Sunday, 7 August 2022

अखिल भारतीय मुस्लिम महासंघ के द्वारा आयोजित किए जा रहे जश्न ए आजादी के अमृत महोत्सव का पहला कार्यक्रम मदरसा फैजुल उलूम पर आयोजित किया गया !

अखिल भारतीय मुस्लिम महासंघ के द्वारा आयोजित किए जा रहे जश्न ए आजादी के अमृत महोत्सव का पहला कार्यक्रम मदरसा फैजुल उलूम पर आयोजित किया गया  ! जिसमें मुख्य अतिथि दर्जा राज्यमंत्री पैमक्सपैड उत्तर प्रदेश के चेयरमैन सूर्य प्रकाश पाल रहे इस कार्यक्रम में मुफ्ती उलेमा और पूरे देश से मदरसे में तालीम ले रहे तालिब इल्म शामिल रहे  ! मदरसों के बच्चों का जज्बा मादरे वतन जिंदाबाद , जश्न ए आजादी कायम रहे , और हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारों से फिजा हुब्बल वत्नी का जोश भर रहा था वही बच्चों ने तिलावते कलाम ए पाक नाते पाक तकरीर से शहीदाने आजादी की जानकारियां दी  ! इसी क्रम में मुख्य अतिथि सूर्य प्रकाश पाल ने कहा कि देश की *आजादी में पूरे मुल्क की कुर्बानियां शामिल है उन्हें हिंदू मुसलमान सिख या ईसाई में बाटा नहीं जा सकता*
 *क्योंकि उस वक्त मे सभी आजादी के सिपाही थे देश की स्वतंत्रता में सभी बराबर के हिस्सेदार हैं* !
*मदरसा फैजुल उलूम के बच्चों के जज्बे को देखकर कहा कि हमारा भारत पूरी तरह से सुरक्षित है* ! 
*कुछ लोग मुल्क की फिजा में जहर घोलना चाहते हैं जो हर सूरत में नाकाम रहेंगे* उन्होंने केंद्र और प्रदेश की सरकार के साथ-साथ हर घर तिरंगा लगाने का हर मुल्क के नागरिक से आवाहन किया इस मौके पर कार्यक्रम के संयोजक मुस्लिम महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष फरहत अली खान ने कहां की हमारी सोच कौमी एकता शांति और अमन की होना चाहिए! उन्होंने कहा कि *हमें हमेशा देश के कानून सरकार और सरजमीन ए वतन का एहतेराम और पालन करना अपना फर्ज मानना चाहिए* 
मदरसे के बानी मोहम्मद असलम जावेद कासमी ने सभी मेहमानाने और मुख्य अतिथि का धन्यवाद किया ! इस अवसर पर मुफ़्ती नासिर साहब कारी शकील मौलाना उबेद उल रहमान खान फैजी के अलावा  उलेमा मौलाना और मुफ्तयइकराम शामिल रहे!  निजामत मुफ्ती जिया उल हक ने की

-घर तिरंगा लगाएं आजादी के अमृत महोत्सव को मनाए,प्रेस क्लब पत्रकार एकता सेवा ट्रस्ट अध्यक्ष मुकेश कुमार

हर-घर तिरंगा लगाएं आजादी के अमृत महोत्सव को मनाए,

प्रेस क्लब पत्रकार एकता सेवा ट्रस्ट अध्यक्ष मुकेश कुमार 

मंडावर /आजादी का अमृत महोत्सव को लेकर हर-घर तिरंगा अभियान कार्यक्रम प्रत्येक नागरिक को मनाना चाहिए और इससे जुड़ना चाहिए देश के प्रधानमंत्री मोदी जी के आवाहन पर सभी देशवासियों को अपने अपने घरों पर तिरंगा अवश्य लगाना चाहिए तथा अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल स्टेटस में भी तिरंगा लगाना चाहिए यह हमारी आन बान शान का प्रतीक है हमारे देश का राष्ट्रीय ध्वज देश के लिए सम्मान और हमारे लिए देशभक्ति और स्वतंत्रता का भी प्रतीक है, प्रेस क्लब पत्रकार एकता सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष मुकेश कुमार ने बताया की भारत को आजाद कराने के लिए हमारे लोगों ने जो कुर्बानियां दी हैं,हमें उन को भूलना नहीं चाहिए और हम सभी देशवासियो को उनके आदर्शों पर चलना चाहिए सभी लोग आजादी के अमृत महोत्सव को बहुत धूमधाम से मनाएं तथा सरकार के आवाहन पर  सभी अपने घरों पर अपनी दुकानों पर तिरंगा अवश्य लगाएं!

Saturday, 6 August 2022

यूपी :अब किस्तों में भी जमा हो सकेगा ई चालान, यातायात पुलिस को दी गई 2050 ई पॉस मशीनें*

