरस से हिसाब किताब में पड़े हो।"
       
साधू के बदन पर पसीने की बूंदे बहने लगी,सांस तेज होने लगी,उसने ऊँची आवाज में चीख लगाई"यशोदा।

        *साधु हड़बड़ा कर उठ बैठा,उसके माथे पर पसीना बह रहा था।उसने बाहर झाँक कर देखा,सुबह होने को थी।उसने जल्दी से अपना झोला बाँधा और गुरु जी के सामने जा खड़ा हुआ।गुरु जी ने पूछा "आज इतने जल्दी भिक्षा पर?"साधु बोला- "घर जा रहा हूँ।"*
      *गुरु जी बोले- "अब घर क्या करने जा रहे हो?"साधु बोला- "धर्म सीखने..!!"*
   *🙏🏿🙏🙏🏽जय श्री कृष्ण*🙏🏼🙏🏻🙏🏾

विश्व हिंदी दिवस और भारत का दुर्भाग्य -डॉ दिलीप कुमार सिंह ‌ स्नातकोत्तर एवं विद्या वारिधि

विश्व हिंदी दिवस और भारत का दुर्भाग्य -डॉ दिलीप कुमार सिंह ‌ स्नातकोत्तर एवं विद्या वारिधि

आज ‌ भारत को दास बनाने वाले अंग्रेजों के पंचांग से 11 नवंबर के दिन विश्व हिंदी दिवस है लेकिन देश के 99% लोग विशेष कर हिंदी भाषा भारतीय लोग इसको नहीं जानते हैं 

क्रिसमस और अंग्रेजी नए वर्ष पर महीना पहले से बधाई शुभकामनाएं देने वाले लोग और विशेष कर हिंदी पत्रकारिता जगत आज बिल्कुल चुपचाप है। 

प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति और सभी दलों के सांसद विधायक मंत्री पूरी तरह अंग्रेजी रंग-ढंग में रंग चुके हैं और कोई भी बधाई शुभकामनाएं कल से नहीं दिया है 

इसी को कहते हैं दीपक तले अंधेरा घर की मूली सांग बराबर घर का जोगी जोगड़ा आन गांव का सिद्ध इसलिए भारत गणगौर दुर्गति को प्राप्त हो रहा है 

भारत के लोग पूरी तरह काले अंग्रेज विदेशीक्रीत दास और मंत्रालय के मानस पुत्र बन चुके हैं केवल पांच प्रतिशत लोग अपवाद बचे हैं।

दुनिया भर की भाषण बाजी वह भी अंग्रेजी में देने का चलन हो गया है वह तो भला है कि राजनेताओं को और नई पीढ़ी को दिन-रात प्रयास करने पर भी अच्छी तरह लिखना पढ़ना बोलना नहीं आता है वरना यह लोग हिंदी भाषा को छूते ही नहीं। 

हिंदी संस्कृत की उत्तराधिकारी है विश्व की सबसे बड़ी और वैज्ञानिक भाषा है इसमें जो कहते हैं वही लिखते हैं वही बोलते हैं इसका इतिहास 1500 वर्ष पुराना है जिसको 1000 वर्ष सिद्ध करने का प्रयास सत्ता पक्ष विपक्ष और विदेश द्वारा खरीदे गए विद्वानों से हो रहा है 


हिंदी का व्याकरण सर्वश्रेष्ठ है इसका शब्द को सबसे बड़ा है इसमें दुनिया की हर भाषा को समाहित करने की शक्ति है और विज्ञान टेक्नोलॉजी सहित आम बोलचाल की भाषा इससे अच्छी कोई भाषा नहीं हो सकती है ।‌ बंद हो चुका है कि हिंदी से सुंदर सरल वैज्ञानिक और व्याकरण की भाषा दुनिया में कोई नहीं है। 

भारत के काले अंग्रेज और शतक पर आसीन लोग वामपंथी और कांग्रेसी लोगों के सहारे से यह अफवाह और भ्रम फ्लेट हैं कि बिना अंग्रेजी के विज्ञान टेक्नोलॉजी और आज की भाषा में प्रगति नहीं की जा सकती इन काले अंग्रेजों को मैं बता देना चाहता हूं कि चीन जापान जर्मनी फ्रांस और रूस जैसी महान शक्तियां अपने भाषा और साहित्य के सहारे पूरी दुनिया में सर्वश्रेष्ठ हैं और सर्वोच्च शिखर पर विद्वान है यदि 1947 में अंग्रेजी हटाकर हिंदी अपना ली गई होती तो आज भारत सोने की चिड़िया और विज्ञान टेक्नोलॉजी साहित्य का सर्वश्रेष्ठ देश और जगतगुरु बन गया होगा लेकिन यह अंग्रेजी भाषा बोलकर प्रधानमंत्री रामराज ला रहे हैं और हिंदी हिंदू हिंदुस्तान का मुंगेरीलाल का हसीन सपना दिखा रहे हैं। 

