Thursday, 15 October 2026

अष्टमी और नवमी का व्रत हवन और पूजा पाठ - सनातन धर्म बहुत ही वैज्ञानिक गणना है जो परमाणु घड़ी से भी सटीक होता है ऐसे में इसके व्रत त्यौहार पूजा पाठ यज्ञ हवन बहुत गहराई में जाते हैं।

अष्टमी और नवमी का व्रत हवन और पूजा पाठ - 
सनातन धर्म बहुत ही वैज्ञानिक गणना है जो परमाणु घड़ी से भी सटीक होता है ऐसे में इसके व्रत त्यौहार पूजा पाठ यज्ञ हवन बहुत गहराई में जाते हैं। 


इस वर्ष भी अष्टमी और नवमी की तिथि में दुर्लभ संजोग है इसलिए अधिक विस्तार न करते हुए बताना चाहता हूं कि ज्योतिष विज्ञान धर्म  दर्शन और पंचांग के अनुसार अष्टमी और नवमी कब मनाई जाएगी। 

शारदीय नवरात्रि में अष्टमी की तिथि सूर्योदय के बाद 18 अक्टूबर सुबह 8:27 पर लग रही है और 19 को 10:51 पर समाप्त हो रही है इस प्रकार महाअष्टमी का व्रत करने वाले 18 को व्रत करेंगे और 19 अक्टूबर सूर्योदय से लेकर 10:51 के बीच पूजा पाठ हवन कन्या पूजन और उनको भोजन और दान 19 अक्टूबर को ही करेंगे इसमें कोई संदेह नहीं है। 


इसी प्रकार नवमी का व्रत और पूजन सुबह 19 अक्टूबर को 11:00 बजे के बाद करेंगे इसमें भी कोई संदेह नहीं है अब अपना देश बहुत बड़ा और विशाल है 


इसलिए पूर्वी भारत में 19 अक्टूबर को यह समय सुबह 10:00 बजे तक अष्टमी के लिए और उसके बाद नवमी के लिए रहेगा जबकि पश्चिमी भारत में यह समय सुबह 11:30 बजे अष्टमी का और उसके बाद नवमी का रहेगा इस प्रकार संपूर्ण भारत में महा अष्टमी और महानवमी का व्रत 19 अक्टूबर को ही होगा और इसका पारण 20 अक्टूबर को किया जाएगा जिस दिन विजयादशमी अर्थात दशहरा का पर्व है और यह सूर्योदय के बाद होगा अब यदि किसी को कोई संदेह है तो वह पूछ सकता है - डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

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