*यूपी :अब किस्तों में भी जमा हो सकेगा ई चालान, यातायात पुलिस को दी गई 2050 ई पॉस मशीनें*
प्रदेश में गाड़ियों के होने वाले चालान का भुगतान अब किस्तों में भी किया जा सकेगा। यातायात निदेशालय पहले चरण में ऑन स्पॉट पेमेंट के लिए पुलिस कर्मियों को 2050 ई पॉस मशीनें उपलब्ध करा चुका है। शेष 7950 ई पॉस मशीनें भी जल्द मुहैया करा दी जाएंगी। इन मशीनों पर डेबिट व क्रेडिट कार्ड से भी भुगतान की सुविधा है। इसके जरिये भुगतान करने के बाद वाहन स्वामी बैंक को किस्तों में पैसे लौटा सकते हैं।
अभी तक ई चालान के भुगतान के लिए लोगों को यातायात पुलिस के विभिन्न कार्यालयों में भटकना पड़ता था। इसके बावजूद भुगतान करने में तमाम दिक्कतें आती थीं। अब यातायात पुलिस के पास उपलब्ध ई पॉस के जरिये चालान का भुगतान किया जा सकेगा। यही नहीं चालान की जानकारी बाद में होने पर भी किसी भी चौराहे पर मौजूद यातायात पुलिस कर्मी के पास उपलब्ध ई पॉस मशीन के जरिये भुगतान किया जा सकता है। इस व्यवस्था से चालान के जरिये मिलने वाले राजस्व में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है। ई-चालान का भुगतान विभिन्न वैलेट से भी किया जा सके, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं जिनकी गाड़ी का चालान हो चुका है लेकिन उनको जानकारी नहीं है। इसकी वजह आरटीओ के सिस्टम में उनके मोबाइल नंबर का अपडेट नहीं होना है। इसके लिए एडीजी यातायात अनुपम कुलश्रेष्ठ ने परिवहन विभाग के अधिकारियों को पत्र लिखकर बीमा कंपनियों से गाड़ी मालिकों का मोबाइल नंबर लेकर आरटीओ के डाटा बेस में अपडेट करने का अनुरोध किया है।

यह कलयुग है और कभी भी कोई भी काम अपने मन से कर सकते हैं इस लेख को गहराई से पढ़ें वरना समझ में नहीं आएगा 11 अगस्त को भी आप रक्षाबंधन मना कर राखी बांध सकते हैं क्योंकि जब आप धर्म का अध्यात्म का काम करते हुए पूजा-पाठ व्रत-त्योहार करते हुए दुराचार कर सकते हैं झूठ बोल सकते हैं अधर्म कर सकते हैं तो 11 अगस्त या 12 अगस्त में कभी भी रक्षाबंधन मना सकते हैं वैसे भी अगस्त भारतीय वर्ष या महीना नहीं है

कभी भी मनाया जा सकता है रक्षाबंधन अर्थात राखी कहां महापर्व चाहे 111 को मना लो चाहे 12 अगस्त को बना लो धूर्त और ठग तथा ढोंगी लोग इस पोस्ट को पढ़कर पागल हो जाएंगे क्योंकि उनका सारा झूठ सामने आ जाएगा जब भी देशवासियों की इच्छा हो विदेशी वस्त्रों में सज धज कर जैसे अंग्रेजी तिथि के अनुसार केक काटकर सिर पर जो कर जैसी टोपी लगाकर जन्मदिन मनाते हैं वैसे हाय हेलो मम्मी डैडी पापा सिस्टर ब्रदर करते हुए शेकहैंड करते हुए कोर्ट बूट शूज टाइप पहनकर पुरुष और स्त्रियां दोनों शानदार जानदार दमदार ढंग से रक्षाबंधन मनाने और शाम को जमकर मांस मदिरा का सेवन करते हुए नियम कानूनों की धज्जियां उड़ा दें और आने वाले दिनों में तमाम सावन के व्रत करवा चौथ गणेश चौथ मंगलवार का व्रत जमकर भारत के स्त्री पुरुष करें साक्षात देवी देवताओं और ईश्वर का दर्शन हो जाएगा डॉ दिलीप कुमार सिंह

*इस समय दुकान से राखी खरीद कर यह पूछा जा रहा है कि रक्षाबंधन कब मनाया जाएगा साल भर में एक राखी तो अपने हाथ से बहने बना नहीं सकते और भाई से आशा करते हैं कि वह उनके लिए अपनी जान दे देगा मेरा यह कहना है कि जब जिसके मन में आए तभी रक्षाबंधन मना ले क्योंकि धर्म-कर्म और कर्तव्य निभाते हुए पाप कर्म करने से अच्छा है की अपनी इच्छा अनुसार शुद्ध मन से कोई काम कभी भी कर लो मेरा यह निश्चित मत है कि आप जैसे मन में आए हुए से व्रत त्यौहार मना लो पूजा पाठ कर लो व्रत के साथ हवन भी जैसे मन में आए कर लो और इतना ही नहीं विवाह जैसे पवित्र कर्म भी अपने हिसाब से कर लो और जब विवाह वास्तविक रूप से हो तब वहां मंत्र पढ़ने सुनने समझने के लिए 4 लोगों से अधिक कोई ना हो यह कलयुग है भाई यहां पर हंस और कछुए वाली बात हर जगह सही हो रही है इसलिए जब आपकी जो इच्छा आए वही करो वही नियम कानून है*

यह कलयुग है और कभी भी कोई भी काम अपने मन से कर सकते हैं इस लेख को गहराई से पढ़ें वरना समझ में नहीं आएगा 11 अगस्त को भी आप रक्षाबंधन मना कर राखी बांध सकते हैं क्योंकि जब आप धर्म का अध्यात्म का काम करते हुए पूजा-पाठ व्रत-त्योहार करते हुए दुराचार कर सकते हैं झूठ बोल सकते हैं अधर्म कर सकते हैं तो 11 अगस्त या 12 अगस्त में कभी भी रक्षाबंधन मना सकते हैं वैसे भी अगस्त भारतीय वर्ष या महीना नहीं है
*जब देश में मंदिर सुने सुने हैं और मधुशाला भरी है लाज शर्म छोड़कर माताएं बहने पत्नियां सार्वजनिक समाज में अर्धनग्न और नग्न होकर नाच रही हैं तो आप कोई भी चीज कभी भी कर सकते हैं कोई भी व्रत त्योहार कभी भी मना सकते हैं*

