Monday, 17 August 2026

नाग पंचमी और सांप प्रजातियां डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह

 नाग पंचमी और सांप प्रजातियां डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह 

।                                                    विज्ञापन 
।                                                    विज्ञापन 


भारत विश्व का सबसे प्राचीन और विश्व व्यापी फैला हुआ देश है और सनातन धर्म सारे संसार का सबसे प्राचीन धर्म है यहां प्रत्येक दिन कोई ना कोई पर्व और उत्सव होता रहता है जिससे जीवन में नीरसता की जगह सरसता फैली रहती है हर एक पर्व उत्सव त्यौहार का अपना एक विशिष्ट महत्व होता है जो मानव जीवन कृषि कार्य धर्म दर्शन अध्यात्म के साथ प्रकृति और पर्यावरण से भी जुड़ा रहता है ऐसा ही एक महान पर्व नाग पंचमी है जो नागों से जुड़ा हुआ है भारत एक ऐसा देश है जहां पर पशु पक्षी ईंट पत्थर आकाश पाताल दिशाओं की ग्राम देवी ग्राम देवता तक की पूजा की जाती है क्योंकि कालांतर में सिद्ध हो गया है कि प्रत्येक वस्तु परमाणु अथवा कोशिका से बनी है और हर एक परमाणु और कोशिका में ईश्वर का ही अंश होता है ।

।                                                    विज्ञापन 
।                                                    विज्ञापन 

नाग पंचमी का महान पर्व सावन महीने के शुक्ल पक्ष में पंचमी के दिन मनाया जाता है जब लोग घर की साफ सफाई करके लीप पोत कर कपड़े पहनकर नाग देवता की पूजा करते हैं और उनका दूध चढ़ाते हैं इस दिन नाग देवता का दर्शन करना शुभ माना जाता है संसार में कोई भी ऐसा धर्म नहीं है जिसके मानने वाले दुनिया में सबसे भयंकर माने जाने वाले नाग और सांपों की पूजा करते हैं जो स्वयं में काल का एक स्वरूप होता है और जिसको देखकर बड़े से बड़े लोगों के मन में भय पैदा हो जाता है और आज इतनी अधिक वैज्ञानिक और चिकित्सा की उन्नति हो जाने के बाद भी प्रतिवर्ष भारत में और दुनिया में सांपों के काटने से लाखों लोग मरते हैं तो प्रश्न उठता है कि आखिर नाग पंचमी का त्यौहार क्यों मनाया गया और इनकी पूजा क्यों की जाती है। 

।                                                    विज्ञापन 
।                                                    विज्ञापन 


सभी प्रकार के सांपों में नाग का विश्व सबसे अधिक विषैला और प्रभावकारी होता है और यह न्यूरोटॉक्सिक होता है नाग अर्थात कोबरा की कई प्रजातियां होती हैं जिसमें शेषनाग सबसे लंबी और घातक प्रजाति है जो हर प्रकार के सांपों को जिंदा ही खा जाता है इसके बाद काला नाग और भूरा नाग होता है और यही सांप की ऐसी प्रजाति है जिसमें बहुत पुराने कुछ नागों में नागमणि पाई जाती है वैसे तो भारत में करैत वाईपर और रसेल वाइपर सांप भी बहुत जहरीले होते हैं लेकिन यह सभी नाग के भय से छिपे रहते हैं। 

वैसे तो कोई भी जहरीला नाग या सांप काट ले तो वर्तमान समय में प्राथमिक चिकित्सा करके अर्थात घाव को साबुन से यह स्वच्छ पानी से अच्छी तरह धोकर उसके ऊपर हल्का दबाव देते हुए पट्टी बांधकर तुरंत ही चिकित्सक के पास जाना चाहिए लेकिन जहां पर चिकित्सा सुविधा न हो या समय बहुत कम हो वहां पर तंत्र-मंत्र जड़ी बूटियां का प्रयोग करने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए जिसमें अधिक मात्रा में काली मिर्च और घी को पिलाना नीम की पत्ती खिलाना और कुछ मंत्रों का जाप करना शामिल है ऐसा माना जाता है कि जरत् कारु ऋषि कश्यप ऋषि शंखचूड़ वासुकी का नाम लेने से सांप नहीं काटते हैं और वह रास्ता बदल कर चले जाते हैं और इनका नाम लेने से सांप का विष असर नहीं करता है नाग कुल का भला करने वाले कुछ ऐसे भी वंश हैं जिन पर सांपों के विश्व का असर नहीं पड़ता है यह बात पूरी तरह सच है इसके अलावा **ऊं कुरुकुल्ये हूं फट् स्वाहा**मंत्र का जाप करने से भी सांप के विश्व का असर नहीं होता है 

सांप एक ऐसा प्राणी है जो मनुष्य से सबसे अधिक डरता है इसके अलावा यह नेवला गरुड़ पक्षी बाज प्रजातियां और गिलहरी मोर एवं बिल्ली से भी डरता है नाग पंचमी को जिस प्रकार से पूजा पाठ और सफाई की जाती है और सावन महीने में जिस तरह से महारुद्र अभिषेक किया जाता है उसे सांप मनुष्य का निवास छोड़कर बन बाग खेत और अन्य जगहों पर चले जाते हैं इसीलिए नाग पंचमी त्यौहार मना कर नागों की पूजा की जाती है इसके अलावा यह नाग जाति और मनुष्य जाति के बीच प्राचीन संबंधों का भी स्मरण दिलाता है। नाग एक प्राचीन काल में मानव की जाति थी जो जंगल गुफा कंदराओं में रहते थे और उनका नागों के साथ लंबे समय रहने से उनके बारे में पूरा ज्ञान हो गया था और वह जड़ी बूटियां और सांपों का जहर उतारने और उनको पकड़ने में सिद्धहस्त थे। नागवंश एक प्रसिद्ध राजवंश भी था अर्जुन घटोत्कच सहित अनेक लोगों का नाग कुल में विवाह हुआ था मेघनाथ की पत्नी सुलोचना नागवांश से ही थी इस प्रकार नाग पंचमी को इसलिए भी मनाया जाता है कि धीरे-धीरे नागवंट आर्य वंश में घुल मिल गया था 

सभी प्रकार के जहरीले नागों से मानव जाति को अपार लाभ होता है यह मानव जाति के लिए विनाशकारी चूहे और अनेक जीव जंतुओं को खाकर मानव जाति का असीम कल्याण करते हैं इसके अलावा यह वातावरण में फैले हुए भयंकर विष को धीरे-धीरे पीते रहते हैं इसे जहर पूरी पृथ्वी पर फैल नहीं पाता है। 

