लहसुन के 25 से ज्यादा फायदे जाने
लहसुन के गुण और प्रयोग –
लहसुन में विटामिन ए, बी, बी2, बी6, सी, मैंगनीज, सेलेनियम, मिनरल्स जैसे पोषक तत्व तो पाए ही जाते हैं, कई एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी फंगल, एंटी बैक्टीरियल, एंटी वायरल और माइक्रोबियल गुण भी पाए जाते हैं। आयुर्वेद की मानें तो वयस्कों के लिए रोजाना सुबह खाली पेट गुनगुने पानी के साथ लहसुन की एक कच्ची कली का सेवन स्वास्थ्य के लिए काफी लाभकारी है। 8 साल से बड़े बच्चों को लहसुन की एक-चौथाई कली का पेस्ट बना कर दिया जा सकता है। यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर करने में कारगर है।
हृदय रोगों में फायदेमंद
लहसुन का नियमित रूप से सेवन हृदय की धमनियां खोलने और खून के प्रवाह को बढ़ाने में सहायक है, जिससे वयस्कों को हृदय संबंधी रोगों का खतरा कम हो जाता है। सुबह खाली पेट लहसुन की एक कली हाथ से दबा कर गर्म पानी के साथ बिना चबाए निगलनी चाहिए।
हाथ-पैर या जोड़ों के दर्द में दे आराम
लहसुन की कलियों का सेवन शरीर में वायु दोष के कारण होने वाली समस्याओं को कम करने में प्रभावी है। आयुर्वेद के अनुसार शरीर में ज्यादा वायु या गैस बनने से ब्लड सकुर्लेशन कम होता है, हाथ-पैरों में अकड़न या दर्द रहता है। एंटीऑक्सीडेंट तत्वों से भरपूर लहसुन के नियमित सेवन से शरीर की सभी इंद्रियों में रक्त संचार बेहतर होता है। हाथ-पैरों में दर्द और सूजन काफी कम होते हैं। शरीर में दर्द होने पर 50 ग्राम सरसों के तेल में 5 ग्राम लहसुन, 5 ग्राम अजवायन, 5 ग्राम सोंठ और 5-7 लौंग मिलाकर काले होने तक गर्म करें। तैयार तेल को किसी बोतल में छान लें। इस तेल से दर्द वाले स्थान पर मालिश करने से राहत मिलती है।
लहसुन एक बहुत ही उपयोगी औषधि है। प्राचीनकाल से इसका प्रयोग किया जाता रहा है और आधुनिक विद्वानों ने भी इसकी भूरि-भूरि प्रशंसा की है।
राजयक्ष्मा (Tuberculosis) एवं अन्य फुफ्फुसविकार, वातविकार, शैथिल्यप्रधान कुपचन (Atonic dyspepsia) एवं व्रण आदि के लिये यह बहुत ही लाभदायक सिद्ध हुआ है।
काश्यपसंहिता में लशुनकल्प नामक एक स्वतन्त्र अध्याय में इसका वर्णन किया गया है।
लहसुन उदर विकार, वातविकार नाशक ओषधि है। यदि इसे अनुपान के अनुसार इस्तेमाल करें, तो यह ह्रदय की रक्षा कर उसे मजबूत बनाता है।
लहसुन पेट की अनेक बीमारी, अपच, गैस आदि रोगों में राहत देता है।
धार्मिक ग्रन्थों में संभवतः इसके उग्रगन्ध के कारण इसका सेवन निषिद्ध माना है।
लहसुन उष्ण, दीपन, पाचन, वातहर, स्वेदजनन, मूत्रल, उत्तेजक, कफनि:सारक, बल्य, वृष्य, रसायन, दुर्गन्धहर एवं उत्तम प्रतिदूषक (Antiseptic) है ।
लहसुन में जो उड़नशील तैल होता है उसका उत्सर्ग, त्वचा, फुफ्फुस एवं वृक्क द्वारा होता है।
फुफ्फुस से उत्सर्ग के समय इससे कफ ढीला हो जाता है तथा उसमें के जीवाणुओं का नाश होकर कफ की दुर्गन्ध दूर होती है।
लहसुन को एक दिन में 2 या तीन पोथी से ज्यादा नहीं लेना चाहिए।
वातनाडी संस्थान पर लहसुन का उत्तेजक प्रभाव पड़ता है।
अधिक मात्रा में लहसुन के प्रयोग से वमन, विरेचन एवं शिरःशूल आदि लक्षण उत्पन्न होते हैं।
बच्चों में इसका सावधानी के साथ प्रयोग करना चाहिये। अधिक मात्रा में सेवन करने पर कभी-कभी मृत्यु भी हो सकती है ।
लहसुन का बाह्य प्रयोग त्वग्रोगकारक (Rubefacient) एवं प्रतिदूषक औषधि के रूप में किया जाता है। अधिक समय तक त्वचा के साथ सम्पर्क होने से स्फोट उत्पन्न होते हैं ।
यक्ष्मा दण्डाणु से उत्पन्न सभी विकृतियों जैसे फुफ्फुसविकार, स्वरयन्त्रशोथ, चर्मविकार, अस्थिव्रण एवं नाडीव्रण आदि में यह निश्चित लाभदायक सिद्ध हुआ है।
लहसुन के रस को इनमें पिलाया जाता है तथा इसका स्थानिक उपयोग भी किया जाता है।
स्वरयंत्र शोथ में इसका टिंक्चर २४ मि.ली. दिन में २, ३ बार देते हैं। पुराने कफविकार जैसे कास, श्वास, स्वरभङ्ग, श्वसनिका शोथ, श्वसनिकाभिस्तीर्णता (Bronchiectasis) एवं श्वासकृच्छ्र आदि में इसका अवलेह बनाकर उपयोग किया जाता है।