*जब पुत्र वधू पुत्री और बहन जैसे पवित्रतम संबंध दुराचार की भेंट चढ़ रहे हैं तो फिर किसी नियम कानून और धर्म ग्रंथों की आवश्यकता ही क्या है जब लज्जा और बड़े छोटे की भावना समाप्त हो गई जब नियम कानून जनता के अनुसार ना बनकर धनकुबेर और राजनेताओं अधिकारियों के अनुसार बन गया तो कोई भी व्रत पर्व त्योहार कभी भी मनाया जा सकता है*

*धर्म-कर्म के आचार्य पंडित और बुद्धिजीवी जब विवाह वैदिक धर्म सेना करके सूट बूट टाई पहन कर बेहद गंदे ढंग से नाचते हुए राजाओं की तरह सिंहासन पर बैठ कर हो सकते हैं तो रक्षाबंधन या कोई भी पर्व त्यौहार कभी भी और कहीं भी अपने मन से मनाया जा सकता है*

*संचार संचार क्रांति के इस युग में जब सारा घर मोबाइल लेकर अपने में व्यस्त है और दूसरे की हाल लेने में भी किसी को कोई रुचि नहीं है और 2 से 5 घंटे फालतू समय बिता रहा है तो उसके लिए शुभ मुहूर्त की अच्छे दिन की क्या आवश्यकता है वैसे भी ज्यादातर लोग अब इंटरनेट के सहारे पोस्ट लिखते हैं और उसी के अनुसार शुभ मुहूर्तनिकालते हैं पूछी पत्र बनाते हैं और स्त्रियां पति से की जगह सारी दुनिया की सेवक करने का थीका लेकर बैठी हैं पति-पत्नी की आंखों में धूल झोंक कर रखैल रखे हुए हैं* 

*तो इन सब ढकोसलोंकीक्याआवश्यकता है
जब बेटा बाप से पत्नी पति से और छोटे बड़ों से जुबान लड़ा रहे हैं और सभ्यता आशीष सदा की सारी सीमाएं पार कर चुके हैं जब छोटे-छोटे बच्चे ब्लू फिल्म और नंगी साइट देख रहे हैं नैतिकता चरित्र नाम की कोई चीज नहीं है तो फिर धर्म ग्रंथों की दुहाई क्यों दी जाती है
जब चारों और काले मन और काले धन का बोलबाला है जिसके हाथ में लाठी है उसकी भैंस है परसों के आगे पुलिस प्रशासन न्यायपालिका के 90% से अधिक लोग बिके हुए हैं तो उसमें इन सब चीजों की क्या आवश्यकता है*

जब आजाद देश में भी कोई राष्ट्रीय वेशभूषा नहीं है अपनी राष्ट्रभाषा नहीं है सब कुछ विदेशी और अंग्रेजी ढंग से चल रहा है सारे संस्कृत सभ्यता ही विदेशी हो गई है और सावन महीने की जगह हिंदी महीनों का त्यौहार अगस्त सितंबर अक्टूबर जैसे अंग्रेजी तारीखों से निश्चित हो रहा है देश की आन देश की स्वतंत्रता तक का निर्धारण 2 अक्टूबर 15 अगस्त 26 जनवरी जैसे अंग्रेजी तिथियों से होता है तो फिर यह नौटंकी करने की क्या आवश्यकता है

जब असली ईश्वर भक्तों को असली धर्म और कर्मकांड लोगों का असली प्रतिभाओं का चरित्रवान और गुणवान लोगों का छल कपट धोखे से नौकरी पाए अधिकारियों और सांसद विधायक मंत्री बने नेताओं के आगे कोई सम्मान ही नहीं तो उस देश में किसी नियम कानून की क्या आवश्यकता है

जब आप अपने घर में बने शुद्ध भोजन और भारतीय परंपरा के अनुसार आराम से पालथी मारकर या आसन लगाकर नहीं खा सकते खड़े-खड़े खा रहे हैं और खड़े खड़े पानी पी रहे हैं खड़े-खड़े भोजन बना रहे हैं और शुद्ध दाल चावल रोटी सब्जी सलाद दूध दही की जगह पिज्जा बर्गर कुरकुरे धकाधक चटपटे मैगी चाऊमीन जैसे बेहद गंदे मसालेदार और नकली तेल से बने भोजन और मिठाइयां तथा नकली दूध दही छेना खोवा पनीर मक्खन भी खा रहे हैं उस देश में धर्म कर्म के लिए नियम मरने की क्या जरूरत है

जब धन और पैसों के लिए आदमी औरतें भी करेंगे मान सम्मान दांव पर लगा दे रहे हैं लज्जा सील रह नहीं गए हैं और अपने देवी-देवताओं की जगह लोग गरासिया मकाबरे और कब रोता था मस्जिदों में जा रहे हैं बड़े-बड़े लोग उन्हीं के बर्तनों में उन्हीं के घर चाट रहे हैं तो फिर बार-बार व्रत त्यौहार के लिए तारीख में पूछने की क्या आवश्यकता है कलयुग है ही मार्ग सोए जाकर जो भावा पंडित सोई जो गाल बजाओ

इसलिए मेरा कहना है कि जिसका जो मन है वही करो कोई नियम कानून चलने वाला नहीं है इस कलयुग में सब लोग एक दूसरे की आंख में धूल झोंक को एक दूसरे से धोखाधड़ी चोरी छल कपट करो और जल्दी ही विनाश के कगार पर पहुंच कर समाप्त हो जाओ अगर हम धर्म कर्म के अनुसार रहे होते अपने धर्म की रक्षा किया होता तो आज भारत में सनातन धर्म क्यों समाप्ति के कगार पर होता क्यों आपने वृहत्तर भारत के ईरान अफगानिस्तान अरब देशों पाकिस्तान बांग्लादेश नेपाल भूटान मालदीव वर्मा लाओस कंबोडिया सिंगापुर ताइवान वियतनाम इंडोनेशिया मलेशिया श्रीलंका जैसे देशों को खोकर खुद भी विनाश के कगार पर पहुंच जाते

