Friday, 16 December 2022

पथरी है*पथरी का इलाज,,पथरी कहीं भी हो कैसी भी हो,,भगवान श्री धनवंत्री जी की कृपा से सब निकल जाती है,,*

:

 पथरी है
*पथरी का इलाज,,पथरी कहीं भी हो कैसी भी हो,,भगवान श्री धनवंत्री जी की कृपा से सब निकल जाती है,,*
अल्फल्फा सीडस सुर्ख 20 ग्राम
यवक्षार 20 ग्राम
हजरल यहुद 10 ग्राम
त्रिविक्रम रस 10 ग्राम
गोखरू क्षार 10 ग्राम
अतिबला क्षार 10 ग्राम
कुल्थ क्षार 10 ग्राम
पाषाण भेद क्षार 10 ग्राम
चौलाई क्षार 10ग्राम
सत्यनाशी मूल क्षार 10 ग्राम
सज्जी 10 ग्राम
अपा मार्ग क्षार 10 ग्राम
मूली क्षार 10 ग्रा।
पंच तरण मूल घन सत्व 10 ग्राम
सूर्य क्षार 10 ग्राम
शुद्ध सुखा शिलाजीत 10 ग्राम
नर पपीते की जड़ की छाल 30 ग्राम
सबको बारीक पावडर करके,
 बिजोरा नींबू के रस में घुट्टी करके दो दो ग्राम सुबह शाम छांछ से लीजिए
प्रभु कृपा से कैसी भी पथरी हो कितनी भी बड़ी हो सब निकल जाती है,,वह भी चुरा होकर। किसी को कम ,,किसी को ज्यादा समय लग सकता है,,पथरी घुलने में



: #नागरमोथा (Cyperus scariosus) 
         संस्कृत में इसे नागरमुस्तक या भद्र मुस्तक कहते हैं। एक पौधा जो पूरे भारत में खरपतवार के रूप में उगता है। इससे इत्र बनता है और औषधि के रूप में इसका उपयोग होता है। यह नमी वाले तथा जलीय क्षेत्रों में अधिक पाया जाता है। 

     इसके झाड़ीनुमा पौधे समुद्र तल से 6 हजार फुट की ऊंचाई तक पाये जाते हैं। नागरमोथा नदी और नालों के किनारे की नमी वाली भूमि में पैदा होते हैं। पुष्प (फूल) जुलाई में तथा फल दिसम्बर के महीने में आते हैं। 

विभिन्नभाषाओं में नाम :- हिंदी में नागरमोथा संस्कृत- मुस्तक, वारिद, कच्ठरूहा, मुस्त तथा मेघ के सभी याम मराठी नागरमोथा, मोथ गुजराती नागरमोथा, मोथा बंगाली नागरमुस्ता, मुथा तैलगू तुगमुस्ते, नागरमुस्तेलु फारसी मुश्क जमीन लैटिन साईहेरस कन्नड़ कोन्नरि द्राविड़ी कोरक्कडंग अरबी सोअद कूफी तमिल मुथाकच, कोरड वैज्ञानिक क्रेसप्रेस सक्रेसिअस कुलनाम क्रेसप्रेस अंग्रेजी नट ग्रेस।  

स्वाद :- नागरमोथा खाने में चरपरा कड़वा, कषैला और सूखा होता है। 

स्वरूप : नागरमोथा के झाड़ी नुमा पौधे की लम्बाई 30 से 60 सेमी तक ऊंची होती है। इसके पत्ते लंबे और पतले होते हैं। इसके तने में आधा इंच व्यास के अण्डाकार सुगन्धित बाहर से पीले रंग के परन्तु अन्दर से सफेद रंग के कन्द (फल) होते हैं। नागरमोथा की जड़ में कसेरू की भांति एक कन्द निकलता हैं जिसे नागरमोथा कहते हैं। 

स्वभाव : नागरमोथा की तासीर शीतल होती है। नागरमोथा के फल में एक सुगन्धित तेल होता है। नागरमोथा में प्रोटीन स्टार्च और अन्य कार्बोहाइड्रेट भी होते हैं। 

गुण-धर्म : नागरमोथा दीपन (पाचन शक्ति को बढ़ाने वाला), पाचक (भोजन को पचाने वाला), कफ, पित्त, रक्त-विकार (खून की बीमारी), तृषा (प्यास), ज्वर और कीड़ों को नाश करता है। नागरमोथा का लेप शोथ (सूजन) को कम करने वाला और स्तनों में दूध की वृद्धि करता है। नागरमोथा त्वचा के रोग, बुखार, जहर को कम करने वाला, बलकारक, गर्भाशय संकोचक (गर्भाशय का सुकड़ना) और मूत्रल (पेशाब को बढ़ाने वाला), को कम करता हैं। यह स्मरण शक्तिवर्द्धक और नाड़ियों (नसों) को ताकत देता है। 

विभिन्न रोगों में सहायक :-
1. मिर्गी: नागरमोथा को उत्तर दिशा की तरफ से पुण्य नक्षत्र में अच्छे दिन में उखाड़कर एक रंग की गाय के दूध से पिलाने से मिर्गी में लाभ पहुंचता है।

2. प्रसूता स्त्री के स्तनों में दूध का कम उतरना:-मोथा (नोगर मोथा) के फल को पानी में पीसकर नारी के स्तनों पर पेस्ट के रूप में लेप करने से प्रसूता स्त्री के स्तनों में दूध की वृद्वि होती है। नागरमोथा को अच्छी तरह से पीसकर नारी के स्तनों पर लेप करें और नागरमोथा को 6 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम दूध में पीसकर पिलाने से दूध की शुद्धि और बढ़ोत्तरी होती है, साथ ही साथ बच्चे को जन्म देने वाली मां (प्रसूता स्त्री) के दूध में जमा गांठें कम हो जाती हैं। नागरमोथा को पानी में उबालकर पिलाने से स्त्रियों के स्तनों का दूध शुद्ध होता है और दूध बढ़ता है।

3. क्षय कास (टी.बी. की खांसी): नागरमोथा, पिप्पली (पीपल), मुनक्का तथा बड़ी कटेरी के अच्छे पके फलों को समान भाग में लेकर भली प्रकार पीसकर घी और शहद के साथ चाटने से टी.बी. की खांसी कम होती है।

4. तृषा (प्यास):- नागरमोथा, पित्तपापड़ा उशीर (खस), लाल चंदन, सुगन्धवाला, सौंठ आदि पदार्थों को पीसकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े को ठड़े पानी के साथ बीमार व्यक्ति को देने से प्यास और बुखार की प्यास में शान्ति मिलती है।

5. खांसी: अतीस, काकड़ासिंगी, पीपल और नागरमोथा को पीसकर चूर्ण बना लें, इस चूर्ण को शहद के साथ चटाने से खांसी के साथ-साथ बच्चों का बुखार कम होता है।

6. अग्निवर्धक (भूख को बढ़ाने वाला) : नागर मोथा की जड़ों को खाना भूख और दिल के लिए लाभकारी होता है।

7. पेट के कीड़े:- एक चुटकी नागरमोथा का चूर्ण शहद के साथ प्रयोग करना चाहिए। नागरमोथा 2 ग्राम, अजवायन 2 ग्राम, भुना हुआ जीरा 2 ग्राम, कालीमिर्च 2 ग्राम और बायबिण्डग 2 ग्राम लेकर 25 ग्राम सेंधानमक के साथ बारीक पीस लें। इस बने चूर्ण को 4-4 ग्राम की मात्रा में छाछ के साथ पीने से पेट के कीड़े मर जाते हैं और पेट के दर्द में लाभ मिलता है। नागरमोथा की जड़ों का 10-20 ग्राम चूर्ण सेवन करने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।

8. अरुचि ज्वर (बुखार में भोजन की इच्छा न होना):- 10 ग्राम नागरमोथा और पित्तपापड़ा दोनों को एक साथ मिलाकर काढ़ा बना लें। इस काढे़ को भोजन से 1 घंटे से पहले पीने से बुखार दूर होता है और भूख बढ़ती है।

9. वमन (उल्टी) लाने के लिए:- नागरमोथा, इन्द्रजौ, मैनफल तथा मुलेठी को समान भाग में लेकर पीसकर छान लें, और इस चूर्ण में शहद मिलाकर सेवन करने से उल्टी होती है।

10. दस्त और आंव:-नागरमोथा के 10 ग्राम चूर्ण में 30 ग्राम दूध डालकर पकायें, जब केवल दूध थोड़ा-सा रह जाये तो इस दूध को 200 मिलीलीटर सुबह, दोपहर तथा शाम को सेवन से आंव (एक प्रकार का सफेद तरल पदार्थ जो मल के द्वारा बाहर निकलता हैं) दस्त बन्द हो जाते हैं। नागरमोथा 6 ग्राम, हिंगुल 6 ग्राम, कपूर 6 ग्राम, इन्द्रजौ 6 ग्राम को एक साथ अच्छी तरह पीसकर छोटी-छोटी गोलियां बनाकर रख लें, फिर इन्हीं बनी गोलियों को दिन में 3-4 बार सेवन करने से ऑव के दस्त समाप्त हो जाते हैं। 

नागर मोथा के रस को गर्म करके फिर उसके बाद उसे ठडा होने पर शहद के साथ मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से अमीबिक प्रवाहिका रोग में लाभ होता है। अदरक और नागरमोथा को अच्छी तरह पीसकर शहद के साथ चटाने से आमातिसार (ऑवयुक्त दस्त) बन्द हो जाते हैं।

11.अतिसार (दस्त):-नागरमोथा की जड़ों का चूर्ण बनाकर सेवन करने से प्रवाहिका (पेचिश) तथा दस्त में लाभ पहुंचता है। 10 ग्राम नागरमोथा, 10 ग्राम आंवला, 10 ग्राम अदरक, 30 ग्राम हरड़ और सोंठ 40 ग्राम। इन सबको मिलाकर कूटकर छान लें। इस चूर्ण के सेवन से दस्त, प्लीहा (तिल्ली) जिगर के साथ बुखार और भूख का कम लगना ठीक हो जाता है। नागरमोथा, बेल की गिरी, लोध, इन्द्र-जौ, पठानी लोध्र, मोचरस और धाय के फूलों को बराबर मात्रा में लेकर बारीक चूर्ण बनाकर रख लें, फिर इस चूर्ण को 3 ग्राम लेकर गाय के दूध से बनी छाछ के साथ सुबह-शाम पीने से सभी प्रकार के दस्तों में लाभ मिलता है।

12. हलीमक:- नागरमोथा की जड़ों का चूर्ण 3 से 6 ग्राम को लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग लौह भस्म के साथ मिलाकर फंकी लें, ऊपर से खैर (कत्थे) का काढ़ा बनाकर पीना चाहिए। इससे हलीमक रोग ठीक हो जाता है।

13. अनियमित मासिक-धर्म: पिसे हुए नागरमोथा में गुड़ को मिलाकर गोलियां बनाकर खिलाने से स्त्रियों को आने वाला मासिक-धर्म ठीक हो जाता है।

14. सुजाक (गिनोरिया):- सुजाक रोग के होने पर नागरमोथा का काढ़ा पीने से लाभ मिलता है।

15. उपदंश (गर्मी):- नागरमोथा का काढ़ा पीने से आराम पहुंचता है।

16. प्रमेह (वीर्य विकार):- नागरमोथा, दारूहल्दी, देवदारू, त्रिफला आदि को बराबर भाग में लेकर पीसकर काढ़ा बना लें, फिर सुबह-शाम इस काढे़ को पिलाने से प्रमेह में लाभ मिलता है।

17.वात रक्त (खूनी वात):- हल्दी, आंवला और नागरमोथा का काढ़ा शहद के साथ सेवन करने से खूनी वात में लाभ पहुंचता है।
 
18. रक्तपित्त (खूनी पित्त):- सिंघाड़ा, धान का लावा, खजूर, कमल, केसर, और नागरमोथा आदि को बराबर भाग में लेकर पीस लें, फिर इसे 3 ग्राम लेकर शहद के साथ प्रतिदिन 3-4 बार प्रयोग करना लाभदायक होता हैं।

19. ज्वर (बुखार):- नागरमोथा और गिलोय का काढ़ा बनाकर पीने से बुखार कम होता जाता है। नागरमोथा और पित्तपापड़े का काढ़ा 20-40 ग्राम की मात्रा में पीने से शीत ज्वर कम होता है और भोजन को पचाने की शक्ति मिलती है। नागरमोथा 10 ग्राम, सौंठ 10 ग्राम और चिरायता 10 ग्राम को मिलाकर काढ़ा बना लें। इस काढे़ का सेवन करने से कफ, वात, आम और बुखार आदि बीमारियां दूर हो जाती हैं। नागरमोथा, पित्तपापड़ा, खस, श्वेत चंदन, सुगन्धवाला और सोंठ का काढ़ा बना लें। इस काढ़े के सेवन से बुखार की जलन और प्यास को शान्त होती है। 

नागरमोथा (मोथा) के फल का काढ़ा बनाकर शहद मिलाकर सुबह-शाम पीने से बुखार, दस्त और पित्त के बुखार में आराम मिलता है। इसके अतिरिक्त मोथा में स्वेदजनक (पसीना लाने वाला), मूत्रजनक (पेशाब लाने वाला) और उत्तेजक होता है।

20. दर्द:- नागरमोथा, मुलेठी, कैथ की पत्ती और लाल चंदन को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें, इस बने हुए लेप को दर्द वाते अंग (भाग) पर लगाने से पीड़ा शान्त होती जाती है।

21. जोंक:- नागरमोथा के फल को मुंह में रखने से कंठ (गले) में चिपकी जोंक तुरन्त बाहर निकल आती है।

22. घाव:-नागरमोथा की जड़ को पीसकर चूर्ण बना लें, फिर इसे गाय के घी में मिलाकर घाव (जख्म) पर लगाने से घाव जल्दी ठीक हो जाता है। मोथा या नागर मोथा के ताजे फल को घिसकर गाय के घी में मिलाकर घाव पर लगाने से फायदा होता है।