जहरीले सांपों से कैंसर इत्यादि की बहुत कीमती दवाएं भी बनती हैं और पूरी दुनिया में सांपों को बड़े चाव से खाया भी जाता है अब रही सांपों के द्वारा मानव को काटने की तो यह स्वाभाविक सी बात है कि अगर सांपों को अपने प्राण संकट में दिखाते हैं तब वह आक्रमण कर देते हैं वैसे सांप का विश्व उनकी सबसे कीमती धरोहर होता है एक बार काट लेने के बाद फिर से जहर बनने में महीनों लग जाते हैं इसलिए सांप जल्दी काटते नहीं और काटते भी हैं तो बहुत ज्यादा विष नहीं उगलते हैं इसके अतिरिक्त सांप भगवान शिव के गले के आभूषण हैं जिनको वह बड़े चाव से अपने गले में पहनते हैं जब उन्होंने हलाहल विष का पान किया था तो उसे कुछ बूंदे धरती पर गिरी और उसी को पीकर सांप बिच्छू और अन्य जीव जहरीले हो गए थे शिव जी का आभूषण होने के कारण और उनके गले की शोभा होने के कारण भी सांपों की पूजा किया जाता है। 

सांप से जुड़ी अनेक कथा कहानी और किंवदन्तियां है लाखों करोड़ों वर्षों से भारतीय जीवन में घुली मिली हैं जिसमें सांपों के द्वारा बदला लेना और कुछ विशेष प्रकार के नागों में नागमणि होना पूरी तरह सत्य है इसके अलावा बहुत भ्रांत धारणाएं भी लोगों के मन में बस गई हैं नाग पंचमी को सांपों के संरक्षण और उनसे सावधान रहने से भी जोड़ कर देखा जाता है क्योंकि वर्षा काल में सांपों के प्रजनन का महीना होता है इसलिए वह बहुत अधिक उग्र होते हैं उनसे बचकर रहना चाहिए और सभी प्राणी एक समान है इस बात की धारणा भी नाग पूजा पूजा दिखती है। 

नाग पंचमी के दिन विधि विधान से नागों की पूजा होती है और उन्हें दूध खीर चढ़ाया जाता है इसके अलावा लोक जीवन में इसे स्थाई बनाने के लिए इस दिन भारत के हर एक गांव शहर गली मोहल्ले में दंगल अर्थात कुश्ती होती है और कूड़ी अर्थात लंबी कूद का आयोजन किया जाता है इसके बाद घरों में भांति-भांति  के सुंदर पकवान बनते हैं इस प्रकार यह महान पर्व शारीरिक स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ है नाग पंचमी के दो दिन पहले हरियाली तीज या हरितालिका तीज आती है जिसका अपना विशेष महत्व है यह विशेष रूप से ध्यान देने की बात है कि सावन में चारों तरफ घने पेड़ पौधे हरियाली होने से और पानी भर जाने से सांप उन सब स्थान से मानव निवास की ओर दौड़ते हैं और नाग पंचमी के दिन पूजा से उत्पन्न विभिन्न प्रकार की रासायनिक गंध और सूक्ष्म ऊर्जा नाग और हर प्रकार के सांपों को आवाज से दूर ले जाती है

यही वजह है कि पहले हर तरफ घने जंगल झाड़ झंकाड़ और हरियाली होने के बाद और घनघोर वर्षा होने के बाद भी प्राचीन काल में सांपों के काटने से शायद ही कोई मरा हो अब ज्यादा लोग मर रहे हैं क्योंकि सांप के आवास पर लोग जबरदस्ती कब्जा कर रहे हैं आप आज से 50 वर्ष पहले अपने घर खानदान के लोगों से पता करेंगे तो पता लगेगा कि इतनी भयंकर स्थिति के बाद भी सांप के काटने से बहुत ही कम लोग मरे हैं और नाग तो बिना चेतावनी दिए काटते भी नहीं है सबसे खतरनाक करैत नाम का सांप होता है जो 1 से 2 फीट लंबा काला चित्तीदार होता है और अगर यह सोते समय काट लेता है तो लोग सोते ही रह जाते हैं इसीलिए कहा जाता है कि करैत का काटा हुआ पानी भी नहीं मांगता हैऔर पूजा पाठ भी नहीं करते हैं इसलिए कहा जा सकता है कि नाग पंचमी एक पूर्ण वैज्ञानिक महापर्व है जो प्रकृति पर्यावरण और प्राणी मात्र की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है
[8/17, 1:56 PM] Dr  Dileep Kumar singh: बुढ़वा मंगल और महावीर हनुमान - डॉ दिलीप कुमार सिंह 

हनुमान जी श्री राम राम और माता सीता के अनन्य भक्त हैं कलयुग में उनसे बड़ा कोई भी नहीं है उन्हें अमर कहा जाता है और सृष्टि के अंत तक श्री राम कथा का प्रचार करने के लिए दुष्टों का संघार करने के लिए और सज्जनों का उद्धार करने के लिए कलयुग में उन्हें विशेष रूप से भगवान श्री राम के द्वारा सहेजा गया है
बुढ़वा मंगल की कहानी बुढ़वा मंगल को बड़ा मंगलवार भी कहते हैं इसकी कथा महाभारत से ली गई है महाबली भीमसेन जिनमें 10000 हाथियों का बाल था अपने बल पर बहुत घमंड करते थे और हमेशा उत्पाद मचाया करते थे एक बार जब वह बनवास में थे तब हिमालय क्षेत्र में उन्हें एक अद्भुत दिव्य सुगंध की अनुभूति हुई बाद में संत और महात्माओं ने कहा यह तो अद्भुत नीलकमल की सुगंध है जो दूर-दूर तक फैला रहता है द्रोपदी की इच्छा हुई कि इस नीलकमल को धारण करें बस फिर क्या था उन्होंने भी को कहा और भीम दहाड़ते और गरजते हुए चल पड़े 

भीमसेन की दहाड़ से सभी भयभीत हो गए जंगल के शेर चीता बाघ इधर-उधर भागने लगे और हलचल मच गई भी अपनी गदा जोर-जोर घूमते हुए नीलकमल की ओर चले जा रहे थे हनुमान जी ने उनको शिक्षा देने और उनके अहंकार को दूर करने के लिए एक वृद्ध बंदर का रूप बनाया और रास्ते में पूछ फैला कर लेट गए थोड़ी ही देर बाद भीम भीम गरजते और दहाड़ते हुए उधर आए और रास्ते पर बंदर की पूंछ देखकर उन्होंने बंदर से अपनी पूंछ हटाने को कहा तब हनुमान रूपी वृद्धि वानर बोला अरे भाई तुम मुझको लग कर चले जाओ इस पर भी भीमसेन ने कहा कि किसी को भी लांघ कर जाने का सनातन धर्म में कोई नियम नहीं है इसलिए तुम अपनी पूंछ हटा लो

हनुमान जी ने कहा ऐसा करो तुम मेरी मूछ हटा दो और चले जाओ क्योंकि मैं तो बुड्ढा हो गया हूं और मुझे उठने बैठने में बहुत परेशानी होती है इस पर भी गर्व से भरकर एक अंगुली से उसकी पुछ उठाकर फेंकने लगे मगर अंगुली में दर्द होने लगा और पूछ यहां की कहां पड़ी रही इस पर उन्होंने एक हाथ से उठाने का प्रयास किया फिर दोनों हाथ से उठाने का प्रयास किया इसके बाद अपनी गदा से हटाने का प्रयास किया लेकिन पसीने पसीने होने पर भी पूंछ हिंदी तक नहीं 