इसलिए मेरा कहना है कि फालतू की बकवास तर्क वितर्क मत कीजिए आपको अपने धर्म कर्म संस्कृति सभ्यता नियम कानूनों के प्रति जरा भी प्रेम और लगाओ नहीं रह गया है रहन-सहन बोलचाल वेशभूषा नौकरी के ढंग सब कुछ से हम पूरी तरह विदेशी हो गए हैं एक कहावत है सिर पर लाल टोपी रूसी फिर भी हम हैं हिंदुस्तानी मेरा जूता है जापानी यह पतलून इंग्लिष्टानी

इसलिए अगर आप सबके अंदर जगह भी लज्जा शर्मा भारतीय भावना स्वदेश प्रेम और सनातन धर्म के प्रति सच्चा प्रेम हो तो इस पोस्ट को ध्यान से पढ़ें और सोचे हम कौन थे क्या हो गए हैं और क्या होंगे अभी क्या हमारे पतन की गिरने की कोई सीमा भी हैं क्या लज्जा और शर्म नाम की कोई चीज है भारत के अंदर यह सब बातें सोच कर धर्म ग्रंथों और विधि विधान के अनुसार 

*12 अगस्त को सुबह 5:00 बजे से 8:00 बजे के अंदर रक्षाबंधन मना ले वरना तो कलयुग है जो करें सब अच्छा ही है पोस्ट पढ़कर क्रोध से लाल पीले मत होना दांत मत किटकिटाना अपना सिर दीवाल पर मत दे मारना गुस्से में वर्णन सिर फट जाएगा कुछ मिलेगा भी नहीं झूठ मुठ के स्वदेश प्रेमी होने और सनातनी होने का नौटंकी छोड़ दो अगर ऐसा ही होता तो हमारे धर्म गुरु आचार्य संत महंत सांसद विधायक और मंत्री बड़े-बड़े धनकुबेर और बुद्धिजीवी दुराचार में काले धन में और गलत आचरण में पकड़ कर जेल नहीं जाते वैसे ही सरकार ने सातवें वेतन आयोग से इतना दे दिया है कि दोनों हाथ से धन लूट आओ तब भी नहीं समाप्त होगा इसके बाद भी दिन रात लूटपाट पर जुटे हैं ऊपर से चल रहे हैं धर्म कर्म के अनुसार रक्षाबंधन मनाने धिक्कार है लज्जा शर्म से विहीन लोगों*

कब मनाया जायेगा परम् पवित्र रखी का महापर्व
शास्त्रीय नियम के अनुसार रक्षाबंधन 12 अगस्त को ही मनाया जाएगा. यहीं धर्म ग्रंथों का आदेश है 
धर्म सिंधु के अनुसार अपराह्न या प्रदोष व्यापिनी श्रावण शुक्ल रक्षाबंधन बधाई जाए ।
ऐसा निर्देश है किंतु  शास्त्रीय विधान यह हैं कि उस समय भद्रा नही होनी चाहिए। इसलिए 
उपरोक्त विवरण के अनुसार यह योग 11 अगस्त को बनता है क्योंकि 11 अगस्त को प्रातः 09:38 से पूर्णिमा आ जाएगी। लेकिन उसी समय अर्थात प्रात: 09:38 बजे से रात्रि 8:25 बजे तक भद्रा रहेगी।
यथा-
*पूर्णिमायां भद्रारहितायां त्रिमुहुर्ताधिकोदय व्यापिन्यामपराह्ने प्रदोषे वा कार्यम्।*
जैसा धर्मसिंधु में उल्लेख  है कि
*भद्रायां द्वे न कर्तव्यम् श्रावणी फाल्गुनी वा। श्रावणी नृपतिं हन्ति,ग्रामों दहति फाल्गुनी।*
अर्थात भद्रा काल में दो त्यौहार नहीं मनाने चाहिए ।श्रावणी अर्थात रक्षाबंधन ।फाल्गुनी अर्थात होली।
भद्रा काल में रक्षाबंधन मनेगा तो हानिकारक है।(इदम् भद्रायां न कार्यम्।)
शुभ और कल्याण की इच्छा रखने वाली बहन, बेटियों माताओं को अपने भाइयों की कलाई में भद्राकाल में राखी नहीं बांधनी चाहिए।
लौकिक व्यवहार में रक्षा विधान हमेशा प्रात: समय अथवा दोपहर में होता है इसीलिए इस दिन में उदया तिथि ली जाती है।
12 अगस्त को प्रातः 7:16 बजे तक पूर्णिमा है उसके पश्चात प्रतिपदा आएगी।
उस दिन सूर्य  5:30 उदय  होंगे। पूर्णिमा मात्र 01 घंटा 45 मिनट रहेगी। 12 अगस्त 2022 दिन शुक्रवार में सूर्य उदय के बाद 3 घटी से भी अधिक है । संकल्पादिता तिथि धर्म कृत्योपयोगी  रक्षाबंधन के लिए श्रेष्ठ मानी जाएगी।
कुछ विद्वान 11 अगस्त को रक्षाबंधन का बनाने का निर्णय कर सकते हैं जो शास्त्र के विपरीत है क्योंकि जिस समय पूर्णिमा आएगी उसी समय भद्रा आरंभ हो जाएगी और भद्रा में रक्षाबंधन करना शुभ नहीं होता है।