23. स्वेदजनन (पसीना को लाना):- नागरमोथा की जड़ और फल का काढ़ा बनाकर सेवन करने से पसीना और पेशाब खुलकर आता है और मुंह से लार का गिरना रुक जाता है।

24. कुष्ठ (कोढ़):- पीपल, कालीमिर्च, हरड़, बहेड़ा, आमला, शुंठी, बायविडंग, नागरमोथा, चंदन, चित्रक, दारूहल्दी, सोनामक्खी, पीपलामूल और देवदारू को 50-50 ग्राम की मात्रा में लेकर बारीक पीसकर मिश्रण बना  लें, फिर मण्डूर को 400 मिलीग्राम गाय के दूध में अच्छी तरह पकायें, जब मण्डूर 50 ग्राम शेष रह जाये तो इसे मिश्रण में मिलाकर गूलर के फल के समान छोटी-छोटी गोलियां बना लें। इन गोलियों के सेवन से डकारे आना बन्द हो जाती हैं। इसके साथ ही कुष्ठ, अजीर्ण (भूख का कम होना), शोथ (सूजन), कफ, बवासीर, पीलिया, मेद (मोटापा), प्लीहा (तिल्ली) आदि रोगों में इसकी गोलियों का सेवन करने से लाभ मिलता है।

25. मूत्रवर्द्धक:- नागरमोथा के चूर्ण को मट्ठे के साथ सेवन करने से मूत्र में वृद्धि होती है।

26.अण्डकोष की खुजली:- नागरमोथा को पीसकर अण्डकोषों पर लेप करने से अण्डकोषों की खुजली में लाभ होता है।

27. दमा, खांसी:- नागरमोथा, सोंठ और बड़ी हरड़ के चूर्ण में गुड़ मिलाकर खाने से दमा और खांसी नष्ट हो जाती है। सोंठ, हरड़ और नागरमोथा को पीसकर गुड़ में मिलाकर 2-2 ग्राम की मात्रा में गोलियां बनाकर रख लें। इन्हें चूसने से सभी प्रकार की खांसी और दमा नष्ट हो जाती है।

28. पुन: पौनिक ज्वर:- नागरमोथा, पीपल, कुटकी, अमलतास का गूदा और छोटी हरड़ को एक साथ पीसकर काढ़ा बना लें। इसे काढे़ के सेवन से पुन: पौनिक बुखार से छुटकारा मिलता है।

29. वात-पित्त का ज्वर:- नागरमोथा, हरड़, बहेड़ा, आंवला, कुटकी, महुए के बीज और फालसे की छाल को मिलाकर काढ़ा बनाकर पिलाने से कफ का बुखार को दूर हो जाता है।

30. शीतादि रोग (दांतों में ठण्डा लगना):- नागरमोथा, फूलप्रियंगु तथा त्रिफला को पानी के साथ पीसकर लेप बना लें। इसका लेप प्रतिदिन दांतों पर करने से शीतादि रोग नष्ट होते हैं।

31. कनीनिका शोथ (आंखों की पुतली की सूजन और जलन): मोथा या नागर मोथा के कन्द (फल) को साफ करके घी में भूनकर पीस लें। इसे आंखों में लगाने से 3-4 दिनों में ही पूरा लाभ हो जाता है।

32. जीभ और त्वचा की सुन्नता (अचेतन) :- नागरमोथा 3-6 ग्राम पीसकर दूध में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से रोग में लाभ होता है।

33. योनि की जलन और खुजली:- नागरमोथा के फल को पीसकर कपड़े से निचोड़कर रस एकत्र कर लें। इस रस को लगाने से योनि की खुजली और जलन में बहुत लाभ मिलता है।

34. हिचकी का रोग: 1 ग्राम नागरमोथे का चूर्ण शहद के साथ सेवन करने से हिचकी में आराम मिलता है।

35. मूत्र के साथ खून आना: नागरमोथा 3 से 6 ग्राम को दूध में पीस घोलकर, सुबह-शाम पीने से पेशाब साफ आने लगता है।

36.थूंक अधिक आना:- नागरमोथा के फल का काढ़ा बनाकर 20-40 ग्राम प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से मुंह से थूक आना तथा मुंह के छाले अपने आप कम हो जाते हैं।

37. संग्रहणी (पेचिश):- नागरमोथा, अतीस, बेलगिरी तथा इन्द्रजौ इन सभी को बारीक पीसकर चूर्ण बनाकर रख लें। फिर इस चूर्ण को शहद में मिलाकर चाटने से संग्रहणी अतिसार का रोग दूर हो जाता है। नागरमोथा, बेलगिरी, इन्द्रयव, सुगंध तथा मोचरस इन सभी को बराबर मात्रा में पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को बकरी के दूध में डालकर पकाएं। इसके बाद इसमें से 1 चम्म्च लेकर प्रतिदिन सेवन करने से संग्रहणी अतिसार का रोग दूर हो जायेगा। नागरमोथा, अरलू, सोंठ, धाय के फूल, पठानी लोध्र, सुगन्धवाला, बेलगिरी, मोचरस, पाठा, इन्द्रयव, कुड़े की छाल, आम की गुठली, अतीस और लजालू को कूट-छानकर चूर्ण बना लें। 

इस चूर्ण को शहद के साथ या चावलों के धोवन के साथ सेवन करने से संग्रहणी अतिसार में लाभ मिलता है। नागरमोथा, इन्द्रयव, बेलगिरी, पठानी लोध, मोचरस और धाय के फूल आदि सभी एक समान भाग में लेकर कूट-छानकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को गुड़युक्त मट्ठा (लस्सी) के साथ सेवन करने से संग्रहणी अतिसार का रोग दूर हो जाता है। 3 से 6 ग्राम नागरमोथा को अदरक के रस के साथ पीसकर सुबह शाम सेवन करने से संग्रहणी रोग नष्ट हो जाता है।

38. खूनी दस्त: लगभग आधा ग्राम से लगभग 1 ग्राम नागकेसर (पीला नागकेसर) 1 ग्राम मिश्री एवं मक्खन के साथ सुबह-शाम सेवन करने से रक्तातिसार के रोगी का रोग दूर हो जाता है।

39. बन्द मासिक-धर्म (नष्टार्तव):- माहवारी यदि किसी गर्भाशय के दोष के कारण रुकी हो तो मोथा या नागरमोथा का कन्द लगभग 3-6 ग्राम प्रतिदिन 2-3 बार पिलाने से माहवारी शुरू हो जाती है। नागरमोथा के ताजे फल का ही उपयोग करना चाहिए।

40. प्रदर रोग: नागरमोथा की जड़, त्रिफला (हरड़, बहेड़ा आंवला,) लोध्र और महुआ के फूलों को बराबर लेकर कूट-पीस लें। इसमें से 5 ग्राम चूर्ण रोजाना शहद के साथ सेवन करने से प्रदर में लाभ होता है।

41. प्रसवोत्तर रक्तस्राव (बच्चे के जन्म के बाद योनि से खून आना): नागरमोथा 6 ग्राम दूध में पीसकर सुबह-शाम खाने से रक्तस्राव बन्द हो जाता है।

42. जलोदर: नागरमोथा और मुर्दासंग का काढ़ा बनाकर पीने से जलोदर ठीक हो जाता है।

43. स्तनों के आकार में वृद्धि: सफेद मोथा के फूल को काली रंग की गाय के दूध में पीसकर स्तनों पर लेप करने से स्तनों के साइज (आकार) में वृद्वि होती है।

44. गठिया (घुटने या जोड़ों का दर्द): 3 ग्राम गोखरू का चूर्ण 3 ग्राम लें। इससे रोगी के घुटने का दर्द दूर हो जाता है।

45. हैजा: नागरमोथा 10 ग्राम, हींग 6 ग्राम, कपूर 6 ग्राम तथा पीपल 6 ग्राम इन सबको पानी में पीसकर छोटी-छोटी आधा-आधा ग्राम की गोलियां बनाकर रख लें। हैजे की प्रांरभिक अवस्था में 1-1 घंटे के अन्तर से 1-1 गोली खिलाने से निश्चित रूप से लाभ होता है।

46. बालातिसार और रक्तातिसार: 3 से 6 ग्राम इन्द्रयव को नागरमोथा के साथ काढ़ा बना लें। इस काढ़े को शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से बच्चों का रक्तातिसार (खूनी दस्त) दूर हो जाता है।

47. नाड़ी का दर्द: अतीस, नागरमोथा, भारंगी, सौंठ, पीपल और बहेड़ा  25-25 ग्राम लेकर बारीक पीसकर चूर्ण बनाकर रख लें। फिर यह चूर्ण 5-5 ग्राम रोजाना सुबह-शाम पानी के साथ लेने से नाड़ी का रोग ठीक होता है। 

48. बच्चों के रोग:-नागरमोथा, पेठे के बीज, देवदारू और इन्द्रजौ को पीसकर पानी में मिलाकर पीने से बच्चों की सूजन दूर हो जाती है। 5-5 ग्राम नागरमोथा, अतीस, काकड़ासिंगी को पीसकर लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग शहद में मिलाकर बच्चे को दिन में 3 बार देना चाहिए। नागरमोथा, धाय के फूल, लोध्र, बेलगिरी, मंजीठ और नेत्रवाला को मिलाकर काढ़ा बनाकर पिलाने से अथवा इन सबको पीसकर इसके चूर्ण को शहद में मिलाकर चटनी की तरह चटाने से बच्चों का अतिसार (दस्तों का रोग) पूरी तरह से दूर हो जाता है। यह नुस्खा बच्चों के दस्त को ठीक करने काफी मददगार होता है। नागरमोथा, काकड़सिंगी और अतीस को बारीक पीसकर रख लें।, फिर इसे शहद में मिलाकर चटाने से दूध पीने वाले बच्चों के बुखार, खांसी और उल्टी में जरूर ही आराम हो जाता है।~~~~`````~~~~~`````~~~~`````~~~~~


जय श्री धनवंतरी जी

जय श्री आयुर्वेद
यह आयुर्वेद का ग्रुप बहुत सारे अपरिचित लोगों पर बनाया गया है,,, ग्रुप का उद्देश्य केवल आयुर्वेद को आम जन मानस तक पंहुचाना है,, जीवनोप्योगी घरेलू और आयुर्वेद के नुक्शो के माध्यम से,,आपको स्वस्थ रखने की कोशिश है,,यह क्म्यूनिटी ग्रुप है,,प्रत्येक सदस्य को लग सकता है,, कि इस ग्रुप में केवल दो ही लोग है,,लेकिन ऐसा नहीं यह ग्रुप 20 अन्य आयुर्वेदिक ग्रुप का एक ग्रुप बना है,,कृपया लेफ्ट होने से पहले एक हफ्ता ,,ग्रुप वाच करे ,,अगर फिर भी आपको लगे कि ग्रुप निर्थक है,,तो आप लेफ्ट हो सकते,,है,,
कुछ लोग जो मुझसे अपरिचित है,,अगर वे समझते है,, कि हमे बिना हमारी अनुमति के एड कर लिया,,तो हम उनसे माफी मांगते है,,वे चाहे तो लेफ्ट हो सकते है,,ग्रुप के लगभग 4300 सदस्य है



[: *रसौली,फाइब्रॉइड,गांठ,का आयुर्वेद में बेहतरीन* *इलाज,,हो सकता है 30,40 दिन में कोई रिजल्ट ही न आये परन्तु धर्यपूर्वक लेते रहे।*।
रिजल्ट देखिए,,शेयर कीजिए,,आपका एक शेयर किसी का अंग भंग होने से बचा सकता है,,ऑपरेशन का दर्द वही जानता है,,जो झेल चुका है,,इसको
कांचनार गुगुल स्पेशल 160 टैब
वर्धिवधिका बटी 160 टैब
गंडमाला कण्डन रस 80 टैब
पुनरवादी गुगल 160टैब

रसमणिक्य 15 ग्राम
लौह भस्म 3 ग्राम
शिला सिंदूर 10 ग्राम
ताल सिंदूर 10 ग्राम
मल्ल सिंदूर 10ग्राम
प्रवाल पिष्टी 5 ग्राम
हीरा भस्म 300एमजी
स्वर्ण भस्म 1 ग्राम
अभाव में स्वर्ण माक्षिक भस्म 5 ग्राम
चुना बुझा सुखा5 ग्राम
*बैधनाथ* की ले  या किसी भी विश्वसनीय की ,सभी दवाई।
सबको खरलकर बिल्कुल ऐसी करले की छूने से हाथ की रेखाओं में घुस जाए 2 घण्टे लगेंगे।।
अब ईस्की 160 पूड़ियां बनाले ।।
सुबह शाम 1,1 पुड़िया कांचनार की छाल ओर गोरखमुंडी के काढ़े में ,,15ml सिस्ट वेदा ,एक चम्मच शहद डालकर खाली पेट ले।।
काढ़े के लिए 300 ग्राम कांचनार की छाल व 150 ग्राम गोरखमुंडी को 1 जगह कूटकर रखलें।
रात को मिट्टी की हांडी में 2 चम्मच पावडर 500ml पानी मे भिगो दें सुबह स्टील के बर्तन में डालकर पकाए जब पकते पकते पानी आधा रह जाये तो छानकर शहद मिलाकर गर्म गर्म ही पुड़िया के साथ प्रयोग करे।। मेरा विश्वास है कि *ये** *प्रयोग*  शरीर के किसी भी हिस्से में किसी भी प्रकार की कोई भी गांठ हो,रसोली ,,फब्रॉइड हो चाहे माताओ बहनों की बच्चेदानी में हो या स्तनों में हो प्रभु कृपा से खत्म कर देगा ,, अगर बनाने में परेशानी हो रही है तो हमसे मंगवा सकते हैं, समय जरूर ज्यादा लग सकता है,, लेकिन खत्म जरूर हो जाएगी।🌷
 कितने भी ब्लॉकेज क्यों न हो ,,सब डिजॉल्व हो सकते है,,