लहसुन एवं वायविडङ्ग का सेवन भी लाभदायक है। बच्चों के कुकास में इसको ३, ४ घण्टे पर सुंघाया जाता है तथा इसके रस को पिलाते भी हैं जिससे कष्ट कम हो जाता है।
फुफ्फुसकोथ (Gangrene of lungs) में इसके टिंक्चर (५ में १) का उपयोग बहुत सफल रहा है।
प्रारम्भ में इसको कम मात्रा में देना चाहिये तथा बाद में २० बूँद तक दिन में ३ बार देना चाहिये।
थोड़े ही समय में ज्वर, कफ की दुर्गन्ध, स्वेदाधिक्य एवं अग्निमांद्य आदि दूर होकर लाभ होता है। इसी प्रकार खण्डीय फुफ्फुसपाक (Lobar pneumonia) में भी इसके टिंक्चर को ३० बूँद हर चार घण्टे पर जल के साथ देने से ४८ घण्टे के अन्दर ही लाभ मालूम होने लगता है तथा ५, ६ दिन में ज्वर कम हो जाता है। इन सभी विकारों में आन्तरिक प्रयोग के साथ-साथ इसको छाती पर लगाते भी हैं।
वायविडङ्ग के साथ इसका क्षीरपाक सभी वातविकार में जैसे गृध्रसी, कटिग्रह, अर्दित, पक्षाघात, एकाङ्गघात, उरुस्तम्भ, अपतन्त्रक एवं अपस्मार आदि में लाभदायक है।
आन्तरिक प्रयोग के साथ इससे सिद्ध तैल की मालिश भी की जाती है।
अपस्मार में लहसुन का फांट भोजन के पूर्व एवं पश्चात् देने का विधान है।
अपतन्त्रक में इसको सुंघाया जाता है। इसी प्रकार ठण्डक लगने से उत्पन्न पीड़ा, जीर्ण आमवात एवं संधिशोथ तथा शिरःशूल आदि में इसको खिलाया जाता है तथा बाह्य लेप भी किया जाता है।
बच्चों के वात विकारों में इसकी मालिश विशेष लाभदायक है।
शैथिल्यप्रधान कुपचन (Atonic dyspepsia), आध्मान, उदरशूल, विसूचिका, वमन, गुल्म, उदावर्त, आंव एवं केंचुओं की बीमारी में इसका बहुत प्रयोग किया जाता है।
केंचुआ (Round worms) में १०-३० बूँद रस दूध में मिलाकर पिलाते हैं । वातगुल्म में इसको पीसकर घृत के साथ खिलाने से लाभ होता है।
ग्रहणीव्रण (Duodenal ulcer) में भी इसको लाभदायक माना गया है।
विषमज्वर में लहसुन को तैल या घृत के साथ सुबह खिलाने से लाभ होता है।
आन्त्रिक एवं तन्द्राभ ज्वर (Typhoid and Typhus) के प्रतिबन्धन के लिये इसके टिंक्चर को ४ मि.ली. हर ४ या ६ घण्टे पर शरबत के साथ देते हैं।
यदि रोग के प्रारम्भ में ही इसका प्रयोग किया जायेगा तो ज्वर बढ़ने नहीं पायेगा । इसका उपयोग आन्त्रिक प्रतिदूषक (Intestinal antiseptic) औषधि के रूप में किसी भी अवस्था में किया जा सकता है। बच्चों को २ मि.ली. की मात्रा में शरबत के साथ पर्याप्त है।
हार्ड प्रॉब्लम यानी हृद्रोग में इसके प्रयोग से आध्मान कम होकर हृदय के ऊपर का दबाव दूर होता है जिससे हृदय को बल प्राप्त होकर मूत्र अधिक होने लगता है।
सर्वाङ्गशोथ एवं जलोदर में लहसुन से लाभ होता है।
लहसुन के स्वरस को ३, ४ भाग जल में मिलाकर क्षत तथा दुर्गन्धित व्रण प्रक्षालन के काम में लाया जाता है जिससे वेदना कम होकर व्रण जल्दी ठीक होता है।
कार्बोलिक् एसिड (Carbolic acid) की अपेक्षा इससे धातुओं को कम नुकसान होता है। इसी प्रकार शोथ, विद्रधि, बालतोड़ एवं दाद आदि पर इसका लेप लाभदायक है।
लहसुनसे सिद्ध सर्षप तैल का उपयोग खुजली (पामा) में किया जाता है।
रोहिणी (Diphtheria) नामक अत्यन्त उग्र गले के विकार में इसकी एक-एक कली चूसने को दी जाती है। ३, ४ घण्टे में ६० ग्रा. तक लहसुन दिया जाता है।
विकृत कला (Membrane) के दूर होने पर दिन भर में ६० ग्रा. तक लहसुन देना चाहिये।
शिशुओं के लिये इसके रस को २०-३० बूँद हर चार घण्टे पर शरबत के साथ देना चाहिये । एक रोगी में नाडीव्रण (Sinus) के लिये इसके ताजे स्वरस को २ बूँद की मात्रा में हर छठे दिन स्थानिक सूचिकाभरण किया गया जिससे १० से.मी. गहरा नाडीव्रण २ महीने के अन्दर ठीक हो गया।
उपजिह्वा शोथ में लहसुन का स्थानिक प्रयोग सिल्हर नाइट्रेट् (Silver nitrate) की अपेक्षा अच्छा होता है।
कर्णशूल में इसके गुनगुने रस का या इससे सिद्ध तैल का उपयोग लाभदायक है।
लहसुन का तेल से बाधिर्य कम सुनने में भी लाभ होता है ।
आर्तवप्रवर्तक पीसीओडी या सोमरोग होने के कारण इसका उपयोग अनार्तव एवं कष्टार्तव आदि में किया जाता।
गर्भिणी में लहसुनका प्रयोग नहीं करना चाहिये।
