Tuesday, 13 December 2022

पंजाब में फिर बिगड़ते हालात*👉 *पंजाब में तरनतारन के एक थाने में रॉकेट लॉन्चर से हमला अतिवादी - आतंकी तत्वों के दुस्साहस का नया प्रमाण है

👉 *पंजाब में फिर बिगड़ते हालात*
👉 *पंजाब में तरनतारन के एक थाने में रॉकेट लॉन्चर से हमला अतिवादी - आतंकी तत्वों के दुस्साहस का नया प्रमाण है!!

इस हमले ने कुछ माह पहले मोहाली में खुफिया विभाग के मुख्यालय पर हुए रॉकेट हमले की याद दिला दी!! इस हमले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी की ओर से यह मानकर की जा रही है कि यह आतंकी हमला है!! हो सकता है कि तरनतारन हमले के पीछे भी इन्हीं ताकतों का हाथ हो,, जिन्होंने मोहाली में हमला कराया था!! जो भी हो,, उन तत्वों तक पहुंचना आवश्यक है,, जो ऐसे हमले कर,, और करा रहे हैं!! यह मानने के अच्छे भले कारण है कि यह तत्व और कोई नहीं खालिस्तानी है!! इन तत्वों को पाकिस्तान से सहयोग और समर्थन मिल रहा हो तो हैरानी नहीं!! पुलिस ठिकानों पर राकेट हमलों के साथ ही इसकी भी अनदेखी नहीं की जा सकती कि पंजाब में पिछले कुछ समय में पुलिस सुरक्षा के साए में रह रहे व्यक्तियों की हत्याएं  उनके अंगरक्षकों की उपस्थिति में ही हो चुकी है!! एक अन्य चिंता की बात यह भी है कि खालिस्तान का राग अलापने वाले तत्व निरंकुश दिख रहे हैं!! वह खालिस्तान  की खुली पैरवी करने के साथ सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने का काम भी कर रहे हैं!! इनका समर्थन जिस तरह कुछ राजनीतिक - सामाजिक संगठन कर रहे हैं और पुलिस सतर्कता का परिचय देने के बजाय ढुलमुल नजर आ रही है,, उससे पंजाब में वैसा ही माहौल बनता दिख रहा है,, जैसा तब था,, जब खालिस्तानी आतंकवाद चरम पर था*!!