आयुर्वेद में सब संभव है
,अगर हार्ट डिजीज से बचना है तो
सबसे पहले घर से रिफाइंड,,चीनी,,मैदा,डालडा,,एल्युमिनियम के बर्तन  बाहर कीजिए
हार्ट पेसेन्ट को रोज सुबह खाली पेट ,,,आयु कलश नाम की दवाई की 15 ml की खुराक एक गिलास गुनगुने पानी में दीजिए

नाश्ते में अंकुरित अनाज ,,चना,,गेंहू,,मूंग दीजिए
नाश्ते के बाद दो दो गोली वृहत वात चिंतामणि रस,,प्रभाकर बटी,,हृदय अमृत बटी पीसकर शहद,अदरक रस एक एक चम्मच मिलाकर दीजिए,
दोपहर के भोजन में मूंग दाल बहुत पतली दो मिक्स आटे की चपाती दीजिए
भोजन में सलाद का विशेष ध्यान रखें,,
नमक हल्का और लाहौरी ही प्रयोग करे,,शाम को फिर सुबह की तरह ही दवा दीजिए,,रात का भोजन जल्दी और हल्का करे,,थोड़ी देर के लिए धूप जरूर ले
जितनी दूरी बिना थके पैदल चल सके,,जरूर चले
किसी भी प्रकार की रोग के बारे में जानकारी के लिए,,रोगी की पूरी डिटेल के साथ 9719546268 पर वाट्स एप कर सकते है,,कृपया फोन कॉल न करे,,समय मिलने पर जवाब दिया जायेगा

ॐ सुर्यदेवाय् नम् 🌺🙏*
*"गजाननं भूतगणादि सेवितं"*
*"कपित्थ जम्बुफल चारू भक्षणं।"*
 *"उमासुतं शोकविनाश कारकं"*
*"नमामि विघ्नेश्वर पादपंकजं।।"*
 *ॐ नम: सूर्याय शान्ताय सर्व रोग विनाशने।*
*आयु: आरोग्यं ऐश्वर्य देहि देव जगत्पते।।*
 *आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीदमम् भास्कर।*
*दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते॥*
 *" ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात् "*
 *नमामीशमीशान निर्वाण रूपं, विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदः स्वरूपम्‌ ।*
*निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं, चिदाकाश माकाशवासं भजेऽहम्‌ ॥*
*आपको आपके सपरिवार को विनायक चतुर्थी, अगंदान दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।*
 *👉 दर्द👇*
*पन्नों की तरह रहे है पलटते,*
*देखते रहे जिन्दगी बिखरते।*
*कभी बयां ना कर सके हम,*
*जिंदगी दुःख दर्द से तड़पते।।*
*लगे कुरेदने, घाव खुद अपने,*
*दर्द भरे हृदय से तपिश तपने।*
*गहरी नींद में थे हम सोये हुए,*
*जगा के तोड़ दिए सारे सपने।।*
*दर्द देख उनके आंसू झरते थे,*
*कभी पास जो, बैठा करते थे।*
*"हँसमुख" से हां में हां भरते थे,*
*अपने होने का वो दम भरते थे।।*
*किस किस को, तुम दोष दोगे,*
*अपने इर्द गिर्द कितने ही होगे।*
*सारा जगत स्वार्थ से भरती है,*
*जिसे देखो वो अपने ही होगे।।*
 *🙏🌺राम राम,राधे राधे, जय मातादी,प्रणाम्,आशिर्वाद,सुप्रभात,&Good morning,☕👄☕🌺🙏*
 डकारें🌻
(belching)

पेट में बनी गैस जब मुंह से बाहर आती है तो वह डकार कहलाती है। पेट में अधिक अम्लता (एसिडिटीज) के बनने से गैस होने लगती है, जिसके कारण मुंह में हल्का-सा खट्टा या तीखा पानी आता है।

उपचार..

1. कत्था 

कत्था लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग से लगभग आधा ग्राम तक खुराक के रूप में लेने से डकारे आना बंद हो जाती हैं।

2. अजवायन 

 अजवायन, सेंधानमक, संचरनमक, यवक्षार, हींग और सूखे आंवले का चूर्ण बराबर लेकर अच्छी तरह पीसकर चूर्ण बना लें। 1 ग्राम चूर्ण सुबह-शाम शहद के साथ चाटने से खट्टी डकारे आना बंद हो जाती हैं।

3. सोंठ 

 लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग से लगभग 1 ग्राम सोंठ का चूर्ण को देशी घी में भूनी हींग और कालानमक के साथ सुबह-शाम सेवन करने से डकार नहीं आती हैं।

4. बाजरे 

बाजरे के दाने के बराबर हींग लेकर गुड़ या केले के साथ खाने से डकार में आराम मिलता है।

5. जीरा 

1 चम्मच पिसा हुआ जीरा सेंककर, 1 चम्मच शहद में मिलाकर खाना खाने के बाद चाटने से डकारों में लाभ होता है।

6. ढाक 

ढाक (पलास) की गोंद लगभग आधा ग्राम से लगभग 1 ग्राम सुबह-शाम  सेवन करने से लाभ होता है।

7. कुलिंजन 

 कुलिंजन लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग से लगभग आधा ग्राम तक के टुकड़ों को मुंह में रखने या चूसने से पाचन से संबधी बीमारियां दूर होती हैं और मुंह में सुगन्ध आती है।

8. हींग 

 देशी घी में भुनी हुई हींग, कालानमक और अजवायन के साथ सुबह-शाम सेवन करने से डकार, गैस और भोजन के न पचने के रोगों में लाभ मिलता है।

9. दालचीनी 

दालचीनी का तेल 1 से 3 बूंद को बतासे या चीनी पर डालकर सुबह-शाम सेवन करने से डकार और पेट में गैस बनने में लाभ पहुंचता है।

10. मरोड़फली 

मरोड़फली के फल का चूर्ण लगभग 2 से 3 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से डकार, अफारा (पेट में गैस) और पेट के दर्द कम होकर लाभ देता है।

11. नारियल 

कड़वी नारियल की गिरी को खाना खाने के बाद खाने से खट्टी डकारें आना बंद हो जाती हैं।

12. ताड़ 

ताड़ के कच्चे गूदे का पानी पीने से वमन (उल्टी) और उबकाई आना बंद हो जाती है।

13. पिस्ता 

 पिस्ता का सेवन करने से जी का मिचलाना और उल्टी में लाभ होता है।

14. मिश्री 

मिश्री की चासनी में बेर की मींगी (गूदा) और लौंग को मिलाकर खाने से जी के मिचलाने में लाभ होता है।

15. धनिया 

धनिया और भारंगी को पानी में पकाकर पिलाने से सूखी उल्टी आना रुक जाएगी।

16. जस्ता-भस्म 

जस्ता-भस्म लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग, मिश्री और जीरा के साथ खाने से उल्टी और जी का मिचलाना बंद हो जाता है।

17. पोदीना 

पोदीना और इमली को पीसकर उसमें सेंधानमक या शहद  मिलाकर खाने से खट्टी डकारे और उल्टी आना शांत हो जाती है।

18 धनिया 

 यह कोई रोग नहीं है परन्तु यदि कभी लगातार खट्टी डकारे आने लगती है तो रोगी को बेचैनी होने लगती है और वह शीघ्र ही घबरा जाता है। पेट में जलन होती है और जबान सूखने लगती है। बार-बार डकार आने से खुश्की दूर हो जाती है और वायु के कारण पेट में गर्मी सी महसूस होने लगती है। सीने में जलन, अकड़न और मीठा दर्द होने लगता है। ऐसी दशा में पाचक औषधि काम करती है। इसके लिए थोड़ा सा पुदीना और थोड़ा सा सूखा धनियां, बड़ी इलायची, अजवायन और कालानमक इन सबको पीसकर या तो टिकिया बना लेते हैं या चूर्ण बना लेते हैं फिर इसे 2 घंटे बाद गर्म पानी से लेना चाहिए। थोड़ी देर में डकारे बंद हो जाएंगी।

19. मेथी 

मेथी के हरे पत्ते उबालकर, दही में रायता बनाकर सुबह और दोपहर में खाने से खट्टी डकारे, अपच, गैस और आंव में लाभ होता है।

20 नींबू 

बिजौरे नींबू की जड़, अनार की जड़ और केशर पानी में घोटकर रोगी को पिलाने से डकार और जुलाब बंद हो जाते हैं।

21.नौसादर 

नौसादर, कालीमिर्च, 5 ग्राम इलायची दाना, 10 ग्राम सतपोदीना पीस लें, इसे आधा ग्राम लेकर प्रतिदिन 3 बार खुराक के रूप में पानी के साथ लेने पर खट्टी डकारे, बदहजमी, प्यास का अधिक लगना, पेट में दर्द, जी मिचलाना तथा छाती में जलन आदि रोगों से छुटकारा मिलता है।

22. नागरमोथा 

पीपल, कालीमिर्च, हरड़, बहेड़ा, आमला, शुंठी, बायविडंग, नागरमोथा, चंदन, चित्रक, दारूहल्दी, सोनामक्खी, पीपलामूल और देवदारू को 50-50 ग्राम लेकर पीसकर बारीक चूर्ण बना लें, फिर मण्डूर को 400 मिलीलीटर गाय के मूत्र में अच्छी तरह पका लें। जब मण्डूर 50 ग्राम शुद्ध रह जाये तो इसमें उपरोक्त चूर्ण को मिलाकर गूलर के फल के समान गोलियां बना लें। इन गोलियों को रोगी को देने से डकारें आना बंद  हो जाती हैं ।

: चक्कर आने पर घरेलू उपचार

 1 .अचानक सिर का घूमना,

2. आंखों के सामने अचानक अंधेरा छा जाना,

3. कुछ नजर नहीं आना,

4. सारी धरती घूमती सी नजर आना

इन सबको ही चक्‍कर आना कहते हैं।

चक्कर आने के कई कारण हो सकते हैं।

 हम आपको बता रहे हैं चक्कर आने पर किये जाने वाले घरेलू उपचारों के बारे में।

चक्कर आने पर घरेलू उपचार के बारे में हम जरूर आपको बताएगें लेंकिन सब से पहले हम यह जान लेते है कि चक्कर आना किसे कहते है। 

कभी-कभी किसी को चक्कर आते हैं, थोड़ी देर तक बैठे रहने के बाद जैसे ही उठते हैं, आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है।

ऐसा लगता होगा कि चारो ओर की चीजें तेजी से घूम रही हैं।

यह तब होता है, जब मस्तिष्क में रक्त की पूर्ति कम हो जाती है।

रक्तचाप में अचानक कमी से भी यह स्थिति पैदा हो सकती है।

घर में रखी चीजों द्धारा हम इस का उपचार कर सकती है।

जानिये इन उपायों के बारें में

चक्कर आने पर घरेलू उपचार

पकने के बाद सूखी हुई लौकी को डण्ठल की तरफ से काट दें, ताकि अन्दर का खोखलापन दिखाई दे।
अगर सूखा गूदा हो तो उसे निकाल दें।

अब इसमें ऊपर तक पानी भर कर 12 घण्टे तक रखें फिर हिलाकर पानी निकाल कर साफ कपड़े छान लें।
इस पानी को ऐसे बर्तन में भरें, जिसमें आप अपनी नाक डुबो सकें।
नाक डुबोकर जोर से सांस खींचें, ताकि पानी नाक से अन्दर चढ़ जाए।

पानी खींचने के बाद नाक नीची करके आराम करें।
इस उपाय से चक्करआने की समस्या सदा के लिए खत्म हो जाती है।

चक्कर आने पर तुलसी के रस में चीनी मिलाकर सेवन करने से या तुलसी के पत्तों में शहद मिलाकर चाटने से चक्कर आना बंद हो जाता है।

चक्कर आने पर धनिया पाउडर 

10 ग्राम तथा आंवले का पाउडर 

10 ग्राम लेकर एक गिलास पानी में भिगो कर रख दें। 

सुबह अच्छी तरह मिलाकर पी लें।
इससे चक्कर आने बंद हो जाते है।

सिर चकराने पर आधा गिलास पानी में दो लौंग डालकर उसे उबाल लें और फिर उस पानी को पी लें।

इस पानी को पीने से लाभ मिलता है।

10 ग्राम आंवला,

3 ग्राम काली मिर्च और

10 ग्राम बताशे को पीस लें।

15 दिनों तक रोजाना इसका सेवन करें चक्कर आना बंद हो जाएगा।

जिन लोगों को चक्कर आते हैं उन्हें दोपहर के भोजन के 2 घंटे पहले और शाम के नाश्ते में फलों का जूस पीना चाहिए।

रोजाना जूस पीने से चक्कर आने बंद हो जाएंगे।

लेकिन ध्यान रखें कि जूस में किसी प्रकार का मीठा या मसाला नहीं डालें सदा जूस पियें।

जूस की जगह चाहें तो ताजे फल भी खा सकते हैं।

नारियल का पानी रोज पीने से भी चक्कर आने बंद हो जाते है।

चाय व कॉफ़ी कम पीनी चाहिए।
अधिक चाय व कॉफ़ी पीने से भी चक्कर आते हैं।

20 ग्राम मुनक्का घी में सेंककर सेंधा नमक डालकर खाने से चक्कर आने बंद हो जाते है।

खरबूजे के बीजों को पीसकर घी में भुन लें। 
अब इसकी थोड़ी थोड़ी मात्रा सुबह शाम लें, इससे चक्कर आने की समस्या में बहुत लाभ होता है।

किसी भी समस्या से संबंधित जानकारी के लिए अपनी समस्या अपने नाम के साथ भेजे। समय मिलते ही आपकी समस्या का समाधान किया जाएगा।

