आज विजय दिवस है!
आज ही के दिन अर्थात 16 दिसम्बर 1971 को भारतीय सेना ने पाकिस्तान से बंगला देश को स्वतंत्र कराकर एक नये देश के रुप में विश्व मानचित्र पर स्थापित कराया। साथ ही भारतीय सेना ने पाकिस्तान के 93 हजार सैनिकों को बंदी भी बना लिया था।
भारतीय सशस्त्र सेनाओं के असाधारण पराक्रम, अनुशासन व अक्षय राष्ट्र निष्ठा का अमिट और पावन अध्याय है- ’विजय दिवस’
जय हिंद 🇮🇳
वन्दे मातरम् 🇮🇳
भारत माता की जय 🇮🇳
लेकिन इस युद्ध का एक दूसरा पहलू भी है जो देश के साथ बहुत बड़ा देशद्रोह और गद्दारी है पहला हमने लगभग एक लाख सैनिकों का समर्पण कराकर उन्हें छोड़ दिया लेकिन बदले में भारत के 5000 युद्ध बंदी नहीं छोड़े गए आज भी पाकिस्तान की जेलों में सड़ रहे हैं अधिकतर तो मर चुके हैं
दूसरा दूसरा भारत की सेना ने लाहौर तक लगभग एक तिहाई पाकिस्तान जीत लिया था लेकिन बदले में भारत को क्या मिला कम से कम उस समय गिलगित बालटिस्तान और बलूचिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर तो भारत को ले ही लेना चाहिए था लेकिन बदले में 1 इंच भी जमीन तथाकथित अलावा महिला इंदिरा गांधी ने नहीं लिया
बांग्लादेश को आजाद करके भारत को क्या मिला कम से कम भारत में मिलाकर उसका एक प्रांत बना लिया होता उस समय शेख मुजीबुर रहमान इसके लिए सहमत भी थे केवल वे चाहते थे उन्हें आज और वहां का गवर्नर बना दिया जाए लेकिन इंदिरा गांधी ने उनकी बात स्वीकार नहीं किया और जिसका परिणाम बहुत दुखद हुआ आज बांग्लादेश पाकिस्तान से भी बड़ा भारत का कट्टर शत्रु है
Aur iske alava 1965 से लेकर 1971 तक भारत में लगभग दो करोड़ बांग्लादेशी पाकिस्तानी और उनके साथ छिपे हुए अनेक विदेशी विधर्मी रोहिंग्या इत्यादि आए आज उनकी संख्या लगभग 15 करोड़ पार कर चुकी है और यह भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुके हैं 15 करोड़ दुनिया के 190 देशों की जनसंख्या भी नहीं है जबकि युद्ध के बाद इन सब को वापस बांग्लादेश भेज देना चाहिए था अब आप खुद समझ लीजिए कि किस तरह भारत को गुलाम और विधर्मी बनाने की सफल साजिश 1971 के युद्ध में की गई जिसे हम आज तक नहीं समझ पाए हैं सेना के अद्वितीय वीरता का बहुत ही दुखद अंत कर दिया गया डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह
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