पशु, मवेशियों में ॲन्ध्राक्स (Anthrax) नामक रोग के प्रतिबन्धन के लिये एवं सर्पविषादि में बाह्यभ्यन्तर प्रयोग किया जाता है।
*आंखों के नीचे होने वाले डार्क सर्कल्स या काले धब्बों से कैसे बचें.?*
*जानिये इनका कुदरती उपचार...*
आंखों के नीचे काले धब्बे होना आम समस्या है।
अधिकांशतः ये कम सोने, अधिक थकान होने, कमजोरी अथवा किसी बीमारी के कारण होते है।
प्राय: नींद न आने की बीमारी के कारण होते हैं और उनकी आंखों पर डार्क सर्कल्स या काले धब्बे पड़ जाते है।
नींद लेना स्वास्थ्य के लिये आवश्यक है।
यदि आपको नींद नही आती, आप को थकावट रहती है तो रोज सुबह घर में ही एक्ससाइज करनी चाहिये।
आंखों की चारों तरफ की त्वचा बड़ी नाजुक होती है। इसलिये सौन्दर्य प्रसाधन लगाते समय बड़ी सावधानी बरतनी चाहिये।
सोने से पहले त्वचा को नमी देने वाली क्रीम या लोशन इस्तेमाल करनी चाहिये।
रूई के फोहे को आंखों के इर्द-गिर्द लगाएं।
आंखों के लिये बादाम क्रीम सबसे उपयुक्त होती है। इससे रंग भी साफ होता है और साथ ही त्वचा का पोषण होता है।
कोई भी सौन्दर्य-प्रसाधन तत्व आंखों वाले क्षेत्र पर ज्यादा देर नहीं लगाना चाहिये।
चेहरे पर लगाया जाने वाला लेप आंखों के आसपास नहीं लगाना चाहिये।
आंखों पर खीरे का रस, आलू का रस तथा गुलाबजल को रूई के फोहे में भिगोकर आंखों पर रखना चाहिये।
: *दूध पीने का भरपूर लाभ लेने के लिए ध्यान रखें जरूरी बातें*
1 कई लोगों की आदत होती है, भोजन के बाद दूध पीने की। लेकिन खाना खाने के तुरंत बाद कभी भी दूध का सेवन न करें। इससे पचने में समय लगता है और आपको भारीपन महसूस होता है।
2 जब भी आप भोजन बाद दूध पी रहे हैं, तो आधा भोजन ही करें, वरना पाचन संबंधी समस्या से आप परेशान हो सकते हैं। खास तौर से रात में इसका ध्यान रखें।
3 खट्टी या नमकीन चीजों का सेवन दूध पीने के आधे या एक घंटे पहले ही कर लें या दूध पीने के बाद करें। अगर ऐसा नहीं किया तो ब्लोटिंग या डकार आने की समस्या हो सकती है।
4 प्याज और बैंगन के साथ कभी दूध का सेवन नहीं करें। इनमें मौजूद रसायन आपस में क्रिया कर त्वचा संबंधी रोग पैदा कर सकते हैं। इसलिए इनके सेवन में कुछ समय का अंतर रखें।
5 कभी भी ठंडा दूध न पिएं, ना ही इसमें चीनी का इस्तेमाल करें। ठंडा दूध धीरे पचता है जिससे पेट में गैस बन सकती है। और चीनी पोषक तत्वों को खत्म कर देती है और पाचन में समस्या पैदा करती है।
6 अगर आप ताकत और पोषण के लिए दूध पी रहे हैं, तो गाय का दूध लें। लेकिन अगर वजन बढ़ाना चाहते हैं तो भैंस का दूध प्रयोग करें। लेकिन भैंस का दूध कफ बढ़ाने का काम भी करता है, इसका ध्यान रखें।
*6 तरीके जो 7 दिन में पेट को अंदर कर देंगा*
1) चॉकलेट्स, आलू, अरबी और मीट आदि न खाएं और चावल भी मांड निकाल कर खाएं। ओवर ईटिंग न करें और बीच-बीच में भूख लगे तो सलाद गाजर, खीरा, ककड़ी भूने चने, सलाद, मुरमुरे, रोस्टेड स्नेक्स आदि खा सकते हैं।
2) रोजाना सुबह और शाम वॉक पर जाएं। कम से कम 4 कि.मी.वॉक करें। लंच के बाद भी कुछ देर जरुर वॉक करें।अगर आप रात में 8:30 बजे के बाद खाना खा रहे हैं, तो चपाती और चावल के बजाय दाल और सब्जियों को प्राथमिकता दें। रात में हल्का खाना खाएं।
3) टोंड दूध और टोंड दही, पनीर और अन्य सामग्री का इस्तेमाल करें। पानी पेट को ऐसे तत्व से भर देता है, जिसमें कोई कैलोरी नहीं होती। इससे व्यक्ति को पेट भरा होने का अहसास होता है और नतीजतन वह खाने के दौरान कम कैलोरी लेता है।पानी ज्यादा पीना चाहिए और मीठे और हाइकैलोरी वाले खाद्य पदार्थ कम लेने चाहिए।
4) खाने में ऊपर से नमक न मिलाएं। परंपरागत मसाले सिर्फ स्वाद नहीं बढ़ाते हैं , बल्कि उनमें माइक्रोन्यूट्रिएंट , ऐंटी ऑक्सीडेंट और फाइबर भी होते हैं। सिर्फ ध्यान रखें कि इन्हें भूनने के लिए ज्यादा तेल का इस्तेमाल न करें।
5) वजन कम करना चाहते हैं तो ज्यादातर सफेद चीजें ( आलू , मैदा , चीनी , चावल आदि ) कम करें और मल्टीग्रेन या मल्टीकलर खाने ( दालें , गेहूं , चना , जौ , गाजर , पालक , सेब , पपीता आदि ) पर जोर दें।