*लिवर की सफाई के लिए*

20 ग्राम काली किशमिस और 1 ग्लास पानी लेकर मिक्सर मे ज्युस बनाकर सुबह खाली पेट 15 दिनों तक सेवन करने से लिवर की सफाई होती है |

*किडनी की सफाई के लिए*
हरा धनिया 40 ग्राम +1 ग्लास पानी मिक्स करके मिक्सर मे पिस करके सुबह खाली पेट लिजिए यह 10 दिनों तक करने से किडनी की सफ़ाई होती है। और हमारी किडनी स्वस्थ रहती है।

*हार्ट की सफाई के लिए*
60 ग्राम अलसी को मिक्सर मे पीस लिजिए फिर सुबह शाम खालीपेट 10-10 ग्राम की मात्रा मे सेवन से हमारा हार्ट (हृदय) स्वस्थ रहता है यह उपाय 1 महिने तक करनां है।

*दिमाग की सफाई के लिए*
बादाम 8 और अखरोट 2 नग लेकर रात को 1 ग्लास पानी मे भिगोकर सुबह खाली पेट सेवन करें। यह पूरे 2 महिनों तक करने से दिमाग को पूरी तरह से जहरमुक्त किया जा सकता है।

*फेंफडो की सफाई के लिए*
2 चम्मच शहद + 1 चम्मच नींबू का रस + 1 चम्मच अदरक का रस सभी चीजो को मिक्स करके सुबह खाली पेट सेवन करने से बिड़ी, सिगरेट, गुटखा या तंबाकु से जो नुकसान हमारे फेंफडो को हुआ है उन्हे सुधार होगा और हमारे फेंफडे पुरी तरह से स्वस्थ हो जाते है। यह प्रयोग करीब 20 दिनों तक करनां है।

सरसों के तेल में कई औषधिय गुण होते हैं। सरसों का तेल त्‍वचा में जाकर शरीर को कई बीमारियों से बचाने में सहायक होता है। खांसी में राहत पाने के लिए गर्म सरसों के तेल से छाती की मालिश करने से आराम मिलता है। सरसों के तेल में मौजूद सेलेनियम और मैग्नेशियम में एंटी-इनफ्लैमटॉरी तत्व होते हैं। इस तेल से मसाज करने पर ये तत्‍व शरीर में गर्माहट पैदा करते हैं।: *IBS/ Irritable Bowel Syndrome/ग्रहणी/संग्रहणी*

लक्षण-इसके लक्षण अलग अलग व्यक्तियों में अलग अलग दिखते हैं लेकिन कुछ लक्षण जोकि सभी  में एक जैसे ही होते हैं वो निम्न हैं-
*1) पेट दर्द* कुछ व्यक्तियों को पेट दर्द होता है और यह दर्द कभी चुभने जैसा होता है और कभी मरोड़ जैसा।
*2)पेट फूलना* थोड़ा भोजन करने पर ही या अक्सर भोजन बिना किये भी लगता है कि पेट भरा हुआ है और भूख नहीं लगती।
*3)कब्ज* कुछ व्यक्तियों को बहुत दिनों से कब्ज की शिकायत रहती है और यदि ध्यान से देखें तो उनका मल पानी मे डूब जाता है।
*4)पतली दस्त* किन्हीं किन्हीं को अक्सर पतली दस्त होने लगती है और इससे उनका वजन भी कम होने लगता है।
*5)अत्यधिक डकार* ऐसे व्यक्तियों को अक्सर बार बार डकार आती रहती है और किन्हीं लोगों को तो लगता है कि गैस उनके शरीर मे फँसी हुई है और वो जहाँ भी दबाते है तो गैस डकार के रूप में बाहर निकलती है।
*6)असामान्य मल* मल का स्वरूप बिल्कुल असामान्य होता है, किन्हीं को कभी पतला कभी रूखा मल निकलता है किन्ही को आँव के साथ मल आता है,,कभी कभी केवल आँव /म्यूकस ही आता है और मल त्याग के समय पेट दर्द भी होता है।
*7)तनाव* जिनको उपरोक्त समस्याएं होती हैं उन्हें तनाव अक्सर होता है,वजन कम होने लगता है और व्यक्ति चिढचिढा होने लगता है।
*8)अन्य* किन्हीं व्यक्तियों को कमजोरी के कारण चक्कर आता है उन्हें लगता है कि हमेशा बुखार जैसा बना हुआ है और कुछ भी करने में मन नहीं लगता।

*उपचार-* आयुर्वेद के अनुसार यह एक चिरकालीक व्याधि है,, इस व्याधि को पूरी तरह लक्षण दिखाने में बहुत समय लगता है और इसी तरह इसके ठीक होने में भी बहुत समय  लग सकता है
इसके लिए आहार,विहार,योग आदि माध्यमों से ही स्वास्थ्य लाभ सम्भव है।

*आहार-* हल्का भोजन लें,भोजन के साथ दिन में गाय के दूध से बना मट्ठा,जीरा पावडर डालकर जरूर लें
माँसाहार, अण्डे, कटहल,भिंडी,,बैंगन,, मैदा से बने पदार्थ,तले हुए खाद्य पदार्थ,बेकरी उत्पाद ,अचार वगैरह का प्रयोग बिल्कुल ना करें।
पनीर,दही,मलाई,सूखे मेवे का प्रयोग ना करें।
भूख लगने पर ही भोजन लें अन्यथा ना ले।
भोजन के साथ या बाद में भी अगर जरूरत हो तो गुनगुना पानी ही पीयें।

*विहार-* पूरी नींद लें।
हल्के व्यायाम करें।
सुबह टहलने जाएँ।
रात में भोजन ना करें ,,शाम ढलते ही हल्का भोजन करे व भोजन के बाद 100 कदम जरुर टहलें।
*IBS,,Irritable bowel syndrome*  का बेहद असरदार उपचार IBS के रोगियों के लिए वैद्य रामकुमार ने बहुत मेहनत और बहुत सारे पेसेंट पर अनुसंधान करके तैयार किया है,, 
 स्वर्ण पर्पटी 10 ग्राम
विजय प्रपटी 10ग्राम
पन्चामृत पर्पटी 10 ग्राम 
अभ्र्क भस्म शतपुटी 5 ग्राम
शँख भस्म 5 ग्राम
बंग भस्म 5 ग्राम
नाग भस्म 5 ग्राम

 मजबूत हाथों से खूब महीन घुटाई करे ।
 अब जीरा पावडर 100 ग्राम
अजवयन 30 ग्राम,
कच्चा बेल गिरी चूर्ण 50 ग्राम 
मोचरस 50 ग्राम
धाय फूल 50 ग्राम
सोंठ 50 ग्राम
सौंफ 50 ग्राम
धनिया 50 ग्राम
कूड़ा छाल 50 ग्राम
7 बार जल से धोकर सुखाई हुई भांग पत्ती 50 ग्राम
सबको एक जगह महीन ग्राइंडर करले अब घुटाई किया हुवा उपरोक्त सामान मिलाकर फिर घुटाई करे,, 3 से 5 ग्राम सुबह शाम शहद या गाय की छांछ से दे। रोगी का दूध, गेंहू व मैदे से बने समान बन्द करवा दें। कम से कम 1 महीने के लिये। फलाहार व मूंग दाल की बराबर चावल वाली पतली खिचड़ी ही दे। पानी उबालकर रूम टेम्परेचर पर ठंडा किया हुवा पानी ही दे।
जो बनाने में असमर्थ हो हमसे मंगवा सकते है,,धैर्य के साथ प्थय पूर्वक दवा सेवन करने से आराम अवश्य होगा
 
*मुख्य चिकत्सक जन सेवा* *कल्याण चिकित्सा केंद्र*
*झबरेड़ा हरिद्वार*

 *आज का विषय है बढ़ता हुआ मोटापा,, आज प्रत्येक 10 में से एक आदमी मोटापे से परेशान है //हम लोग मोटापे को - तो घटाना चाहते हैं लेकिन ,,अपनी आदत बदल ना बिल्कुल नहीं बदलना चाहते,, मोटापा कई सारी बीमारियों को अपने साथ लेकर आता है/// जैसे ==थायराइड,, चलते हुए सांस फूलना,, लीवर का फैटी हो जाना,, ट्राइग्लिसराइड बढ़ना,, कोलेस्ट्रोल बढ़ना,, खर्राटे लेना ,,घुटनों में दर्द रहना ,,,घुटनो का घिसना,,कमर और गर्दन में दर्द रहना ,,पैरों में सूजन आना ,,मधुमेह ,,एसिडिटी,,अनिद्रा, नस पर नस चढ़ना, कब्ज,,आदि*
*क्या न करे,,एक बार में स्वाद के चक्कर में ज्यादा ना खाए,,नॉनवेज को बॉय बोले,,नमकीन,बिस्किट,ब्रेड,,फास्ट फूड,,ऑइली प्रोडक्ट,,होटल ,,शादी का चटोटा भोजन,, चाट,, पकोड़े,,पूरी ,,कचोड़ी ,, पकवान,,बंद करे*

*क्या करे,ज्यादा मात्रा में सलाद का सेवन करे,,नींबू,,मौसमी,, आन्ननास,,चुकंदर को अपने भोजन में शामिल करे,,सुपाच्य भोजन करे,,रात का भोजन जल्दी करे*
*दवाई और इलाज*
*त्रयुष्णआदि लोह 60 ग्राम*
*रत्न प्रभा बटी स्पेशल120 गोली*
*मेदोहर गुगल 120 ग्राम*
*त्रिफला गुगल 120 ग्राम*
*पुनरन्वादी गुगल 120 ग्राम*
*रोस्टेड जीरा 150 ग्राम*
*सबको मिक्सी में* *पीसकर 7/7 ग्राम*
*सुबह शाम गुनगुने पानी से लीजिए*


हमारे क्लीनिक पर सभी प्रकार की लाइलाज बीमारियो का इलाज आयुर्वेदिक दवाओ द्वारा संभव है

*ठंड में खाएं मिले जुले अनाज की रोटी, मिलेंगे ये 5 फायदे* 
 
1 सामान्य आटे को खाने से आपको सीमित मात्रा में ही पोषण मिल पाता है और मल्टीग्रेन आटा या उससे बना भोजन करने से आपके शरीर में कई तरह के पोषक तत्वों की एक साथ पूर्ति हो जाती है।

2 मल्टी ग्रेन से बने व्यंजन खाने से शरीर को अधिक फाइबर मिलता है, जो कि वजन कम करने और मोटापा घटाने में बेहद सहायक होता है। इसके प्रयोग से आप जल्दी दुबले हो सकते हैं।
3 मल्टी ग्रेन का उपयोग डायबिटीज तथा उच्च रक्तचाप रोगियों के लिए बेहद फायदेमंद होता है, इतना ही नहीं यह शरीर में वसा का जमाव भी नहीं होने देता। अत: आप अधिक समय तंदुरुस्त रहते हैं।


4 मिला जुला अनाज आटे के रूप प्रयोग करने से शरीर को भरपूर मात्रा में फाइबर मिलता है, जो पाचन तंत्र को बेहतर कार्य करने में मदद करता है और कब्ज की समस्या दूर करता है।

5 शरीर के लिए आवश्यक कई पोषक तत्वों की आपूर्ति मल्टी ग्रेन करता है, जिससे आपकी प्रतिरोधक क्षमता में इजाफा होकर बीमारियां दूर रहती हैं।
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 शरीर को ताकतवर बनाये ::
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जिस तरह मोटापा एक परेशानी है। ठीक वैसे ही अधिक दुबलापन या कमजोरी भी कई लोगों के लिए समस्या का कारण बन जाता है। ऐसे में कई बार सुडौल शरीर न होने के कारण आत्मविश्वास में कमी महसूस होने लगती है।

1- नाश्ते में सुबह आलू के दो पराठें के साथ लगभग 50 ग्राम दही का सेवन करें, यह ऊर्जा का अच्छा स्रोत है।

2- 40 ग्राम मूँगफली के दाने सेंककर, 10 ग्राम गुड़ के साथ चबा-चबाकर नाश्ते के तौर पर सेवन करें, ये ऊर्जा का पर्याप्त भण्डार है।

3- रोजाना 10-12 गिलास पानी पीना चाहिए, साथ ही नाश्ते के रूप में ऐसे पदार्थ लें, जिसमें प्रत्येक से 200 कैलोरी प्राप्त हो।

4- नाश्ते में अंकुरित अनाज लें। चोकर से बना केक खाएं क्योंकि चोकर मेग्नेशियम व अन्य पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं।

5- सोते समय एक गिलास मीठे गुनगुने गर्म दूध में एक चम्मच शुद्ध घी डालकर पीना चाहिए।

6- 2 चम्मच प्याज का रस, 1 चम्मच शहद, चौथाई चम्मच घी मिलाकर सेवन करने से ताकत बढ़ती है।

7- सफेद मूसली या धोली मूसली का चूर्ण बनाकर। एक चम्मच चूर्ण और एक चम्मच पिसी मिश्री मिलाकर। सुबह व रात को सोने से पहले गुनगुने दूध के साथ एक चम्मच मात्रा में लेने से कमजोरी दूर हो जाती है।

8-दूध की मलाई तथा पिसी मिश्री जरूरत के अनुसार मिलाकर खाना चाहिए, यह अत्यंत शक्तिवर्धक है।