सही अपनी हीन भावना के चलते और देश तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री की अपेक्षा के चलते हिंदी के एक दर्जन लेखन और रचनाओं को आज तक नोबेल पुरस्कार नहीं मिला जिसमें जयशंकर प्रसाद सुमित्रानंदन पंत सूर्यकांत त्रिपाठी निराला महादेवी वर्मा अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध मुंशी प्रेमचंद ‌‌ जैसे एक दर्जन लोग बहुत आराम से नोबेल पुरस्कार पढ़ सकते थे लेकिन इनको आज तक भारत रत्न नहीं दिया गया तो नोबेल पुरस्कार क्यों मिलेगा।

यह चीनी और अंग्रेजी भाषा से अधिक बोली जाती है और 100 करोड़ से अधिक लोग बोलते हैं लेकिन भारत का सरकार या कड़ाई से तीसरे नंबर पर जबरदस्ती ले आता है भारत के 90 प्रेस से लोग हिंदी बोलने पढ़ने और समझते हैं और दुनिया के करोड़ों लोग भारत के बाहर हिंदी बोल रहे हैं सीख रहे हैं । यह भारत सरकार ने चाहा होता तो आज दुनिया के हर देश के लोग हिंदी भाषा पर लिख बोल और सीख रहे होते लेकिन वह तो काले अंग्रेजों की नई फसल दिन रात तैयार कर रहे हैं

ऐसा कहा जाता है कि अमेरिका इंग्लैंड के सारे पर भारत की सरकारी से संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषा जानबूझकर नहीं बना रही है वरना कब किया अंतर्राष्ट्रीय भाषा बन गए होती अभी तो हिंदी को राष्ट्रीय भाषा भी नहीं घोषित किया गया है कामकाज करना तो दूर की बात है बची खुची भाषा वर्तमान सरकार अंग्रेजी लाज कर पूरा कर देरही है।

जब तक हिंदी के साथ अंग्रेजी का गोल नहीं पिलाया जाए तब तक अच्छे से अच्छा हिंदी का वक्त खुद को अच्छा वक्त नहीं समझता है दूसरों की तो बात ही छोड़ दो प्रधानमंत्री तो 10 वाक्य में पांच वाक्य अंग्रेजी जानबूझकर बोलते हैं और गुड मॉर्निंग बनारस पड़ेगा तो बढ़ेगा इंडिया खेलेगा इंडिया इंडिया राइजिंग लोकल फार वोकल डबल इंजन सरकार जैसे अनर्गल शब्द जानबूझकर गढ़े जा रहे हैं।


आज हिंदी के पत्र पत्रिका समाचार पत्रों में देख लो अधिकांश के मुख्य पृष्ठ पर उल्टा सीधा लिखा हुआ है और किसी में इस विषय पर अच्छा लेख प्रकाशित करने और हिंदी भाषी लोगों की रचनाओं को सम्मानित करने की आवश्यकता नहीं समझे 


हर प्रकार की उपेक्षा अन्याय अत्याचार और देशवासियों का भेदभाव सहकर भी हिंदी दिन-रात प्रगति करते हुए अघोषित त रूप से राष्ट्रभाषा और विश्व भाषा के पद पर आरूढ़ है और जैसे ही कोई सच्चा देशभक्त 


प्रधानमंत्री बनेगा या विश्व भाषा हो जाएगी और पूरे देश में अनिवार्य कर दी जाएगी अंग्रेजी को हटा दिया जाएगा।

निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति को मूल‌ 
बिन निज भाषा ज्ञान के मिटे न  हिय को शूल।

इसलिए कहा गया है कि भारत के लोगों को 

हमको ना निज गौरव तथा निज र्देश का अभियान है 

हम ‌ नर नहीं है पशु निरा हैं ‌ और मृतक समान है।


हिंदी को मिटाने के लिए ही ज़बरदस्ती मुसलमान ने देशभक्त ‌ लोगों को मिटाने के लिए देशद्रोही गद्दारों को मिलकर उर्दू भाषा का जबर्दस्ती आविष्कार किया है जो पूरी दुनिया में कहीं नहीं है केवल भारत में है। 


तो क्या हिंदी भाषा और साहित्य समाप्त हो जाएगा बिल्कुल नहीं होगा देश के गद्दार देशद्रोही छिपे हुए लोग विदेशी शेरों पर कितना ही प्रयास कर ले हिंदी निरंतर बढ़ती जाएगी और एक दिन पूरे विश्व में हिंदी का राज होगा हिंदी भाषा में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ कवि साहित्यकार उपन्यासकार एकांकी लेखक नाटककार ‌ कवि और विश्व कवि महाकाव्य लेखक हैं जितना विश्व में कहीं नहीं है। विश्व कवि तुलसीदास विश्व कवि जयशंकर प्रसाद सूर्यकांत त्रिपाठी निराला नंदन पंत महादेवी वर्मा चंद्रवरदाई प्रेमचंद अयोध्या सिंह उपाध्याय भारतेंदु हरिश्चंद्र जैसे लाखों लाख लेखक पड़े हुए हैं जिनकी तुलना विश्व में कोई नहीं कर सकता ‌ सच तो यही है कि अभी हिंदी साहित्य में एक से बढ़कर एक कवि लेखक साहित्यकार रचनाकार पड़े हैं जिनका अध्ययन ही नहीं किया गया है 