इस पर भीमसेन को बहुत आश्चर्य हुआ 10000 हाथियों का बाल रखने वाले भीम एक बंदर की पूछ नहीं हटा पाए उन्हें अपनी भूल अनुभव हुई और उन्होंने प्रार्थना किया कि हे भगवान आप अपने असली रूप में आ जाइए तब हनुमान अपने विराट असली रूप में आए जो आकाश तक फैले हुए थे भी ने उनकी पूजा अर्चना किया और हनुमान जी परम प्रसन्न हुए और भीमसेन को अच्छे उपदेश देते हुए अपनी दिव्य शक्तियों को प्रदान किया इसके बाद भीमसेन नीलकमल लेकर द्रौपदी को दे दिए तभी से यह बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल मनाया जाने लगा है 

इस दिन स्नान करके शुद्ध चित्र से हनुमान जी का ध्यान करना चाहिए उनके मंदिर में जाकर उनसे अपनी मनोकामना कहना चाहिए बेसन के लड्डू सिंदूर और चमेली भी चढ़ा सकते हैं लेकिन ध्यान रखें कि हनुमान जी की पूजा करते समय भगवती सीता और भगवान श्री राम का ध्यान अवश्य करें हनुमान चालीसा का भी पाठ करना चाहिए और हनुमान जी की दिव्या गाथाओं का वर्णन करते हुए रामायण के प्रसंग को भी आपस में कहना और सुनना चाहिए ऐसा करने से हनुमान जी निश्चित प्रसन्न होते हैं और मनोकामनाएं पूरी करते हैं हनुमान जी का ऐसा प्रभाव है कि उनके भक्त को कलयुग का प्रभाव और शनिदेव छू भी नहीं सकते हैं बाकी की बात ही क्या है

Sunday, 16 August 2026

*आने वाला समय कुवांरेपन का युग होगा* एक हालिया अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार अगले छ:वर्षो में विश्व की लगभग 45% लड़कियां अविवाहित रह जाएंगी।

*आने वाला समय कुवांरेपन का युग होगा*
       
     एक हालिया अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार अगले छ:वर्षो में विश्व की लगभग 45% लड़कियां अविवाहित रह जाएंगी।
                                                  विज्ञापन
                                                    विज्ञापन 
यह रिपोर्ट 1 फरवरी 2025 को प्रकाशित लोकमत अखबार में छपी थी, जो मार्गन स्टेनली संस्था द्वारा किए गए एक विस्तृत अध्धयन पर आधारित हैं।।

*सर्वेक्षण में पाये गए प्रमुख कारण:-*

१.आज की लड़कियां उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही है और करियर को प्राथमिकता दे रही हैं।
२.वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है और किसी पर निर्भर रहना नहीं चाहती।
३.उन्हें स्वतंत्रता प्रिय है और वे अपने जीवन के निर्णय स्वयं लेना चाहती हैं।
४.विवाह, मातृत्व और पारिवारिक बंधनों को वे अक्सर अपनी प्रगति में बाधा मानने लगी हैं।
५.यदि यह प्रवृति बनी रही तो पारंपरिक परिवार प्रणाली और सामाजिक संरचना बिखर सकती हैं।
६.जनसंख्या में गिरावट, कुंवारे लड़को की संख्या में वृद्धि और वृद्धावस्था में अकेलेपन की समस्याएँ सामने आ सकती हैं।
७.प्रश्न यह भी उठता है प्रगति, पद और पैसा किस काम आएंगे, जब जीवन के अंत में साथ देने वाला कोई न होगा?

*कई माता पिता लड़कियों के रिश्ते तो ढूंढ रहे हैं, पर स्वयं लड़की को विवाह में रूचि नहीं होती।जिसके कारण हर रिश्ता नकारा जा रहा है।*
*समाज के एक बड़े वर्ग को इस बदलाव की गंभीरता का अभी मालूम नहीं है,इसलिए यह आवश्यक है कि हम समय रहते चेते।*

*लड़कियों के विवाह के लिए उपयुक्त आयु 23 से 26 वर्ष के बीच हो यदि हो पाएं तो ओर भी जल्दी, इसके लिए सामूहिक स्तर पर जागरूकता ओर पहल जरूरी है।*

*यह विषय किसी के विरोध में नहीं, बल्कि भविष्य की स्थरिता और संतुलन की चिंता के तहत उठाया गया है, समाज, परिवार और व्यक्तिगत जीवन तीनों को संतुलित रखना ही सच्ची प्रगति हैं।*


: *हम सबको इस पर विचार अवश्य करना चाहिए*

   *भविष्य की एक ज्वलंत समस्या*
   
👉🏿   जब बच्चों का विवाह
    20 साल में होता था, तो 
   एक सदी में 5 पीढ़ियाँ होती थीं.

👉🏿 जब बच्चों का विवाह
     25 साल में होता था, तो 
    एक सदी में 4 पीढ़ियाँ होती थीं.

👉🏿 अब बच्चों का विवाह
    30 साल में होता है, तो 
   एक सदी में 3 पीढ़ियाँ होती हैं.

👉🏿  सोचने वाली बात है.
        क्या हमारा समाज 
अगली सदी तक जीवित रहेगा ?
     आज एक अजीब सा 
       अंधेरा फैल रहा है.

🏚️    गली-मोहल्ले वीरान हैं, 
      आस-पास के घर खाली हैं.
आज घरों में बच्चों की आवाज कम 
        पति-पत्नी की आवाज 
         ज्यादा सुनाई देती है.

★  लड़कियाँ 30-35 साल तक 
              कुंवारी हैं.
★  लड़के 35 साल के बाद भी 
         कुँवारें घूम रहे हैं.
★  देर से शादी ...
   फिर सम्बंध विच्छेद (तलाक)

         टूटते परिवार  ...
         दुखी माँ-बाप.
      माता-पिता अकेले..
पूरी पीढ़ी खालीपन अनुभव करती है.

🤷🏻‍♀️   क्या हम इसे 
    "पढ़ा-लिखा समाज" कहें या 
"स्वयं को नुकसान पहुँचाने वाला समाज" 

💁🏻‍♂️  यह तो जनसंख्या कम करने की
           एक खामोश साज़िश है.

★ अगर 50 जोड़ों में 
      सिर्फ़ एक बच्चा हो
      तो अगली पीढ़ी में 
      सिर्फ़ नाममात्र के बच्चे होंगे.

👉  अगर ऐसा ही चलता रहा, 
        तो तीसरी पीढ़ी लगभग 
           गायब हो जाएगी.

👉 मोहल्ले,गलियाँ खाली पड़ी हैं.
         सब लोग रोड़ पर हैं.
        जीवन का आधा समय तो 
          रोड़ पर ही बीत जाता है.

★  गाँव के गाँव खत्म हो रहे हैं.

★ शहरों में ऊँची इमारतें हैं, लेकिन संयुक्त परिवार प्रथा समाप्त हो गयी है.

