*किसानों को नहीं मिल पा रहा समय पर लाभ*
अंबेडकरनगर
भले ही किसानों के लिए सरकारी योजनाओं की भरमार क्यों न हो। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। जिले के किसान परेशान हाल है। सरकारी योजनाएं कठिन कागजी प्रक्रिया एवं कमीशन खोरी के कारण किसान तक पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देती। वास्तविक किसान योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते है। किसानों की मानें तो जनप्रतिनिधियों के लंबे लंबे भाषण व घोषणाओं से किसान का पेट नहीं भरता है। यह सब हवा हवाई ही मात्र है।
कृषि विभाग कार्यवाहक अधिकारियों के भरोसे विभाग द्वारा चलाया जा रहा है। इससे किसानों को सरकार द्वारा चलाई जा रही दर्जनों योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिल रहा। प्रशासन व विभाग के आला अधिकारियों द्वारा जूनियर अधिकारियों को कार्यवाहक अधिकारी बनाकर काम चलाया जा रहा है। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।किसान मुल्क राज, सुरेंद्र कुमार, प्रकाश चंद, सुनील कुमार आदि ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किसानों की आमदनी को बढ़ाने के लिए दर्जनों योजनाओं को चलाया जा रहा है, लेकिन अंबेडकरनगर में समय पर इन योजनाओं का किसानों को लाभ पिछले कुछ वर्षों से नहीं मिल रहा। किसानों का कहना है कि पहले सरकार के दिशानिर्देश पर कृषि अधिकारियों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में कैंप आयोजित कर कृषि संबंधी जानकारी किसानों को दी जाती थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से ये योजनाएं कागजों तक ही सिमट चुकी हैं।जबकि मुहर्रम ने बताया कि जटिल कागजी प्रक्रिया के कारण किसानों को योजनाओं का लाभ नहीं मिलता है। यह लाभ सीधे तौर पर बिचोलियों को मिल जाता है। किसानों ने बताया उप निदेशक कृषि कार्यालय में तैनात सुनील वर्मा नाम का एक बाबू जो 10 साल से एक ही पटल पर तैनात है। वह इस गड़बड़ झाले का असली खिलाड़ी बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश की भी खुलेआम अवहेलना है। क्योंकि मुख्यमंत्री का साफ आदेश है कि किसी भी विभाग का कोई भी बाबू तीन साल से ज्यादा एक पटल पर तैनात नहीं रह सकता।
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