सबसे बड़ा कारण क्षत्रिय धर्म के तेज से युक्त सदाचार संस्कार से भरी हुई नारियों ने जब से अपना ही घर जलाना टीवी मोबाइल और फिल्मों के चक्कर में पड़कर वेश्या जैसी स्त्रियों का अनुकरण करना शुरू कर दिया तब से सब कुछ खंडहर बन गया
मैंने अपने घर को ऐसा होते आँख से देखा है।
हमारे जौनपुर, आजमगढ़ के बहुत गाँव में ठाकुर साहब के पास 120 बीघा खेत था। दरवाजे पर ट्रैक्टर, 10 भैंस, घर पर हमेशा 10-35 लोग खाना खाते थे। पूरे इलाके में इज्जत थी।
आज... उसी हवेली में 4 हिस्से हो गए हैं। बीच में दीवार उठ गई है। एक हिस्सा बिक गया, दो हिस्सों में ताला लगा है, एक में केस चल रहा है। लड़के बनारस, दिल्ली कमाने चले गए।
सोचा, जमीन तो वही है, फिर पैसा कहाँ गया?
इस पर अमेरिका में 3000 अमीर परिवारों पर 20 साल तक रिसर्च हुई। और जो बात निकली, वो बिल्कुल हमारे पूरब की कहानी है।
*90% परिवारों का पैसा तीसरी पीढ़ी तक खत्म हो जाता है। कारण क्या?*
लोग सोचते हैं - बाजार, किस्मत, खर्चा।
रिसर्च कहती है - *कारण पैसा नहीं है।*
*60% कारण - घर में बात बंद हो जाना।*
दादा जब तक था, सब एक जगह बैठते थे। दादा गया तो भाई-भाई ने अलग-अलग बैठक बना ली। रसोई अलग, खेत अलग, दिल अलग। एक-दूसरे से बात ही बंद।
*25% कारण - बेटे को सिखाया ही नहीं।*
बाप ने बेटे को जमीन तो दे दी, पर हिसाब-किताब, कचहरी, खाद-पानी का भाव कभी सिखाया नहीं। बेटा मालिक तो बन गया, पर मालिक वाली अक्ल आई ही नहीं।
बस, यहीं से कहानी खत्म शुरू होती है।
मेरे दादा कहते थे -
*पहली पीढ़ी कमाती है, उसे भूख पता है।*
*दूसरी पीढ़ी रखती है, उसने सिर्फ थाली देखी है।*
*तीसरी पीढ़ी बेचती है, उसे लगता है थाली रोज आएगी।*
आज पूरब के हर दूसरे गाँव की यही कहानी है।
जो 10% परिवार आज भी जुड़े हैं, उन्होंने सिर्फ एक काम किया है -
*महीने में एक बार बिना मोबाइल के साथ बैठना, और खुल के 3 बात पूछना - हमारे पास क्या है? इसे कैसे बचाना है? बच्चों को क्या सिखाना है?*
विरासत तिजोरी में नहीं, साथ बैठने में है।
आपके गाँव में भी ऐसी कोई घर,हवेली देखी है जो देखते-देखते खंडहर बन गई? नाम मत लिखिए, बस हाँ लिख दीजिए, कहानी सबकी एक ही है।
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