👉  नई बहुएं
    "सिर्फ़ एक ही बच्चा" चाहती हैं.
    🤷🏻‍♀️  क्या यही समाज है ?
❓ क्या यही हमारे पुरखों की 
             विरासत है ?

👉   सच तो यह है, कि ....
    बच्चे अब प्यार की निशानी नहीं रहे. बल्कि बच्चे पैदा करना ...एक मजबूरी सी है.

⚖️   सबसे बड़ी गलती — 
      लड़की के पिता की है,
        वही पिता जिसने 
     20-22 साल की उम्र में 
             विवाह करके 
          परिवार बसाया था.

अब वही पिता 30 साल की उम्र तक 
     अपनी बेटी का विवाह न करके बहादुरी दिखा रहे हैं.

👉  परिणाम ????

लड़के लड़कियाँ डिप्रेशन में जा रहे हैं.

👉  आज बच्चों का सही समय पर विवाह नहीं हो रहा है, और
 न सही समय पर कोई नौकरी मिल रही है.

👉  समाज धीरे-धीरे 
      समाप्त होता जा रहा है.

👉   इसी कारण बच्चे 
       समाज के साथ नहीं
    अकेले रहना पसंद करते हैं.
         यानी एकल परिवार
  यहाँ तक कि बच्चे भी नहीं चाहिए.

★  देर से शादी करना
★  देर से बच्चा करना, फिर
         एक बच्चे के बाद 
   मेडिकल और लालन-पालन का
             बहाना करना.
💁🏻‍♀️  यह आम बात हो गई है.

   हजारों जवान लड़के लड़किया उम्र के कारण कुंवारे घूम रहे हैं.

      समाज के समझदार लोग 
          चुप्पी साधे हुए हैं

★  विवाह, परिवार, बच्चे – 
इन सब को बोझ समझा जा रहा है.

🎈 विवाह ... कोई दुनियावी बंधन नहीं यह घर परिवार और समाज का स्तम्भ है.

🎈 प्रजाति, सभ्यता और संस्कार कोआगे बढ़ाने का एक तरीका है.

💥 अब हम सब को समझने का समय आ गया है.
🫵   बच्चों को ‘हद से ज्यादा'
      आजादी दे कर हमने उनकी 
             समझ छीन ली.

★ विवाह टलता रहा, और जब हुआ, तब तक बहुत देर हो चुकी थी.

        फिर वही अकेलापन

🫵  लड़के लड़कियों के लिए
        विवाह की सही उम्र
🔹  लड़कों के लिए 25 साल से पहले
🔸 लड़कियों की  20 साल से पहले.

🚩 वर्ना इतिहास लिखेगा ...
  “वह हिंदू समाज, जिसने चुपचाप स्वयं को खत्म कर लिया.” 

    सोचो और समझदारी दिखाओ.

        अपने बच्चों का विवाह
           समय पर कीजिये.
🙏

   क्योंकि ... परिवार नहीं बचा, तो समाज को भी देर सवेर  ध्वस्त होते देर नहीं लगनी है.

  यही कारण है ...डेविड सेलबॉर्न, सतीश बंसल और बिल वार्नर जैसे लेखक यह कहने पर मजबूर हो जाते हैं , कि 
       ★   इस्लाम के मज़बूत 
      फैमिली सिस्टम की वजह से  ...
           देर सवेर ... अधिकांश देश भारत में भी हिन्दू परिवार परम्परा का पतन होना प्रारम्भ हो चुका है.

          रक्त के 5 रिश्ते
     समाप्त होने की कगार पर हैं.
       ताऊ, चाचा, बुआ, मामा
        मौसी जैसे रिश्ते
          आने वाले समय में
             देखने-सुनने को
              नहीं मिलने वाले हैं.

      इसे इस तरह  👇🏽
     समझा जा सकता है-

    पुत्र       पुत्री
     2         1        (मौसी X)
     1         2      (चाचा, ताऊ X)
     1         1   (चाचा, ताऊ, मौसी X)
     1         0          X
     0         1          X
  परिणाम
     0         0
★

       सिंगल चाइल्ड फैमिली को 
    उनका निर्णय तीसरी पीढ़ी याने जिनके आप ... दादा-दादी होंगे बुरी तरह प्रभावित करेगा. जिस दादा को मूल से अधिक ब्याज प्यारा होता है, उसका तो ....मूलधन भी समाप्त हो जाएगा.
     इसके लिए वह स्वयं उत्तरदायी है.

          इसलिए दम्पत्ति को 
      सिंगल चाइल्ड के निर्णय पर गंभीरता से विचार करना होगा.

    यह घटती आबादी के आँकड़े
             बोल रहे हैं.
 यह विश्लेषण सरकारी आँकड़ों के अध्ययन से आ रहा है.

        आपका पौत्र या प्रपौत्र 
               इस संसार में 
           अकेला खड़ा होगा.

       उसे अपने रक्त के रिश्ते की
           आवश्यकता होगी तो 
     इस पूरे ब्रह्मांड में उसका अपना कोई नहीं होगा.

      यह अत्यंत सोचनीय विषय है.

      ये न केवल हमारे बच्चों को
       एकाकी जीवन जीने को 
      मजबूर करेगा बल्कि हमारी 
       हिंदू परिवार सभ्यता को ही नष्ट कर देगा.

 हम जो हिन्दू एकता की बात करते हैं ये तो सभ्यता ही समाप्त हो जाएगी और इन सबके लिए हमारी वर्तमान पीढ़ी उत्तरदायी होगी.

★
        अगर आप इस विषय को
           गंभीर समझते हैं तो 
     इस समस्या पर विचार करें,

   घर परिवार में, पति पत्नी के बीच, रिश्तेदारों में, दोस्तो में एवं 
     विभिन्न बैठकों एवं आयोजनों में इस विषय पर मंत्रणा करें.

      अपनी सभ्यता, संस्कार औऱ पीढ़ियों को बचाये.

बहुत गंभीर समस्या है.

साभार: सोशल मीडिया

"जय जय सियाराम"
    💐🙏💐🇮🇳

मुझे पता है आपको यह लेख अच्छा लगा है तो कृपया समय निकालकर जरूर विचार-विमर्श करे अपनो से 💐🙏🏻🌹🕉️🌻

Saturday, 15 August 2026

देश की आज़ादी का मूल मंत्र एकता प्रेम और क़ानून का सम्मान राष्ट्रीय अध्यक्ष मुस्लिम महासंघ फ़रहत अली खान*