6) दिन भर के खाने में सबसे ज्यादा फोकस ब्रेकफास्ट पर होना चाहिए। अक्सर लोग वजन कम करने की धुन में ब्रेकफास्ट नहीं लेते लेकिन रिसर्च कहता हैं कि अगर नियमित रूप से ब्रेकफास्ट लिया जाए तो लंबी अवधि में वजन कम होता है।
: डेंगू के लिए #आयुर्वेद का अनुभूत योग
डेंगू हेतु स्वयं के द्वारा तैयार सप्तामृत स्वरस
१. गिलोय ५० ग्राम
२. तुलसी पत्र २५
3. छोटी पीपर ४
४. लौंग ७
५. सोंठ पाउडर ५ ग्राम
६. पपीते का आधा पत्ता या 10 ग्राम
७. मिश्री/ बुरा / गुड़ / चीनी 50 ग्राम
सबको लेकर १०० मिली पानी में लेकर ग्रायन्डर करके छान ले इसे २-२ छोटी चम्मच दिन में ४-५ बार ले बाकी को फ्रीज में रख दे जिससे खराब न हो, ३-४ दिन में डेंगू बिल्कुल ठीक हो जायेगा व प्लेटलेट्स बढ़कर सामान्य हो जाएंगे।
*हरड़ का थोड़ा सा पाउडर ऐसे उपयोग करें तो... बाल और दांत दोनों चमकने लगेंगे*
हरड़ को आयुर्वेद में बहुत उपयोगी माना गया है। यह त्रिफला के तीन फलों में सबसे गुणकारी माना गया है। बाजार में दो प्रकार की हरड़ मिलती है। बड़ी हरड़ और छोटी हरड़। हरड़ पेड़ के वे फल हैं जो गुठली पैदा होने से पहले ही गिर पड़ते हैं। हरड़ में एस्ट्रिन्जेन्ट, टैनिक अम्लए गैलिक अम्ल, चेबूलीनिक अम्ल और म्यूसीलेज । रेजक पदार्थ हैं एन्थ्राक्वीनिन जाति के ग्लाइको साइड्स। इसके अलावा हरड़ में दस प्रतिशत जल, 13.9 से 16.4 प्रतिशत नॉन टैनिन्स और शेष अघुलनशील पदार्थ होते हैं।इसके अलावा इसमें वैज्ञानिकों के अनुसार ग्लूकोज, सार्बिटाल, फ्रक्टोस, सुकोस, माल्टोस एवं अरेबिनोज हरड़ के प्रमुख कार्बोहाइड्रेट हैं। इसमें 18 प्रकार के अमीनो अम्ल पाए जाते हैं। हरड़ इतने गुणों से भरपूर है लेकिन अधिकांश लोग इसके प्रयोग नहीं जानते तो अगर आप भी उन्हीं लोगों में से एक हैं तो आइए हम बताते हैं आपको हरड़ के कुछ अचूक प्रयोग।
कब्ज के इलाज के लिए हरड़ को पीसकर पाउडर बनाकर या घी में सेकी हुई हरड़ की डेढ़ से तीन ग्राम मात्रा में शहद या सैंधा नमक में मिलाकर लेना चाहिए।
अतिसार होने पर हरड़ गर्म पानी में उबालकर प्रयोग की जाती है।
हरड़ का चूर्ण, गोमूत्र तथा गुड़ मिलाकर रात भर रखने और सुबह यह मिश्रण रोगी को पीने के लिए दें,इससे बवासीर तथा खूनी पेचिश आदि बिल्कुल ठीक हो जाते हैं।
लीवर, स्पलीन बढऩे की या पेट में कीड़ों की समस्या हो तो दो सप्ताह तक लगभग तीन ग्राम हरड़ के चूर्ण का सेवन करना चाहिए।
हरड़ का चूर्ण दुखते दांत पर लगाने से भी तकलीफ कम होती है।
एलर्जी से परेशान लोग हरड़ फल और हल्दी से तैयार लेप लगाएं।जब तक एलर्जी खत्म न हो जाए तब तक लेप जारी रखें।
हरड़ के फल को नारियल तेल में उबालकर लेप बनाएं और बालों में लगाएं। हरड़ के उपयोग से बाल काले और चमकीले बनते हैं।
हरड़ का लेप पतले छाछ के साथ बनाकर गरारे करने से मसूढ़ों की सूजन में भी आराम मिलता है।
*गैस की समस्या का इलाज*
- गैस की समस्या को दूर करने के लिए आप एक अदरक के टुकडे को देसी घी में पक लें. और फिर उस पर काला नमक डालकर खाएं इसके अलावा अदरक की चाय पीने से भी आपको एसिडिटी की प्रॉब्लम से राहत मिलती है.
- पका हुआ पाइनएप्पल खाएं या फिर आप इसका जूस पी एम इसकी एल्कलाइन प्रॉपर्टी गैस से तुरंत राहत दिलाने में बहुत मदद करती है.
- ठंडे पानी में 1 चम्मच भुना हुआ जीरा पाउडर घोलकर पीने से भी आपका डाइजेशन सुधर जाता है और गैस की प्रॉब्लम दूर हो जाती है.
- गैस की प्रॉब्लम को तुरंत दूर करने के लिए एक गिलास पानी में आधा चम्मच पुदीने का रस डालकर पिए इसके अलावा आप पुदीने की चाय भी पी सकते हैं.
- गैस की समस्या को दूर करने के लिए नारियल पानी एक बहुत बढ़िया उपाय है क्योंकि नारियल पानी पीने से आपका डाइजेशन सुधरता है और आपके पेट की तमाम तरह की प्रॉब्लम दूर हो जाती हैं और अगर गैस बन रही हो तो आप नारियल पानी पी लें इससे तुरंत गैस में आराम मिलेगा.
: नारियल तेल और कपूर से 5 अद्भुत फायदे......
🌷🌷🌷🌷🌷
नारियल तेल यूं तो सेहत और त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद है, लेकिन कपूर के साथ नारियल तेल का मेल किसी जादू से कम असर नहीं करता।
अब जानिये ये पांच फायदे भी..
(🙏🏻) एलर्जी..
