Friday, 16 December 2022

जौनपुर सहित भारत के सभी व्यापारियों से एक विनम्र प्रश्न बड़ी हुई जीएसटी के कारण आप घाटे में हैं और भारत बंद का आयोजन कर रहे हैं लेकिन क्या पूरे जौनपुर में एक भी दुकानदार बनिया ऐसा है जो खुलेआम कह सके या लिखकर दे सके कि उसके दुकान में सारा शुद्ध सामान बिकता है कोई भी मिलावटी सामान नहीं है वह शुद्ध डालता है और गुणा गणित जोड़ में भी बेईमानी नहीं करता है

 जौनपुर सहित भारत के सभी व्यापारियों से एक विनम्र प्रश्न बड़ी हुई जीएसटी के कारण आप घाटे में हैं और भारत बंद का आयोजन कर रहे हैं लेकिन क्या पूरे जौनपुर में एक भी दुकानदार बनिया ऐसा है जो खुलेआम कह सके या लिखकर दे सके कि उसके दुकान में सारा शुद्ध सामान बिकता है कोई भी मिलावटी सामान नहीं है वह शुद्ध डालता है और गुणा गणित जोड़ में भी बेईमानी नहीं करता है

एक खोवा मंडी है सारा खोवा नकली है झूठे ही 2 लोग अगर कह दे छापा पड़ने वाला है तो मिनट भर में सारी खोवा मंडी साफ हो जाती है जनपद के सभी व्यापारियों की यही हालत है अगर किसी के भी दुकान की जांच किसी भी सामान की करें तो गारंटी के साथ नकली निकलेगा

बाजार में बिकने वाला सरसों के तेल से लेकर डालडा घी सब कुछ नकली है शहद नकली है यहां तक कि मेवा इत्यादि वासपित् करके उसका रस निकाल कर बेचा जाता है दूध और दूध से बने सारे पदार्थ हैं रसायनों के द्वारा बने होते हैं दूध देश में है ही नहीं और दूध का छेना पनीर मक्खन लस्सी मट्ठा दही अपार मात्रा में हर दुकान पर कहां से उपलब्ध है

इतना ही नहीं अधिकांश वृद्धि और एक्सपायरी डेट के सामान हर दुकानदार बेच रहा है दवाओं का भी यही हाल है एक तरफ आप महंगाई और जीएसटी का रोना रो रहे हो दूसरी तरफ इन सबके बावजूद भी सबके पास गाड़ी बंगला खेत फार्म हाउस है वह कहां से और कैसे हो रहा है

जनपद में 99% दुकानदार सामान लेने के बाद रसीद नहीं देते हैं मांगने पर हीला हवाली करते हैं झगड़ा भी कर लेते हैं ₹200 से ₹300 किलो तक तेल और दाल भी करेंगे वह भी नकली ऐसा क्यों है

ज्वेलर्स का हाल तो और खराब है 24 कैरेट का दाम 18 कैरेट सोना बेच कर लेते हैं और उसमें भी टाका इत्यादि का अलग से काट लेते हैं जब वापस करने जाओ तो उसमें एक चौथाई काट लेते हैं पता लगा 1 वर्ष भी नहीं हुआ सभी के पास बड़े-बड़े प्रतिष्ठान बन गए और यह जनता का खून चूस कर घर बेईमान लोग नगर सेठ बन जाते हैं हर जगह पर कुर्सी लगाकर मुख्य अतिथि अध्यक्ष पद की शोभा बढ़ाते हैं लाज शर्म तो है नहीं

5 परीक्षा डॉक्टर तो बहुत अच्छे हैं लेकिन 95% शैतान और राक्षस को भी मात देने वाले हैं आज देश में 95% डिलीवरी ऑपरेशन से हो रही है उसका कोई जिम्मेदार है ठीक उसी तरह जैसे सब को आईना दिखाने वाला सर्वोच्च न्यायालय अपने 5:30 करोड़ लंबित मुकदमों पर बगले झांकने लगता है वही हाय डॉक्टरों का है हद तो यह हो गई है कि उनके द्वारा लिखी दवाई केवल उनके हॉस्पिटल के मेडिकल स्टोर पर ही मिलती हैं इतना सब पैसा लूट कर क्या करोगे अगली पीढ़ी में सब बर्बाद हो जाएगा

यही हाल होटल वाले ढाबे वाले हलवाई लोगों का है सभी अनाप-शनाप अनर्गल काम करके पैसा कमा रहे हैं आए दिन देह व्यापार करने वाले नगर के प्रतिष्ठित होटलों से पकड़े जाते हैं यह सब करने के बाद भी अगर आप भारत बंद कर रहे हैं तो आप लोगों जैसा नैतिक महापुरुष सारे संसार में मिलना मुश्किल ही है

यही हाल पेट्रोल पंप ओं का भी है हर जगह प्रति लीटर 100 से 200 मिलीलीटर कमतौल आ जाता है और अक्सर वाद विवाद होता रहता है हलवाई लोगों की हालत तो यह है कि 500 लोगों के लिए 1000 लोगों का सामान खरीद लेते हैं और ढाई सौ लोगों का भोजन बनाकर बाकी सब बेच लेते हैं यहां तक कि गाजर का हलवा पनीर की सब्जी और इसी तरह अन्य सामान बगल के होटलों से कांटेक्ट करके चुपके से उन्हें बेच देते हैं और असली माल धीरे से पार कर देते हैं