*देश की आज़ादी का मूल मंत्र एकता प्रेम और क़ानून का सम्मान राष्ट्रीय अध्यक्ष मुस्लिम महासंघ फ़रहत अली खान* 
अस्सी वें यौम ए आज़ादी के मुबारक मौक़े पर मदरसा जमीतुल अंसार नियर थाना गंज में जश्न ने आज़ादी जोश और खरोश से मनाया गया ।
मुस्लिम महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष फ़रहत अली खान ध्वज रोहण किया राष्ट्रगान जोश ओ खरोश के साथ गाया गया।
जहां बच्चों ने देश भक्ति गीत गाये तकरीरे की वही परवेज़ निज़ामी समाज सेवी आज़ाद हिंदुस्तानी एजाज़ क़मर लेखक चिंतकविचारक सैय्यद मज़हर अली मियां मजहरी प्रमुख शायर, डॉ आरिफा खान, आकाशवाणी उद्घोषिका मारिया फ़रहत हसीन जहां ने अपने ओजस्वी विचार रखे।
मुख्य अतिथि मुस्लिम महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष फरहत अली खान ने कहा आज़ादी का मूल मंत्र बुनियादी हक़ीक़त और सच्चाई देश की एकता थी है और हमेशा रहेगी।

आज इसी को हमें अपनाने की जरूरत है।
क़ानून का सम्मान और मौजूदा सरकारों का एहतेराम है।
स्वतंत्रता दिवस की सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर मदरसे के संचालक ओर मुतावल्ली सआदत अली अंसारी ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी।
अंत में मदरसे में आयोजित मेघावी छात्रों को मेडल पहनाकर सम्मानित किया।
सभी छात्रों को मिठाई भी तकसीम की गई।
इस अवसर पर मारिया अज़हर फायेजा बुशरा खान ज़ाहिद खान आमिर खान सहित मदरसे के छात्र और अभिभावक उपस्थित रहे।

मौसम संबंधित नवीन भविष्यवाणी हमारे ज्योतिष मौसम और विज्ञान अनुसंधान केंद्र के अनुसार 30 जुलाई से 7 अगस्त

मौसम संबंधित नवीन भविष्यवाणी हमारे ज्योतिष मौसम और विज्ञान अनुसंधान केंद्र के अनुसार 30 जुलाई से 7 अगस्त तक लगातार अच्छी वर्षा होने की भविष्यवाणी बिल्कुल सही हुई 7 से लेकर 12 अगस्त तक सूखे मौसम की भविष्यवाणी भी बिल्कुल सही हुई प्रचंड गर्मी उमस और पसीना की भविष्यवाणी भी बिल्कुल सही हुई 13 अगस्त से 20 अगस्त तक वर्षा की बात भी पूरी तरह सही हो रही है कभी कम कभी हल्की तो कभी बूंदाबादी अभी तक रोज वर्षा हुई है

                                              विज्ञापन 
                        विज्ञापन 
आज का अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 28 डिग्री सेल्सियस रहेगा जबकि कल का अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहेगा।

घनघोर भयंकर गर्मी प्रचंड उमस और पसीना से लोग 11:00 तक बहाल रहेंगे आज 10:00 बजे से मौसम बदलने शुरू होगा और तीन चार बजे के आसपास वर्ष शुरू हो जाएगी जो रात भर चलेगी और आने वाले 5/6 दिनों में ज्यादातर समय मौसम में बरसात का रहेगा मौसम भी ठंडा सुहावना हो जाएगा इस बीच लोगों को भयंकर रूप से हो रही सर्दी खांसी जुखाम बुखार और पेट के रोगों से भी छुटकारा मिलेगा इस समय ठंड वाली चीज फ्रिज में रखी चीज बिल्कुल ना खाएं और हैप्पी बर्थडे केक तो बिल्कुल ना खाएं इसको खाने वाला गारंटी के साथ टाइफाइड रोग और अन्य रोगों का शिकार हो जाता है ।

ताज और नवीन भविष्यवाणी यह है कि आज 15 अगस्त के घनघोर भयंकर गर्मी उमस और पसीने के बाद आधी रात के बाद तीन दिनों तक माध्यम से भरी और कहीं-कहीं बहुत भारी वर्षा जौनपुर सुल्तानपुर प्रतापगढ़ प्रयागराज सोनभद्र मिर्जापुर दीनदयाल नगर वाराणसी गाजीपुर आजमगढ़ अंबेडकर नगर अयोध्या और आसपास होने जा रही है सभी लोगों को आवश्यक सूचना और चेतावनी दी जा रही है इससे मौसम भी अच्छा हो जाएगा और खेती बागवानी भी सुधर जाएगी  - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र दिनांक 15 अगस्त 2026
                               विज्ञापन                  विज्ञापन 

नास्तिक होना सिर्फ भगवान को न मानना नहीं है,*

*नास्तिक होना सिर्फ भगवान को न मानना नहीं है,* 

नास्तिक होना मतलब है —
हर बात को समझना,
हर सवाल का उत्तर खोजना,
और अंधविश्वास से ऊपर उठकर
सच्चाई को अपनाना।
नास्तिक वही बनता है
जो डर से नहीं,
सोच से जीता है।
जो पूछता है — क्यों?
जो मानने से पहले समझता है।
जो परंपरा से पहले सत्य को देखता है।
नास्तिक का मतलब नफरत नहीं,
ज्ञान है।
विरोध नहीं,
विवेक है।
अहंकार नहीं,
जागरूकता है।
जो इंसान अपने भीतर झाँकता है,
अपने कर्म को पहचानता है,
और मानवता को धर्म से ऊपर रखता है—
वही सच्चे अर्थ में जागरूक है।
नई खोज, नया विचार,
नई दिशा—
ये सब सवालों से जन्म लेते हैं,
और सवाल वही करता है
जो सोचने की हिम्मत रखता है।
इसलिए नास्तिकता का अर्थ
सिर्फ इंकार नहीं,
बल्कि सत्य की खोज है।
पहले इंसान बनो,
फिर विचार चुनो।
सच्चाई वहीं मिलेगी
जहाँ डर नहीं,
ज्ञान होगा।
— अज्ञात 
*
*अंधविश्वास, रूढ़िवाद व तमाम कुरीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करें और बेहतर समाज बनाने के लिए संघर्ष करें।*

किताब हमारी सबसे अच्छी दोस्त*

*किताब हमारी सबसे अच्छी दोस्त*

किताब,,,,
सिखाती है हमें ज्ञान और विज्ञान, 
समझाती है कारण, बदहाली का, 
सिखाती हैं बनाना हमें संगठन 
सारी जनता की पूर्ण मुक्ति का।
किताब,,,,
देती है गुर, नर-नारी समानता का, 
पढ़ने लिखने की संस्कृति का, 
लघु परिवार की जरूरत का, 
एक बेहतर समाज बनाने का। 
किताब,,,,
देती है मंत्र हम सबको, 
विकास में हिस्सेदारी का, 
समाज के प्रति दायित्व का, 
भाग्यवाद से छुटकारा पाने का।
किताब,,,,
देती है हौंसला हम सबको,
चार दिवारी से बाहर आने का, 
जगाती है इच्छा लोगों में 
पढ़ने की और सीखने की।

किताब,,,,
तोड़ती है क्रूरतम शिकंजा 
पोंगा पंडितों का, जादू टोनों का, 
कर डालती है मोह भंग 
तांत्रिक विज्ञान का, भूत और प्रेत का। 

किताब,,,,
बदलती है सलीका 
प्यार से रहने का और सहने का, 
तोड़ती है पूरा का पूरा शिकंजा 
कुरीतियों का, अज्ञान का, साजिशों का।