त्वचा पर किसी भी तरह की एलर्जी हो या फिर फंगस, नारियल के तेल में कपूर को मिक्स करें और संबंधित स्थान पर लेप करें। एक ही बार प्रयोग से आप इसका प्रभाव देख सकते हैं।
(🙏🏻) पिंपल्स..
त्वचा पर किसी भी कारण से होने वाले पिंपल्स पूरी त्वचा पर फैलकर उसे खराब कर सकते हैं। इसपर नारियल तेल और कपूर का लेप लगाएं और खुद असर देखें कि पिंपल्स कम होते जाएंगे।
(🙏🏻) डैंड्रफ..
बालों में डैंड्रफ से परेशान हैं, तो नारियल तेल में जरा सा कपूर मिलाएं और सिर की त्वचा पर ऊंगलियों के पोरों से मालिश करें। जल्दी ही आपकी यह समस्या भी हल हो जाएगी।
(🙏🏻) झाइयां...
त्वचा पर किसी तरह के दाग या झाइयां होने पर आप नारियल तेल में कपूर डालकर मसाज कर सकते हैं। यह त्वचा की हर समस्या के लिए एक बढ़िया समाधान है।
(🙏🏻) खुजली..
त्वचा में खुजली होने पर यह तरीका बहुत ही जल्द असर करता है।
बस त्वचा पर इसकी अच्छी तरह से मसाज करें और सभी सूक्ष्म बैक्टीरिया के साथ खुजली से भी निजात पाएं।
*हरड़ का थोड़ा सा पाउडर ऐसे उपयोग करें तो... बाल और दांत दोनों चमकने लगेंगे*
हरड़ को आयुर्वेद में बहुत उपयोगी माना गया है। यह त्रिफला के तीन फलों में सबसे गुणकारी माना गया है। बाजार में दो प्रकार की हरड़ मिलती है। बड़ी हरड़ और छोटी हरड़। हरड़ पेड़ के वे फल हैं जो गुठली पैदा होने से पहले ही गिर पड़ते हैं। हरड़ में एस्ट्रिन्जेन्ट, टैनिक अम्लए गैलिक अम्ल, चेबूलीनिक अम्ल और म्यूसीलेज । रेजक पदार्थ हैं एन्थ्राक्वीनिन जाति के ग्लाइको साइड्स। इसके अलावा हरड़ में दस प्रतिशत जल, 13.9 से 16.4 प्रतिशत नॉन टैनिन्स और शेष अघुलनशील पदार्थ होते हैं।इसके अलावा इसमें वैज्ञानिकों के अनुसार ग्लूकोज, सार्बिटाल, फ्रक्टोस, सुकोस, माल्टोस एवं अरेबिनोज हरड़ के प्रमुख कार्बोहाइड्रेट हैं। इसमें 18 प्रकार के अमीनो अम्ल पाए जाते हैं। हरड़ इतने गुणों से भरपूर है लेकिन अधिकांश लोग इसके प्रयोग नहीं जानते तो अगर आप भी उन्हीं लोगों में से एक हैं तो आइए हम बताते हैं आपको हरड़ के कुछ अचूक प्रयोग।
कब्ज के इलाज के लिए हरड़ को पीसकर पाउडर बनाकर या घी में सेकी हुई हरड़ की डेढ़ से तीन ग्राम मात्रा में शहद या सैंधा नमक में मिलाकर लेना चाहिए।
अतिसार होने पर हरड़ गर्म पानी में उबालकर प्रयोग की जाती है।
हरड़ का चूर्ण, गोमूत्र तथा गुड़ मिलाकर रात भर रखने और सुबह यह मिश्रण रोगी को पीने के लिए दें,इससे बवासीर तथा खूनी पेचिश आदि बिल्कुल ठीक हो जाते हैं।
लीवर, स्पलीन बढऩे की या पेट में कीड़ों की समस्या हो तो दो सप्ताह तक लगभग तीन ग्राम हरड़ के चूर्ण का सेवन करना चाहिए।
हरड़ का चूर्ण दुखते दांत पर लगाने से भी तकलीफ कम होती है।
एलर्जी से परेशान लोग हरड़ फल और हल्दी से तैयार लेप लगाएं।जब तक एलर्जी खत्म न हो जाए तब तक लेप जारी रखें।
हरड़ के फल को नारियल तेल में उबालकर लेप बनाएं और बालों में लगाएं। हरड़ के उपयोग से बाल काले और चमकीले बनते हैं।
हरड़ का लेप पतले छाछ के साथ बनाकर गरारे करने से मसूढ़ों की सूजन में भी आराम मिलता है।
घरेलू उपचार......
🏵️पैरों के तलवे की जलन .....