👉 *क्या यह विचित्र नहीं कि पंजाब सरकार बंदूक संस्कृति और भड़काऊ गानों पर तो रोक लगाने की बातें कर रही है,, लेकिन सार्वजनिक रूप से हथियार लहराने और देश विरोधी बयान देने वालों पर अंकुश लगाने के लिए अपेक्षित कदम नहीं उठा रही है.. ❓ यह भी अजीब बात है कि इस तरह की भनक मिलने के बाद भी सुरक्षा एजेंसियां ने तो आतंकी तत्वों की टोह ले सकी और ना ही तरनतारन में उनके दुस्साहशी हमले को रोक  सकी कि  वेफिर से किसी सरकारी इमारत को निशाना बना सकते हैं... ❓ यह निराशाजनक है कि जब पंजाब सरकार और उसकी पुलिस को अतिवादी - आतंकी तत्वों के दुस्साहस पर लगाम लगाने में सक्षम दिखना चाहिए,, तब वह असहाय- नीरउपाय सी दिख रही है!! यह शुभ संकेत नहीं!! पंजाब में खालिस्तानी तत्वो,, नशे के सौदागरों,, सामाजिक ताने-बाने को बिगाड़ने वालों के साथ गैंगस्टर भी बेलगाम दिख रहे हैं!! पंजाब के हालात राज्य सरकार के साथ केंद्र सरकार के लिए भी चिंता का विषय बनने चाहिए!! केवल यह कहने से काम चलने वाला नहीं है कि पंजाब में जो है अप्रिय घटनाएं घट रही है,, उनके पीछे विदेशी ताकतों का हाथ है!! प्रश्न यह है कि इन ताकतों  के जो एजेंट पंजाब में सक्रिय हैं,, उन पर राज्य सरकार लगाम क्यों नहीं लगा पा रही है*...❓
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️ *पंजाब में पिछले कुछ अर्से की घटनाओं को देखें तो 1979 से 1984 के कालखंड की झलक दिखती है !! पंजाब में शिरोमणि गुरुद्वारा  प्रबंधक कमेटी यानी एसजीपीसी से लेकर हिंसा के रास्ते अलग खालिस्तान के सपने देखने वालों के सारे कदम ठीक वैसे ही हैं, जैसे उन काले दिनों में थे!! एसजीपीसी ने इसी 1 दिसंबर से जिन  सिख कैदियों  की रिहाई का अभियान छेड़ा है वह और कोई नहीं, पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हत्यारे एवं बम धमाके के दोषी हैं! कुछ दिनों पहले पंजाब में शिवसेना नेता सुधीर सूरी की एक मंदिर के बाहर धरना प्रदर्शन के दौरान दर्जन भर से ज्यादा पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में हत्या कर दी गई!! सूरी  हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियों के अपमान और कुछ तत्वों द्वारा उनके लिए अपशब्दों का विरोध करने के लिए धरने पर बैठे थे, लेकिन पुलिस की मौजूदगी में उनकी हत्या हो गई! मौके से पकड़े गए हत्यारोपीत संदीप सिंह को लेकर जब जांच-पड़ताल हुई तो ऐसे वीडियो सामने आए जिनमें वह वारिश पंजाब दे नामक खालिस्तान समर्थक संगठन के मुखिया अमृतपाल सिंह के साथ नजर आ रहा है!! अमृतपाल ने संदीप सिंह के समर्थन में बयान दिए और उसके परिवार की जिम्मेदारी उठाने का भरोसा दिलाया!! इसके बाद भी पंजाब पुलिस की अमृतपाल को जांच के दायरे में लाने की हिम्मत नहीं हो पा रही है!! सुधीर सूरी की हत्या के कुछ दिनों बाद फरीदकोट में एक डेरा समर्थक जिस पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी का आरोप था, की भी दिनदहाड़े हत्या हो गई!! इससे कुछ दिन पहले फरीदकोट में ही अमृतपाल ने रैली कर सिख  युवाओं से न्याय व्यवस्था में विश्वास न रखते हुए बेअदबी के आरोपीतो पर खुद कार्रवाई  करने और सिख राज स्थापित करने की अपील की थी!! हत्याओं का यह दौर 1979 के जरनैल सिंह भिंडरावाला के समर्थकों द्वारा अपने वैचारिक- राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की हत्या जैसा ही है!! निरंकारी बाबा गुरचरण सिंह की हत्या करने वाला भी भिंडरावाला का खास रंजीत सिंह था!! तब भी पुलिस भिंडरावाला पर कार्रवाई करने से बचती रही थी!! जब कभी कार्रवाई की कोशिश हुई तो भिंडरावाला ने मेहता चौक गुरुद्वारे और बाद में श्री अकाल तख्त साहिब में ठिकाना बना लिया और सरकार ठिठक  गई*!!
