Sunday, 4 October 2026

भारत देश को बर्बाद कर उसे इंडिया बनाने का गहरा कुचक्र - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

भारत देश को बर्बाद कर उसे इंडिया बनाने का गहरा कुचक्र - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

क्या हो रहा है भारत देश में क्या सचमुच सारी व्यवस्था और सरकार सो रही है और जनता नरक भोग रही है क्या जनता भी इसमें बराबर की दोषी नहीं है सस्ती मदिरा अश्लील फ़िल्में, मोबाइल फोन में आती बिना मांगे अनचाही नग्न अर्धनग्न तसवीरें, नंगे रील्स, सस्ता नशा, देश में फैले हुए दवा माफिया, जातिवादी हिंसा, हर वस्तु में हो रही मिलावट, नकली घी, तेल, दाल, चावल, आटा, सब्जियां, लगातार प्राकृतिक संसाधनों का निजीकरण पर्वत पहाड़ जल, वन, पशुओं की हत्या, बेरोजगारी, भूख.. क्या यही हमारा भारत है?

तो फिर नर्क किसे कहते हैं? गुगल पर मुफ्त मे पोर्न साइट, फिर ओयो होटेल, 14 फरवरी पूर्ब नियोजित संभोग दिवस, यही तो नर्क है ! देश के युवा सिर्फ सुरा सुन्दरी में डूबा गया है !
फिर लिव इन रिलेशन ( विवाह पूर्व संभोग ) आया है, लोगों के 25- 25 वर्ष के रिश्ते टूट गए, कोई सुनवाई नहीं, कोई कानून का भय नहीं, कोई शर्म लाज लिहाज नहीं, रोटी मिले ना मिले नशा मोबाइल सुरा सुन्दरी मिल जाए बस यही स्वप्न होता है, अश्लीलता रोकने के बजाय इतनी फैला दी गई है कि अब वेश्यालयों की आवश्यकता नहीं होती है, किसी देश का बेड़ा गर्क करना है तो वहाँ की सभ्यता संस्कृति प्रथाओं  परम्पराओं को सरकार और बुद्धि देवी लोगों के एक वर्ग को ब्लैकमेल करके पैसों से खरीद कर  तोड़ दीजिए और यही किया जा रहा है।

फिल्मी नायक नायिका यही कर रहे हैं, अब तो स्त्रियों ने चड्डी की रंग बताते बताते पहनना भी बंद कर दिया है, स्तन के चूचुक ढ़क कर बाकी सब कुछ दिखा देना फैशन बन गया है , नग्नता सीधे घरों में आ रही है, पहले फ़िल्में थोड़ी साफ सुथरी होती थी रेडियो पर मन्ना डे हेमलता लता आशा किशोर मुकेश हेमंत कुमार के कर्णप्रिय गीत होते थे, जो आत्मा को प्रेम की पवित्रता से भर देते थे, आजकल संगीत ही फूहड़ है काला कौवा काट खाएगा सात सहेलियां खड़ी-खड़ी चोली के पीछे क्या है? चने के खेत में, मुझको राना जी माफ करना क्यों की रात मे किसी और के साथ सो गयी इत्यादि बेहद गंदे भद्दी अश्लील मैथुनी द्विअर्थी और उत्तेज़क गीतों ने लोगों के मस्तिष्क में गन्दगी भर दी है,। और समाज भी इतना लज्जा रहित बेशर्म हो गया है कि धर्म ईश्वर का डर नहीं रह गया छोटे बच्चों से बुद्ध तक जवान से अधेड़ सभी लाज शर्म छोड़कर प्रेम से सुनते हैं और मटकते हैं 

जब विचार गंदे होते हैं तभी कामुकता  गंदगी अश्लीलता जन्म लेती है, विचारों को गीतों द्वारा नग्न स्त्रियों द्वारा  गंदे बर्थडे अश्लील विज्ञापनों द्वारा जापानी तेल के द्वारा और भी तमाम गंदी चीजे द्वारा जानबूझकर किशोरों को भड़काया जाता है, जो आप परिपक्व होते हैं और बहुत जल्दी उत्तेजित भी हो जाते हैं और फिर अपराध बलात्कार होने पर कड़े कानून का ना होना अपराधी का छूट जाना उसके हौसले बुलंद करता है,

 कितना हास्यास्पद है कि जमीन के नीचे पानी का दोहन टनों में किया जाता है और लोगों को टूथपेस्ट करते वक्त पानी बचाने की सलाह दी जाती है, उसी प्रकार लोगों की काम भावनाओं को जानबूझकर उत्तेजित किया जा रहा है और फिर बलात्कार के लिए निर्दोष स्त्रियों को दोषी ठहराया जाता है, जातिवाद समाप्त नहीं किया जाता है सरकारी रिकार्ड में सबसे पहले जन्म लेते ही फार्म भरवा लिया जाता है और फिर असमानता कि बात कही जाती है, कैसे आएगी समानता कौन लाएगा? सदियाँ बीत गई लेकिन हम लोग भारतीय नहीं बन सके.... लोग ब्राह्मण , क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र है लेकिन अफसोस भारतीय कोई नहीं है, और जाते जाते कड़वा सच - ये सभी नेता विदेशों में भाग जायेगे इनके बच्चे वहीं पढ़ते हैं और बर्बाद होगे आप और हम और हमारी आने वाली पीढ़ी !
विचार अवश्य कीजिये , आपकी  पीढ़ी का भविष्य वर्तमान के माता-पिता आप हम और सभी के ऊपर हैं इसको सुधारने ना सरकार आएगी नाराज नेता न अधिकारी ना कोई देवदूत आएगा हमको आपको कितना शीघ्र जा सके जागना होगा संस्कार नैतिकता संस्कृति सभ्यता जगा कर जल्दी से जल्दी प्राचीन विरासत को आगे लाना होगा - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

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