12 अगस्त 2022 दिन शुक्रवार के दिन धनिष्ठा नक्षत्र रात्रि 03:45 बजे तक रहेगा । जिससे इस दिन धाता और सौभाग्य योग बन रहा है ।जो बहन भाइयों के प्रेम को बढ़ाने वाला और उत्साहवर्धक होता है।

**12 अगस्त को राखी बांधने का शुभ मुहूर्त-**
प्रातः काल 05:30 से 8:09 तक सिंह लग्न रहेगा जो रक्षाबंधन के लिए सर्वोत्तम समय रहेगा ।

रक्षाबंधन का मंत्र:
 *येन बद्धो बलि राजा दानवेंद्रो महाबल:।*
 *तेनत्वां प्रति बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।*


*उपरोक्त शुभ मुहूर्त में बहनें अपने भाइयों की कलाइयों में राखी बांधकर उनके  उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और समृद्धि की कामना करें तो निश्चित ही उनको आपका आशीर्वाद प्राप्त होगा। डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी बाल गोपाल शिवानी ज्योतिष मौसम और विज्ञान अनुसंधान केंद्र*

[8/7, 10:04 AM] Dileep Singh Rajput Jounpur: *इस वर्ष के रक्षाबंधन सभी विद्वानों और ज्योतिषी लोगों तथा पंचांग करो को दुविधा में डाल दिया है*
*जिसका कारण है कि 11 अगस्त को श्रावण माह के चतुर्दशी है अर्थात सूर्य के उदय होने पर उदया तिथि में पूर्णिमा नहीं है पूर्णिमा का प्रारंभ सुबह 9:35 पर और भारत के उत्तरी भागों में 9:40 पर हो रहा है जिस का समापन अगले दिन 8:00 बजे सुबह के लगभग हो रहा है*

*और सबसे बड़ी बात यह है की पूर्णिमा तिथि और भद्र तिथि एक साथ ही 11 अगस्त को 9:35 पर लग रही है अब कुछ विद्वान यह कह कर 11 को रक्षाबंधन का पर्व उचित मान रहे हैं कि भद्रा अंतरिक्ष में और पृथ्वी पर ना होकर पाताल लोक में है उन मूर्खों को यह मालूम नहीं है कि पाताल भी धरती का ही अंश है और सबसे बड़ी बात है कि भद्रा 11 तारीख को रात 8:25 है तब तक सूर्य अस्त हो जाएगा इस समय सूर्य लगभग 6:25 पर अस्त हो रहा है*

*ऐसे में अगर आप महापर्व रक्षाबंधन और श्रावण मास के अन्य क्रिया कर्म करते हैं तो रात 8:25 के बाद ही करना होगा और अगर 12 अगस्त को रक्षाबंधन और श्रावणी क्रिया कर्म करेंगे तो 8:00 बजे के पहले ही करना होगा क्योंकि उसके बाद प्रथम अतिथि लग जा रही हैं*

*ज्योतिष ग्रंथों और निर्णय सिंधु या अन्य सभी ग्रंथ इस बारे में मौन है कि ऐसी स्थितियों में क्या करना चाहिए ठीक वैसे ही जैसे खेल में या सेना में कितना ही प्रशिक्षण लेकर और नियम सीख कर जाए लेकिन वहां पर आप परिस्थितियां बिल्कुल अलग पाते हैं और अगर वह किताब के अनुसार या प्रशिक्षण के अनुसार चलेगा तो बेमौत मारा जायेगा*

*12 अगस्त को उदया तिथि से पूर्णिमा मिल रही है लेकिन उदया तिथि के लिए कम से कम 6 घंटे का समय सामान्य रूप से माना जाता है हालांकि इसके बहुत ठोस प्रमाण नहीं है लेकिन इसका आधा समय ही मिल रहा है इस बारे में आलोचना प्रत्यलोचना और दोष निकालने का कोई मतलब नहीं है इसलिए ऐसे विषयों पर पूरे देश में सनातन धर्म के विद्वान और ज्योतिषि लोगों के द्वारा पहले से ही एक राय एकमत होकर एक नियम निकाल लेना चाहिए क्योंकि इस परम ब्रह्म मेंकोई भी चीज पूरी तरह स्थितियां निश्चित नहीं की जा सकती*/

*ऐसे में दो स्थितियां बन रही हैं और दोनों में आप आराम से रक्षाबंधन का पर्व अपनी सुविधानुसार मना सकते हैं यह तो रात में 8:25 पर 11 अगस्त को आप रक्षाबंधन का और सरावली क्रिया कर्म का पर्व मना सकते हैं या फिर उदया तिथि को भी अर्थात 12 अगस्त को प्रातः 5:00 बजे से लेकर 8:00 बजे के बीच भी मना सकते हैं मेरा तो यही मत है कि लोकमत वेद मत और जनमत तीनों का मिश्रण जैसा हो वैसा ही करना चाहिए इसमें विद्वत्ता दिखाने की आवश्यकता नहीं है बाकी तो कलिकाल चल ही रहा है जो उचित समझ में आए वही कीजिए फिर भी सूर्य के अस्त के बाद और रात में रक्षाबंधन मनाने से तो 12 अगस्त को सूर्योदय के साथ शुभ मुहूर्त में मनाया जाना ही अधिक उचित प्रतीत होता है डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र*