मैंने कई जगह स्वयं इसको अनुभव किया है कि अगर आप 15 या 20 सामान लिस्ट बनाकर ले जाते हैं और खुद से नहीं जोड़ते हैं तो उसमें आपको कम से कम 20% से लेकर 30% तक घाटा उठाना निश्चित है क्योंकि वह जानबूझकर आपको हजार पांच सौ रुपए ज्यादा जोड़ देता है और अगर आप पकड़ लिए तो हाथ जोड़कर माफी मांग लेता है और भारत के 95% लोग कभी भी रसीद और दुकानदार का लिखा हुआ जोड़ मिलाते नहीं हैं

इसके बाद भी कोई भी व्यापारी ऐसा नहीं है जो सारी सुविधाओं से युक्त ना हो और दिन दूनी रात चौगुनी उन्नति नहीं कर रहा हो कभी सरकार ने यह जनता ने पूछा कि भाई इतना बड़ा घाटा होने के बाद भी आप इतना अपार पैसा कहां से कम आ रहे हैं सारे मैरिज लॉन सारे पेट्रोल पंप सारी अच्छी-अच्छी चीजें और हर सर्वोत्तम वस्तुएं व्यापारी लोग ही उपयोग में ला रहे हैं नेता माफिया लोगों और गुंडे बदमाशों से इनके मधुर संबंध होते हैं आप ही उन्नति देश के लिए क्यों नहीं करते जिस तरह अपना व्यापार चिकित्सा चार पांच साल में ही 10 गुना कर लेते हैं सरकार को चाहिए आप लोगों को अपना सलाहकार बनाकर देश को अमेरिका रूस चीन से बहुत आगे ले जाए एक बार सुना गया था चिदंबरम ने गमले में 40 करोड़ की गोभी पैदा किया आप लोग तो उससे भी आगे निकल गए हैं

मिठाई वालों की हालत और भी खराब है सब लोग असली मिठाई बेचने का दावा करते हैं और जौनपुर का कोई भी मिष्ठान भंडार चाहे जो भी हो किसी भी परीक्षण में खड़ा नहीं उतर पाया है मोटर लेनदेन करके अपनी इज्जत और प्रतिष्ठा बचा कर दी गई रकम जनता से पैसे वसूल ता है व्यापारियों को तो कोई नुकसान नहीं है जितना जीएसटी बढ़ता है उससे ज्यादा जनता से वसूल लेते हैं जिस तरह सड़क पर दौड़ने वाले वाहन से होता है असली माल तो जनता पर पड़ती है

पूरे देश की अधिकतर बिजली पानी और सुख सुविधाओं का लाभ है व्यापारी करते हैं जहां पर गरीब और मध्यम वर्ग को ₹500 से लेकर ₹2000 प्रति माह मीटर रीडर विल जबरदस्ती लगाता है और उसे देना पड़ता है क्योंकि सुनने वाला कोई नहीं है उसी तरह व्यापारी लोग निडर होकर 1000000 1500000 रुपए की बिजली प्रत्येक घर के हिसाब से खर्च करते हैं बाद में बिजली विभाग में बैठे दलाल और उनके आका मिलकर ₹50000 में सुलह करा कर मामला रफा-दफा कर देते हैं झटका सरकार को और जनता को लगता है आम जनता की कोई सुनने वाला नहीं है

तो इस प्रकार इतने महान व्यापारी वर्ग और बढ़िया लोगों को मैं कोटि-कोटि वंदन नमन और अभिनंदन करता हूं और आशा करता हूं कि यह लोग इसी प्रकार से अपने त्याग तपस्या और बलिदान से भारत को सोने की चिड़िया बनाते रहेंगे लगता है सरकार ने इन्हें जबरदस्ती दुकान पर बैठा कर कहा है आपको व्यापार करना ही होगा और इसलिए लोग सड़क पर उतर आए हैं कि हम जबरदस्ती व्यापार नहीं करेंगे शायद जबरदस्ती व्यापार कराने के कारण ही सड़क पर बढ़कर मकान दुकान बना लेते हैं उसके बाद सड़क पर अपनी कुर्सी मेज और सामान फैला देते हैं और इस प्रकार 50 फीट की सड़क 25 फीट में सिमट जाती है और भूल से अगर आप साइकिल मोटरसाइकिल या चार पहिया लेकर दुकान के सामने खड़े हो गए और सीधे साधे हैं तो यह सज्जन दुकानदार आप से मारपीट करने पर उतारू हो जाएंगे यही हाल सब्जी मंडी में सब्जी वालों का है धुआंधार फायदा कमा कर मारपीट करना इनकी आम आदत है और झगड़ा होने पर सभी सब्जी वाले दुकानदार रिक्शावाला वाले एकजुट हो जाते हैं डॉ दिलीप कुमार सिंह
 इन ब्यापारियो के दुकान के बाहर ठेले वाला खडा हो जाये तो आफत आ जाती है
अगर किसी छोटे व्यवसायी को कोई परेशान करता है तब ब्यपारी वर्ग नही दिखता है

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