किताब,,,,
करती देती है पूरा भंडाफोड़ 
शोषण का, लूट का, हड़पने का, 
देती है मंत्र सारी दुनिया को 
संगठित होने का, नव जन सृजन का।

किताब,,,,
देती है हौंसला लड़ने का,
लूट के किले गिरने का, 
दिखाती है मार्ग हमें 
मुक्ति का, बदलाव का।

किताब,,,,
सिखाती है सलिका हमें 
बेहतर इंसान बनने का,
देती है स्वर हमें आपसी भाईचारे का
संघर्ष का, विद्रोह का, इंकलाब का।

किताब,,,,
लोग धोखा दे सकते हैं 
पर किताबें तो कभी नहीं, 
किताबों को रखिए अपने पास 
किताबें होती हैं सबसे अच्छी दोस्त।

 लेखक अज्ञात 

Wednesday, 12 August 2026

स्वतंत्रता के श्वेत श्याम बिंदु -डॉ दिलीप कुमार सिंह

स्वतंत्रता के श्वेत श्याम बिंदु -डॉ दिलीप कुमार सिंह 

15 अगस्त 1947 को 190 वर्ष के शासन के बाद और करोड़ों लोगों के बलिदान के फल स्वरुप देश को विभाजित स्वतंत्रता प्राप्त हुई जिसमें भारत ने पाकिस्तान अफ़गानिस्तान तिब्बत नेपाल भूटान म्यांमार श्रीलंका मालदीव बांग्लादेश जैसे अपने भूभाग खो दिए ।बाद में अरुणाचल प्रदेश और कश्मीर का काफी भाग चीन और पाकिस्तान ने कब्जा कर लिया और स्वतंत्रता प्राप्ति के 78 वर्ष बीत गए आज हम अपनी आजादी मनाने जा रहे हैं तो गंभीर आत्मवलोकन और निष्पक्ष विवेचना करनी है कि इन वर्षों में हमने लोकतांत्रिक भारत में क्या खोया और क्या पाया है ।

                                   विज्ञापन 
                                    विज्ञापन 

इतना तो निश्चित है कि 1947 में भारत की स्थिति बहुत ही दयनीय और शोचनीय थी क्योंकि भारत लगातार सिकंदर के आक्रमण से लेकर 800 वर्षों तक तुर्क मुगलों द्वारा और 190 वर्ष अंग्रेजों के द्वारा लूटा गया था देश का सब कुछ लूट कर बाहर चला गया था केवल गिनती के राजनेताओं बड़े अधिकारियों और दलाल लोगों और सेठ साहूकारों उद्योगपतियों के पास ही धन बचा था देश की 99% जनता नंगी भूखी थी सोने की चिड़िया कहां जाने वाला भारत बिल्कुल कंगाल हो चुका था इसी बीच पाकिस्तान से बिगड़े संबंध के कारण 1948 में पाकिस्तान से युद्ध भी लड़ना पड़ा उधर गांधी जी द्वारा भी काफी धन दौलत जबरदस्ती पाकिस्तान को दिला देने से स्थिति और भी भयानक हो गई थी देश की इच्छा और जनमत के विरुद्ध सरदार पटेल की जगह नेहरू को जबरदस्ती प्रधानमंत्री बनाए जाने से और लॉर्ड माउंटबेटन के आजादी के बाद भी वायसराय बने रहने से देश की स्थितियां और भी दयनीय हो गई थी ।                         
                                       विज्ञापन 
                                     विज्ञापन 


कालांतर में धीरे-धीरे देश का विकास शुरू हुआ उद्योग धंधे और नदियों पर बांध बनने से और परमाणु रिएक्टर स्थापित होने से आर्थिक स्थिति में सुधार होना शुरू हुआ लेकिन नेहरू की अति महत्वाकांक्षा और राजनीतिक एवं कूटनीतिक विफलता के कारण और डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद से उनका पूरी तरह मतभेद होने के कारण सारी प्रगति बेमानी हो गई। विश्व मंच पर नेहरू की भीषण असफलता के बीच चीन ने भारत पर भीषण आक्रमण किया और उसे बुरी तरह पराजित किया और लाखों वर्ग किलोमीटर भूभाग छीन लिया तिब्बत के दलाई लामा को सक्षम न होते हुए भी जबरदस्ती शरण देने और तिब्बत को चीन के अधिकार में मान लेने और भारत का वीटो पावर चीन को सौंप देने से इतना गहरा झटका लगा जिससे भारत अभी भी उबर नहीं पाया और इसी भीषण अपमान के चलते नेहरू का देहासान भी हो गया।

नेहरू की नीतियां पूरे विश्व के लिए और भारत के लिए बहुत ही मूर्खतापूर्ण थी कैलाश मानसरोवर जैसे पवित्र स्थान अक्साई चीन भारत के कब्जे से निकल जाने से और गिलगित-बाल्टिस्तान मुजफ्फराबाद पाकिस्तान के जीत लेने से भारत जो रुस से लगभग सटा हुआ था अब रूस से बहुत दूर हो गया और उस पर पाकिस्तान और चीन का नियंत्रण हो गया भारत रत्न स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री जी ने देश को काफी हद तक संभाला लेकिन बहुत बड़े विश्वास घात और षड्यंत्र के चलते विदेशी इशारों पर उन्हें ताशकंद में समझौता के कालखंड में मार दिया गया और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की तरह आज तक उनका रहस्य जस का तस बना हुआ है ।
                                        विज्ञापन 

                                                      विज्ञापन 

इसके बाद इंदिरा गांधी की विवादास्पद नीतियां लोकतंत्र का काला अध्याय आपातकाल लागू हुआ न्यायपालिका की दुर्गति हुई देश के मुकदमे करोड़ की संख्या में पहुंच गए जबरदस्ती नसबंदी सनातनी लोगों की खोज खोज कर कराने विरोध करने वाले सभी नेताओं को जेलों में ठूंस दिया गया।चारों ओर हाहाकार मच गया इसके बाद मिली-जुली सरकारों का दौर चला फिर कांग्रेस और भाजपा के बीच रास्साकशी और नूराकुश्ती होते-होते 2014 में पहली बार मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी जो आज भी चल रही है फिर भी देश में कोई बहुत कुछ उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ ।

फिर भी कुछ क्षेत्रों में भारत में विश्व स्तरीय प्रगति किया जिसमें परमाणु भौतिकी रक्षा अनुसंधान विमान क्षेत्र और अंतरिक्ष विज्ञान कृषि और दुग्ध क्रांति मछली पालन रेल सड़क बिजली जैसे भाग आते हैं कृषि उत्पादन में भी अभूतपूर्व वृद्धि हुई और भारत चीन के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा खाद्यान्न उत्पादक देश है ।दुग्ध क्रांति के फल स्वरुप भारत दूध में पहला और चीनी उत्पादन में भी पहला स्थान रखता है इसके अलावा धान गेहूं पटसन और जूट लोहा इस्पात जैसे क्षेत्रों में भी अभूतपूर्व प्रगति हुई लेकिन इस कालखंड में फिर से सियाचिन ,1999 का भारत-पाकिस्तान का युद्ध कारगिल और गलवान घाटी एवं कश्मीर पर आतंकवादियों के लगातार आक्रमण से देश को भारी क्षति हुई जिसका असर यहां की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा । सबको विश्वास था कि ऑपरेशन सिंदूर में मोदी जी जबरदस्ती पाकिस्तान द्वारा अधिकृत कश्मीर भारत में मिला लेंगे लेकिन ऐसा भी नहीं हो पाया। 