🏵️लौकी काटकर पैरों के तलवों पर मलें। लौकी का रस भी लगा सकते है । कहीं की भी जलन में , लौकी का गूदा या रस लगाने से जलन में , आराम होता है ।
🏵️ करेले के पत्तों का या करेले का रस की मालिस करने से आराम होता है ।
🏵️ शुद्ध घी की मालिस करने से भी, लाभ होता है ।
🏵️ मसूर की दाल का आटा पीसकर और पानी में घोलकर उबालें। ठंडा होने पर, चार बार नित्य पैरों पर लेप करें ।
🏵️ सूखा धनिया 10 ग्राम भिगोकर व पीसकर, ठंडाई की तरह सेवन करें । शरीर व पैरों की जलन में , लाभ होता है ।
: *यह 12 घेरलू नुस्खे पढ़ लो कुछ नया सीखने मिलेगा।*
🌷. नींबू के पत्तों का रस निकालकर नाक से सूंघे जिस व्यक्ति को हमेशा सिरदर्द बना रहता है , उसे भी इससे शीघ्र आराम मिलता है ।
🌷. काली मिर्च को सुई से छेद कर दे फिर मोमबत्ती की लौ से जलाएं । जब धुआं उठे तो इस धुएं को नाक से अंदर खीच लें । इस प्रयोग से सिर दर्द ठीक हो जाता है । हिचकी चलना भी बंद हो जाती है ।
🌷. दो छोटे चम्मच आंवला का पावडर एक कटोरी में ले और उसमें एक छोटा चम्मच शहद डालकर अच्छी तरह से मिला लें । हर रोज सुबह इस मिश्रण का सेवन करने से अस्थमा में लाभ होगा ।
🌷. निम की निम्बोली के अंदर की सुखी गिरी और कालिमिर्ची को बराबर मात्रा में लेकर दोनों को कूटपीसकर आधा चम्मच रोजाना सुबह भूखे पेट पानी के साथ 2 सप्ताह तक लें । चाहे केसा भी बवासीर हो ठीक हो जाता है ।
🌷. सहजन ( Moringa ) के पेड के पत्ते का रस 3 चम्मच की मात्रा में प्रतिदिन सेवन करने से त्वचा का ढीलापन दूर होता है और चर्बी की अधिकता कम होती है ।
🌷. दांत में कीड़े लगने और दर्द होने पर लौंग को दांत के खोखले स्थान में रखने से या लौंग का तेल लगाने से दर्द नही होता साथ ही कीड़ा बहार निकल जाता है ।
🌷. पिसी हुई कलौंजी, आधा चम्मच और एक चम्मच शहद मिलाकर चाटने से मलेरिया का बुखार ठीक होता है ।
🌷. रात में एक गिलास दूध में दो चम्मच शहद मिलाकर लेने से डाइजेस्टीव सिस्टम में सुधार होता है । कब्ज की समस्या से छुटकारा मिलता है । इसे रोजाना लेने से पेट व आंत से जुड़ी समस्याएं नहीं होती हैं ।
🌷. बच्चा सोते समय पेशाब करता हो तो भुने काले तिलों को गुड़ के साथ मिलाकर उसका लड्डू बना लीजिए । बच्चे को यह लड्डू हर रोज रात में सोने से पहले खिलाइए , बच्चा सोते वक्त पेशाब नही करेगा ।
🌷. आँवला चूर्ण 5 - 10 ग्राम 1 चम्मच शहद में मिलाकर सुबह खाली पेट चाटने से थाइरॉइड जैसी गंभीर बीमारी भी 1 - 2 महीने में घुटने टेक देती है ।
🌷. सरसों के बीजों से निकाला गया सरसों का तेल बालों के लिए काफी फायदेमंद होता है । विटामिन - A से परिपूर्ण येतेल बालों को पोषण प्रदान करने के साथ बालों की वृद्धि भी करता है।
🌷. गाय का घी नाक में डालने से कान का पर्दा बिना आपरेशन के ही ठीक हो जाता है ।
*सर्दियों में निखरी त्वचा पाना है? तो लगाएं ग्लिसरीन और गुलाब जल*
1 ग्लिसरीन के साथ गुलाबजल का मिश्रण आपकी त्वचा को नमी के साथ-साथ निखार भी देता है। सर्दियों में रूखी त्वचा से आप भी परेशान हो रहे हैं, तो ग्लिसरीन और गुलाबजल मिलाकर सोते वक्त अपनी त्वचा पर जरूर लगाकर देखें।
2 इस मिश्रण का त्वचा पर प्रयोग कर आप अपनी त्वचा को मौसम के अनुकूल आसानी से बना सकते हैं। यह आपकी त्वचा का रूखापन, मृत त्वचा ओर अन्य अनियमितता को हटाकर कंडिशनिंग करता है।
3 बढ़ती उम्र के लक्षणों को कम कर यह आपको जवां दिखने में मदद करता है। गुलाबजल में एंटी एजिंग गुण मौजूद होते हैं और ग्लिसरीन का इस्तेमाल आपकी झुर्रियों को कम कर सकता है।
4 सर्दी के दिनों में देखभाल के बावजूद त्वचा बेजान और ढीली हो जाती है। इससे बचने के लिए ग्लिसरीन और गुलाबजल का मिश्रण आपके लिए काम की चीज है। यह आपकी त्वचा करे खिला-खिला बनाए रखने में मददगार है।
5 रात के समय इस मिश्रण का इस्तेमाल आपकी त्वचा को ठंड के दुष्प्रभाव से बचाता है, साथ ही उसे चिकनाई प्रदान करता है जिससे त्वचा में रूखापन नहीं रहता और उसकी दमक भी बढ़ जाती है।
*मोतियों जैसे सफेद दांत पाने के लिए ये जबरदस्त घरेलू उपाय जरूर आजमाएं*
1) आधा चम्मच बेकिंग सोडा में चुटकी भर नमक मिलाएं और इस मिश्रण को ब्रश में लगाकर दांतों पर हल्के-हल्के से मसाज करें। इसके बाद टूथपेस्ट से दांत साफ करें। इस उपाय से दांतों की चमक बढ़ने में मदद मिलेगी।
2) मुंह की दुर्गंध दूर करने के लिए सुबह ब्रश करने के बाद व्हाइट विनेगर में बराबर मात्रा में पानी मिलाकर कुल्ला करें। इस उपाय से मुंह की दुर्गंध दूर होने में मदद मिलती है।
3) दांतों में सड़न लगने से बचाने के लिए 1-2 अखरोट की गिरी को कूटें और इसे टूथपेस्ट में मिलाकर इससे ब्रश करें।
4) दांतों की सफाई करने के लिए स्ट्रॉबेरी का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। इसके लिए एक पकी हुई स्ट्रॉबेरी को मैश कर लें, अब उसमें चुटकी भर खाने का सोडा मिलाएं। फिर इसे ब्रश में लगाकर दांतों की सफाई करें।