विषय से हटकर में भारत के सभी विद्वान और जोशी तथा पंचांग का लोगों से पूछना चाहता हूं कि जिस ढंग से आपके घर के बच्चे पश्चिमी सभ्यता में रह रहे हैं पढ़ रहे हैं और वेशभूषा वस्त्र पहन रहे हैं उसका उल्लेख भारत के किस वेद पुराण धर्म ग्रंथ में किया है कृपया बताएं किसी भी सनातनी धर्म ग्रंथ वेद पुराण में कहीं भी रात्र में विवाह का उल्लेख नहीं है आवाज सारे विवाह रात में ही किए जा रहे हैं इस पर भी बताएं जो विवाह कर्म किए जा रहे हैं उसमें डीजे आर्केस्ट्रा इत्यादि किस धर्म ग्रंथ के अनुसार है और इतना ही नहीं हमारे घर की संस्कृति सभ्यता जो विकसित हो रही है वह किस धर्म के अनुसार हम अपने बच्चों को दे रहे हैं और किस धर्म के अनुसार हम अंग्रेजी भाषा और अंग्रेजी कानून का पालन कर रहे हैं

 *अपने मन से करना है तो जो भी कीजिए वरना जो हो रहा है होने दीजिए इस पर सनातन धर्म का सनातन धर्म की तथाकथित सरकार का हमारा आपका कोई नियंत्रण नहीं है हमारे आपके बच्चे पापा मम्मी डैडी आंटी अंकल हाय हेलो कह रहे हैं खड़े-खड़े भोजन खा रहे हैं खड़े-खड़े पानी पी रहे हैं खड़े-खड़े रसोई मान रही हैं यह सब किस धर्म ग्रंथ के अनुसार हो रहा है कृपया निष्पक्षता और गहराई से विचार करें जन्मदिन और केक काटना मोमबत्ती ठोकर बुझाना यह सब किस वेद मत लोकमत के अनुसार हैं और सबसे बड़े दुख की बात है कि हम आप विद्वान और ज्योतिषी लोगों और ब्राह्मण तथा छतरी लोगों के घर हो रहा है सामान्य जनता की बात ही छोड़ दीजिए*

*मैं आप सभी लोगों से अब बिल्कुल साफ साफ कहना चाहता हूं कि बिना किसी संदेह भ्रम के 11 अगस्त को रात में 8:30 बजे से लेकर 12 अगस्त को 7:30 बजे सुबह तक आराम से आप रक्षाबंधन कभी भी मना सकते हैं इससे अधिक कुछ कहने सुनने की आवश्यकता नहीं है कोई भी ऐसा कार्य ना करें जिससे सनातन धर्म के रास्ते टकराव की ओर बढ़े अभी तो हमें पहले सभी गैर मुसलमानों गए ईसाई लोगों और गैर यहूदी लोगों के साथ-साथ पंत को धर्म मान रहे सिख जैन बौद्ध और पारसी लोगों को पहले सनातन धर्म में शामिल करना है मैं एक बार फिर सभी से यह कहना चाहूंगा कि शंका या भ्रम में मत पड़े 11 अगस्त को रात में 8:30 बजे से लेकर अपनी सुविधा अनुसार 12 अगस्त को सुबह 7:30 बजे तक आराम से रक्षाबंधन मनाया और श्रावण मास के अन्य कर्म करें सामान्य जनता तो कभी भी रक्षाबंधन मना सकती है लेकिन फिर भी आग्रह है कि जिसे 11 अगस्त को रक्षाबंधन मनाना है या राखी बाजनी है वही 11 अगस्त को रात 8:30 बजे के बाद ही ऐसा करें यही सारे वेद मत लोकमत और जनमत तथा धर्म ग्रंथों और ज्योतिष ग्रंथों का निचोड़ है इसमें विद्वान बनने की या खुद को बड़ा या छोटा साबित करने की कोई आवश्यकता नहीं है वैसे भी सबसे बड़ा नियम यही है कि पूरे श्रद्धा विश्वास और भक्ति के साथ आप कुछ भी कभी भी कर सकते हैंडॉ दिलीप कुमार सिंह*
[8/7, 10:04 AM] Dileep Singh Rajput Jounpur: 🕉️🌹 जज साहब । आपने बिल्कुल हंड्रेड परसेंट सही बात कही वर्तमान के समय में जनमानस के सोच एवं उनके द्वारा किए जा रहे नैतिक अनैतिक कर्मों में भेद को ना मानते हुए अपने मन की मनमानी करते हैं तथा फिर सुखद परिणाम की उम्मीद करते हैं। अनिष्ट कारक परिणाम प्राप्त होने के पश्चात शास्त्रों की गाइडलाइन को ही गलत साबित करने का असफल प्रयास करते हैं। जबकि इतिहास में बुरे कर्मों के परिणाम का साक्ष्य उनके समक्ष उपलब्ध है। हर हर महादेव शंभू।।🌹🕉️
[8/7, 10:04 AM] Dileep Singh Rajput Jounpur: *जी हां बिल्कुल सही कहा है आपने और हमारा आपका और सभी विद्वान तथा जोशी लोगों सच्चा सनातनी देशभक्त और सनातन धर्म के रक्षक लोगों से यही आशा है कि आपस में मिलकर सर्वमान्य तिथि और नियमों को अपनाते हुए इसकी रक्षा करें धर्म और देश की रक्षा न करने का कारण ही है कि हम आज पहले के भारत से 11 गुना छोटा हो गए हैं जो कभी ईरान से इंडोनेशिया और कजाकिस्तान शिनजियांग प्रांत से श्रीलंका और मालदीव तक फैला हुआ था आज बचे हुए भारत में भी आधा भूभाग विधर्मी लोगों के हाथ चला गया है फिर भी हम आपसे अहंकार एक दूसरे से बड़े होने की सोच और खुद को बड़ा विद्वान मानने की भूल की आदत छोड़ नहीं रहे हैं ऐसा करना बिल्कुल उचित नहीं है राक्षस तो नियमों के विपरीत चाहे जो कर सकता है लेकिन देवता ऐसा नहीं कर सकते इसीलिए ईश्वर भी नियम के अधीन रहकर सारा सुख दुख शराब इत्यादि भोंgते हैं और धरती लोक पर उसे भोगने आते हैं*

