*💎💎किस के लिए ये सब 💎💎*
पूरी उम्र बड़े अच्छे से गुजर जाती है,और जब जाने का समय आता है तब बच्चो के लिए भाई से संपत्ति का विवाद अक्सर लोग कर लेते हैं,उस भाई से जिसके बगैर एक पल भी गुजारना एक समय में मुश्किल होता था,आज उसी भाई से इतना विवाद हो गया की अबोला तक हो गया,वो भी उन बच्चो के लिए जिनको आपकी संपत्ति में जरा भी इंट्रेस्ट नही होता है,अब जरा सोचिए फिर *किस के लिए ये सब ?*
और आपका भी ठिकाना कब तक,कुछ कह नहीं सकते,फिर *किस के लिए ये सब?*
आपके जाने के बाद कौन याद रखेगा आपको और कब तक,कुछ भी तो पता नहीं,फिर *किस के लिए ये सब?*
अगर को बच्चे साथ हैं,तो अलग बात है,नही तो अगर देश के बाहर है तो क्या आपको बिदा करने भी आ पाएंगे,कुछ पता नहीं,तो फिर *किस के लिए ये सब?*
जिन बच्चों के लिए ये सब आप कर रहे हैं वो तो एक पल भी आपके साथ बैठने को भी तैयार नहीं,तो फिर *किसके लिए ये सब?*
अभी भी वक्त है कुछ नही बिगड़ा है,ये त्योहार भी तो इसी लिए आते हैं,सब कुछ भूल कर अपनो को गले लगा लीजिए,न ही तो ये वक्त निकल जायेगा और आपके हाथ कुछ नही लगने वाला,वैसे भी तो खाली हाथ आए थे खाली हाथ ही जाओगे,फिर *किस के लिए ये सब?*
मेरा विनम्र निवेदन है मेरी बात किसी को भी बुरी लगी हो तो कृपया मुझे क्षमा करें ,लेकिन यह जरूर विचार करें कि आखिर *किस के लिए ये सब?*
*स्वस्थ रहें,व्यस्त रहें , योग करते रहे ओर मस्त रहें।
*सिर्फ...एक कम्बल*
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जवानी में उसके पति का देहांत हो गया था । घर में एक छोटा बेटा था, उस बेटे के उज्जवल भविष्य के लिए उस माँ ने घर-घर जाकर काम किया । *काम करते-2 वो बहुत थक जाती थी, लेकिन फिर भी आराम नही करती थी ।वो सोचती थी जिस दिन बेटा लायक हो जाएगा उस दिन आराम करूंगी।*
देखते-2 समय बीत गया! *माँ बूढी हो गयी और बेटे को अच्छी नौकरी मिल गयी।कुछ समय बाद बेटे की शादी कर दी और एक बच्चा हो गया। अब बूढी माँ खुश थी कि बेटा लायक हो गया .......*
लेकिन ये क्या ....... बेटे व बहू के पास माँ से बात करने तक का वक़्त नही होता था ।
*बस ये फर्क पड़ा था माँ के जीवन में ...पहले वह बाहर के लोगो के बर्तन व कपड़े धोती थी। अब अपने घर मेंबहू-बेटे के...* फिर भी खुश थी क्योंकि औलाद उसकी थी ।
*सर्दियों के मौसम में एक टूटी चारपाई पर, बिल्कुल बाहर वाले कमरें में एक फटे से कम्बल में सिमटकर माँ लेटी थी! . और सोच रही थी ... आज बेटे को कहूँगी तेरी माँ को बहुत ठंड लगती है एक नया कम्बल ला दे।*
शाम को बेटा घर आया तो माँ ने बोला... बेटा मै बहूत बूढी हो गयी हूँ, शरीर में जान नही है, ठंड सहननही होती मुझे नया कम्बल ला दे।। .... *तो बेटा गुस्से में बोला, इस महीने घर के राशन में और बच्चे के एडमिशन में बहुत खर्चा हो गया! कुछ पैसे है पर तुम्हारी बहू के लिए शॉल लाना है वो बाहर जाती है। तुम तो घर में रहती हो सहनकर सकती हो।। ये सर्दी निकाल लो,अगले साल ला दुंगा।*
.. बेटे की बात सुनकर माँ चुपचाप सिमटकर कम्बल में सो गयी .... *अगले सुबह देखा तो माँ इस दुनियाँ में नही रही...* सब रिश्तेदार, पड़ोसी एकत्रित हुए, बेटे ने माँ की अंतिम यात्रा में कोई कमी नही छोड़ी थी।
*माँ की बहुत अच्छी अर्थी सजाई थी!बहुत महंगा शॉल माँ को उढाया था।। सारी दुनियां अंतिम संस्कार देखकर कह रही थी।हमको भी हर जन्म में भगवानऐसा ही बेटा मिले!*
_मगर उन लोगो को क्या पता था कि मरने के बाद भी एक माँ तडप रही थी।।। .. सिर्फ एक कम्बल के लिए ...सिर्फ एक कम्बल के लिए....._
दोस्तों, *माँ-बाप का दिल दु:खाकर आज तक कोई सुखी नही हुआ. कदर करनी है, तो जीतेजी करो,अरथी उठाते वक़्त तो नफरत करने वाले भी रो पड़ते हैं।*
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