9- छाछ से निकाला गया ताजा माखन तथा मिश्री मिलाकर खाना चाहिए।

10- बादाम को पत्थर पर घिसकर दूध में मिलाकर पीना चाहिए, इससे बल मिलता है।

: घरेलू उपचार 
मसूढे़ के रोग :---------
      मसूड़ों के रोग क्या है? मसूड़ों की बीमारी (पीरियोडोन्टल डिजीज) एक बहुत ही सामान्य स्थिति है । जहां मसूड़ों में सूजन, गले या संक्रमित हो जाते हैं। मसूड़ों की रोग पट्टिका (बैक्टीरिया की एक चिपचिपा फिल्म जो दांतों और मसूड़ों पर बनती है) के कारण होती है। पट्टिका एसिड और विषाक्त पदार्थों बनाता है।
* एक चम्मच अमचूर का चूर्ण, एक गिलास पानी में , तीन घंटे भिगोकर, इस पानी से, कुल्ले करने से, मसूढो़ की सूजन, दर्द सही हो जाता है ।
* जामुन  के सिरके की चौथाई चम्मच पानी में डालकर, कुल्ला करने से, मसूढो़ की सूजन दूर हो जाती है और हिलते हुए दाँत भी मजबूत हो जाती है ।
* कच्ची शलगम को , चबा-चबाकर सेवन करने से, मसूढे़ और दाँतों के रोग सही हो  जाते है और दाँत स्वच्छ रहते है ।
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*ठंड में कैसे करें अदरक का सेवन जानिए 7 तरीके* 
 
 ठंड में अदरक का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद होता है। यह एक ओर जहां सर्दी, जुकाम और खांसी से बचाती है वहीं यह शरीर में गर्माहट पैदाकरके ठंड से भी हमें बचाती है। हालांकि यदि आपको अदरक से नुकसान होता है तो इसका सेवन न करें। आओ जानते हैं कि सर्दी के मौसम में किन 7 तरीकों से अदरक का सेवन किया जा सकता है।

1. चाय के साथ- अदरक को कद्दूकस करके चाय में डालकर उबालकर इसका उपयोग करें।

2. पानी के साथ- एक गिलास पानी में अदरक के कुछ टूकड़ें डालकर पानी को उबालें और गुनगुना होने पर इसका सेवन करें।

3. सब्जी के साथ- अदरक को कद्दूकस करके इसे सब्जियों के साथ पकाकर खाएं।

4. शहद के साथ- अदरक को कूटकर एक चम्मर रस निकालें और आधा चम्मच शहद में मिलाकर पीएं।
5. चटनी के साथ- अदरक को पीसकर उसका पेस्ट बनाकर उसे चटनी के साथ खाएं।

6. रायते के साथ- कद्दूकस करके रायता में भी अदरक का उपयोग कर सकते हैं।

7. गुड़ के साथ- अदरक के कुछ टूकड़े गुड़ में मिलाकर भी खास सकते हैं।


*सेहत का खजाना: आंवला, जानिए अचूक फायदे* 
 
1 रक्त में हीमोग्लोबिन की कमी होने पर, प्रतिदिन आंवले के रस का सेवन करना काफी लाभप्रद होता है। यह शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में सहायक होता है, और खून की कमी नहीं होने देता।

2 आंवला एसिडिटी की समस्या होने पर बेहद फायदेमंद होता है। आंवला का पाउडर, चीनी के साथ मिलाकर खाने या पानी में डालकर पीने से एसिडिटी से राहत मिलती है। इसके अलावा आंवले का जूस पीने से पेट की सारी समस्याओं से निजात मि‍लती है।
3 पथरी की समस्या में भी आंवला कारगर उपाय साबित होता है। पथरी होने पर 40 दिन तक आंवले को सुखाकर उसका पाउडर बना लें, और उस पाउडर को प्रतिदिन मूली के रस में मिलाकर खाएं। इस प्रयोग से कुछ ही दिनों में पथरी गल जाएगी।

4 आंवला डायबिटीज के मरीजों के लिए बहुत काम की चीज है। पीड़ि‍त व्यक्ति अगर आंवले के रस का प्रतिदिन शहद के साथ सेवन करे तो बीमारी से राहत मिलती है।
5 बालों को काला, घना और चमकदार बनाने के लिए आंवले का प्रयोग होता है, इसके पाउडर से बाल धोने या फिर इसका सेवन करने से बालों की समस्याओं से निजात मिलती है।

6 बुखार से छुटकारा पाने के लिए आंवले के रस में छौंक लगाकर इसका सेवन करना चाहिए, इसके अलावा दांतों में दर्द और कैविटी होने पर आंवले के रस में थोड़ा सा कपूर मिला कर मसूड़ों पर लगाने से आराम मिलता है।

7 शरीर में गर्मी बढ़ जाने पर आंवल सबसे बेहतर उपाय है। आंवले के रस का सेवन या आंवले को किसी भी रूप में खाने पर यह ठंडक प्रदान करता है। हिचकी तथा उल्टी होने की पर आंवले के रस को मिश्री के साथ दिन में दो-तीन बार सेवन करने से काफी राहत मिलेगी।

*बासी मुंह पानी पीने से शरीर को मिलते हैं ये 5 जबरदस्त फायदे* 
 
पुराने समय की अपेक्षा आजकल की दिनचर्या में काफी बदलाव आ गया है, हम सुबह उठते हैं और सबसे पहले बासी मुंह जो काम करते हैं वह है फोन चलाना, पर क्या आप जानते हैं सुबह उठकर ब्रश करने के पहले अगर हम बासी मुंह एक-दो गिलास पानी पीते हैं तो वह हमारे लिए बेहद लाभकारी होता है।
आइए जानते हैं इसके 5 फायदे-

1 बासी मुंह पानी पीने से शरीर अंदर से साफ होता है जिससे अशुद्धियां निकलने के कारण त्वचा चमकदार भी बनती है और कील-मुंहासों से भी छुटकारा मिलता है।

2 बासी मुंह हमारी लार में अच्छे बैक्टेरिया और एंटी माइक्रोबियल गुण होते हैं, जब हम बासी मुंह पानी पीते हैं तो पाचन तंत्र भी मजबूत होता है।

3 बासी मुंह पानी पीने से किडनी की समस्या में राहत मिलती है। इससे किडनी की कार्यक्षमता तो बढ़ती ही है साथ ही किडनी में पथरी की समस्या से भी छुटकारा मिल सकता है।
4 बिना ब्रश किए पानी पीने से शरीर में बढ़ी हुई विषाक्त तत्वों की मात्रा कम होती है।

5 अगर सुबह बासी मुंह गुनगुना पानी पीते हैं तो तेजी से वजन कम होता है। ऐसा करने से लार में मौजूद बैक्टेरिया शरीर का मेटाबोलिज्म तेज कर देते हैं जिससे तेजी से फैट बर्न होता है।

 लहसुन  के 25 से ज्यादा फायदे जाने
लहसुन के गुण और प्रयोग –

लहसुन में विटामिन ए, बी, बी2, बी6, सी, मैंगनीज, सेलेनियम, मिनरल्स जैसे पोषक तत्व तो पाए ही जाते हैं, कई एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी फंगल, एंटी बैक्टीरियल, एंटी वायरल और माइक्रोबियल गुण भी पाए जाते हैं। आयुर्वेद की मानें तो वयस्कों के लिए रोजाना सुबह खाली पेट गुनगुने पानी के साथ लहसुन की एक कच्ची कली का सेवन स्वास्थ्य के लिए काफी लाभकारी है। 8 साल से बड़े बच्चों को लहसुन की एक-चौथाई कली का पेस्ट बना कर दिया जा सकता है। यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर करने में कारगर है।

हृदय रोगों में फायदेमंद
लहसुन का नियमित रूप से सेवन हृदय की धमनियां खोलने और खून के प्रवाह को बढ़ाने में सहायक है, जिससे वयस्कों को हृदय संबंधी रोगों का खतरा कम हो जाता है। सुबह खाली पेट लहसुन की एक कली हाथ से दबा कर गर्म पानी के साथ बिना चबाए निगलनी चाहिए।

हाथ-पैर या जोड़ों के दर्द में दे आराम
लहसुन की कलियों का सेवन शरीर में वायु दोष के कारण होने वाली समस्याओं को कम करने में प्रभावी है। आयुर्वेद के अनुसार शरीर में ज्यादा वायु या गैस बनने से ब्लड सकुर्लेशन कम होता है, हाथ-पैरों में अकड़न या दर्द रहता है। एंटीऑक्सीडेंट तत्वों से भरपूर लहसुन के नियमित सेवन से शरीर की सभी इंद्रियों में रक्त संचार बेहतर होता है। हाथ-पैरों में दर्द और सूजन काफी कम होते हैं। शरीर में दर्द होने पर 50 ग्राम सरसों के तेल में 5 ग्राम लहसुन, 5 ग्राम अजवायन, 5 ग्राम सोंठ और 5-7 लौंग मिलाकर काले होने तक  गर्म करें। तैयार तेल को किसी बोतल में छान लें। इस तेल से दर्द वाले स्थान पर मालिश करने से राहत मिलती है।

लहसुन एक बहुत ही उपयोगी औषधि है। प्राचीनकाल से इसका प्रयोग किया जाता रहा है और आधुनिक विद्वानों ने भी इसकी भूरि-भूरि प्रशंसा की है।
राजयक्ष्मा (Tuberculosis) एवं अन्य फुफ्फुसविकार, वातविकार, शैथिल्यप्रधान कुपचन (Atonic dyspepsia) एवं व्रण आदि के लिये यह बहुत ही लाभदायक सिद्ध हुआ है।

काश्यपसंहिता में लशुनकल्प नामक एक स्वतन्त्र अध्याय में इसका वर्णन किया गया है।

लहसुन उदर विकार, वातविकार नाशक ओषधि है। यदि इसे अनुपान के अनुसार इस्तेमाल करें, तो यह ह्रदय की रक्षा कर उसे मजबूत बनाता है।

लहसुन पेट की अनेक बीमारी, अपच, गैस आदि रोगों में राहत देता है।

धार्मिक ग्रन्थों में संभवतः इसके उग्रगन्ध के कारण इसका सेवन निषिद्ध माना है।
लहसुन उष्ण, दीपन, पाचन, वातहर, स्वेदजनन, मूत्रल, उत्तेजक, कफनि:सारक, बल्य, वृष्य, रसायन, दुर्गन्धहर एवं उत्तम प्रतिदूषक (Antiseptic) है ।

लहसुन में जो उड़नशील तैल होता है उसका उत्सर्ग, त्वचा, फुफ्फुस एवं वृक्क द्वारा होता है।

फुफ्फुस से उत्सर्ग के समय इससे कफ ढीला हो जाता है तथा उसमें के जीवाणुओं का नाश होकर कफ की दुर्गन्ध दूर होती है।

लहसुन को एक दिन में 2 या तीन पोथी से ज्यादा नहीं लेना चाहिए।
वातनाडी संस्थान पर लहसुन का उत्तेजक प्रभाव पड़ता है।
अधिक मात्रा में लहसुन के प्रयोग से वमन, विरेचन एवं शिरःशूल आदि लक्षण उत्पन्न होते हैं।

बच्चों में इसका सावधानी के साथ प्रयोग करना चाहिये। अधिक मात्रा में सेवन करने पर कभी-कभी मृत्यु भी हो सकती है ।

लहसुन का बाह्य प्रयोग त्वग्रोगकारक (Rubefacient) एवं प्रतिदूषक औषधि के रूप में किया जाता है। अधिक समय तक त्वचा के साथ सम्पर्क होने से स्फोट उत्पन्न होते हैं ।
यक्ष्मा दण्डाणु से उत्पन्न सभी विकृतियों जैसे फुफ्फुसविकार, स्वरयन्त्रशोथ, चर्मविकार, अस्थिव्रण एवं नाडीव्रण आदि में यह निश्चित लाभदायक सिद्ध हुआ है।
लहसुन के रस को इनमें पिलाया जाता है तथा इसका स्थानिक उपयोग भी किया जाता है।

स्वरयंत्र शोथ में इसका टिंक्चर २४ मि.ली. दिन में २, ३ बार देते हैं। पुराने कफविकार जैसे कास, श्वास, स्वरभङ्ग, श्वसनिका शोथ, श्वसनिकाभिस्तीर्णता (Bronchiectasis) एवं श्वासकृच्छ्र आदि में इसका अवलेह बनाकर उपयोग किया जाता है।

लहसुन एवं वायविडङ्ग का सेवन भी लाभदायक है। बच्चों के कुकास में इसको ३, ४ घण्टे पर सुंघाया जाता है तथा इसके रस को पिलाते भी हैं जिससे कष्ट कम हो जाता है।

फुफ्फुसकोथ (Gangrene of lungs) में इसके टिंक्चर (५ में १) का उपयोग बहुत सफल रहा है।

प्रारम्भ में इसको कम मात्रा में देना चाहिये तथा बाद में २० बूँद तक दिन में ३ बार देना चाहिये।

थोड़े ही समय में ज्वर, कफ की दुर्गन्ध, स्वेदाधिक्य एवं अग्निमांद्य आदि दूर होकर लाभ होता है। इसी प्रकार खण्डीय फुफ्फुसपाक (Lobar pneumonia) में भी इसके टिंक्चर को ३० बूँद हर चार घण्टे पर जल के साथ देने से ४८ घण्टे के अन्दर ही लाभ मालूम होने लगता है तथा ५, ६ दिन में ज्वर कम हो जाता है। इन सभी विकारों में आन्तरिक प्रयोग के साथ-साथ इसको छाती पर लगाते भी हैं।
वायविडङ्ग के साथ इसका क्षीरपाक सभी वातविकार में जैसे गृध्रसी, कटिग्रह, अर्दित, पक्षाघात, एकाङ्गघात, उरुस्तम्भ, अपतन्त्रक एवं अपस्मार आदि में लाभदायक है।

आन्तरिक प्रयोग के साथ इससे सिद्ध तैल की मालिश भी की जाती है।
अपस्मार में लहसुन का फांट भोजन के पूर्व एवं पश्चात् देने का विधान है।
अपतन्त्रक में इसको सुंघाया जाता है। इसी प्रकार ठण्डक लगने से उत्पन्न पीड़ा, जीर्ण आमवात एवं संधिशोथ तथा शिरःशूल आदि में इसको खिलाया जाता है तथा बाह्य लेप भी किया जाता है।

