🔥 *चीनी सेना के खिलाफ अब रक्षात्मक के बजाय, आक्रमक रवैया अपनाना होगा*
🔥 *चीन को सबक सिखाने का सही समय*
👉 *चीन की शरारत*
👉 *अरुणाचल प्रदेश के तवांग में चीनी सेना की आक्रमक हरकत ने 2 वर्ष पहले लद्दाख के गलंवन में हुई खूनी झड़प की याद दिलाने के साथ यह भी स्पष्ट कर दिया कि चीन अपनी शत्रुतापूर्ण गतिविधियों से बाज आने वाला नहीं है!! तवांग की घटना ने यह भी साफ कर दिया कि चीनी सेना आगे भी भारतीय सीमा में अतिक्रमण करने की कोशिश कर सकती है!! यह ठीक है कि गलंवन की घटना के बाद से भारतीय सेनाऐ सतर्क हैं, लेकिन अब केवल सतर्कता बरतना ही पर्याप्त नहीं!! हमारी सेनाओं को चीनी सेना के खिलाफ रक्षात्मक के बजाय आक्रमक रवैया अपनाना होगा!! ऐसा लगता है कि गलवन में उसे वैसा सबक नहीं सिखाया जा सका,, जैसा जरूरी था!! कम से कम अब तो यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए उसे सही सबक सिखाया जाए!! यह केवल सीमाओं पर चौकसी बरतने से नहीं,, बल्कि उस पर आर्थिक निर्भरता कम करने से भी होगा!! यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि गलवन की घटना के बाद आयातीत चीनी वस्तुओं पर निर्भरता कम करने के जो तमाम कदम उठाए गए,, उनसे वांछित परिणाम प्राप्त नहीं हुआ!! अफसोस कि ऐसा आत्मनिर्भर भारत अभियान शुरू करने के बाद भी नहीं हुआ!! यह सही समय है कि उन कारणों का निवारण किया जाए,, जिनके चलते चीनी वस्तुओं पर भारत की निर्भरता कम होने का नाम नहीं ले रही!! इस दिशा में ठोस उपाय इसलिए भी किए जाने चाहिए,, क्योंकि व्यापार के मामले में पलड़ा चीन की ओर झुका हुआ है!! यह भी समझ जाना चाहिए कि चीनी ऐपस पर पाबंदी लगाना पर्याप्त नहीं साबित हुआ*!!
👉 *बेलगाम चीन को सही संदेश देने के लिए भारत को उन देशों से संपर्क संवाद बढ़ाकर आर्थिक एवं सैन्य सहयोग कायम करने के लिए भी सक्रिय होना चाहिए!! जो उसकी दादागिरी से पीड़ित है!! इसके अतिरिक्त भारत को तिब्बत और ताइवान के मसले पर भी मुखर होना होगा!! इस सब के साथ ही यह भी आवश्यक है कि चीन के मामले में देश का राजनीतिक नेतृत्व एक सुर में बोलना सीखे!! यह देखना बेहद दुखद है कि जब राजनीतिक नेतृत्व को एकजुट होने के साथ ऐसा दिखना भी चाहिए तब वह सरकार को घेरने में लगा हुआ है!! कांग्रेस सरकार पर कुछ ज्यादा ही हमलावर है!! कभी-कभी ऐसा लगता है उसके इस हमलावर रवैया का कारण यह है कि चीन के संदर्भ में उसकी अपनी रीति - नीति को लेकर सवाल ने उठने पाए!! इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि डॉकमाल विवाद के समय राहुल गांधी भारत सरकार को सूचित किए बिना चीनी राजदूत से मुलाकात कर आए थे!! यह समझना भी कठिन है कांग्रेश को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से समझौता करने की क्या जरूरत थी.. ❓ यह समझौता इसीलिए आपत्तिजनक है,, क्योंकि राजीव गांधी फाउंडेशन ने चीन से पैसा लेने में भी संकोच नहीं किया था*!!
👉 *क्या... ❓ घर का भेदी लंका ढाए या कुछ और*. ❓
👉 *चीन को लेकर (सुपर इंडिया न्यूज़ टीवी) बहुत से समाचार प्रकाशित कर चुका है और वह अपने समाचारों के माध्यम से सरकार को इंगित भी कर चुका है*!!
👉 *कि कुत्ते की दुम कभी सीधी नहीं होती*
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