*जौनपुर की महान विभूतियां भाग 295 डॉक्टर श्रीपाल सिंह क्षेम*
*जौनपुर के जिन महान विभूतियों और प्रतिभाओं ने राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कॉल पर अपनी अमित रेखा खींची है उसमें जौनपुर के रत्न डॉक्टर श्रीपाल सिंह क्षेम का नाम अग्रगण्य है एक महान कवि साहित्यकार के अतिरिक्त एक गहन चिंतक दार्शनिक जौनपुर और आदि गंगा गोमती से जुड़े हुए महान व्यक्तित्व थे जो देश और सनातन धर्म के लिए हमेशा चिंता तो रहा करते थे उन्होंने बहुत सी रचनाएं किया है और साहित्य तथा काव्य जगत में उनका परिचय देने की आवश्यकता नहीं है साहित्य के महारथी उन्हें यूं ही नहीं कहा जाता जनपद के विश्वविख्यात तिलकधारी सिंह क्षत्रिय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में अध्यापन करने के साथ-साथ वे समाज की दिशा और दशा के प्रति सदैव जागरूक रहते थे और सबसे बड़ी बात उभरते हुए लोगों को बहुत ही सुने और प्रोत्साहन देते थे*
*आज भी तिलकधारी सिंह स्नातकोत्तर महाविद्यालय उनका लिखा गया प्रार्थना गीत महाविद्यालय का प्रतीक है और यहां के विख्यात मंथन पत्रिका में छपता है कवि सम्मेलनों में भी हुए अद्भुत अद्वितीय थे और सबके साथ घुलमिल जाने का एक अलग अंदाज था इनके साथ वे अपने शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी सचेत रहते थे और घर गए लोगों का मान सम्मान करना उनकी आदत में शुमार था उनके भरे पूरे परिवार में उनके पुत्र और अन्य लोग उनकी विरासत को संजोग कर न केवल रखे हैं बल्कि हर वर्ष उनके याद में आयोजन करते रहते हैं जब मैं विद्या वारिधि अर्थात पीएचडी करने की सोची और छायावाद में करने का मन बनाया तो उन्होंने कहा 60 वर्ष के बाद कोई ऐसा प्रयास कर रहा है लेकिन उन्होंने मुझे भरपूर दिशानिर्देश किया और मुझे याद है कि कभी भी मैं उनके घर से बिना जलपान के वापस नहीं आया उनके बारे में अधिक परिचय देना सूर्य को दीपक दिखाने जैसा होगा फिलहाल जौनपुर की इस महान विभूति और अन्य प्रतिभा को मैं कोटि-कोटि श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं*
No comments:
Post a Comment