बच्चों के वात विकारों में इसकी मालिश विशेष लाभदायक है।
शैथिल्यप्रधान कुपचन (Atonic dyspepsia), आध्मान, उदरशूल, विसूचिका, वमन, गुल्म, उदावर्त, आंव एवं केंचुओं की बीमारी में इसका बहुत प्रयोग किया जाता है।

केंचुआ (Round worms) में १०-३० बूँद रस दूध में मिलाकर पिलाते हैं । वातगुल्म में इसको पीसकर घृत के साथ खिलाने से लाभ होता है।
ग्रहणीव्रण (Duodenal ulcer) में भी इसको लाभदायक माना गया है।
विषमज्वर में लहसुन को तैल या घृत के साथ सुबह खिलाने से लाभ होता है।
आन्त्रिक एवं तन्द्राभ ज्वर (Typhoid and Typhus) के प्रतिबन्धन के लिये इसके टिंक्चर को ४ मि.ली. हर ४ या ६ घण्टे पर शरबत के साथ देते हैं।
यदि रोग के प्रारम्भ में ही इसका प्रयोग किया जायेगा तो ज्वर बढ़ने नहीं पायेगा । इसका उपयोग आन्त्रिक प्रतिदूषक (Intestinal antiseptic) औषधि के रूप में किसी भी अवस्था में किया जा सकता है। बच्चों को २ मि.ली. की मात्रा में शरबत के साथ पर्याप्त है।

हार्ड प्रॉब्लम यानी हृद्रोग में इसके प्रयोग से आध्मान कम होकर हृदय के ऊपर का दबाव दूर होता है जिससे हृदय को बल प्राप्त होकर मूत्र अधिक होने लगता है।
सर्वाङ्गशोथ एवं जलोदर में लहसुन से लाभ होता है।
लहसुन के स्वरस को ३, ४ भाग जल में मिलाकर क्षत तथा दुर्गन्धित व्रण प्रक्षालन के काम में लाया जाता है जिससे वेदना कम होकर व्रण जल्दी ठीक होता है।
कार्बोलिक् एसिड (Carbolic acid) की अपेक्षा इससे धातुओं को कम नुकसान होता है। इसी प्रकार शोथ, विद्रधि, बालतोड़ एवं दाद आदि पर इसका लेप लाभदायक है।

लहसुनसे सिद्ध सर्षप तैल का उपयोग खुजली (पामा) में किया जाता है।
रोहिणी (Diphtheria) नामक अत्यन्त उग्र गले के विकार में इसकी एक-एक कली चूसने को दी जाती है। ३, ४ घण्टे में ६० ग्रा. तक लहसुन दिया जाता है।
विकृत कला (Membrane) के दूर होने पर दिन भर में ६० ग्रा. तक लहसुन देना चाहिये।
शिशुओं के लिये इसके रस को २०-३० बूँद हर चार घण्टे पर शरबत के साथ देना चाहिये । एक रोगी में नाडीव्रण (Sinus) के लिये इसके ताजे स्वरस को २ बूँद की मात्रा में हर छठे दिन स्थानिक सूचिकाभरण किया गया जिससे १० से.मी. गहरा नाडीव्रण २ महीने के अन्दर ठीक हो गया।
उपजिह्वा शोथ में लहसुन का स्थानिक प्रयोग सिल्हर नाइट्रेट् (Silver nitrate) की अपेक्षा अच्छा होता है।
कर्णशूल में इसके गुनगुने रस का या इससे सिद्ध तैल का उपयोग लाभदायक है।
लहसुन का तेल से बाधिर्य कम सुनने में भी लाभ होता है ।
आर्तवप्रवर्तक पीसीओडी या सोमरोग होने के कारण इसका उपयोग अनार्तव एवं कष्टार्तव आदि में किया जाता।

गर्भिणी में लहसुनका प्रयोग नहीं करना चाहिये।
पशु, मवेशियों में ॲन्ध्राक्स (Anthrax) नामक रोग के प्रतिबन्धन के लिये एवं सर्पविषादि में बाह्यभ्यन्तर प्रयोग किया जाता है।


 *आंखों के नीचे होने वाले डार्क सर्कल्स या काले धब्बों से कैसे बचें.?*
*जानिये इनका कुदरती उपचार...*
आंखों के नीचे काले धब्बे होना आम समस्या है।
अधिकांशतः ये कम सोने, अधिक थकान होने, कमजोरी अथवा किसी बीमारी के कारण होते है।

प्राय: नींद न आने की बीमारी के कारण होते हैं और उनकी आंखों पर डार्क सर्कल्स या काले धब्बे पड़ जाते है।

नींद लेना स्वास्थ्य के लिये आवश्यक है।
यदि आपको नींद नही आती, आप को थकावट रहती है तो रोज सुबह घर में ही एक्ससाइज करनी चाहिये।

आंखों की चारों तरफ की त्वचा बड़ी नाजुक होती है। इसलिये सौन्दर्य प्रसाधन लगाते समय बड़ी सावधानी बरतनी चाहिये।
सोने से पहले त्वचा को नमी देने वाली क्रीम या लोशन इस्तेमाल करनी चाहिये।
रूई के फोहे को आंखों के इर्द-गिर्द लगाएं।
आंखों के लिये बादाम क्रीम सबसे उपयुक्त होती है। इससे रंग भी साफ होता है और साथ ही त्वचा का पोषण होता है।
कोई भी सौन्दर्य-प्रसाधन  तत्व आंखों वाले क्षेत्र पर ज्यादा देर नहीं लगाना चाहिये।
चेहरे पर लगाया जाने वाला लेप आंखों के आसपास नहीं लगाना चाहिये।
आंखों पर खीरे का रस, आलू का रस तथा गुलाबजल को रूई के फोहे में भिगोकर आंखों पर रखना चाहिये।


 *दूध पीने का भरपूर लाभ लेने के लिए ध्यान रखें जरूरी बातें* 
 
1 कई लोगों की आदत होती है, भोजन के बाद दूध पीने की। लेकिन खाना खाने के तुरंत बाद कभी भी दूध का सेवन न करें। इससे पचने में समय लगता है और आपको भारीपन महसूस होता है।

2 जब भी आप भोजन बाद दूध पी रहे हैं, तो आधा भोजन ही करें, वरना पाचन संबंधी समस्या से आप परेशान हो सकते हैं। खास तौर से रात में इसका ध्यान रखें।

3 खट्टी या नमकीन चीजों का सेवन दूध पीने के आधे या एक घंटे पहले ही कर लें या दूध पीने के बाद करें। अगर ऐसा नहीं किया तो ब्लोटिंग या डकार आने की समस्या हो सकती है।

4 प्याज और बैंगन के साथ कभी दूध का सेवन नहीं करें। इनमें मौजूद रसायन आपस में क्रिया कर त्वचा संबंधी रोग पैदा कर सकते हैं। इसलिए इनके सेवन में कुछ समय का अंतर रखें।

5 कभी भी ठंडा दूध न पिएं, ना ही इसमें चीनी का इस्तेमाल करें। ठंडा दूध धीरे पचता है जिससे पेट में गैस बन सकती है। और चीनी पोषक तत्वों को खत्म कर देती है और पाचन में समस्या पैदा करती है।

6 अगर आप ताकत और पोषण के लिए दूध पी रहे हैं, तो गाय का दूध लें। लेकिन अगर वजन बढ़ाना चाहते हैं तो भैंस का दूध प्रयोग करें। लेकिन भैंस का दूध कफ बढ़ाने का काम भी करता है, इसका ध्यान रखें।

तरीके जो 7 दिन में पेट को अंदर कर देंगा* 
 
1) चॉकलेट्स, आलू, अरबी और मीट आदि न खाएं और चावल भी मांड निकाल कर खाएं। ओवर ईटिंग न करें और बीच-बीच में भूख लगे तो सलाद गाजर, खीरा, ककड़ी भूने चने, सलाद, मुरमुरे, रोस्टेड स्नेक्स आदि खा सकते हैं।  
2) रोजाना सुबह और शाम वॉक पर जाएं। कम से कम 4 कि.मी.वॉक करें। लंच के बाद भी कुछ देर जरुर वॉक करें।अगर आप रात में 8:30 बजे के बाद खाना खा रहे हैं, तो चपाती और चावल के बजाय दाल और सब्जियों को प्राथमिकता दें। रात में हल्का खाना खाएं।  
 3) टोंड दूध और टोंड दही, पनीर और अन्य सामग्री का इस्तेमाल करें। पानी पेट को ऐसे तत्व से भर देता है, जिसमें कोई कैलोरी नहीं होती। इससे व्यक्ति को पेट भरा होने का अहसास होता है और नतीजतन वह खाने के दौरान कम कैलोरी लेता है।पानी ज्यादा पीना चाहिए और मीठे और हाइकैलोरी वाले खाद्य पदार्थ कम लेने चाहिए। 
 4) खाने में ऊपर से नमक न मिलाएं। परंपरागत मसाले सिर्फ स्वाद नहीं बढ़ाते हैं , बल्कि उनमें माइक्रोन्यूट्रिएंट , ऐंटी ऑक्सीडेंट और फाइबर भी होते हैं। सिर्फ ध्यान रखें कि इन्हें भूनने के लिए ज्यादा तेल का इस्तेमाल न करें। 
 5) वजन कम करना चाहते हैं तो ज्यादातर सफेद चीजें ( आलू , मैदा , चीनी , चावल आदि ) कम करें और मल्टीग्रेन या मल्टीकलर खाने ( दालें , गेहूं , चना , जौ , गाजर , पालक , सेब , पपीता आदि ) पर जोर दें। 
6) दिन भर के खाने में सबसे ज्यादा फोकस ब्रेकफास्ट पर होना चाहिए। अक्सर लोग वजन कम करने की धुन में ब्रेकफास्ट नहीं लेते लेकिन रिसर्च कहता हैं कि अगर नियमित रूप से ब्रेकफास्ट लिया जाए तो लंबी अवधि में वजन कम होता है।
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 डेंगू के लिए #आयुर्वेद का अनुभूत योग 

डेंगू हेतु स्वयं के द्वारा तैयार सप्तामृत स्वरस
१. गिलोय ५० ग्राम
२. तुलसी पत्र २५
3. छोटी पीपर ४
४. लौंग ७
५. सोंठ पाउडर ५ ग्राम
६. पपीते का आधा पत्ता या 10 ग्राम
७. मिश्री/ बुरा / गुड़ / चीनी 50 ग्राम

सबको लेकर १०० मिली पानी में लेकर ग्रायन्डर करके छान ले इसे २-२ छोटी चम्मच दिन में ४-५ बार ले बाकी को फ्रीज में रख दे जिससे खराब न हो, ३-४ दिन में डेंगू बिल्कुल ठीक हो जायेगा व प्लेटलेट्स बढ़कर सामान्य हो जाएंगे।

 *हरड़ का थोड़ा सा पाउडर ऐसे उपयोग करें तो... बाल और दांत दोनों चमकने लगेंगे*

हरड़ को आयुर्वेद में बहुत उपयोगी माना गया है। यह त्रिफला के तीन फलों में सबसे गुणकारी माना गया है। बाजार में दो प्रकार की हरड़ मिलती है। बड़ी हरड़ और छोटी हरड़। हरड़ पेड़ के वे फल हैं जो गुठली पैदा होने से पहले ही गिर पड़ते हैं।  हरड़ में एस्ट्रिन्जेन्ट, टैनिक अम्लए गैलिक अम्ल, चेबूलीनिक अम्ल और म्यूसीलेज । रेजक पदार्थ हैं एन्थ्राक्वीनिन जाति के ग्लाइको साइड्स। इसके अलावा हरड़ में दस प्रतिशत जल, 13.9 से 16.4 प्रतिशत नॉन टैनिन्स और शेष अघुलनशील पदार्थ होते हैं।इसके अलावा इसमें वैज्ञानिकों के अनुसार ग्लूकोज, सार्बिटाल, फ्रक्टोस, सुकोस, माल्टोस एवं अरेबिनोज हरड़ के प्रमुख कार्बोहाइड्रेट हैं। इसमें 18 प्रकार के अमीनो अम्ल पाए जाते हैं। हरड़ इतने गुणों से भरपूर है लेकिन अधिकांश लोग इसके प्रयोग नहीं जानते तो अगर आप भी उन्हीं लोगों में से एक हैं तो आइए हम बताते हैं आपको हरड़ के कुछ अचूक प्रयोग। 

 कब्ज के इलाज के लिए हरड़ को पीसकर पाउडर बनाकर या घी में सेकी हुई हरड़ की डेढ़ से तीन ग्राम मात्रा में शहद या सैंधा नमक में मिलाकर लेना चाहिए।

  अतिसार होने पर हरड़ गर्म पानी में उबालकर प्रयोग की जाती है। 

हरड़ का चूर्ण, गोमूत्र तथा गुड़ मिलाकर रात भर रखने और सुबह यह मिश्रण रोगी को पीने के लिए दें,इससे बवासीर तथा खूनी पेचिश आदि बिल्कुल ठीक हो जाते हैं। 

लीवर, स्पलीन बढऩे की या पेट में कीड़ों की समस्या हो तो दो सप्ताह तक लगभग तीन ग्राम हरड़ के चूर्ण का सेवन करना चाहिए।

हरड़ का चूर्ण दुखते दांत पर लगाने से भी तकलीफ कम होती है।

 एलर्जी से परेशान लोग हरड़ फल और हल्दी से तैयार लेप लगाएं।जब तक  एलर्जी खत्म न हो जाए तब तक लेप जारी रखें।

हरड़ के फल को नारियल तेल में उबालकर लेप बनाएं और बालों में लगाएं। हरड़ के उपयोग से बाल काले और चमकीले बनते हैं।

हरड़ का लेप पतले छाछ के साथ बनाकर गरारे करने से मसूढ़ों की सूजन में भी आराम मिलता है।

 *गैस की समस्या का इलाज* 
 
- गैस की समस्या को दूर करने के लिए आप एक अदरक के टुकडे को देसी घी में पक लें. और फिर उस पर काला नमक डालकर खाएं इसके अलावा अदरक की चाय पीने से भी आपको एसिडिटी की प्रॉब्लम से राहत मिलती है. 
 - पका हुआ पाइनएप्पल खाएं या फिर आप इसका जूस पी एम इसकी एल्कलाइन प्रॉपर्टी गैस से तुरंत राहत दिलाने में बहुत मदद करती है. 
 - ठंडे पानी में 1 चम्मच भुना हुआ जीरा पाउडर घोलकर पीने से भी आपका डाइजेशन सुधर जाता है और गैस की प्रॉब्लम दूर हो जाती है. 
 - गैस की प्रॉब्लम को तुरंत दूर करने के लिए एक गिलास पानी में आधा चम्मच पुदीने का रस डालकर पिए इसके अलावा आप पुदीने की चाय भी पी सकते हैं. 
 - गैस की समस्या को दूर करने के लिए नारियल पानी एक बहुत बढ़िया उपाय है क्योंकि नारियल पानी पीने से आपका डाइजेशन सुधरता है और आपके पेट की तमाम तरह की प्रॉब्लम दूर हो जाती हैं और अगर गैस बन रही हो तो आप नारियल पानी पी लें इससे तुरंत गैस में आराम मिलेगा.

