एक बहुत ही खतरनाक षड्यंत्र जो देश की आजादी के समय से ही चल रहा है
आपने ध्यान दिया होगा कि जैसे ही दीपावली एकादशी नानक जयंती कार्तिक पूर्णिमा आती है
वैसे ही एक सप्ताह पहले से पूरे देश में विशेष कर दिल्ली में भयानक प्रदूषण की चर्चा अचानक ही समाचार पत्र पत्रिकाएं बुद्धिजीवी लोग और न्यायपालिका के लोग और सारी सरकार और उसका तंत्र विदेशी हाथों में बिककर करने लगते हैं
फिर अचानक एक याचिका डाली जाती है और तुरंत आदेश हो जाता है कि इस साल प्रदूषण को रोकने के लिए पटाखे पूरी तरह से प्रतिबंधित होंगे
और जब यही पटाखे ईद बकरीद वारावफात क्रिसमस और नए अंग्रेजी वर्ष में दीपावली से 100 गुना अधिक पूरी दुनिया में छोड़े जाते हैं तब कहीं कोई प्रदूषण नहीं फैलता है
दूसरी नौटंकी पराली जलाने को लेकर हैं जबकि अब इस पराली का कोई नामोनिशान नहीं है ।
हर वर्ष ऐसा ही होता है जैसे ही दीपावली आती है दुनिया भर की नौटंकी शुरू हो जाती है और सरकार भी इस काम में खूब सहयोग न्यायपालिका का करती है
मजे की बात यह है कि हर बार की तरह इस बार भी आज दिनांक 20 अक्टूबर तक पूरे भारत के किसी भी समाचार पत्र पत्रिका सोशल मीडिया में इस भयानक विषैले प्रदूषण का कहीं कोई जिक्र नहीं है।
जबकि जौनपुर मुंबई कानपुर सहित भारत के लगभग सभी नगरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 के आसपास हैं जब दीपावली एकादशी और कार्तिक पूर्णिमा और नानक जी की जयंती आ जाएगी तब सनातन धर्म को उत्साह उल्लास से पर्व मनाने से रोकने के लिए सारा ज्ञान उदल दिया जाएगा पानी बचाने का ज्ञान ईद बकरीद 12 वफात गुड फ्राइडे न्यू इंग्लिश ईयर और क्रिसमस पर नहीं बघारा जाता है इसी तरह जानवरों की दया वाला पाठ बकरीद पर नहीं बघारा जाता जब करोड़ों पशु एक ही झटके मेंअल्लाह को प्यारी है कुर्बानी के नाम पर और गटक लिए जाते हैं हलाल कर दिए जाते हैं जब नवरोज में और बड़ी प्रतियोगिताओं में रंग और शराब उड़ेली जाती है तब भी भारत का सारा सरकारी तंत्र और प्रिंट इलेक्ट्रानिक मीडिया विदेशी इशारों पर एकदम चुप रहती है सबको केवल पैसा चाहिए।
डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि
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