*गलत वक्त पर फल खाने से होते हैं गंभीर नुकसान, जानें 5 तथ्य*
1 फलों को खाने के पहले या ठीक बाद में खाने से हमेशा बचें। फलों का सेवन या तो खाने के आधे घंटे पहले कर लें या फिर खाना खाने के कम से कम एक घंटा बाद तक न करें, अन्यथा आपको पाचन व एसिडिटी संबंधी समस्या हो सकती है।
2 सुबह के समय फलों का सेवन स्वास्थ्य और शरीर के लिए सबसे फायदेमंद होता है, लेकिन कुछ फल ऐसे हैं जिन्हें सुबह खाली पेट खाने से हमेशा बचना चाहिए। सीट्रिक यानि खट्टे फलों को खाली पेट खाने से एसिडिटी बढ़ सकती है।
3 अगर आप भी उन लोगों में शामिल हैं जो स्वाद बढ़ाने या हेल्थ के लिए फलों को दही या दूध के साथ खाते हैं, तो ऐसा बिल्कुल न करें। यह आपको स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दे सकता है।
4 कुछ फल किडनी स्टोन के मरीजों के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं, इसलिए पहले पूरी जानकारी लें तभी किसी फल का सेवन करें। अगर तरबूज खा रहे हैं तो बेहतर होगा कि इसके साथ कुछ न खाएं।
5 फलों का चयन अपनी तासीर के अनुसार करें। अगर आपकी तासीर ठंडी है, तो केले, संतरा, अनानास जैसे फलों को ज्यादा न खाएं। वहीं अगर आपकी तासीर गर्म है तो आम और पपीते जैसे फलों का सेवन कम ही करें।
: *डायरिया होने पर यह घरेलू उपाय आजमाएं*
1 एक गिलास पानी में दो चम्मच शकर और चुटकी भर नमक और नींबू के रस की कुछ बूंदें मिलाकर बच्चे को पिलाएं।
2 नारियल पानी पिलाना भी फायदेमंद होगा, अत: कच्चे नारियल का पानी बच्चे को पिलाएं जिससे पोषक तत्व भी मिलें और डायरिया से राहत भी मिले।
3 दाल का पानी, चावल का मांड, दही केला, हल्की चाय व हल्का पाचक भोजन दें।
: *चाय के साथ क्या खाना हो सकता है खतरनाक? जानना चाहते हैं तो इसे जरूर पढ़ें*
1 बेसन की चीजें - नमकीन हो, मठरी हो या फिर कुछ और, हर मौसम में बेसन से बनी चीजों का चाय के साथ सेवन सबसे कॉमन है। लेकिन अगर आपकी भी यही आदत है तो ठहरिए, यह आदत हेल्दी नहीं है। हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि चाय के साथ बेसन की चीजों को नहीं खाना चाहिए यह शरीर में पोषक तत्वों की कमी करते हैं। इसके अलावा चाय के साथ बेसन की चीजों का सेवन पेट और पाचन संबंधी समस्याएं भी पैदा कर सकती हैं।
2 कच्ची चीजें - कच्ची चीजें जैसे सलाद, अंकुरित अनाज या फिर उबला हुआ अंडा जैसी चीजें भी चाय के साथ लेना आपकी सेहत और पेट को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा यह गर्म और ठंडे का सम्मिश्रण होगा जो पेट संबंधी समस्याएं भी दे सकता है।
3 हल्दी वाली चीजें - अगर आप चाय के साथ या चाय पीने के तुरंत बाद ऐसी चीजों का सेवन करते हैं जिसमें हल्दी की मात्रा अधिक हो, तो यह भी आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसका प्रमुख कारण है चाय और हल्दी में मौजूद रासायनिक तत्व, जो आपस में क्रिया करके आपके पेट में रासायनिक क्रिया कर पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं एवं पेट के लिए नुकसानदायक तत्वों का निर्माण कर सकते हैं।
4 नींबू - चाय के साथ किसी ऐसी चीज का प्रयोग भी न करें जिसमें नींबू की मात्रा हो, यह नुकसानदायक है। कई लोग चाय में नींबू निचोड़कर लेमन टी बनाकर पीते हैं। लेकिन यह चाय एसिडिटी और पाचन संबंधी और गैस की समस्या भी पैदा कर सकती है।
*इन 10 समस्याओं में टॉनिक है सरसों का तेल, जानिए इसके फायदे*
1 सरसों के तेल को बहुत पौष्टिक माना जाता है, इसलिए इसका प्रयोग खाना बनाने के लिए भी किया जाता है। इसकी तासीर गर्म होने से सर्दियों में यह अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
2 सरसों के तेल की मालिश करने से शरीर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और रक्त संचार भी बेहतर होता है। यह शरीर में गर्माहट पैदा करने में भी मददगार होता है।
3 दांतों की तकलीफ में सरसों के तेल में नमक मिलाकर रगड़ने से फायदा होता है, साथ ही दांत पहले से अधिक मजबूत हो जाते हैं।
4 त्वचा संबंधी समस्याओं में भी बेहद फायदेमंद होता है। यह शरीर के किसी भी भाग में फंगस को बढ़ने से रोकता है और त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाता है।
5 यह बालों की जड़ों को पोषण देकर रक्तसंचार बढ़ाता है जिससे बालों का झड़ना बंद हो जाता है। इसमें ओलिक एसिड और लीनोलिक एसिड पाया जाता है, जो बालों की ग्रोथ बढ़ाने के लिए अच्छे होते हैं।
6 सरसों तेल को कई लोग एक टॉनिक के रूप में भी प्रयोग करते हैं। यह शरीर की कार्य क्षमता बढ़ा कर शरीर की कमजोरी को दूर करने में सहायता करता है।इस तेल की मालिश के बाद स्नान करने से शरीर और त्वचा दोनों स्वस्थ रहते हैं।