इसके अलावा खेलों में भारत की स्थिति बहुत ही खराब रही भारत कभी भी ओलंपिक खेलों में सर्वश्रेष्ठ 30 स्थान तक भी नहीं पहुंच सका जबकि चीन जैसे स्थान जो 1948 तक भारत से बहुत पीछे थे 1970 के दशक से अभूतपूर्व प्रगति करते हुए अर्थ वित्त खेल सहित हर क्षेत्र में आज पहले स्थान पर पहुंच गए भारत कभी भी ओलंपिक खेलों में एक से अधिक स्वर्ण पदक एक साथ नहीं जीत पाया इससे अधिक दुर्भाग्य और क्या हो सकता है कुछ भारतीय खिलाड़ियों ने व्यक्तिगत स्तर पर कालखंड में पूरे विश्व में अपना जादू बिखेरा और सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बने । इसमें सुनील माइकल फरेरा पंकज आडवाणी गावस्कर सचिन तेंदुलकर कपिल देव रोहित शर्मा विराट कोहली कुंवर दिग्विजय सिंह बाबू अशोक कुमार विश्वनाथन आनंद साइना नेहवाल पीवी सिंधु मैरी कॉम अभिनव बिंद्रा नीरज चोपड़ा सुशील कुमार जैसे गिने चुने नाम शामिल हैं और सबसे दुखद बात यह कि आज तक भारत को ओलंपिक खेलों के आयोजन करने योग्य भी नहीं समझा गया।

भारत की सरकार और बुद्धिजीवी लोगों तथा तमाम मीडिया के लोगों को बातों को बढ़ा चढ़ा कर कहने की आदत पड़ गई है जैसे अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत ने अभूतपूर्व प्रगति किया है लेकिन आज भी वह अमेरिका चीन और रूस से बहुत पीछे है यह तीनों देश अपने-अपने अंतरिक्ष स्टेशन बना चुके हैं चांद पर पहुंच चुके हैं जब भारत अपना मानव चंद्रमा पर उतार देगा तब वह 1969 में अमेरिका की बराबरी करेगा इस सच को छिपा कर भारत के चंद्रयान मिशन को बहुत बढ़ा चढ़ा कर दिखाया जाता है फिर भी चंद्रयान और मंगल अभियान उच्च कोटि के अभियान रहे लेकिन अभी भारत को इस क्षेत्र में बहुत कुछ करना है और कर भी सकता है लेकिन अपेक्षित सरकारी दिशा निर्देश और सहायता नहीं मिल पाने से अभी यह अभियान अपने शैशवावस्था में है।

आज 78 वर्षों में भी देश भ्रष्टाचार बेरोजगारी महंगाई सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों तथा सरकारी तंत्रों की संवेदनहीनता लालफीताशाही भ्रष्टाचार और घूसखोरी से बुरी तरह जूझ रहा है देश का अपार काला धन और करोड़ों घुसपैठिए देश की अर्थव्यवस्था खोखला करने के लिए काफी है बढ़ती हुई जनसंख्या विशेष कर मुस्लिम जनसंख्या देश की सारी प्रगति और उपलब्धियां को फीका करके उसे धरातल पर ला देती है ।यदि 5 करोड़ के लिए 10 वर्षों में सुविधाएं जुटाई जाती हैं तो 10 करोड लोग पैदा हो जाते हैं इसलिए सब कुछ और भी विकट और भयानक हो जाता है निश्चित रूप से बिजली पानी और सड़क क्षेत्र में बहुत अधिक प्रगति हुई है लेकिन बिजली चोरी और सड़क पर भीषण दुर्घटनाएं जाम और अतिक्रमण और धर्म स्थलों का अवैध निर्माण बड़े-बड़े लोगों का कब्जा बहुत ही भीषण चिंता का विषय है रेल हवाई जहाज और सड़क दुर्घटनाओं में भारत के सबसे अधिक लोग मरते हैं यही हाल रोग बीमारियों के और सांपों के काटे जाने को लेकर भी हैं अधिकांश धर्म गुरु और धर्मस्थल लूटपाट बेईमानी शोषण और चोरी के केंद्र बन गए हैं ।

लोकतंत्र का सजग प्रहरी प्रेस मीडिया बहुत लाचार और विवश है कुछ गिने चुने सरकारी सुविधा प्राप्त प्रिंट इलेक्ट्रानिक मीडिया को छोड़ दिया जाए तो बाकी स्थितियां बहुत ही खराब है मध्यम और जनपद स्तर के समाचार पत्रों को बहुत अधिक संघर्ष करना पड़ता है और सच छापने की बहुत भारी कीमत उनको चुकानी पड़ती है विज्ञापन और सुविधाओं के लिए सरकार पर निर्भर यह तंत्र चाहकर भी सरकार की और अधिकारियों की आलोचना और बुराई एक सीमित दायरे से अधिक जाकर नहीं कर सकता है फिर भी जान पर खेल कर से सामने लाने वाले पत्रकारों ने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की गरिमा को कायम रखा है और इसे देश का चौथा स्तंभ बिल्कुल सही कहा जाता है लेकिन इनको ना तो सरकार सहायता और सुरक्षा देता है और न जानता ही इसलिए जाकर भी बहुत कुछ नहीं कर सकते हैं। 

पुलिस की हालत तो इतनी खराब है की अधिकांश भारतीयों का विश्वास ही पुलिस से उठ चुका है और रात में कोई अपनी महिलाओं लड़कियों को थाने में भेजने के पहले हजार बार सोचता है न्यायपालिका की स्थिति भी बहुत खराब है 5 करोड़ से अधिक मुकदमे लंबित है जो स्थिति को भयानक रूप में प्रदर्शित करते हैं अगर 100 वर्ष इसी गति से सब कुछ चलता रहे तो भी मुकदमों का निस्तारण नहीं हो पाएगा लगभग हर सरकारी विभागों की यही हालत है कहीं भी पत्रावली बिना लेनदेन के आगे नहीं बढ़ती है लगभग हर सरकारी विभाग और संस्थान का यही हाल है सांसद और विधानसभा में दो तिहाई दिन केवल शोरगुल और टीका टिप्पणी में ही चले जाते हैं दूसरों को यह क्या उपदेश देंगे चुनाव लड़ने की ना कोई योग्यता है न मानदंड और ना शिक्षा ही उनके लिए उपयोगी अर्हता मानी गई है दल बदल विधायक अर्थ हैं हो गया है और अधिकांश संख्या में सांसद विधायक गंभीर प्रकृति के मुकदमों में लिप्त पाए गए हैं और उन्हें चुनने वाली जनता क्या समझ कर चुनती है यह समझ के बाहर है 