यदि जरा भी देश प्रेम है आत्मबोध है अपना गौरव है तो मेरी निम्नलिखित पंक्तियों को पढ़कर ‌ देशभक्ति हिंदी भक्त बन जाइए इसे मैं आपका देश का और सनातन धर्म का उद्धार है

हे देशद्रोहियों गद्दारों हे मैकाले के मानस पुत्रों 
 हे काले अंग्रेजों हे बिके बुद्धिजीवी लोगों ‌ हे नकली राजनेता लोगों 
हे हिंदी की खाने वालों अंग्रेजी की गाने वालों 

तुम याद रखो याद तूने हिंदी से गद्दारी करके अंग्रेजी को पकड़ा तो याद रहे इतिहास में तुमको क्षमता करेगा ज्ञात रहे पीढ़ियां तुम्हारी करनी पर पछताएंगे भारत की लाली में काली पुत्र जाएगी

हिंदी साहित्य में एक से बढ़कर एक महान रचनाएं हैं जिसमें से केवल एक ही रचना पूरे विश्व के हर साहित्य के बराबर है।रामचरितमानस सूरसागर कबीर की साखी सरहपा का सिद्ध काव्य चंद्रवरदाई का पृथ्वीराज रासो जगनिक का ऑल्ह खंड विश्व काव्य कामायनी ‌ हरिऔध का प्रिय प्रकाश सुमित्रानंदन पंत का चिदंबरम महादेवी वर्मा के गीत सुभद्रा कुमारी चौहान और श्याम नारायण पांडे की वीर रस से भरी कविताएं पर्दा बेगम का तकिया पुरस्कार जैसी कहानी मलिक मोहम्मद जायसी की पद्मावत जैसे अनंत ग्रंथ ‌ और कभी रात तुलसी मीरा बिहारी रसखान और रचनाएं हिंदी साहित्य में भारी पड़ी है अकेले रामचरितमानस और कामायनी पूरी दुनिया के समस्त साहित्य से बढ़कर हैं।

विश्व भाषा हिंदी का बिल्कुल सही भविष्य विश्व कवि सुमित्रानंदन पंत ने बहुत पहले ही कर दिया था और यही सत्य होगा -

++ अरे ये पल्लव बाल अभी तो हैं यह नवल प्रवाल 
नहीं फूटी इसमें तरु डाल विश्व पर विस्मित चितवन लाल 
हिलाते अधर प्रवाल।



आज पल्लवित हुई है डाल 
खिलेगा कल गुंजित मधुमास 
 मुग्ध होंगे मुझे मधु से मधु बाल सुरभि से अस्थिर मरुताकास।

Friday, 9 January 2026

इतना ही नहीं भारत सहित विश्व के अनेक नेताओं की हत्या होने के योग बन रहे हैं और आतंकवाद तथा आतंकवादी भारत से

 Jounpur: नई अंग्रेजी वर्ष के ज्योतिष और पंचांग के गणनाओं के अनुसार यह वर्ष पूरे विश्व के लिए बहुत ही डरावना और हलचल भरा होगा इसमें अमेरिका की दादागिरी सबके सिर चढ़ जाएगी और अमेरिका का एक छत्र राज होगा 


और जल्दी ही अमेरिका प्रायोजित तंत्र ईरान भारत चीन दक्षिण पूर्वी एशिया और दक्षिण अमेरिका में भयंकर हिंसा तोड़फोड़ विद्रोह दंगा फसाद आगजनी एक लंबा खेल शुरू करेंगे जिसकी आज में बहुत से देश झुला जाएंगे भारत तो किसी तरह बच जाएगा लेकिन यहां पर महंगाई पर हिसाब बढ़ जाएगी अमेरिकी सारे पर यहां तक था पलट की कोशिश भी होगी ‌ वेनेजुएला के बाद अमेरिका का सबसे बड़ा निशान ईरान होगा जहां पर बिके हुए राजनेताओं के सहारे ईरान की सत्ता डांवाडॉल हो जाएगी 

रूस और चीन अमेरिका से बुरी तरह से डर जाएंगे अमेरिका यूरोप और इसराइल मिलकर अब देश पर आर्थिक कब्जा कर लेंगे और यदि कोई विरोध करेगा तो इजरायल के द्वारा उसे बर्बाद कर दिया जाएगा और अमेरिका का ग्रीनलैंड पर कब्जा भी हो सकता है डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि
[L Jounpur: ‌ इतना ही नहीं भारत सहित विश्व के अनेक नेताओं की हत्या होने के योग बन रहे हैं और आतंकवाद तथा आतंकवादी भारत से दुनिया के अनेक भागों पर भीषण हमले करेंगे आंतरिक विद्रोह में देशद्रोही गद्दार विदेशी शक्तियों की मदद करेंगे यह सब कुछ इसी जनवरी में दिखाई देगा प्रमाण के रूप में इसको रखा जा सकता है