: नारियल तेल और कपूर से 5 अद्भुत फायदे......
🌷🌷🌷🌷🌷
नारियल तेल यूं तो सेहत और त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद है, लेकिन कपूर के साथ नारियल तेल का मेल किसी जादू से कम असर नहीं करता।

अब जानिये ये पांच फायदे भी..

(🙏🏻) एलर्जी..

त्वचा पर किसी भी तरह की एलर्जी हो या फिर फंगस, नारियल के तेल में कपूर को मिक्स करें और संबंधित स्थान पर लेप करें। एक ही बार प्रयोग से आप इसका प्रभाव देख सकते हैं।


(🙏🏻) पिंपल्स..

त्वचा पर किसी भी कारण से होने वाले पिंपल्स पूरी त्वचा पर फैलकर उसे खराब कर सकते हैं। इसपर नारियल तेल और कपूर का लेप लगाएं और खुद असर देखें कि पिंपल्स कम होते जाएंगे।


(🙏🏻) डैंड्रफ..

बालों में डैंड्रफ से परेशान हैं, तो नारियल तेल में जरा सा कपूर मिलाएं और सिर की त्वचा पर ऊंगलियों के पोरों से मालिश करें। जल्दी ही आपकी यह समस्या भी हल हो जाएगी।


(🙏🏻) झाइयां...

त्वचा पर किसी तरह के दाग या झाइयां होने पर आप नारियल तेल में कपूर डालकर मसाज कर सकते हैं। यह त्वचा की हर समस्या के लिए एक बढ़िया समाधान है।


(🙏🏻) खुजली..

त्वचा में खुजली होने पर यह तरीका बहुत ही जल्द असर करता है।
बस त्वचा पर इसकी अच्छी तरह से मसाज करें और सभी सूक्ष्म बैक्टीरिया के साथ खुजली से भी निजात पाएं।


: *हरड़ का थोड़ा सा पाउडर ऐसे उपयोग करें तो... बाल और दांत दोनों चमकने लगेंगे*

हरड़ को आयुर्वेद में बहुत उपयोगी माना गया है। यह त्रिफला के तीन फलों में सबसे गुणकारी माना गया है। बाजार में दो प्रकार की हरड़ मिलती है। बड़ी हरड़ और छोटी हरड़। हरड़ पेड़ के वे फल हैं जो गुठली पैदा होने से पहले ही गिर पड़ते हैं।  हरड़ में एस्ट्रिन्जेन्ट, टैनिक अम्लए गैलिक अम्ल, चेबूलीनिक अम्ल और म्यूसीलेज । रेजक पदार्थ हैं एन्थ्राक्वीनिन जाति के ग्लाइको साइड्स। इसके अलावा हरड़ में दस प्रतिशत जल, 13.9 से 16.4 प्रतिशत नॉन टैनिन्स और शेष अघुलनशील पदार्थ होते हैं।इसके अलावा इसमें वैज्ञानिकों के अनुसार ग्लूकोज, सार्बिटाल, फ्रक्टोस, सुकोस, माल्टोस एवं अरेबिनोज हरड़ के प्रमुख कार्बोहाइड्रेट हैं। इसमें 18 प्रकार के अमीनो अम्ल पाए जाते हैं। हरड़ इतने गुणों से भरपूर है लेकिन अधिकांश लोग इसके प्रयोग नहीं जानते तो अगर आप भी उन्हीं लोगों में से एक हैं तो आइए हम बताते हैं आपको हरड़ के कुछ अचूक प्रयोग। 

 कब्ज के इलाज के लिए हरड़ को पीसकर पाउडर बनाकर या घी में सेकी हुई हरड़ की डेढ़ से तीन ग्राम मात्रा में शहद या सैंधा नमक में मिलाकर लेना चाहिए।

  अतिसार होने पर हरड़ गर्म पानी में उबालकर प्रयोग की जाती है। 

हरड़ का चूर्ण, गोमूत्र तथा गुड़ मिलाकर रात भर रखने और सुबह यह मिश्रण रोगी को पीने के लिए दें,इससे बवासीर तथा खूनी पेचिश आदि बिल्कुल ठीक हो जाते हैं। 

लीवर, स्पलीन बढऩे की या पेट में कीड़ों की समस्या हो तो दो सप्ताह तक लगभग तीन ग्राम हरड़ के चूर्ण का सेवन करना चाहिए।

हरड़ का चूर्ण दुखते दांत पर लगाने से भी तकलीफ कम होती है।

 एलर्जी से परेशान लोग हरड़ फल और हल्दी से तैयार लेप लगाएं।जब तक  एलर्जी खत्म न हो जाए तब तक लेप जारी रखें।

हरड़ के फल को नारियल तेल में उबालकर लेप बनाएं और बालों में लगाएं। हरड़ के उपयोग से बाल काले और चमकीले बनते हैं।

हरड़ का लेप पतले छाछ के साथ बनाकर गरारे करने से मसूढ़ों की सूजन में भी आराम मिलता है।
 घरेलू उपचार......

🏵️पैरों के तलवे की जलन .....


🏵️लौकी काटकर पैरों के तलवों पर मलें। लौकी का रस भी लगा सकते है । कहीं की भी जलन में , लौकी का गूदा या रस लगाने से जलन में , आराम होता है ।

🏵️ करेले के पत्तों का या करेले का रस की मालिस करने से आराम होता है ।

🏵️ शुद्ध घी की मालिस करने से भी, लाभ होता है ।

🏵️ मसूर की दाल का आटा पीसकर और पानी में घोलकर उबालें। ठंडा होने पर, चार बार नित्य पैरों पर लेप करें ।

🏵️ सूखा धनिया 10 ग्राम भिगोकर व पीसकर, ठंडाई की तरह सेवन करें । शरीर व पैरों की जलन में , लाभ होता है ।

*यह 12 घेरलू नुस्खे पढ़ लो कुछ नया सीखने मिलेगा।*
 

🌷. नींबू के पत्तों का रस निकालकर नाक से सूंघे जिस व्यक्ति को हमेशा सिरदर्द बना रहता है , उसे भी इससे शीघ्र आराम मिलता है ।

🌷. काली मिर्च को सुई से छेद कर दे फिर मोमबत्ती की लौ से जलाएं । जब धुआं उठे तो इस धुएं को नाक से अंदर खीच लें । इस प्रयोग से सिर दर्द ठीक हो जाता है । हिचकी चलना भी बंद हो जाती है ।

🌷. दो छोटे चम्मच आंवला का पावडर एक कटोरी में ले और उसमें एक छोटा चम्मच शहद डालकर अच्छी तरह से मिला लें । हर रोज सुबह इस मिश्रण का सेवन करने से अस्थमा में लाभ होगा ।

🌷. निम की निम्बोली के अंदर की सुखी गिरी और कालिमिर्ची को बराबर मात्रा में लेकर दोनों को कूटपीसकर आधा चम्मच रोजाना सुबह भूखे पेट पानी के साथ 2 सप्ताह तक लें । चाहे केसा भी बवासीर हो ठीक हो जाता है ।

🌷. सहजन ( Moringa ) के पेड के पत्ते का रस 3 चम्मच की मात्रा में प्रतिदिन सेवन करने से त्वचा का ढीलापन दूर होता है और चर्बी की अधिकता कम होती है ।

🌷. दांत में कीड़े लगने और दर्द होने पर लौंग को दांत के खोखले स्थान में रखने से या लौंग का तेल लगाने से दर्द नही होता साथ ही कीड़ा बहार निकल जाता है ।

🌷. पिसी हुई कलौंजी, आधा चम्मच और एक चम्मच शहद मिलाकर चाटने से मलेरिया का बुखार ठीक होता है ।

🌷. रात में एक गिलास दूध में दो चम्मच शहद मिलाकर लेने से डाइजेस्टीव सिस्टम में सुधार होता है । कब्ज की समस्या से छुटकारा मिलता है । इसे रोजाना लेने से पेट व आंत से जुड़ी समस्याएं नहीं होती हैं ।

🌷. बच्चा सोते समय पेशाब करता हो तो भुने काले तिलों को गुड़ के साथ मिलाकर उसका लड्डू बना लीजिए । बच्चे को यह लड्डू हर रोज रात में सोने से पहले खिलाइए , बच्चा सोते वक्त पेशाब नही करेगा ।

🌷. आँवला चूर्ण 5 - 10 ग्राम 1 चम्मच शहद में मिलाकर सुबह खाली पेट चाटने से थाइरॉइड जैसी गंभीर बीमारी भी 1 - 2 महीने में घुटने टेक देती है ।

🌷. सरसों के बीजों से निकाला गया सरसों का तेल बालों के लिए काफी फायदेमंद होता है । विटामिन - A से परिपूर्ण येतेल बालों को पोषण प्रदान करने के साथ बालों की वृद्धि भी करता है।

🌷. गाय का घी नाक में डालने से कान का पर्दा बिना आपरेशन के ही ठीक हो जाता है ।

*सर्दियों में निखरी त्वचा पाना है? तो लगाएं ग्लिसरीन और गुलाब जल* 
 
1 ग्लिसरीन के साथ गुलाबजल का मिश्रण आपकी त्वचा को नमी के साथ-साथ निखार भी देता है। सर्दियों में रूखी त्वचा से आप भी परेशान हो रहे हैं, तो ग्लिसरीन और गुलाबजल मिलाकर सोते वक्त अपनी त्वचा पर जरूर लगाकर देखें। 
2 इस मिश्रण का त्वचा पर प्रयोग कर आप अपनी त्वचा को मौसम के अनुकूल आसानी से बना सकते हैं। यह आपकी त्वचा का रूखापन, मृत त्वचा ओर अन्य अनियमितता को हटाकर कंडि‍शनिंग करता है। 
3 बढ़ती उम्र के लक्षणों को कम कर यह आपको जवां दिखने में मदद करता है। गुलाबजल में एंटी एजिंग गुण मौजूद होते हैं और ग्लिसरीन का इस्तेमाल आपकी झुर्रियों को कम कर सकता है। 
4 सर्दी के दिनों में देखभाल के बावजूद त्वचा बेजान और ढीली हो जाती है। इससे बचने के लिए ग्लिसरीन और गुलाबजल का मिश्रण आपके लिए काम की चीज है। यह आपकी त्वचा करे खि‍ला-खि‍ला बनाए रखने में मददगार है। 
5 रात के समय इस मिश्रण का इस्तेमाल आपकी त्वचा को ठंड के दुष्प्रभाव से बचाता है, साथ ही उसे चिकनाई प्रदान करता है जिससे त्वचा में रूखापन नहीं रहता और उसकी दमक भी बढ़ जाती है।

 *मोतियों जैसे सफेद दांत पाने के लिए ये जबरदस्त घरेलू उपाय जरूर आजमाएं* 
 
1) आधा चम्मच बेकिंग सोडा में चुटकी भर नमक मिलाएं और इस मिश्रण को ब्रश में लगाकर दांतों पर हल्के-हल्के से मसाज करें। इसके बाद टूथपेस्ट से दांत साफ करें। इस उपाय से दांतों की चमक बढ़ने में मदद मिलेगी।

2) मुंह की दुर्गंध दूर करने के लिए सुबह ब्रश करने के बाद व्हाइट विनेगर में बराबर मात्रा में पानी मिलाकर कुल्ला करें। इस उपाय से मुंह की दुर्गंध दूर होने में मदद मिलती है।

3) दांतों में सड़न लगने से बचाने के लिए 1-2 अखरोट की गिरी को कूटें और इसे टूथपेस्ट में मिलाकर इससे ब्रश करें।

4) दांतों की सफाई करने के लिए स्ट्रॉबेरी का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। इसके लिए एक पकी हुई स्ट्रॉबेरी को मैश कर लें, अब उसमें चुटकी भर खाने का सोडा मिलाएं। फिर इसे ब्रश में लगाकर दांतों की सफाई करें।