कुछ चीजों को बहुत बड़ा चढ़ा कर कहा जाता है जैसे कि भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है बात बिल्कुल सही है लेकिन यह भी देखना होगा कि विश्व की सर्वश्रेष्ठ 10 अर्थव्यवस्था में तीसरे स्थान से लेकर दसवें स्थान तक की अर्थव्यवस्था में बहुत मामूली अंतर है उसमें भी तीसरे चौथे पांचवें और छठे स्थान में नाम मात्र का अंतर है अगर भारत तीसरे स्थान पर भी पहुंच जाता है तो इसमें कोई बहुत बड़ी आश्चर्य की बात नहीं है क्योंकि कोई भी सरकार रहेगी तीसरे स्थान तक भारत का 5 वर्ष में पहुंच जाना निश्चित है ।लेकिन भारत की असली अर्थव्यवस्था की तुलना चीन और अमेरिका से है जो भारत से चार से लेकर 6 गुना अधिक है तब समझ में आता है कि अभी हम बहुत पीछे हैं

 भारतीय राजनेता इतने चालाक है कि वह हमेशा पाकिस्तान से तुलना करके भारत की श्रेष्ठता दिखाते हैं बगल में  स्थित चीन की कभी तुलना नहीं करते हैं जो भारत के लिए असली और सबसे बड़ा खतरा है किसी भी जगह चले जाइए सब जगह भ्रष्टाचार बेईमानी लूट घूसखोरी भ्रष्टाचार का अड्डा है चाहे पुलिस हो रेल विभाग हो परिवहन विभाग हो रजिस्ट्री विभाग हो बिजली विभाग हो हर जगह यही हालत है देश के लोगों को गलत दिशा में मोडा जा रहा है सरकार समर्थक लोग चीन और अमेरिका के सामानों का बहिष्कार करने की बात करते हैं जबकि उनके घर लगभग सारे सामान चीन और अमेरिका द्वारा बने हैं यह कभी नहीं प्रयास किया जाता कि हम चीन अमेरिका से अच्छे सामान उनसे सस्ती दर पर बनाने का प्रयास करें राजनेताओं ने सारी सुविधाएं अपने लिए मिली मार नूरा कुश्ती के तहत कर लिया है और एक साथ कई जगह से लड़कर कहीं ना कहीं से जीत ही जाते हैं नीचे से ऊंची प्रतियोगिताओं से आने वाले पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी अंगूठा छाप सांसद विधायक के आगे कुछ नहीं है उच्च और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया तो बहुत ही घटिया और खराब है। बिना किसी परीक्षा प्रतियोगिता के सीधे उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में जज बनने वाला व्यक्ति कितना उच्च स्तर का काम कर सकता है। 

देश का हाथ पैर सीना काटकर पाकिस्तान बांग्लादेश कश्मीर अफगानिस्तान तिब्बत लंका म्यांमार मालदीव्स को बांटकर यह आशा बनी थी कि भारत एक सनातनी देश होगा जिसमें हिंदी हिंदू हिंदुस्तान और राम राज्य का बोलबाला रहेगा और कम से कम दुनिया में एक जगह तो सनातनी अर्थात गैर मुस्लिम गैर क्रिश्चियन गैर ईसाई सुरक्षित और अपने अनुसार जीवन जीते रहेंगे लेकिन वह भी आकाश कुसुम और मुंगेरीलाल का हसीन सपना बनकर रह गया है आज हिंदी और प्रदेश की भाषाएं लोग इसीलिए बोलते हैं कि जीवन भर कोशिश करके भी वे अंग्रेजी पढ़ लिख समझ और बोल नहीं सकते वे अपने भाषा प्रेम के कारण ऐसा नहीं करते हैं बल्कि विवश होकर ऐसा करते हैं सरकार कोई भी हो हर सरकार अंग्रेजी भाषा और अंग्रेजी रहन-सहन अंग्रेजी सभ्यता और अंग्रेजी प्रोटोकॉल को पूरे देश में जबरदस्ती लागू करती चली जा रही है और तमाम बहाना बनाकर दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे वैज्ञानिक भाषा हिंदी को मिटाने पर डटी हुई है। इसीलिए कहा जाता है कि -

*हमको न निज गौरव तथा निज देश का अभिमान है।

हम नर नहीं है पशु निरा है और मृतक समान हैं।

इस प्रकार निष्पक्ष रूप से यह कहा जा सकता है कि भारत में स्वतंत्रता के बाद  बहुत भारी प्रगति किया है लेकिनअगर रूस इसराइल चीन जर्मनी ईरान  और अमेरिका से तुलना करके देखा जाए तो हम अर्थव्यवस्था खेल अंतरिक्ष शक्ति में उनसे बहुत-बहुत पीछे हैं इसी प्रकार प्रति व्यक्ति आमदनी में भारत विश्व के 100 सर्वश्रेष्ठ देशों में भी नहीं है न्याय व्यवस्था बिजली पानी सड़क की उत्तम व्यवस्था और रेलगाड़िया की रफ्तार प्रेस की स्वतंत्रता के मायने में भी भारत की स्थिति बहुत शोचनीय है विश्व में कूटनीति और राजनीति के क्षेत्र में भी भारत बहुत पीछे है इसी तरह उच्चतर शोध अच्छे विश्वविद्यालय अच्छे समाचार पत्रों के मायनों में भी भारत की स्थिति बहुत ही खराब है

गंदगी प्रदूषण और हरियाली को लेकर तो भारत की स्थिति चिंता से भी चिंतनीय है स्थितियां इतनी खराब है कि लोगों की यात्रा के लिए आरक्षित टिकट का मिल पाना गंगा स्नान के बराबर है यही देश की वास्तविक स्थिति है और ट्रेनों में यात्रा करने वाले कोई भी सुरक्षित नहीं है जंजीर से बांधकर रखा गया शौचालय का मग्गा इसका प्रमाण है फिर भी देश आगे बढ़ रहा है अगर कोई सच्चा राष्ट्रभक्त व्यक्ति आ जाएगा तो उसी दिन से भारत बिल्कुल सही दिशा में सोने की चिड़िया और जगतगुरु हो सकता है। अभी तक तो लाल बहादुर शास्त्री जी को केंद्र में और कल्याण सिंह को राज्य में छोड़कर कोई महापुरुष उस कुर्सी को ठोकर मारने वाला नहीं आया लेकिन वर्तमान में यदि योगी जी प्रधानमंत्री बन जाते हैं और हेमंत विश्व शर्मा पुष्कर धामी शिवराज सिंह चौहान जैसे कुछ नेता आशा की किरण जागते हैं लेकिन अभी फिलहाल ऐसे योग्य महान मानव की प्रतीक्षा की जा रही है भगवान श्री राम से चलकर हर राजनेता गांधी पर आकर अटक जाता है और वहीं पर देश भटक जाता है।