🔥 *हाल ही में 1 दिन के लिए नजरबंद किए गए अमृतपाल ने भी अपनी रायफले लहराते समर्थकों के साथ स्वर्ण मंदिर का दौरा किया और वहां हजारों की भीड़ को संबोधित किया!! खालिस्तानी प्रचार तंत्र ने कुछ ही घंटों में इन तस्वीरों को धार्मिक गानों से मिलाकर व्हाट्सएप स्टेटस और इंस्टाग्राम रील्स के रूप में सिख युवाओं के बीच वायरल कर दिया!! अमृतपाल को पंजाब में अब भिंडरावाला 2.0 कहा जाने लगा है!! उसने न सिर्फ भिंडरावाला जैसी वेशभूषा बना रखी है, बल्कि उसी प्रकार की भड़काऊ बातें भी करता है!! वह भिंडरावाला की ही तरह हथियारबंद समर्थकों के बीच चलता है!! अमृतपाल को भिंडरावाले के रूप में स्थापित करने में लगे तत्व भिंडरावाला को लेकर फतासीओ से भरे मनोविज्ञान से भली-भांति परिचित है!! इन तत्वों ने वर्षों तक भिंडरावाला को लेकर कपोल कथाएं गढ़ कर उसे एक संत और करिश्माई शक्तियों वाले महानायक के रूप में स्थापित किया है!! इसका नतीजा यह है कि पिछले कुछ वर्षों में खालिस्तान समर्थक युवाओं का एक ऐसा तबका  खड़ा हुआ है, जो भिंडरावाला जैसा किरदार एक बार फिर अपने सामने देखना चाहता है!! अमृतपाल को भिंडरावाला 2.  0 बना कर उसी तलब को पूरा किया जा रहा है!! पिछले 5- 6 साल में पंजाब में बेहद सुने जाने वाले हिट पंजाबी पॉप गानों में भिंडरावाला, बंदूकों, बंकरो और दिल्ली को चुनौती के व्यापक महिमामंडन से इस मनोविज्ञान को भलीभांति समझा जा सकता है!! इस माहौल के लिए जितने जिम्मेदार खालिस्तान समर्थक अलगाववादी तत्व हैं, उतनी ही जिम्मेदार एसजीपीसी की राजनीति है*!!
🔥 *एसजीपीसी से जुड़े नेताओं ने जब ऑपरेशन ब्लू स्टार की बर्फी बनाना शुरू किया तो फिर भी समझ आता था क्योंकि आखिर सिखों के सबसे पवित्र तीर्थ को इस ऑपरेशन में नुकसान पहुंचा था उसी को ही क्यों करोड़ों हिंदू श्रद्धालुओं की भावना भी स्वर्ण मंदिर से जुड़ी रही है पर क्या एसजीपीसी समझ सकती है कि उसने गुरुद्वारों में भिंडरावाला जैसी विवादित शख्सियत जो अपने भाषणों में हर अनुयाई से 35 हिंदुओं की हत्या करने का आह्वान करता था की तस्वीरें क्यों लगने दी यह भी एक तथ्य है कि भिंडरावाला की सभाओं में खुलेआम मंच से उन पुलिस अधिकारियों और आम लोगों के नाम पुकारे जाते थे जिनकी हत्याएं की जानी होती थी यह भी विचारणीय प्रश्न है कि क्या ब्लूस्टार जैसी घटना कभी होती अगर भिंडरावाला ने श्री अकाल तख्त साहिब में डेरा जमा कर आतंकी गतिविधियां संचालित ने की होती यह भी एक तथ्य है कि अगर अकाली नेताओं ने नई दिल्ली के आव्हान पर समझदारी दिखाते हुए अकाली मोर्चा स्थगित कर दिया होता तो संभवत ब्लू स्टार का फैसला वापस ले लिया जाता आज के एसडीपीसी नेता यह भूल चुके हैं कि किस तरह श्री हरी मंदिर साहिब में फंसे अकाली नेताओं पर ब्लू स्टार के दौरान भिंडरावाला समर्थकों ने ग्रेनेड हमला कर गुरुचरण सिंह तोहरा और हरचरण सिंह लोंगोवाल की हत्या की कोशिश की थी जिन्हें भारतीय सेना ने ही अपनी सुरक्षा में बख्तरबंद वाहन से स्वर्ण मंदिर से निकाला था इसके बाद भी एसजीपीसी उसी राजनीति को दोहरा रही है जो आनंदपुर साहिब प्रस्ताव से पंजाब को 84 के हालात तक ले गई थी जिसमें अकाली और भिंडरावाला के बीच कौन अधिक कट्टरपंथी है इसे लेकर हार्ट की कट्टरपंथ की होड़ में अक्सर अधिक कट्टरपंथी की ही जीत होती है जो तब भिंडरावाला था और इस बार अमृतपाल दिखाई देता है खालिस्तान समर्थक कट्टरपंथ मतान तरण नशे की समस्या और बैठक रासायनिक खेती के दुष्प्रभाव के चलते कैंसर रूपी महामारी से जूझते पंजाब को लेकर खतरे की घंटी बजाने का समय है ज्ञानी जेल सिंह के शब्दों को याद करें तो पंजाब की किताब का बरका बरका एक बार फिर बिखर रहा है*

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