[10/22, 10:30 PM] Dileep Singh Rajput Jounpur: सब लोगों के लिए आवश्यक जानकारी के लिए हिंदीवर्ष के महीने ---
*चैत्र महीना पहले आया
सब फसलों को घर में लाया
चारों तरफ बसंत है छाया*
*फिर बैशाख बसंत कहाया
फल-फूलों से तरु लद आया
शीतल मंद पवन है छाया*
*गर्मी का है जेठ महीना
बैठे-बैठे चले पसीना
मुश्किल हो गया सबका जीना*
*है आषाढ़ की अजब कहानी
आया बादल बरसा पानी
चारों तरफ मेघ और पानी*
*सावन की तो बात निराली
चारों तरफ बिछी हरियाली
शिव भक्ति छाई मतवाली*
*भादो मूसलधार बहाता
खेतों में सब चीज उगाता
वर्षा और बाढ़ है लाता*
*क्वार में मच्छर गाते हैं
घर-घर जूड़ी फैलाते हैं
सर्दी खांसी और ज्वर में
बच्चे बूढ़े तप जाते हैं*
*कार्तिक की तो शोभा
न्यारी लगती बहुत चांदनी प्यारी
जाड़े में बसंत ऋतु न्यारी डॉ दिलीप कुमार सिंह*
*अगहन फसली मास कहाता
ज्वार बाजरा घर में लाता
धन धान्य से घर भर जाता*
*पूस महीना ठंडा भारी
थर थर कांपे नर अरु नारी
बर्फ सी हवा है हाहाकारी*
*ठंडी हवा माघ में चलती
पाला पड़ता खेती जलती
शीत की मार झेलनी पड़ती*
*फागुन सबसे पीछे आता
होली का हुल्लड़ दिखलाता
छिनरों और छिनरियों को
यह परम प्रसन्न कर जाता*
*भारत के हैं यही महीने
बारी बारी आते हैं
सुख-समृद्धि हम सब को देकर
सबको खुश कर जाते हैं*
आप सब को यह रोचक जानकारी अवश्य ही अच्छी लगी होगी
धन्यवाद
*डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह ज्योतिष शिरोमणि, मौसम विद ,न्याय विद ,अंतरिक्ष विज्ञानी एवं दार्शनिक ,एवं ज्योतिष रत्न वास्तु परा अपरा व गूढ़ विद्याओं के पारंगत परा भौतिकी विद*
[10/22, 10:30 PM] Dileep Singh Rajput Jounpur: एकछोटासागॉव
जिसमे पीपल की छॉव
गॉव सारा खतम हो गया
क्या से क्या हो गया
सारे रिश्ते खतम
आये पैसों पे हम
दिल का रिश्ता खतम हो गया
क्यासेक्याहोगया ?
कजरी चैता खतम
फागुनी भी खतम
और दशहरा भी गुम हो गया
क्यासेक्याहोगया ?
भागे हमसब शहर
खोये पैसो मे हम
सपनों मे ही तो जीवन गया
क्यासेक्याहोगया ?
ठंडी शीतल बयार
महक फूलों की हाय
*अपनापन भी गया*
क्यासेक्याहोगया ?
ऊपरी सब खुशी
ऊपरी है हंसी
नकली सब कुछ यहॉ
*धर्म सारा तो बस*
पैसा ही होगया
हाय भारत मेरा
इंडिया हो गया?
क्यासेक्याहोगया* *डॉ दिलीप कुमार सिंह एम ए टी एच डी हिंदी ज्योतिष और ज्योतिर्विज्ञान* ? !
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