सरकार पत्रकारों के हित मे 15 अगस्त को समितियों का गठन करने की घोषणा करें - सूरज ब्रम्हे ( राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, और सभी प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों को पत्र प्रेषित कर मांग की है )#www.aumtv786.blogspot.com

सरकार पत्रकारों के हित मे 15 अगस्त को समितियों का गठन करने की घोषणा करें - सूरज ब्रम्हे    ( राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, और सभी प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों को पत्र प्रेषित कर मांग की है )
नरेंद्र मोदी विचार मंच के राष्ट्रीय संयोजक एवं अखिल भारतीय प्रेस महासंघ के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री सूरज ब्रम्हे ने देश के महामहिम राष्ट्रपति, देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी, एवं समस्त प्रदेशों के मुख्यमंत्री को पत्र प्रेषित कर मांग की है कि प्रेस मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ये लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ माना गया है। हमारा देश स्वतंत्रता की 75 वी वर्षगांठ अमृत महाउत्सव के रूप में हर घर तिरंगे लगा कर माना रहा है। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ में काम करने वाला हमारा पत्रकार भाई भूखे रहकर काम करने पर मजबूर है। लोकतंत्र के तीनों स्तंभों में कार्य करने वालों को सरकार वेतन या मानदेय के रूप में एक अच्छी राशि उनके कार्य के एवज में दिया जाता है। किन्तु लोकतंत्र के चौथे स्तंभ में कार्य करने वालों को ना वेतन के रूप में ना ही मानदेय के रूप में कोई राशि नही दी जाती ना ही उनकी कोई सुरक्षा की व्यवस्था है। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ में कार्य करने वाले पत्रकार देश को आईना दिखाने का कार्य अपनी जान पर खेल कर कर रहें हैं। सरकार की ओर से उनको किसी भी प्रकार से सहायता नही दी जा रही है। जिससे वे अपने और अपने परिवार का भरण-पोषण बहुत ही मुश्किल से कर पाते हैं। श्री ब्रम्हे ने पत्रकारों के हित मे सरकार से मांग की है कि पत्रकारों के हित मे राष्ट्रीय समिति, प्रदेश समिति, जिला समिति और तहसील समिति का शीघ्र गठन किया जाए जिससे पत्रकारों का दुर्घटना बीमा, बीमारी सहायता , अधिमान्यता पत्रकार, सुरक्षा व्यवस्था , उनके बच्चों को निशुल्क शिक्षा व्यवस्था सहित अन्य कार्य पारदर्शिता के साथ शीघ्रता से किये जा सकें। सरकार के द्वारा समितियों का गठन कर जनसंपर्क विभाग को निर्देशित कर अधिमान्यता समिति,  पत्रकार कल्याण समिति, श्रम कल्याण बोर्ड,  पत्रकारिता पुरस्कार चयन समिति, जिला स्तरीय समितियों , तहसील समिति में भागीदारी, सहित अन्य सभी समितियों का गठन तत्काल किए जाने के निर्देश जारी करते हुवे स्वत्रंत्रता की 75 वी वर्षगांठ पर घोषण किया जाये। तथा इन समितियों में राष्ट्रीय स्तर पर , प्रदेश स्तर, जिला स्तर, एवं तहसील स्तर पर  श्रम विभाग से पंजीकृत पत्रकार यूनियनों , संगठनों के प्रतिनिधियों को उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष , प्रदेश अध्यक्ष की अनुशंसा पर शामिल किया जाए।  ऐसे पत्रकार जिनको किसी अपराधिक प्रकरण में सजा हो चुकी है अथवा जिनके विरुद्ध प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है , ऐसे पत्रकारों को किसी भी समिति में शामिल ना किया जाए । जनसंपर्क विभाग द्वारा विभिन्न समितियों में अनुभवी निर्विवाद और केंद्र सरकार औऱ राज्य शासन की जन कल्याणकारी नीतियों का प्रचार प्रसार करने में रुचि रखने वाले पत्रकारों को विभिन्न समितियों का सदस्य बनाया जाए । जनसंपर्क विभाग द्वारा पत्रकारों को दिए जाने वाले विभिन्न श्रेणी के पुरस्कार के लिए केवल उन पत्रकारों का चयन किया जाए जिन्होंने सरकार के हित मे तथा जनता के हित मे अच्छा काम किया हो। श्री ब्रम्हे ने कहा कि पत्रकारों पर आये दिन हमला होने की खबर हमको समाचार पत्रों के माध्यम से पढ़ने को मिलता है। हमले से कई पत्रकारों की जान भी चली जाती है। लेकिन सरकार की ओर से उनके परिवार को किसी भी प्रकार की कोई सहायता नही की जाती। जबकि पत्रकार सरकार और जनता के बीच की धुरी है जो सरकार की नीतियों की जानकारी जनता तक और जनता की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने का काम करते हैं। श्री ब्रम्हे ने विनम्र अनुरोध करते हुवे महामहिम राष्ट्रपति, मा.प्रधानमंत्री, मा.सभी प्रदेशों के सम्माननीय मुख्यमंत्रीगण से मांग कि है कि पत्रकारों के हित में विभिन्न समितियों के गठन संबंधी  कार्यवाही  तत्काल प्रारंभ हो, ऐसे  निर्देश जारी करने की कृपा करें।                           प्रति, श्रीमान सम्पादक जी, श्रीमान जिलाप्रतिनिधि महोदय, श्रीमान तहसील प्रतिनिधि महोदय,.......सादर प्रकाशनार्थ .....सधन्यवाद सादर.......   प्रेषक - सूरज ब्रम्हे, राष्ट्रीय संयोजक नरेंद्र मोदी विचार मंच एवं राष्ट्रीय संगठन महामंत्री अखिल भारतीय प्रेस महासंघ