*गलत वक्त पर फल खाने से होते हैं गंभीर नुकसान, जानें 5 तथ्य* 
 
1 फलों को खाने के पहले या ठीक बाद में खाने से हमेशा बचें। फलों का सेवन या तो खाने के आधे घंटे पहले कर लें या फिर खाना खाने के कम से कम एक घंटा बाद तक न करें, अन्यथा आपको पाचन व एसिडिटी संबंधी समस्या हो सकती है।
2 सुबह के समय फलों का सेवन स्वास्थ्य और शरीर के लिए सबसे फायदेमंद होता है, लेकिन कुछ फल ऐसे हैं जिन्हें सुबह खाली पेट खाने से हमेशा बचना चाहिए। सीट्रिक यानि खट्टे फलों को खाली पेट खाने से एसिडिटी बढ़ सकती है। 
3 अगर आप भी उन लोगों में शामिल हैं जो स्वाद बढ़ाने या हेल्थ के लिए फलों को दही या दूध के साथ खाते हैं, तो ऐसा बिल्कुल न करें। यह आपको स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दे सकता है।
4 कुछ फल किडनी स्टोन के मरीजों के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं, इसलिए पहले पूरी जानकारी लें तभी किसी फल का सेवन करें। अगर तरबूज खा रहे हैं तो बेहतर होगा कि इसके साथ कुछ न खाएं। 
5 फलों का चयन अपनी तासीर के अनुसार करें। अगर आपकी तासीर ठंडी है, तो केले, संतरा, अनानास जैसे फलों को ज्यादा न खाएं। वहीं अगर आपकी तासीर गर्म है तो आम और पपीते जैसे फलों का सेवन कम ही करें।
 *डायरिया होने पर यह घरेलू उपाय आजमाएं* 
 
1 एक गिलास पानी में दो चम्मच शकर और चुटकी भर नमक और नींबू के रस की कुछ बूंदें मिलाकर बच्चे को पिलाएं।
2 नारियल पानी पिलाना भी फायदेमंद होगा, अत: कच्चे नारियल का पानी बच्चे को पिलाएं जिससे पोषक तत्व भी मिलें और डायरिया से राहत भी मिले।
3 दाल का पानी, चावल का मांड, दही केला, हल्की चाय व हल्का पाचक भोजन दें।

*चाय के साथ क्या खाना हो सकता है खतरनाक? जानना चाहते हैं तो इसे जरूर पढ़ें* 
 
1 बेसन की चीजें - नमकीन हो, मठरी हो या फिर कुछ और, हर मौसम में बेसन से बनी चीजों का चाय के साथ सेवन सबसे कॉमन है। लेकिन अगर आपकी भी यही आदत है तो ठहरिए, यह आदत हेल्दी नहीं है। हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि चाय के साथ बेसन की चीजों को नहीं खाना चाहिए यह शरीर में पोषक तत्वों की कमी करते हैं। इसके अलावा चाय के साथ बेसन की चीजों का सेवन पेट और पाचन संबंधी समस्याएं भी पैदा कर सकती हैं।

2 कच्ची चीजें - कच्ची चीजें जैसे सलाद, अंकुरित अनाज या फिर उबला हुआ अंडा जैसी चीजें भी चाय के साथ लेना आपकी सेहत और पेट को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा यह गर्म और ठंडे का सम्म‍िश्रण होगा जो पेट संबंधी समस्याएं भी दे सकता है।

3 हल्दी वाली चीजें - अगर आप चाय के साथ या चाय पीने के तुरंत बाद ऐसी चीजों का सेवन करते हैं जिसमें हल्दी की मात्रा अधिक हो, तो यह भी आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसका प्रमुख कारण है चाय और हल्दी में मौजूद रासायनिक तत्व, जो आपस में क्रिया करके आपके पेट में रासायनिक क्रिया कर पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं एवं पेट के लिए नुकसानदायक‍ तत्वों का निर्माण कर सकते हैं।

4 नींबू - चाय के साथ किसी ऐसी चीज का प्रयोग भी न करें जिसमें नींबू की मात्रा हो, यह नुकसानदायक है। कई लोग चाय में नींबू निचोड़कर लेमन टी बनाकर पीते हैं। लेकिन यह चाय एसिडिटी और पाचन संबंधी और गैस की समस्या भी पैदा कर सकती है।


 *इन 10 समस्याओं में टॉनिक है सरसों का तेल, जानिए इसके फायदे* 
 
1 सरसों के तेल को बहुत पौष्टिक माना जाता है, इसलिए इसका प्रयोग खाना बनाने के लिए भी किया जाता है। इसकी तासीर गर्म होने से सर्दियों में यह अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
2 सरसों के तेल की मालिश करने से शरीर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और रक्त संचार भी बेहतर होता है। यह शरीर में गर्माहट पैदा करने में भी मददगार होता है।
3 दांतों की तकलीफ में सरसों के तेल में नमक मिलाकर रगड़ने से फायदा होता है, साथ ही दांत पहले से अधिक मजबूत हो जाते हैं।
4 त्वचा संबंधी समस्याओं में भी बेहद फायदेमंद होता है। यह शरीर के किसी भी भाग में फंगस को बढ़ने से रोकता है और त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाता है।
5 यह बालों की जड़ों को पोषण देकर रक्तसंचार बढ़ाता है जिससे बालों का झड़ना बंद हो जाता है। इसमें ओलिक एसिड और लीनोलिक एसिड पाया जाता है, जो बालों की ग्रोथ बढ़ाने के लिए अच्छे होते हैं।
6 सरसों तेल को कई लोग एक टॉनिक के रूप में भी प्रयोग करते हैं। यह शरीर की कार्य क्षमता बढ़ा कर शरीर की कमजोरी को दूर करने में सहायता करता है।इस तेल की मालिश के बाद स्नान करने से शरीर और त्वचा दोनों स्वस्थ रहते हैं।
7 ठंड के दिनों में सरसों का तेल गर्माहट के लिए रामबाण इलाज है, हल् के गर्म तेलकी मसाज से रूखी-सूखी त्वचा भी नर्म, मुलायम व चिकनी हो जाती है। सरसों के तेल की मालिश से गठिया रोग और जोड़ो का दर्द भी ठीक हो जाता है।

*भोजन के बाद सौंफ खाने के 9 बेहतरीन फायदे और जबरदस्त नुस्खे
 
1 भोजन के बाद रोजाना 30 मिनट बाद सौंफ लेने से कॉलेस्ट्रोल काबू में रहता है। 
2 पांच-छे ग्राम सौंफ लेने से लीवर और आंखों की रोशनी ठीक रहती है। अपच संबंधी विकारों में सौंफ बेहद उपयोगी है। बिना तेल के तवे पर सिकी हुई सौंफ और बिना तली सौंफ के मिक्चर से अपच होने पर बहुत लाभ होता है। 
3 दो कप पानी में उबली हुई एक चम्मच सौंफ को दो या तीन बार लेने से अपच और कफ की समस्या समाप्त होने में मदद मिलती है। 
4 अस्थमा और खांसी के उपचार में भी सौंफ का सेवन सहायक है। 
5 कफ और खांसी होने पर भी सौंफ खाना फायदेमंद होता है। 
6 गुड़ के साथ सौंफ खाने से मासिक धर्म नियमित होने लगते है। 
7 यह शिशुओं के पेट और उनके पेट के अफारे को दूर करने में बहुत उपयोगी है। 
8 एक चम्मच सौंफ को एक कप पानी में उबलने दें और 20 मिनट तक इसे ठंडा होने दें। इससे शिशु के कॉलिक का उपचार होने में मदद मिलती है। शिशु को एक या दो चम्मच से ज्यादा यह घोल नहीं देना चाहिए। 
9 सौंफ के पावडर को शकर के साथ बराबर मिलाकर लेने से हाथों और पैरों की जलन दूर होती है। भोजन के बाद 10 ग्राम सौंफ लेनी चाहिए।

*बहुत ही गुणकारी व कई बीमारियों में लाभकारी है मैथी दाना* 
 
• अगर आप वजन कम करना चाहते हैं तो रोज सुबह खाली पेट मैथी दाने का सेवन करें। यह आपको वजन कम करने में बहुत फायदा पहुंचाएगा। 

• एसिडिटी की प्रॉब्लम होगी दूर : अगर किसी को एसिडिटी की परेशानी है, तो उन लोगों के लिए भी मैथी दाना फायदेमंद होता है। 

• शुगर के मरीजों को मैथी दाने का रोजाना सेवन करना चाहिए। यह उनके शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करता है। 


• कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मैथीदाना बहुत फायदेमंद होता है। यदि आपके शरीर में कॉलेस्ट्राल की समस्या है तो आप इसका सेवन जरूर करें। 

• बालों के झड़ने की समस्या से निजात दिलाने में भी मैथी दाना बहुत फायदा करता है। इसका सेवन बालों को खूबसूरत, घना और सॉफ्ट बनाने में मदद करता है। चाहे तो आप इसे अपने बालों पर लगा भी सकते हैं।


 *जिनके बाल झड़ते हों, वे कच्चे पालक का सेवन करें*पालक में विटामिन ए,बी,सी, लोहा, कैल्सियम, अमीनो अम्ल तथा फोलिक अम्ल प्रचुर मात्रा में पाया जाता है | कच्चा पालक खाने में कडवा और खारा लगता है, परन्तु बहुत ही गुणकारी होता है | पालक का रस सम्पूर्ण पाचन -तंत्र की प्रणाली ( पेट,छोटी-बड़ी आंतें ) के लिए सफाई-कारक एवं पोषण-कर्ता है | कच्चे पालक के रस में प्रकृति ने हर प्रकार के शुद्धिकारक तत्व रखे है | पालक संक्रामक रोग तथा विषाक्त कीटाणुओं से उत्पन्न रोगों से रक्षा करता है | इसमें विटामिन ‘ए’ पाया जाता है जो म्यूक्स मेम्ब्रेन्स की सुरक्षा के लिए उपयोगी है |दही के साथ कच्चे पालक का रायता बहुत ही स्वादिष्ट और गुणकारी होता है | इसलिए गुणों में पालक अन्य सभी शाकों में सर्वोपरि है | इसका रस यदि पीने में अच्छा न लगे तो इसके रस में आंटा गुंथकर रोटी बनाकर खाने चाहिए | पालक रक्त में लाल कण बढाता है | कब्ज़ दूर करता है | पालक, दाल व अन्य सब्जियों के साथ खायें | इसमें पाया जाने वाला विटामिन ‘ए’ विशेष मात्र में होता है जो बालों के लिए अत्यंत जरुरी होता है | जिसके बाल झाड़ता हो ,वो कच्चे पालक का सेवन करें |


 *टमाटर करेगा कई रोगों का उपचार, जानिए क्यों ये है हेल्थ के लिए वरदान* 
 
1 टमाटर में भरपूर मात्रा में कैल्शियम, फास्फोरस और विटामिन सी पाया जाता है। एसिडिटी की समस्या होने पर टमाटरों की खुराक बढ़ाने से इस समस्या से निजात मिलता है।
 2 टमाटर में काफी मात्रा में विटामिन 'ए' पाया जाता है, जो हमारी आंखों के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
 3 टमाटर खाने से पाचन शक्ति बढ़ती है और गैस की समसा भी दूर होती है।
 4 डॉक्टरो के अनुसार टमाटर के नियमित सेवन से श्वास नली बिल्कुल साफ रहती है और खांसी, बलगम की शिकायत खत्म होती है। 
 5 बच्चों को सूखा रोग होने पर टमाटर का रस पिलाने से फायदा होता है। साथ ही ये उनके तेजी से विकास में भी मदद करता है।
 6 गर्भवती महिलाओं के लिए भी सुबह एक गिलास टमाटर के रस का सेवन फायदेमंद होता है।
 7 डाइबिटीज व दिल के मरिजों की सेहत के लिए टमाटर बहुत उपयोगी होता है।
 8 अगर पेट में कीड़े होने की शिकायक हो, तो सुबह खाली पेट टमाटर में पिसी हुई काली मिर्च लगाकर खाने से कीड़े मर कर निकल जाते हैं। आप चाहे तो काली मिर्च डले हुए टमाटर का सूप पी सकते हैं।

 गर्भ धारण अथवा गर्भ स्थापना के लिए कुछ आयुर्वेदिक नुस्खे
1. एक चम्मच असगंध का चूर्ण, एक चम्मच देशी घी के साथ मिलाकर मिश्री मिले हुए दूध के साथ मासिक धर्म के छठे दिन से पुरे माह पीने से बंध्यापन दूर होकर गर्भधारण होता है ! यह प्रयोग सुबह खाली पेट प्रयोग करना चाहिए और जब तक लाभ ना हो तब तक दोहराते रहना चाहिए !!
 
2. अपामार्ग की जड़ का चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में दूध के साथ ऋतुकाल के बाद 21 दिनों तक सेवन करने से गर्भ धारण होता है !!
 
3. अशोक के फूल दही के साथ नियमित रूप से सेवन करते रहने से भी गर्भ स्थापित होता है !!
 
4. नीलकमल का चूर्ण और धाय (धातकी) के पुष्पों का चूर्ण समभाग मिलाकर ऋतुकाल प्रारम्भ होने के दिन से 4 दिनों तक नियमित रूप से एक चम्मच चूर्ण शहद के साथ सेवन करने से गर्भधारण होता है ! प्रयोग असफल होने अगले ऋतुकाल से पुनः दोहराए !!
 
5. पीपल के सूखे फलों का चूर्ण आधे चम्मच की मात्रा में कच्चे दूध के साथ मासिक धर्म शुरू होने के पांचवें दिन से दो हफ्ते तक सुबह शाम प्रयोग करने से गर्भधारण होता है ! लाभ नहीं होने से अगले महीने भी इसको जारी रखें !!🙏


*🔥होठों का खुश्की से बचाव🔥* 
 
नाभि में रोजाना सरसों का तेल लगाने से होंठ नहीं फटते और फटे हुए होंठ मुलायम और सुन्दर हो जाते है। साथ ही नेत्रों की खुजली और खुश्की दूर हो जाती है। या सरसों का तेल कनपटी में मलिए, कान में डालिए, नाक में सुड़किए, नाभि में लगाइए - इससे नेत्र-ज्योति तथा मस्तिष्क - शक्ति बढ़ती है। जुकाम कभी नहीं होता। सर्दी के दिनों में प्रतिदिन सरसों का तेल नाभि पर लगाने से हाथ पांव भी नहीं फटते और हाथ पैरों की चमड़ी खुरदरी नहीं होती।
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              *🌹💐🌹*
      *""सदा मुस्कुराते रहिये""*
        हँसते रहिये हंसाते रहिये

            *🕸सुप्रभात 🕸*

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