7 ठंड के दिनों में सरसों का तेल गर्माहट के लिए रामबाण इलाज है, हल् के गर्म तेलकी मसाज से रूखी-सूखी त्वचा भी नर्म, मुलायम व चिकनी हो जाती है। सरसों के तेल की मालिश से गठिया रोग और जोड़ो का दर्द भी ठीक हो जाता है।
*भोजन के बाद सौंफ खाने के 9 बेहतरीन फायदे और जबरदस्त नुस्खे*
1 भोजन के बाद रोजाना 30 मिनट बाद सौंफ लेने से कॉलेस्ट्रोल काबू में रहता है।
2 पांच-छे ग्राम सौंफ लेने से लीवर और आंखों की रोशनी ठीक रहती है। अपच संबंधी विकारों में सौंफ बेहद उपयोगी है। बिना तेल के तवे पर सिकी हुई सौंफ और बिना तली सौंफ के मिक्चर से अपच होने पर बहुत लाभ होता है।
3 दो कप पानी में उबली हुई एक चम्मच सौंफ को दो या तीन बार लेने से अपच और कफ की समस्या समाप्त होने में मदद मिलती है।
4 अस्थमा और खांसी के उपचार में भी सौंफ का सेवन सहायक है।
5 कफ और खांसी होने पर भी सौंफ खाना फायदेमंद होता है।
6 गुड़ के साथ सौंफ खाने से मासिक धर्म नियमित होने लगते है।
7 यह शिशुओं के पेट और उनके पेट के अफारे को दूर करने में बहुत उपयोगी है।
8 एक चम्मच सौंफ को एक कप पानी में उबलने दें और 20 मिनट तक इसे ठंडा होने दें। इससे शिशु के कॉलिक का उपचार होने में मदद मिलती है। शिशु को एक या दो चम्मच से ज्यादा यह घोल नहीं देना चाहिए।
9 सौंफ के पावडर को शकर के साथ बराबर मिलाकर लेने से हाथों और पैरों की जलन दूर होती है। भोजन के बाद 10 ग्राम सौंफ लेनी चाहिए।
*बहुत ही गुणकारी व कई बीमारियों में लाभकारी है मैथी दाना*
• अगर आप वजन कम करना चाहते हैं तो रोज सुबह खाली पेट मैथी दाने का सेवन करें। यह आपको वजन कम करने में बहुत फायदा पहुंचाएगा।
• एसिडिटी की प्रॉब्लम होगी दूर : अगर किसी को एसिडिटी की परेशानी है, तो उन लोगों के लिए भी मैथी दाना फायदेमंद होता है।
• शुगर के मरीजों को मैथी दाने का रोजाना सेवन करना चाहिए। यह उनके शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करता है।
• कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मैथीदाना बहुत फायदेमंद होता है। यदि आपके शरीर में कॉलेस्ट्राल की समस्या है तो आप इसका सेवन जरूर करें।
• बालों के झड़ने की समस्या से निजात दिलाने में भी मैथी दाना बहुत फायदा करता है। इसका सेवन बालों को खूबसूरत, घना और सॉफ्ट बनाने में मदद करता है। चाहे तो आप इसे अपने बालों पर लगा भी सकते हैं।
*जिनके बाल झड़ते हों, वे कच्चे पालक का सेवन करें*
पालक में विटामिन ए,बी,सी, लोहा, कैल्सियम, अमीनो अम्ल तथा फोलिक अम्ल प्रचुर मात्रा में पाया जाता है | कच्चा पालक खाने में कडवा और खारा लगता है, परन्तु बहुत ही गुणकारी होता है | पालक का रस सम्पूर्ण पाचन -तंत्र की प्रणाली ( पेट,छोटी-बड़ी आंतें ) के लिए सफाई-कारक एवं पोषण-कर्ता है | कच्चे पालक के रस में प्रकृति ने हर प्रकार के शुद्धिकारक तत्व रखे है | पालक संक्रामक रोग तथा विषाक्त कीटाणुओं से उत्पन्न रोगों से रक्षा करता है | इसमें विटामिन ‘ए’ पाया जाता है जो म्यूक्स मेम्ब्रेन्स की सुरक्षा के लिए उपयोगी है |दही के साथ कच्चे पालक का रायता बहुत ही स्वादिष्ट और गुणकारी होता है | इसलिए गुणों में पालक अन्य सभी शाकों में सर्वोपरि है | इसका रस यदि पीने में अच्छा न लगे तो इसके रस में आंटा गुंथकर रोटी बनाकर खाने चाहिए | पालक रक्त में लाल कण बढाता है | कब्ज़ दूर करता है | पालक, दाल व अन्य सब्जियों के साथ खायें | इसमें पाया जाने वाला विटामिन ‘ए’ विशेष मात्र में होता है जो बालों के लिए अत्यंत जरुरी होता है | जिसके बाल झाड़ता हो ,वो कच्चे पालक का सेवन करें |
*टमाटर करेगा कई रोगों का उपचार, जानिए क्यों ये है हेल्थ के लिए वरदान*
1 टमाटर में भरपूर मात्रा में कैल्शियम, फास्फोरस और विटामिन सी पाया जाता है। एसिडिटी की समस्या होने पर टमाटरों की खुराक बढ़ाने से इस समस्या से निजात मिलता है।
2 टमाटर में काफी मात्रा में विटामिन 'ए' पाया जाता है, जो हमारी आंखों के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
3 टमाटर खाने से पाचन शक्ति बढ़ती है और गैस की समसा भी दूर होती है।
4 डॉक्टरो के अनुसार टमाटर के नियमित सेवन से श्वास नली बिल्कुल साफ रहती है और खांसी, बलगम की शिकायत खत्म होती है।
5 बच्चों को सूखा रोग होने पर टमाटर का रस पिलाने से फायदा होता है। साथ ही ये उनके तेजी से विकास में भी मदद करता है।
6 गर्भवती महिलाओं के लिए भी सुबह एक गिलास टमाटर के रस का सेवन फायदेमंद होता है।
7 डाइबिटीज व दिल के मरिजों की सेहत के लिए टमाटर बहुत उपयोगी होता है।
8 अगर पेट में कीड़े होने की शिकायक हो, तो सुबह खाली पेट टमाटर में पिसी हुई काली मिर्च लगाकर खाने से कीड़े मर कर निकल जाते हैं। आप चाहे तो काली मिर्च डले हुए टमाटर का सूप पी सकते हैं।
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