गीता के अनुसार अहंकार क्या है❓
श्रीमद्भगवद्गीता के सोलहवें अध्याय में श्रीकृष्ण कहते है,
'हे अर्जुन! अहंकार, बल और कामना के अधीन होकर प्राणी परमात्मा से ही द्वेष करने लगता है
क्योंकि अहंकार उसे जीत लेता है।
अहंकारी पुरुष यह भूल जाता है
कि परमात्मा स्वयं उसमें ही बसा है।
जो परमात्मा के अस्तित्व को नकारते हैं,
: गीता के अनुसार मन क्या है❓
मन को 11वीं इन्द्रिय माना जाता है,
जो ज्ञानेन्द्रियों और कर्मेन्द्रियों के बीच नियामक का काम करता है।
ये इन्द्रियां और मन हमारे ज्ञान और कर्म के साधन मात्र न होकर इस संसार को भोगने के भी साधन हैं।
संसार का सुख भोगने में मन विचार और कल्पना के द्वारा भी सहायता करता है।
मनुष्य का मन संसार की सबसे अशांत चीज है।
*राम नाम सिमरन की आदत डालने के लिए ऐसा करें कि :*_
*1) आपके घर की दस सीढ़ियाँ हैं, प्रत्येक सीढ़ी चढते व उतरते वक्त बार-बार राम नाम सिमरन करते रहें !*
*2) आप रेड लाइट पर खड़े हो, परेशान होने से अच्छा है राम नाम सिमरन करते रहें ।*
*3) आप किसी को फोन करते हैं, फोन की घंटी बज रही है, जब तक सामने वाला ना उठाए, राम सिमरन करते रहें ।*
*4) कोई भी महिला रोटी पका रही है,राम नाम सिमरन करते हुए पकाएँ, सिमरन भी होगा और रोटी खाने वाले को भी आनन्द आएगा !*
*5) आप किसी का इंतज़ार कर रहे हैं, नाम सिमरन करते रहें ।राम सिमरन भी होगा और इँतजार कब मुलाकात में बदल गया, पता ही नहीं चलेगा ।*
*6) यानी कि जीवन की हर छोटी बड़ी घटना को सिमरन के साथ जोड़ दो । एक दिन देखोगे कि ऐसे ही आदत पड़ जाएगी ।*
*7) अब सिमरन के लिए समय नहीं मिल रहा फिर तो स्वासों में बस जायेगा, और सहज में ही राम सिमरन होने लगेगा ।*
*8) बस हर वक़्त नाम सिमरन ही राम सिमरन*
जय श्री राम जी 🌹🙏🙏🙏🙏🙏🙏
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