गौशाला के महाराज ने केसरिया हिंदू वाहिनी की टीम को बताया पाकिस्तानी आतंकवादी

गौशाला के महाराज ने केसरिया हिंदू वाहिनी की  टीम को बताया पाकिस्तानी आतंकवादी

शनिवार लगभग बारह बजे के समय  केसरिया हिंदू वाहिनी की टीम मृत गौ वंश का अंतिम संस्कार करने के लिए पहुंची थी। जिसकी सूचना उप जिलाधिकारी को दे दी गई थी। इसके बाद केसरिया हिंदू वाहिनी टीम ने देखा कि 2 गोवंश गौशाला परिसर से बाहर आ रहे थे। जिसकी सूचना केसरिया हिंदू वाहिनी की टीम द्वारा गौशाला के कर्मचारियों को दी गई ।इस पर गौशाला के कर्मचारियों ने बताया कि गोवंश गलती से बाहर चले गए होंगे ।इसके बाद केसरीया हिंदू टीम की नजर गौशाला परिसर में मृत गोवंश पर पड़ी जिसकी जानकारी टीम ने कर्मचारियों से लेने  पर उन्होंने बताया कि यह गोवंश हाल ही में मरा है ।जबकि देखने पर प्रतीत हो रहा कि मृत गौवंश काफी पहले का मृत है क्योकि उसकी आंखें भी पंछी नोच चुके थे उसके बाद गौशाला परिसर में दो गोवंश गंभीर हालत में पड़े हुए थे इन सब को देख ही रहे थे कि पश्चिम उत्तर प्रदेश प्रभारी मुकेश कुमार के पास ब्लाक प्रमुख नजीबाबाद का फोन आया और फोन पर उन्होंने प्रभारी से अभद्रता से बात की इसको लेकर केसरिया हिंदू वाहिनी के सभी कार्यकर्ता गौशाला के सामने रोड के किनारे केसरिया हिंदू वाहिनी के बैनर तले धरने पर बैठ गए जिसकी सूचना पर मंडावली थाना अध्यक्ष नरेंद्र गौड़ अपनी फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे और कार्यकर्ताओं को लेकर गौशाला परिसर में पहुंचे  और गौशाला के महाराज श्री श्याम से उनकी समस्या सुनने को कहा जिस पर महाराज ने थानाध्यक्ष के सामने केसरिया हिंदू वाहिनी का कार्यकर्ताओं को पाकिस्तानी आतंकवादी कह  डाला इस पर थानाध्यक्ष ने महाराज को गलत शब्द ना बोलने का आग्रह किया। इस मौके पर केसरिया हिंदू वाहिनी के सदस्य मुकेश कुमार अनुकूल शर्मा राकेश शर्मा पुष्पेंद्र शर्मा देवेंद्र शर्मा सुनील कुमार बंटी कुमार मूलचंद आकाश रोहित तथा अन्य के साथ ब्लॉक नजीबाबाद की समस्त टीम शामिल रही।

अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा ने की जनसभा

अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा ने की जनसभा

मुकेश कुमार 

मंडावर।अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा ने की जनसभा मोहल्ला अफगानान कस्बा मंडावर  में संपन्न हुई ।अध्यक्षता मोहम्मद आमिर शाह ने की संचालन मुस्तकीम ने किया सभा में भारी संख्या में गरीब मजदूर वर्ग के लोगों ने भाग लिया सभा को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष शमशाद हुसैन ने कहा कि माहेगीरी धीवर बिरादरी के लोग रोजगार को लेकर बहुत परेशान है। तालाबों पर उनके कब्जे नहीं है। मछली पालन नहीं कर सकते बाजारों में मछली मुर्गा नहीं बेच सकते पुलिस उनका विरोध करती है। दलालों के माध्यम से पैसे वसूल करती है। तब कहीं जाकर थोड़ा बहुत काम कर पाते हैं ।लगभग 2 माह से कुरैशी बिरादरी का कारोबार पूरी तरह से ठप है। जो मीट बेचकर अपनी जीविका चलाते हैं। आज वह अपने परिवार का पालन पोषण करने के लिए बहुत परेशान है। जो गरीब वर्ग के लोग ठेली आदि लगाकर फल फ्रूट आदि बेचते हैं। उनके ऊपर भी पुलिस का डंडा चल रहा है। अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा सभी ऐसे परिवारों को संगठित कर जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन कर माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को अवगत करा कर इन परिवारों का रोजगार बहाल कराने की मांग करेगी प्रधानमंत्री आवास योजना में भारी भ्रष्टाचार है। डूडा विभाग के अधिकारी दलालों के माध्यम से मकान बना रहे हैं। और जो पात्र व्यक्ति हैं उसका मकान नहीं बन रहा विभाग के द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना को पलीता लगाया जा रहा है।निर्दोष लोगों का उत्पीड़न कर पुलिस अवैध वसूली कर रही है। साप्ताहिक बाजारों में जो लोग मुर्गा मछली बेचते हैं। उनसे पुलिस के द्वारा अवैध वसूली की जा रही है। इस पर रोक लगाने और भ्रष्ट पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश से करेगी सभा में रियासत कुरैशी तरुण  कश्यप अनिल कश्यप आकाश मोहम्मद लियाकत अदनान नसीम अहमद रईस शाह नूरा शाह मोहम्मद हनीफ कुरेशी मोहम्मद शाहरुख फारुख कुरेशी मोहम्मद असलम कुरैशी अल्लाह रखा चौधरी रवीश खान आदि ने भाग लिया।